भूमिका उद्यान विज्ञान या हार्टिकल्चर में फल, सब्जी तथा फूल, सभी का उगाना सम्मिलित है।जिस भूमि में बाग लगाना है यदि उसमें पहले से खेती होती रही है, तो उसे ठीक करने में अधिक कठिनाई नहीं होती। नीचे की भूमि कैसी है, यह जानने के लिए पूरी भूमि में कई जगह पाँच या छह फुट गहरे गड्ढे खोद लेना चाहिए। सर्वप्रथम भूमि के जंगल की सफाई करना चाहिए। बबूल आदि के जंगली पेड़ों और झाड़ियों को काटना चाहिए। केवल ऊपर से तना काट देने से झाड़ियाँ दोबारा बढ़ जाती हैं, इसलिए प्रत्येक पेड़ और झाड़ी को खोदकर जड़ सहित निकाल देना चाहिए। एक दो छायादार मौके का पेड़ ऐसे स्थान पर, जहाँ माली के रहने की झोपड़ी आदि डालनी है, छोड़ भी सकते हैं। बाद में आवश्यकता न रहने पर वे काटे जा सकते हैं। जंगल की सफाई के बाद भूमि की सतह एक करना आवश्यक है। यदि सतह ठीक नहीं होती तो सिंचाई करने में भी असुविधा होती है। सब पेड़ों में एक समान पानी नहीं पहुंचता। वर्षाकाल का पानी भी नीचे स्थान में भर जाता है और पेड़ों को हानि पहुंचती है। सिंचाई की नालियों की सुविधा देखकर भूमि की सतह ठीक कर लेनी चाहिए। यदि पूरी भूमि को एक सा चौरस करना संभव न हो, तो उसको दो या अधिक भागों में बाँटकर हर भाग को अलग अलग समतल कर लेना चाहिए। पर्वतीय क्षेत्रों में, जहाँ बड़े चौरस मैदान नहीं होते, इसी प्रकार सीढ़ीदार खेत बनाए जाते हैं। इसके बाद संभव हो तो पूरे खेते की एक गहरी जुताई कर देनी चाहिए। इससे जमीन भुरभुरी हो जाती है और वर्षा का पानी भी जमीन में भली प्रकार पहुंचता है। सपाट जमीन में अधिकतर वर्षा का पानी बह जाता है। यदि संभव हो तो पूरे खत में हरी खादवाली फसल, जैसे सनई आदि, बोकर जोत देने से भूमि को अच्छी खाद मिल जाती है। इसके बाद पूरी भूमि में पेड़ लगाने के स्थानों में च्ह्रि लगा देना चाहिए। भूमि पर च्ह्रि लगाने से पहले, यदि कागज पर उसका नक्शा बना लिया जाए, तो च्ह्रि लगाना आसान रहता है और कोई गलती नहीं होती है। रेखांकन (लेआउट) की कई विधियाँ होती हैं, जैसे वर्गाकार, षट्भुजाकार, आयताकार आदि। वर्गाकार विधि सुगम और सबसे अधिक प्रचलित है। फलदार वृक्ष से संबंधित प्रश्नोत्तरी प्रश्न: ऊसर भूमि में बेर, अमरूद, आंवला, आम के किन किस्मों को लगाना चाहिए? उत्तर: अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित किस्मों को लगाएँ: बेर - गोला एवं कड़ाका अमरूद - अलाहाबादी सफेदा, लखनऊ-49 (सरदार) एवं अर्का मृदुला आँवला - एनए-7 (5 प्रति5शत चकैया के साथ) आम - आम्रपाली, मल्लिका, हेमसागर एवं लेंगरा। प्रश्न: मेरे पास आप का बाग है जिसमें एक वर्ष के अंतराल में फल आते हैं।