इस महीने में कद्दूवर्गीय फसलें जैसे-तोरई, कद्दू, लौकी, तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी प्रमुख सब्जी वाली फसलों की बुआई करते हैं। खेत की तैयारी इन फसलों की बुआई के लिए अच्छी तरह से पलेवा कर खेत की तैयारी करनी चाहिए और बुआई के लिए आवश्यक सस्य क्रियाओं को अपनाना चाहिए। बीज उपचार बुआई से पूर्व बीज को 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम/कि.ग्रा. बीज, साथ ही ट्राइकोडर्मा 4 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित करने के बाद ही बुआई सुनिश्चित करें। पौध की रोपाई कद्दूवर्गीय सब्जी की नर्सरी फरवरी में तैयार कर मार्च-अप्रैल में पौध की रोपाई कर देनी चाहिए। यूरिया की टॉपड्रेसिंग कददूवर्गीय सब्जियों में 5-6 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करते रहें। फसल कमजोर होने की स्थिति में आवश्यकतानुसार यूरिया की टॉपड्रेसिंग कर दें। ध्यान रहे कि यूरिया उर्वरक पत्तियों पर नहीं पड़ना चाहिए अन्यथा पत्तियां जल जायेंगी। लाल भृंग कीट की रोकथाम कददूवर्गीय सब्जियों में लाल भृंग कीट की रोकथाम के लिए सुबह ओस पड़ने के समय राख का बुरकाव करने से कीट पौधों पर नहीं बैठते हैं। इस कीट का प्रकोप होने पर कार्बोरिल 5 प्रतिशत या मैलाथियान चूर्ण 5 प्रतिशत के 25 कि.ग्रा. चूर्ण कर सुबह पौधों पर छिड़काव करें। सेविन नामक रसायन का 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें। घिया या लौकी घिया या लौकी की नर्सरी जनवरी-फरवरी के दौरान तैयार की गयी पौध की रोपाई 200×100 सें.मी. की दूरी पर करें। लौकी की उन्नत प्रजाति लौकी की उन्नत प्रजाति पूसा संतुष्टि 55-60 दिनों में तैयार हो जाती है और इससे लगभग 25-30 टन/हैक्टर पैदावार मिल जाती है। पूसा संकर 3 प्रजाति की औसतन 42 टन/हैक्टर तक पैदावार प्राप्त होती है और इसकी प्रथम कटाई 55-60 दिनों में होती है। समेकित पोषक तत्व प्रबंध कद्दूवर्गीय सब्जियों में समेकित पोषक तत्व प्रबंध करना चाहिए। इसके लिए 200-250 क्विंटल सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट/हैक्टर की दर से खेत की आखिरी जुताई के समय अच्छी तरह से मिला देनी चाहिए। इसके लिए 120 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 100 कि.ग्रा. फॉस्फोरस और 80 कि.ग्रा. पोटाश तत्व के रूप में देना चाहिए। नाइट्रोजन की आधी मात्रा तथा फॉस्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा आखिरी जुताई के समय मिला देनी चाहिए। नाइट्रोजन की शेष आधी मात्रा खड़ी फसल में दो बार में प्रयोग करते हैं, जिससे कि लगातार फसल की अच्छी पैदावार मिल सके। तोरई की नर्सरी अप्रैल की शुरुआत में तोरई की नर्सरी लगा सकते हैं। इस बीच फरवरी व मार्च में लगाई गई नर्सरी की तैयार पौध की रोपाई 100×50 सें. मी. फासला रखते हुए करें व रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें। अरबी अरबी की अगेची प्रजातियां लगाने का इरादा हो, तो इसी महीने उनकी बुआई करें। करेला करेले की उन्नत प्रजातियों में पूसा संकर 1, पूसा संकर 2 और पूसा विशेष प्रमुख हैं। इनकी बुआई 5-6कि.ग्रा. बीज/हैक्टर की दर से करते हैं। करेले की पौध की रोपाई 150×60 सें.मी. की दूरी पर करें। स्त्रोत : खेती पत्रिका(भाकृअनुप) राजीव कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-11001, विनोद कुमार सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-केन्द्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान, संतोष नगर, हैदराबाद।