<h3 style="text-align: justify;">रबी फसलें</h3> <p style="text-align: justify;">इस माह कृषि कार्यों की दृष्टि से रबी फसलें पकने की अवस्था में आने लगती हैं।</p> <h3 style="text-align: justify;">राई-सरसों की कटाई</h3> <p style="text-align: justify;">समय पर बोई गई राई-सरसों की कटाई इस माह के प्रथम पखवाड़े में शुरू हो जाती है। </p> <h3 style="text-align: justify;">चना, मसूर, मटर, आलू की फसलें</h3> <p style="text-align: justify;">इसी प्रकार चना, मसूर, मटर, आलू की फसलें भी कटाई के लिए तैयार होने लगती हैं।</p> <h3 style="text-align: justify;">गेहूं</h3> <p style="text-align: justify;">गेहूं में भी दाने का पूर्ण भराव और दाना सख्त होने लगता है।</p> <h3 style="text-align: justify;"> बरसीम</h3> <p style="text-align: justify;"> बरसीम से बीज उत्पादन करना है तो इसमें भी विशेष सावधानियां रखनी पड़ेंगी, ताकि अधिकतम उत्पादकता के साथ-साथ, उच्च गुणवत्ता वाला बीज प्राप्त हो सके। </p> <h3 style="text-align: justify;">बसंतकालीन एवं ग्रीष्मकालीन दलहनी फसलों की बुआई</h3> <p style="text-align: justify;">इस माह में बसंतकालीन फसलों की बुआई की तैयारी शुरू हो जाती है। बसंकालीन मक्का और गन्ना के साथ ही ग्रीष्मकालीन दलहनी फसलों की बुआई के लिए यह उपयुक्त समय होता है। </p> <p style="text-align: justify;">सब्जी, फलदार एवं ष्प व सुगंध वाले पौधे</p> <p style="text-align: justify;">सब्जी, फलदार वृक्षों और पुष्प व सुगंध वाले पौधों से भरपूर पैदावार लेने के लिए सस्य कृषि क्रियाओं की आवश्यकता होती है। </p> <p style="text-align: justify;">इस भाग में इन सभी बातों पर विस्तृत जानकारी दी गई है।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्रोत : खेती पत्रिका(आईसीएआर) राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर , सस्य विज्ञान संभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012</p>