छत पर खेती मकानों की अधिकतर छतें खाली रहती हैं। हम उन पर अलग-अलग तरह की जैविक सब्जियां उगा सकते हैं। ये हानिकारक रसायनों एवं कीटनाशकों से रहित होती हैं। वैज्ञानिक विधियां अपनाकर खेतों के बिना भी खेती की जा सकती है। घर की छोटी सी जगह में अपने परिवार की जरूरत के अनुसार खेती कर सकते हैं। इस प्रकार वर्षभर अच्छी व ताजी सब्जियां उपलब्ध हो सकती हैं, जो कि परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी सिद्ध होंगी। छोटी छत पर मृदा की जरूरत कम पड़ती है। इससे कम मृदा में भी छत पर सब्जियां उगाई जा सकती हैं। आजकल बाजार में बिकने वाली सब्जियां बासी होने के साथ-साथ रसायनयुक्त भी होती हैं। इनके सेवन से हमारे स्वास्थ्य पर बहुत खराब प्रभाव पड़ता है। इससे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और रोग आसानी से लग जाते हैं। मारे शरीर के लिए सब्जियों का बहुत महत्व है। ये विटामिन, खनिज लवण कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन आदि की अच्छी स्रोत होती हैं।प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 85 ग्राम फल एवं 300 ग्राम सब्जियों का सेवन करना चाहिए। इनमें लगभग 125 ग्राम हरी पत्तेदार, 100 ग्राम जड़ वाली एवं 75 ग्राम अन्य प्रकार की सब्जियां शामिल हैं। यह मात्रा वर्तमान में केवल 190 ग्राम ही उपलब्ध हो रही है, जो कि बहुत कम है। घरों की छत पर बनाए गए जैविक किचन गार्डन से शुद्ध एवं ताजी सब्जियां तथा फल आसानी से मिल सकते हैं। घरों की छत पर मिट्टी, सीमेंट के गमलों के साथ-साथ थर्मोकोल के अपशिष्टको भी गमलों के रूप में उपयोग कर सकते हैं। इससे पर्यावरण भी सुरक्षित होगा तथा खेती के लिए जरूरी आधार भी मिल जाएगा। गमलों में मृदा एवं थर्मोकॉल के बॉक्स में कोकोपिट एवं कम्पोस्ट का मिश्रण जरूरत के अनुसार भर लेते हैं। कोकोपिट में जल अवशोषण की क्षमता मृदा की तुलना में अधिक होती है। इससे पौधे की वृद्धि अच्छी होती है। इस तरह से बॉक्स में मौसमी सब्जियों को आसानी से उगाया जा सकता है। इसमें जरूरत के अनुसार कोई भी पौधा लगा सकते हैं। घरों की छत पर अनेक प्रकार की सब्जियां जैसे-टमाटर, तोरई, लौकी, टिंडा, बैंगन, पुदीना, मिर्च, भिण्डी, बीन्स आदि और फलों में स्ट्रॉबेरी, पपीता, नीबू आदि को उगाया जा सकता है। इनके साथ-साथ काजू, अंजीर आदि पौधों को भी लगाया जा सकता है। ये बाजार में उपलब्ध मिलावटयुक्त सब्जियों व फलों की तुलना में शुद्ध, पौष्टिक एवं स्वास्थ्यवर्धक होते हैं।पहले विभिन्न प्रकार की सब्जियों व फलों की पौध को बॉक्स में तैयार करते हैं। फिर इनका पौधरोपण करते हैं। सिंचाई आदि की व्यवस्था ड्रिप सिंचाई विधि से करते हैं। इससे जल और धन की बचत होती है। समय-समय पर उसमें कम्पोस्ट खाद आदि मिला सकते हैं। इससे रासायनिक खाद देने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।