<h3 style="text-align: justify;">मूंगफली </h3> <h4 style="text-align: justify;">पर्याप्त नमी एवं जल निकास</h4> <p style="text-align: justify;">मूंगफली में खूटियां (पैगिंग) तथा फलियां बनते समय खेत में पर्याप्त नमी बनाये रखें। अधिक वर्षा होने की स्थिति में खेत में जल-निकास की व्यवस्था करें।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/GroundNUt.jpg" width="260" height="190" /></p> <h4 style="text-align: justify;">टिक्का रोग की रोकथाम </h4> <p style="text-align: justify;">टिक्का रोग की रोकथाम के लिए जिंक मैग्नीज कार्बोमेट 2 कि.ग्रा. अथवा जिनेब 75 प्रतिशत का 2.5 कि.ग्रा. मात्रा प्रति हैक्टर की दर से 800 लीटर पानी में घोलकर 10 दिनों के अन्तराल पर 1-2 छिड़काव करें। इसके लिए ट्राइकोडर्मा विरिडी (5 प्रतिशत) और वर्टीसिलियम लिशेनायी (5 प्रतिशत) का छिड़काव उपयोगी सिद्ध हो सकता है। </p> <h3 style="text-align: justify;">साेयाबीन एवं सूरजमुखी</h3> <h4 style="text-align: justify;">हल्की सिंचाई </h4> <p style="text-align: justify;">सोयाबीन व सूरजमुखी की फसल में वर्षा न होने की स्थिति में फूल व फली बनते समय आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करें। </p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/Soyben.jpg" width="216" height="158" /></p> <h4 style="text-align: justify;">सोयाबीन में मोजैक रोग की रोकथाम</h4> <p style="text-align: justify;">सोयाबीन में पीले मोजैक रोग की रोकथाम के लिए प्रभावित पौधों को निकालकर डाईमेथोएट 30 ई.सी. 1 लीटर या मिथाइल-ओ-डिमेटान (25 ई.सी.) की एक लीटर मात्रा को 800 लीटर पानी में घोलकर आवश्यकतानुसार 10-15 दिनों के अंतराल पर 1-2 छिड़काव करें।</p> <h4 style="text-align: justify;">तम्बाकू की इल्ली एवं रोयेंदार इल्ली </h4> <p style="text-align: justify;">तम्बाकू की इल्ली एवं रोयेंदार इल्ली छोटी अवस्था में झुंड में रहकर एक ही पौधे की पत्तियों को खाती हैं। इस प्रकार के पौधों को नष्ट कर देने से इनके प्रकोप से बचा जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर रासायनिक कीटनाशक क्लोरोपारीफॉस 20 ईसी (1.5 लीटर/हैक्टर) या क्विनालफॉस 25 ईसी (1.5 लीटर प्रति हैक्टर) या मिथोमिल 40 एसपी (1.0 कि.ग्रा./ हैक्टर) का उपयोग करें। पत्ती खाने वाली इल्लियों के नियंत्राण के लिए जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करें। बैक्टीरिया आधारित बायोबिट, डायपेल, बायोआस्प, डेल्फिन, हाल्ट, अथवा फफूंद आधारित बायोरिन, डिस्पेल को 1 कि.ग्रा. या 1 लीटर प्रति हैक्टर की दर से अथवा वायरस आधारित कीटनाशक को 250 एलई की दर से फूल आने अथवा इल्लियों का प्रकोप शुरू होने की अवस्था पर छिड़काव करें। </p> <h3 style="text-align: justify;">सूरजमुखी</h3> <h4 style="text-align: justify;">मधुमक्खी के डिब्बे</h4> <p style="text-align: justify;">सूरजमुखी से अधिक उपज लेने के लिए मधुमक्खी के डिब्बों को खेत के किनारे रखें। मधुमक्खी पालन न करने की स्थिति में सूरजमुखी में अच्छी तरह फूल आ जाने पर हाथ में दस्ताने पहनकर या किसी मुलायम रोंयेदार कपड़े को लेकर फूल के मुड़क पर चारों ओर धीरे से घुमा दें। यह क्रिया प्रातःकाल 7.30 बजे तक करें। सूरजमुखी में हैडरॉट, जिसमें पहले तने व फिर मुंडकों पर काले धब्बे बनते हैं, की रोकथाम के लिए मैन्कोजैब 0.3 प्रति का मुंडक बनते समय छिड़काव करें। </p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012, खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर)।</p>