<h3 style="text-align: justify;">उन्नत प्रजातियां</h3> <p style="text-align: justify;">ग्रीष्मकालीन भिण्डी की उन्नत प्रजातियां जैसे-पूसा ए-5, पूसा सावनी, पूसा मखमली, बी.आर.ओ-3, बी.आरओ-4, उत्कल गौरव</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccdownlod.jpg" width="166" height="146" /></p> <h3 style="text-align: justify;">वायरस प्रतिरोधी किस्में</h3> <p style="text-align: justify;">पूसा ए-4, परभणी क्रांति,पंजाब-7, पंजाब-8, आजाद क्रांति, हिसार उन्नत, वर्षा उपहार, अर्का अनामिका आदि हैं।</p> <h3 style="text-align: justify;">मृदा</h3> <p style="text-align: justify;">इसके लिए बलुई दोमट व दोमट मृदा, जिसका पी-एच मान 6.0-6.8 हो तथा सिंचाई की सुविधा व जल निकास का अच्छा प्रबंध होना चाहिए। ग्रीष्मकालीन मौसम में भिण्डी की बुआई 20 फरवरी से 15 मार्च तक करना उपयुक्त है और बीज दर 20-22 कि.ग्रा./हैक्टर की आवश्यकता पड़ती है।</p> <h3 style="text-align: justify;">बीज की बुआई </h3> <p style="text-align: justify;">बीज की बुआई सीडड्रिल से या हल की सहायता द्वारा गर्मियों में 45×20 सें.मी. की दूरी पर करें एवं बीज की गहराई लगभग 4.5 सें.मी. रखें।</p> <h3 style="text-align: justify;">खाद</h3> <p style="text-align: justify;">बुआई से पहले अच्छी तरह सड़ी गोबर या कम्पोस्ट खाद लगभग 20-25 टन/हैक्टर अच्छी तरह मृदा में मिला दें।</p> <h3 style="text-align: justify;">उर्वरक</h3> <p style="text-align: justify;">तत्व के रूप में बुआई के समय नाइट्रोजन 40 कि.ग्रा. की आधी मात्रा, 50 कि.ग्रा. फॉस्फोरस व 60 कि.ग्रा. पोटाश/हैक्टर की दर से अंतिम जुताई के समय प्रयोग करें तथा आधी बची हुई नाइट्रोजन की मात्रा फसल में फूल आने की अवस्था में डालें।</p> <p style="text-align: left;">स्त्रोत : खेती पत्रिका(आईसीएआर) राजीव कुमार सिंह, विनोद कुमार सिंह, कपिला शेखावत, प्रवीण कुमार उपाध्याय और एस.एस. राठौर, सस्य विज्ञान संभाग,भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली-110012</p>