<h3 style="text-align: justify;">अच्छी पैदावार </h3> <p style="text-align: justify;">फरवरी का महीना शुरू हो चुका है। किसानों के खेत फसलों से लहलहा रहे हैं। बसंत पंचमी के बाद चारों ओर पीले फूल खिले हुए हैं और मौसम में ठंड धीरे-धीरे कम हो रही है। किसानों को अच्छी पैदावार लेने के लिए इस माह में मौसम के उतार-चढ़ाव का ध्यान रखना होगा। किसान, कृषि में आई अनेक क्रान्तियों के अग्रदूत रहे हैं। उन्हें आवश्यकता है, समुचित प्रौद्योगिकियों और उचित दक्षताओं की।</p> <h3 style="text-align: justify;"> अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों का सृजन</h3> <p style="text-align: justify;">देश में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा विभिन्न कृषि-पारिस्थितिकी-परिस्थितियों के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के सृजन और प्रसार के माध्यम से किसानों के साथ ही साथ राष्ट्र की समृद्धि में भी उल्लेखनीय योगदान दिए गए हैं। अतः कृषि में नई तकनीकियां, जलवायु संबंधित जानकारियां व मौसम के पूर्वानुमान का उपयोग, उक्त चुनौतियों का मुकाबला करके अधिक उत्पादन देने में सक्षम हो सकते हैं।</p> <h3 style="text-align: justify;">अत्याधुनिक कृषि सस्य विधियां</h3> <p style="text-align: justify;">अत्याधुनिक कृषि सस्य विधियों द्वारा सामयिक फसल उत्पादन तकनीकों, विभिन्न सब्जी, फल और बागवानी एवं पुष्प व सुगंध फसलों की देखभाल व उन्नत उत्पादन प्रौद्योगिकियों, सामयिक फसलों में समन्वित कीट व रोग प्रबंधन के अलावा बे-मौसम सब्जी उत्पादन के लिए टमाटर को ग्रीनहाउस में उगाने जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों पर इस बार के स्तम्भ में प्रकाश डाला गया है।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : खेती पत्रिका, राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय, एस.एस. राठौर और अवनि कुमार सिंह,सस्य विज्ञान संभाग एवं संरक्षित खेती और प्रौद्योगिकी, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012</p>