अतः ऐसा उपाय बनायें जिससे हर वर्ष फल प्राप्त हो सके ? उत्तर: आनुवांशिक गुण हो,हर साल फलने वाले किस्मों जैसे - आम्रपाली एवं मल्लिका को लगाएँ। प्रश्न : आम, लीची, पपीता के पौधे के बगीचा लगाने के बारे में सुझाव तथा बचाव के बारे में जानकारी दें? फलों के बागीचा लगाने के लिए गड्ढे की तैयारी अप्रैल महीने में कर लें तथा आवश्यक खाद एवं उर्वरक के साथ एक महीने बाद गड्ढों को भर दें। मानसुन के शुरूआत में ही पौधे लगाएँ अन्यथा पौधों के मरने की संभावना अधिक रहती है। जानवरों तथा पाले से बचाव के लिए बाड़े(गैबीयोन) का प्रयोग करें। इस बात का खयाल रखें कि कलम को जोड़ जमीन से ऊपर रहे। जोड़ के नीचे से जो भी डाली निकले उसे तोड़कर हटा देना चाहिए। प्रश्न: फल वाले पौधे (आम, लीची, पपीता) लगाने की विधि तथा सुझाव दें? उत्तर: छोटे छत्रक वाली आप की किस्मों को 5 मी. 5मी. तथा आम एवं लीची के किस्मों को 10मी. 10मी. तथा पपीता को 2मी. 2मी. की दूरी पर लगाना चाहिए। प्रश्न: कटहल के पेड़ का फूल मुरझा जाता है, उपाय बतावें उत्तर: कटहल में मुलायम एवं एवं सिल्कीदार फूल पहले आते हैं जो नर होते हैं अतः उनका मुरझा जाना स्वाभाविक है। अच्छे फल के लिए 7 ग्रा. तुतिया और 7 ग्रा. चुना को प्रतिलीटर पानी (बोर्डेक्स मिक्सचर) में मिलाकर छिड़काव करें। प्रश्न: अमरूद का फल छोटा होता जा रहा है, कारण एवं उपाय बतावें? उत्तर: इसका एक कारण हो सकता है कि आपके द्वारा लगाया गया पौधा निम्न कोटि की किस्म का हो। आवश्यक खाद एवं उर्वरक का प्रयोग करें। नियमित सिंचाई दें। प्रश्न: पपीता का पौधा या पत्तियों में माँगरी लगती है, अधिकांश ऐसा क्यों होता हैं? उत्तर: यह विषाणुजनित कारकों से होता है, बचाव के लिए कैराथेन (0.1%) का छिड़काव एक महीने के अन्तराल पर फूल आने तक करें। अगर आसपास इस रोग से प्रभावित पौधे हों तो उन्हें उखाड़कर फेंक दें। प्रश्न: आम के पेड़ में मेंजर हुआ है लेकिन फल नहीं देता है, उपाय बतावें? उत्तर: मेंजर खिलते समय किसी प्रकार की दवाओं एवं सिंचाई का प्रयोग ने करें। दवाओं का प्रयोग करने पर परागण बुरी तरह प्रभावित होता है। प्रश्न: आम और लीची के पौधों में इस समय फल लग गये हैं, इसकी देखभाल कैसे करें? उत्तर : लीची के पौधों में हल्की सिंचाई हमेशा देते रहें जिससे फल का फटना काफी कम हो जाता है। आम के पौधों में मेंजर आने पर या इसके ठीक पहले, सिंचाई रोक दें जिससे उसमें फूल और अच्छी तरह आएँ। मटर के दाने बराबर फल आने पर प्लानोफिक्स (1 मिली/ली.) का प्रयोग दवाओं जैसे-मोनोक्रोटोफॉस् (0.1%) तथा बैविस्टीन (0.1%) के साथ करें। प्रश्न: आम के पेड़ 7 से 8 साल का हो गया है, पेड़ का विकास भी ठीक है लेकिन अभी तक फल नहीं लगा है। फूल लगता है लेकिन तुरन्त झड़ जाता है। आम का पेड़ देशी प्रजाति का है। कारण एवं उपाय बतायें? उत्तर : चूँकि आपके द्वारा लगाया गया आम देशी प्रजाति का है, इसके फलन में करीब 10 साल लग जाते हैं। शुरूआत में फूल तो आते हैं लेकिन झड़ जाते हैं। फूल लगते समय सिंचाई न करें और जब फल बनने लगे तब उपरोक्त बताए गये दवाओं का प्रयोग करें। प्रश्न: कटहल में प्रथम वर्ष 3 फल आया, द्वितीय वर्ष में 2 एव तृतीय वर्ष के बाद 1 ही फल आता है। ऐसा पाँच वर्षों से हा रहा हैं। उत्तर : समुचित उर्वरक का प्रयोग करें। जुलाई-अक्टूबर के बीच प्रति वृक्ष 30 किग्रा सड़ी गोबर की खाद, 250 ग्रा डीएपी, 100 ग्रा. लिण्डेन धुल का प्रयोग अवश्य करें। प्रश्न: कटहल के पेड़ में फल आता है, बीच में कीट से छेद हो जाता है। एवं खाने में तीतापन लगता है। कैसे? उत्तर: कटहल के छोटे फल काफी मुलायम होते हैं जिनमें कीट आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। बचाव के लिए इंडोसल्फान का 2मिली/ली. या मोनोक्रोटाफिॉस का 1 मिली /ली. का छिड़काव करें। प्रश्न: नींबू का पेड़ लगाए हुए चार साल हो गए हैं लेकिन फल नहीं लग रहा है। उपाय बतायें? उत्तर: अगर पौधे छाड़ीदार हो गये हों तो समय से कटाई-छँटाई एवं उर्वरक की आवश्यक मात्रा का प्रयोग करें। हड्डी का चुरा प्रति पौध 50-100 ग्रा. मिट्टी में मिलाकर दें। सिंचाई हल्की दें। प्रश्न: केला लगाने की विधि एवं रोग निवारण के बारे में जानकारी दें? उत्तर: जहाँ पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो, वहीं केला लगाएँ। अन्यथा केला न लगाएँ। लम्बी प्रजातियों को 3 मी. 3 मी. एवं बौनी किस्मों को 2मी.2मी. पर लगाएँ। आवश्यकतानुसार खाद एवं उर्वरक का प्रयोग करें। रोग रोधी किस्मों को लगाएँ तथा रोगग्रस्त पौधों को उखाड़कर फेंक दें। प्रश्न: मैने 200 आम की गुठली से एक साल पूर्व पौधा लगाया। उससे कलम तैयार करना चाहता हूँ। कृपया उपाय बताएँ। उत्तर: आम का पौधा तैयार करने के लिए साटा और ग्राफ्टिंग विधियों का व्यवहार करें। प्रश्न: 2500 कलमी आम में 1000 बच गए एवं 1500 मर गए। बाकी को कैसे बचाएँ? उत्तर: बचे हुए पौधों में समय पर सिंचाई एवं खरपतवार एवं निकाई-गुड़ाई करते रहें। यह क्रिया जाड़े एवं गर्मी के दिनों में अवश्य करें जब तक पौधा 4-5 वर्ष का नहीं हो जाए। प्रश्न: पपीता के पौधे में ऊपर का पत्ता छोटा-छोटा हो जाता है और फल भी छोटा हो जाए। उपचार बतावें? उत्तर: प्रारंभिक अवस्था में ही खाद एवं उर्वरक की आवश्यकतानुसार प्रयोग करें। हमेशा अच्छी जाति की किस्मों को ही लगाएँ। प्रश्न :मेरे पास नारियल का 10 वर्ष पुराना पेड़ है। फल लगने के बाद लगभग 1/2 कि. ग्रा. होने पर गिर जाता है। कृपया उचित परामर्श दें? उत्तर: पौधों की संख्या कम होने पर, परागण-दोष के कारण ऐसी समस्या आती है। अधिक पौधे रहने पर यह समस्या दूर हो जाती है। फल लगते समय प्लानोफिक्स का छिड़काव (0.1%) करे एवं सिंचाई नियमित रूप से दें। इसमें (नारियल में) सिंचाई की अधिक आवश्यकता होती हैं। प्रश्न: नारियल के पेड़ में फूल आता है और फूल लगने के बाद गिर जाता है। कृपया उपचार बताये? उत्तर: पौधों की संख्या कम होने पर, परागण-दोष के कारण ऐसी समस्या आती है। अधिक पौधे रहने पर यह समस्या दूर हो जाती है। फल लगते समय प्लानोफिक्स का छिड़काव (0.1%) करें एवं सिंचाई नियमित रूप से दें। इसमें (नारियल में) सिंचार्ई की अधिक आवश्यकता होती है। प्रश्न: बहुत सारे आम का पौधा मर जाता है। कैसे बचाये? उत्तर:ऐसा बार्क इटिंग कैटरपिलर के कारण होता है। इसके प्रबंधन के लिए फलों की तुड़ाई के पश्चात मोनोक्रोटोफॉस (0.15%) से समुचे तने को धो दें। यह क्रिया 15 दिनों के अन्तराल पर 2-3 बार दुहराएँ। पौधों के जड़ के नजदीक जुलाई-अगस्त माह में कोड़ाई करके 0.2 क्लोरोपाइरीफॉस का प्रयोग करे। इससे दीमक एवं अन्य कीड़ो की रोकथाम हो जाती है। तने को जमीन से 4' की दुरी तक बोर्डेक्स मिक्सचर द्वारा पोत दें। प्रश्न: आम के पेड़ के तना को कीड़ा काट देता है जिससे वह मर जाता है,निदान बताएँ? उत्तर: ऐसा बार्क इटिंग कैटरपिलर के कारण होता है। इसके प्रबंधन के लिए फलों की तुड़ाई के प्श्चात मोनोक्रोटोफॉस (0.15%) से समुचे तने को धो दें। यह क्रिया 15 दिनों के अन्तराल पर 2-3 बार दुहराएँ। पौधों के जड़ के नजदीक जुलाई-अगस्त माह में कोड़ाई करके 0.2 क्लोरोपाइरीफॉस का प्रयोग करें। इससे दीमक एवं अन्य कीड़ों की रोकथाम हो जाती है। तने को जमीन से 4' की दूरी तक बोर्डेक्स मिक्सचर द्वारा पोत दें। प्रश्न: स्ट्राबेरी की खेती के लिए क्या राँची की जलवायु उपयुक्त हैं? उत्तर: स्ट्राबेरी की खेती अगर जाड़े के मौसम में की जाए तो राँची की जलवायु को इसके लिए उपयुक्त माना जा सकता है। प्रश्न : परती भूमि में फलों के पौधे लगाने की जानकारी चाहिए? उत्तर: परती भूमि में 3' 3' 3' का गड्ढा तैयार करें। अगर वहाँ मिट्टी मोरम वाली हो तो उसे हटाकर अच्छी मिट्टी भर दें। भरते समय खाद एवं उर्वरक की समूचित मात्रा मिलाएँ। प्रश्न: पपीता में फल का आकार छोटा क्यों होता हैं? उत्तर :30 किग्रा गोबर और 100-150 ग्रा. एस.एस.पी., 50 ग्रा. एम.ओ.पी.,50-100 ग्रा. लिण्डेन धुल मिट्टी में मिलाकर गड्ढे को अच्छी तरह भर दें।यह क्रिया मई महीने के अंत तक पुरा अवश्य कर लें। मानसुन के शुरूआत में ही फलदार पौधों को लगा देना चाहिए जिससे पौधे ठीक से लग जाएँ। सब्जियों से संबंधित प्रश्नोत्तरी प्रश्न : बरसात में लगाया गया टमाटर फूल लगने के समय मर जाता है, उपाय बतायें? उत्तर: टमाटर में उकठा रोग के चलते पौधे मर जाते हैं। अतः उससे बचाव के लिए अवरोधी किस्मों को लगाना आवश्यक है जैसे-अरका आभा, अरका आलोक एवं स्वर्ण नवीन/पौधे को रोपाई के