तुड़ाई एवं कटाई-छंटाई आम के बागों से फलों की तुड़ाई के बाद रोगी और फालतू शाखाओं की कटाई-छंटाई करें। रोग व सूखी टहनियों को काटकर जला दें। नाइट्रोजन का इस्तेमाल नये पेड़ों में 500 ग्राम नाइट्रोजन प्रति पेड़ की दर से प्रयोग करें। शल्क तथा शाखा गांठ कीट आम में शल्क कीट तथा शाखा गांठ कीट की रोकथाम के लिए मिथाइल पैराथियान 1.0 मि.ली. या डाईमेथोएट 1.5 मि.ली. दवा प्रति लीटर पानी में से किसी एक दवा का 15 दिनों के अंतराल पर बदलकर दो बार छिड़काव करें। गाॅल मेकर की रोकथाम तराई क्षेत्रों में आम के पौधों पर गांठ बनाने वाले कीट गाॅल मेकर की रोकथाम के लिए मोनोक्रोटोफाॅस 0.5 प्रतिशत या डाइमेथोएट 0.06 प्रतिशत दवा का छिड़काव करें। लाल रतुआ एवं श्यामवर्ण (एंथ्रेक्नोज) के रोग आम के पौधों पर लाल रतुआ एवं श्यामव्रण (एंथ्रेक्नोज) के रोग पर काॅपर ऑक्सीक्लोराइड (0.3 प्रतिशत) दवा का छिड़काव करें। आम सिल्ली कीट आम सिल्ली कीट की रोकथाम के लिए 5-10 अगस्त के बीच क्विनालफाॅस (0.04 प्रतिशत) का 10-15 दिनों के अंतराल पर 3 छिड़काव करें। कीट प्रभावित टहनियों की नुकीली गांठों की छंटाई करें। स्त्राेत : खेती पत्रिका(आईसीएआर), राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय, एस.एस. राठौर और ऋषि राज सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली।