परिचय ऑर्किड्स लंबे समय से मनुष्य के आकर्षण का केंद्र रहा है और इनके फूल अपने अदभुत आकार, रंग, रूप और सगन्ध के लिए विश्वविख्यात हैं। इन फलों में एक अदभुत आकर्षण क्षमता होती है, जो सभी को अपनी ओर आकर्षित करती है। इसमें अन्य फूलों की अपेक्षा अधिक लंबे समय तक ताजे अवस्था में बने रहने की भी क्षमता होती है। कट फूलों के रूप में उपयोग किए जाने वाले फूलों में सबे ज्यादा ऑर्किड्स के सिम्बिडियम के फूलों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसको पहला स्थान प्राप्त है। परत में सिम्बिडियम ऑर्किड्स की खेती सिक्किम और बंगाल के क्रमशः कलिम्पोंग, दार्जिलिंग और मिरिक के क्षेत्रों में की जाती है। अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे-नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश भी इसके फूलों की खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। 1500-2000 मीटर से ऊपर की ऊंचाई और रात्रि के समय ठंड, गर्मी तथा मानसून की बारिश सिम्बिडियम ऑर्किड्स की खेती के लिए आदर्श मानी जाती है। महत्व और उपयोग सिम्बिडियम ऑर्किड्स आनुवंशिक संसाधनों के लिए अत्यधिक मूल्यवान है। कट फूलों, गमला पौधों, लटकते पौधों तथा हर्बल दवाएं बनाने में भी इसका बहुत महत्व है। रोशनी सिम्बिडियम ऑर्किड्स की खेती के , लिए सूर्योदय के समय की रोशनी और शाम , के समय की रोशनी आदर्श मानी जाती है। परिपक्व पौधों के लिए 50 प्रतिशत प्रकाश आवश्यक होता है। गर्मी के समय एवं बढ़ते मौसम के दैरान में 50 प्रतिशत छाया या 5000-6000 एफ.सी. प्रकाश की आवश्यकता होती है। फूलों के मौसम में 2000-3000 एफ.सी. प्रकाश और पत्ते हल्के पीले और हरे रंग के होने चाहिए। तापमान सामान्य तौर पर सिम्बिडियम ऑर्किड्स 7 डिग्री सेल्सियस से भी कम तापमान सहन कर सकता है। पौधों के विकास के लिए रात्रि का औसतन तापमान 18 डिग्री सेल्सियस तथा दिन का औसतन तापमान 24-30 डिग्री सेल्सियस होना आवश्यक है। फूलों की कीलें निकलने की अवस्था में औसतन तापमान 10-15 डिग्री सेल्सियस आवश्यक होता है। सर्दियों का मौसम (अक्टूबर के अंत से फरवरी के अंत तक) रात्रि का औसतन तापमान 12 डिग्री सेल्सियस तथा दिन का औसतन तापमान 18-24 डिग्री सेल्सियस तक सबसे अच्छा माना जाता है। आर्द्रता ऑर्किड्स के लिए आर्द्रता का बहुत महत्व है। 50 प्रतिशत से कम सापेक्ष आर्द्रता नहीं होनी चाहिए। पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए 80 प्रतिशत सापेक्ष आर्द्रता आवश्यक है। गर्मी के मौसम में आर्द्रता को बनाये रखने के लिए दिन में कम से कम एक बार पॉलीघर की जमीन को अवश्य भीगना चाहिए। घर के भीतर जगह-जगह किसी पात्र में पानी भरकर रखने से भी नमी को संरक्षित किया जा सकता है। उत्पादन सिम्बिडियम ऑर्किड्स को बीजों के माध्यम से प्रसारित किया जा सकता है। ऑर्किड्स के विभाजन के लिए मुख्य रूप से ऊतक संवर्धन विधि सबसे उत्तम मानी जाता है। इसमें विभाजन बैकवल्व के द्वारा अथवा पुराने पौधे को विभाजित करके भी नए पौधे तैयार किए जा सकते हैं। इस विधि में पौधा तैयार होने में कम से कम 3-4 वर्षों का समय लग जाता है। रोगमुक्त पौधे तैयार करना है, तो ऊतक संवर्धन ही सबसे उत्तम विधि है। पौधघर पौधघर (ग्रीनहाउस) को बनवाते समय बहुत सी बातों का ध्यान रखना होता है जैसे-हवा का आवागमन, पानी और परिवहन आदि की उचित व्यवस्था। पौधघर को ऐसे बनाएं, जो चारों तरफ से खुला हो और हवा का आवागमन अच्छा हो। ऐसा घर सिम्बिडियम ऑर्किड्स के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। गमला पौधे को अगर मिटटी के गमले में लगाया जाए, तो सबसे अच्छा होता है। प्लास्टिक के गमले का आजकल बहुतायत में प्रयोग किया जा रहा है। गमले चाहे प्लास्टिक के हों या मिट्टी के, गमलों में छिद्र होना बहुत जरूरी होता है। जड़ों के लिए हवा का आवागमन बहुत जरूरी होता है। छिद्रों से अतिरिक्त पानी भी बाहर निकल जाता है। पौधों की आयु के हिसाब से गमले रखने चाहिए जैसे-15 सें.मी. से छोटे पौधे को 6 इंच के गमले में और वयस्क पौधा लगभग 3 वर्ष का 10-12 इंच के गमले में होना चाहिए। रोपण सामग्री पौधे के स्वस्थ एवं सम्पूर्ण विकास के लिए पौधरोपण सामग्री में कटी हुई पत्ती, कटे हुए नारियल के छिलके, भूसी, पेड़ की छाल तथा ईंट के टुकड़े (1:1:1:1) निर्धारित अनुपात में होने चाहिए। रोपण सामग्री का पी-एच मान 5.5-6.5 तक होना चाहिए। पौध लगाना और पुनः भराई ऑर्किड्स के पौधों की रोपाई का समय अप्रैल से लेकर जून के प्रथम सप्ताह तक का होता है। पौध रोपाई से पहले रोपण सामग्री को अच्छी तरह से पानी में भिगोकर साफ कर लेना चाहिए। इसमें से सोडियम बहुत निकलता है, जो पौधों की जड़ों को काफी नुकसान पहुंचाता है। फफूंदीनाशक को भली प्रकार से मिला लेना चाहिए, जिससे किसी रोग का डर न रह जाए। इसके बाद रोपाई करनी चाहिए। रोपण सामग्री तभी पुनः भरनी चाहिए, जब रोपाई किए हुए गमले की रोपण सामग्री लगभग आधा सड़ चुकी हो। गमले में भरी रोपण सामग्री लगभग 2-3 वर्ष के बाद ही पूर्ण रूप से सड़ती है। फिर पुनः भराई भी अप्रैल से लेकर जून के प्रथम सप्ताह तक ही करनी होती है। गमले से गमले का अंतराल लगभग एक वर्ष उम्र के 15 से 20 पौधों को एक वर्गमीटर में रखा जा सकता है। 3 से 4 वर्ष उम्र के वयस्क पौध (10-12 इंच के गमले में हो) तो एक वर्गमीटर में लगभग 3 से 4 पौधे ही रखे जा सकते हैं। जैविक पोषक तत्व प्रबंधन पौधों के पोषक तत्वों के संभावित स्रोत हैं खाद्य फसलों के अवशेष, जैविक खाद, सड़ी हुई गोबर की खाद, वर्मीकम्पोस्ट और कृषि अपशिष्ट पदार्थ इत्यादि। ऑर्किड्स में सड़ी हुई गोबर की खाद की आवश्यकता न के बराबर होती है। इसलिए गौमूत्र का उपयोग छिड़काव के लिए किया जा सकता है। गौमत्र का 1:20 के अनपात में छिडकाव करने से पौधों का अच्छा विकास होता है। इससे कीट-पतंगों से नुकसान का डर भी कम होता है। इसके साथ ही अगर मुर्गी के मल को सुखाकर 5 कि.ग्रा. (गोबर) को 95 लीटर पानी में भिगोकर 15 दिनों के लिए रख दें और इसके बाद 1:20 के अनुपात में छिड़काव करें, तो लाभ मिलता है। ऑर्किड्स को अवस्था के अनुसार अलग-अलग पोषक तत्वों की मात्रा की आवश्यकता होती है। वृद्धि के समय में नाइट्रोजन उर्वरक की जरूरत ज्यादा होती है। जब पुष्प निकल रहा होता है, तो फॉस्फोरस उर्वरक की मात्रा की ज्यादा आवश्यकता होती है। सिम्बिडियम ऑर्किड्स के लिए जैविक खाद तैयार करने के लिए सरसों तेल की खली, सूखी हुई मछली और हड्डी के चूरे को शामिल करके (8:0.5:4 कि.ग्रा. के अनुपात में) भी बनाया जा सकता है। इससे 3.5 प्रतिशत नाइट्रोजन, 2.1 प्रतिशत फॉस्फोरस, 2.7 प्रतिशत पोटाश, 4.5 प्रतिशत कैल्शियम और 1.6 प्रतिशत मैग्नीशियम दिया जा सकता है। सिंचाई ऑर्किड्स को पूरे वर्ष पानी देने की आवश्यकता होती है, जिससे इनकेस्यूडोबल्ब हरा और चिकने बने रहें। पानी की आवश्यकता वर्ष के ऋतुओं के ऊपर निर्भर करती है। जैसे गर्मी के मौसम में प्रति सप्ताह 2 से 3 बार शरद ऋतु में प्रति सप्ताह 1 से 2 बार जाडे के दिनों में प्रति सप्ताह एक बार वसंत ऋतु में प्रति सप्ताह 1 से २ बार कटाई फूलों की कटाई करते समय यह ध्यान रखें, कि जब 70 प्रतिशत फूल खिल जाएं तभी कटाई करें। कटाई करते समय किसी बाल्टी में पानी जरूर रखें। इन कट फ्लावर को काटने के तुरंत बाद पानी में डाला जाना चाहिए, जिससे फूलों की गुणवत्ता खराब न होने पाए। कटाई करने का सबसे उचित समय सुबह का होता है। यह कटाई किसी धारदार औजार से ही करनी चाहिए। आय सिम्बिडियम ऑर्किड्स फूल के एक कीलें की कीमत लगभग 100-200 रुपये के आसपास होती है। अत: 500 वर्गमीटर का पॉलीघर है, तो इसमें लगभग | 1500 पौधे होने चाहिए। इसको तैयार करने | में लगभग 8 से 10 लाख रुपये का खर्च आएगा। इससे 8 से 10 वर्ष में 55,000से 60,000 तक फूल किले ले सकते हैं। इससे लगभग 40 लाख रुपये तक की आय प्राप्त हो सकती है। (भाकृअनुप-राष्ट्रीय ऑर्किड्स अनुसंधान केन्द्र, पाक्यांग (सिक्किम) राकेश कुमार सिंह,लक्ष्मण चन्द्र डे, और मीना छेत्री)