भारत में ग्रामवासी, सब्जियां बिना किसी रसायन व कीटनाशक के उगाते हैं। इससे रसायन व कीटनाशक पर होने वाला खर्च भी बच जाता है। जैविक किचन गार्डन से लाभ जैविक किचन गार्डन से तुलसी, पुदीना, मेथी, अजवायन, धनिया, गिलोय, लेमन ग्रास आदि को प्रतिदिन आवश्यकतानुसार प्राप्त किया जा सकता है। आमतौर पर एक साधारण परिवार का एक माह में साग-सब्जियों पर लगभग एक हजार से दो हजार रुपये तक व्यय हो जाता है। अत: घर की छत पर बनाए गए जैविक किचन गार्डन में उगाई गई सब्जियों से धन की बचत होती है। गर्मी के मौसम में जैविक किचन गार्डन । का होना बहुत ही फायदेमंद होता है। इस का पौधा मौसम में खरबूज, तरबूज की बेल व सब्जियों में करेला, पुदीना, खीरा आदि को लगाकर इनके फलों को सुगमतापूर्वक प्राप्त किया जा सकता है। ये शरीर को शीतलता प्रदान कर गर्मी से राहत दिलाते हैं। आमतौर पर गर्मी के मौसम में जैविक किचन गार्डन का होना बहुत ही फायदेमंद होता है। कुछ पौधे ऐसे होते हैं, जो कीट आदि को भगाकर वातावरण को शुद्ध रखते हैं। इसके लिए किचन गार्डन में लेमन ग्रास, लैवेण्डर, मीठा नीम, रोजमेरी, तुलसी, और सिट्रोनेला आदि पौधे लगा सकते हैं। घर की छत पर बने जैविक किचन गार्डन में सुबह-शाम निराई-गुड़ाई करके शारीरिक श्रम भी होता है। इससे शरीर स्वस्थ रहता है एवं तनाव से राहत मिलती है। जैविक किचन गार्डन में उगाई गई सब्जियों व फलों के सेवन से शरीर की रोगप्रतिरोधक शक्ति मजबूत होती है। कीटों से बचाव पौधों को कीटों के प्रकोप से बचाने के लिए जैविक कीटनाशकों का छिड़काव किया जाता है। इससे छोटे-छोटे पौधों के कीटों को आसानी से मारा जा सकता है। जैविक कीटनाशक नीम का घोल 10 कि.ग्रा. नीम की पत्ती को 5 लीटर पानी में रातभर रखें। सुबह उबालकर छान लें। इस घोल को 100 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें। इसे माहूं के प्रकोप को रोकने के लिए प्रयोग किया जाता है। गोमूत्र व नीम का मिश्रण 10 लीटर गोमूत्र में 1 कि.ग्रा. नीम की पत्ती मिलाकर 10 दिनों तक रखें। 10 दिनों के बाद मिश्रण को छान कर छिड़काव करें। इससे इल्ली की रोकथाम होती है। गोमूत्र व निरगुण्डी 5 लीटर गोमूत्र, 1 लीटर निरगुण्डी का रस, 1 लीटर हींग का पानी, इन तीनों को 8 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से कीटों से रोकथाम होती है। तम्बाकू, हीराकासी व नीबू का मिश्रण एक कि.ग्रा. तम्बाकू, 300 ग्राम हीराकासी व 50 ग्राम नीबू का सत 2 लीटर पानी में मिलाकर मिश्रण तैयार कर लें। इस तैयार मिश्रण में से 250 ग्राम घोल को 15 लीटर पानी में मिलाकर सुबह छिड़काव करें। इससे हरे रंग की इल्लियों के प्रकोप को रोका जा सकता है। स्त्राेत : खेती पत्रिका(आईसीएआर), मनाेज कुमार, सहायक प्राध्यापक, तीर्थकर महावीर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश); शिवांशु तिवारी,एस.आर.एफ; सी,बी. सिंह प्राध्यापक, पशु आनुवांशिकी एवं प्रजनन विभाग, गो.ब. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर, (उत्तराखंड)।