<h3 style="text-align: justify;">खाद एवं उर्वरक की मात्रा</h3> <p style="text-align: justify;">ग्रीष्मकालीन बैंगन में खाद एवं उर्वरक की मात्रा इसकी प्रजाति, स्थानीय जलवायु व मृदा के प्रकार पर निर्भर करती है। अच्छी फसल के लिए 15-20 टन सड़ी गोबर की खाद खेत को तैयार करते समय तथा तत्व के रूप में रोपाई से पहले 60 कि.ग्रा. फॉस्फोरस, 60 कि.ग्रा. पोटाश व 150 कि.ग्रा. नाइट्रोजन की आधी मात्रा अंतिम जुताई के समय मृदा में मिला दें तथा बाकी आधी नाइट्रोजन की मात्रा को फूल आने के समय प्रति हैक्टर की दर से प्रयोग करें। </p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/ccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccdownlod.jpg" width="187" height="164" /></p> <h3 style="text-align: justify;">पौध रोपण </h3> <p style="text-align: justify;">क्यारियों में लम्बे फल वाली प्रजातियों के लिए 70-75 सें.मी. और गोल फल वाली प्रजातियों के लिए 90 सें.मी. की दूरी पर पौध रोपण करें। एक हैक्टर में फसल रोपण के लिए 250-300 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है।</p> <h3 style="text-align: justify;">खरपतवार नियंत्रण</h3> <p style="text-align: justify;">खरपतवार नियंत्रण के लिए पेंडीमेथेलिन या स्टाम्प नामक खरपतवारनाशी की 3 लीटर मात्रा का प्रति हैक्टर की दर से पौध रोपाई से पहले प्रयोग करें। इस बात का ध्यान रखें कि छिड़काव से पहले मृदा में नमी होनी चाहिए।</p> <h3 style="text-align: justify;">निराई व गुड़ाई</h3> <p style="text-align: justify;">निराई व गुड़ाई द्वारा भी खेत में खरपतवार नियंत्रण करना संभव है। फसल की आवश्यकतानुसार खेत में सिंचाई का प्रबंध करें।</p> <h3 style="text-align: justify;">मृदा</h3> <p style="text-align: justify;">ग्रीष्मकालीन बैंगन की खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली बलुई दोमट मृदा उपयुक्त है। मृदा का पी-एच मान 6 से 7 के बीच उपयुक्त है।</p> <h3 style="text-align: justify;"> बीज की बुआई</h3> <p style="text-align: justify;">ग्रीष्मकालीन बैंगन के लिए नर्सरी में बीज की बुआई करें।</p> <h3 style="text-align: justify;">उन्नत प्रजातियां</h3> <p style="text-align: justify;">बैंगन की उन्नत प्रजातियां जैसेः पूसा हाइब्रिड-5, पूसा हाइब्रिड-9, विजय हाइब्रिड, पूसा पर्पिल लौंग, पूसा क्लस्टर, पूसा क्रान्ति, पंजाब जामुनी गोला, नरेन्द्र बागन-1, आजाद क्रान्ति, पन्त ऋतुराज, पन्त सम्राट, टी-3 आदि प्रमुख हैं।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्रोत : खेती पत्रिका(आईसीएआर) राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर, सस्य विज्ञान संभाग,भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012</p>