पूर्व स्ट्रोप्टोसाइक्लिन घोल (आधा ग्राम एक लीटर पानी) में आधे घंटे तक डुबाकर रखना आवश्यक है। चूना का प्रयोग भी लाभदायक होगा। प्रति हेक्टर 12 किलो ब्लीचींग पाउडर खेत तैयारी के समय डालें। प्रश्न: सब्जी उत्पादन में किन-किन बातों को ध्यान में रखना होगा? उत्तर:अच्छी किस्में, खेत का उचित चुनाव, जहाँ पानी का जमाव नहीं हो, संतुलित उर्वरक का प्रयोग, फसलों की रोग व्याधि से सुरक्षा, अम्लीय मिट्टी में चूना का प्रयोग एवं समय पर तोड़ाई आदि के समावेश पर ही अच्छी फसल का उत्पादन निर्भर करता है। इस समय खेतों में लत्तरवाली सब्जियों में भी बहुत अच्छी किस्में विकसित की जा चुकी हैं। उन्हीं को लगाये, जिससे उपज में 20 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि की जा सकती है। अधिक फसल के लिए इथ्रेल 200-250 मि. ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर दो से चार पत्तियों वाली स्थिति में छिड़काव से अधिक उत्पादन लिया जा सकता है। प्रश्न: सब्जी उत्पादक किसानों को पैकेजिंग के बारे में समुचित जानकारी देने की कृपा करें? उत्तर: सब्जियों का वर्गीकरण एवं उसके उपरान्त बाँस की टोकरी या पेपर युक्त पैकेजिंग के लिए ज्यादा उपयुक्त होता है। प्रश्न: आलू की खेती के बारे में पूरी जानकारी चाहिए? उत्तर:आलू की अच्छी किस्में जैसे-कुफरी अशोका, कुफरी कंचन (लाल), कुफरी बहार तथा चीप सोना लगायें। लगाते समय कन्द को डाइथेन या बेभिस्टिन के साथ उपचार करें। उर्वरक में कम्पोस्ट 300 क्विंटल, यूरिया 330 कि.ग्रा., म्यूरेट ऑफ पोटाश 150 किलों तथा सिंगल सुपर फास्फेट 600 किलो प्रति हे. की दर से व्यवहार आवश्यक है। प्रश्न: मौसमी सब्जी लगाने हेतु उचित परामर्श दें? उत्तर: मौसमी सब्जी को खेती में अगात किस्मों का योगदान बहुत बड़ा होता है। अतः संकर या अच्छी किस्में ही लगायें तथा प्रचूर मात्रा में कम्पोस्ट का व्यवहार करें। प्रश्न: सब्जी से सम्बन्धित पौधा संरक्षण प्रणाली की संक्षिप्त जानकारी दें? उत्तर: बिरसा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित बिरसा डायरी ज्यादा उपयोगी होगा। इसमें कीट रोग व्याधि सारी बातें विस्तृत रूप में वर्णित है। प्रश्न: टमाटर का पौधा मर जाता है। उपचार बतावें? उत्तर: टमाटर में उकटा रोग के चलते पौधे मर जाते है। अतः उससे बचाव के लिए अवरोधी किस्मों को लगाना आवश्यक है जैसे-अरका आलोक एवं स्वर्ण नवीन रोपाई के पूर्व स्ट्रेप्टोसाइक्लिन घोल (आधा ग्राम एक लीटर पानी में) आधे घंटे तक डुबाकर रखना आवश्यक है। चूना का प्रयोग भी लाभदायक होगा। प्रति हेक्टर 12 किलो ब्लीचींग पाउडर खेत में डालें। प्रश्न: आलू में चित्ती लगता है उपचार बताये? उत्तर: आलू चित्ती के रोकथाम हेतु रेडोमिल 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर व्यवहार करें । प्रश्न: अच्छे मूल्य के लिए सब्जी फसलों की प्रोसेसिंग के बारे में बतायें? उत्तर : अच्छे मूल्य हेतु प्रसंस्करण आवश्यक है जिसमें सब्जियों के आचार, सुखौटा, टमाटर केचप, पेठा, मटर डिब्बा बन्दी किया जा सकता है। प्रश्न: जैविक विधि से सब्जियों की खेती कैसे करें? उत्तर: जैविक विधि से सब्जियों की खेती हेतु कम्पोस्ट, करंज, वर्मी आदि का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावे बायोउर्वरक का भी समावेश किया जाता है। तीन साल बाद जैविक स्थिति के लिए प्रमाणीकरन की आवश्यकता होती है। कीट-व्यधि एवं रोग प्रबंधन हेतु नीम उत्पादित पदार्थों का प्रयोग किया जाता है। प्रश्न: फलों एवं सब्जियों का संरक्षण कैसे करें? उत्तर: फलों एवं सब्जियों के प्रसंस्करण हेतु बिरसा किसान डायरी का सहयोग अपेक्षित है तथा उद्यान विभाग से भी सम्पर्क साध सकते है। प्रश्न: कद्दू का फूल और फल गिर जाता है। इसके लिए क्या उपाय किस जाए? उत्तर: कद्दू में नर एवं मादा दा तरह के फूल होते हैं तथा परागण मधुमक्खी द्वारा होता है। मिराकुलॉन 3 मि.ली./5 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। साथ ही साथ पौधों की संख्या बढ़कार फलन अधिक किया जा सकता है। प्रश्न: ओल एवं अदरख के सफल खेती के बारे में जानकारी चाहिए? उत्तर: ओल हेतु गजेन्द्र किस्म लगावें तथा प्रति कन्द 500 ग्राम का 50 से 60 से.मी. की दूरी पर लगायें। प्रति उड्ढा 3 किलो कम्पोस्ट 10 ग्राम यूरिया,200 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट तथा 8 ग्राम पोटाश का व्यवहार करें। अदरख हेतु वर्दमान किस्म लगावें। ओल एवं अदरख को लगाने का समय अप्रैल माह उपयुक्त होता है तथा हर स्थिति में कन्द का उपचार लगाने पूर्व करें। प्रकंद 18 क्विंटर प्रति हे. कि दर से लगाना चाहिए। 40-20 से.मी. के दूरी पर लगायें। बोआई के बाद सुखे पत्ते से ढक दें। प्रश्न: बेमौसमी सब्जी उत्पादन तकनीक के बारे में जानकारी चाहिए? उत्तर: पोलीहाउस में दिसम्बर माह में बिचड़ा तैयार कर जनवरी माह में रोपाई करें। बिचड़ा पोली बैग में तैयार करें। पोली बैग को बराबर-बराबर भाग मिट्टी एवं कम्पोस्ट के साथ भराई करें तथा पोली बैग में दो या तीन छेद नीचे कर दें। प्रश्न: शिमला मिर्च की खेती के बारे में जानकारी दें? उत्तर: शिमला मिर्च हेतु कैलिफोरनिया वन्डर, इन्दिरा तथा भारत किस्में लगायें। इसकी खेती मिर्च जैसी ही होती है लेकिन रोग एवं कीट का प्रकोप अधिक होता है। प्रश्न: गोभी के बीज की उपलब्धता के बारे में बतायें? उत्तर: गोभी की अच्छी किस्मों की उपलब्धता भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली से प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावे प्राइवेअ कम्पनी के बीज भी बाजार में उपलब्ध हैं। प्रश्न: गोभी के नए उन्नतशील प्रभेदों के बारे में बताये? उत्तर: अच्छी किस्मों में - अर्ली कुँवारीए हेमलाल, पूसा कतकी, पूसा दिपाली,पूसा शुभ्रा, स्नोवॉल आदि लगाया जा सकता है। किस्म का चुनाव लगाने के समय के अनुसार करें। प्रश्न: करैला के उन्नशील प्रकार कौन से है ? उत्तर: अरका हरित, कोयम्बेटोर लाँग ग्रीन अच्छी किस्में हैं। प्रश्न: रबी के मौसम में आलू के अतिरिक्त कौन-सी फसल लगाएँ जिससे ज्यादा लाभ मिलें? उत्तर: आलू के अलावे मटर, ब्रोकली, अगात टमाटर एवं फ्रेंचबीन लगाया जा सकता हैं। प्रश्न: बैंगन का पौधा लगाने के बाद इसमें फूल आने के समय 75 प्रतिशत पौधे मर जाते हैं। इसका क्या कारण है तथा यह कैसे नियंत्रित होगा? बैंगन की खेती में जमीन हमेशा बदल-बदल कर लगानी चाहिए। गर्मी में चोत की जुताई करें। प्रति हे. 12 किलो ब्लीचिंग पाउडर खेत तैयार करते समय डालें। किस्म में स्वर्ण प्रतिभा लगायें तथा बिचड़ा का उपचार स्ट्रेप्टोसाइक्लिन के द्वारा करें। प्रश्न: कम बारिश में किन फसलों की खेती करने से किसान को ज्यादा लाभ होगा? उत्तर: बोदी, फ्रेंचबीन तथा भिंडी की खेती करें। मूली बहुत कम समय लेता है। बरसाती गोभी की भी खेती की जा सकती है। प्रश्न:अदरख की खेती के लिए किस प्रकार की मिट्टी उपयुक्त होती है एवं लगाने के समय प्रयोग की जाने वाली खाद-उर्वरक तथा बवा की जानकारी दें? उत्तर : हल्की मिट्टी तथा जहाँ पानी का जमाव नहीं हो एसी जमीन अच्छी होती है। प्रति हे. उर्वरक में कम्पोस्ट 200 क्विंटल, यूरिया 250 किलो,ए सिंगल सुपर फास्फेट 350 किलो तथा म्यूरेट ऑफ पोटाश 90 किलो आवश्यक है। यूरिया तीन विभाजित मात्रा में, पहला लगाने के समय, दूसरा 30 दिन बाद तथा तीसरा 40 दिन बाद देना चाहिए। अन्य खाद का व्यवहार लगाते समय किया जाता है। प्रश्न : वैशाख मास में लौकी एवं करेला की खेती के सम्बन्ध में जानकारी दें? उत्तर: लौकी किस्में : पूसा नवीन, अरका बहार करेला : अरका हरित, पूसा विशेष लगाने के लिए : करैला 1 मी. 1मी. कद्दू 1.5 मी. 1.5मी. प्रति थाला तीन से चार बीज लगायें। पर्याप्त मात्रा में कम्पोस्ट का व्यवहार करें। प्रश्न: मैंने कद्दू एवं कोंहड़ा के पौधे लगाए थे। बहुत फूल-फल आया, लेकिन एक भी नहीं ठहरा। इसका कारण एवं निदान बतायें? उत्तर: कद्दू में नर एवं मादा दो तरह के फूल होते हैं तथा परागण मधुमक्खी द्वारा होता है। मिराकुलॉन 3 मि.ली./5 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कार करें। साथ ही साथ पौधों को संख्या भी बढ़ाकर फलन अधिक किया जा सकता है। प्रश्न: बरसात के मौसम में जब अमाअर लगाते हैं तो लगभग 30 दिनों के बाद उसकी पत्तियाँ छोटी-छोटी हो जाती हैं और फल नहीं लगते हैं? उत्तर: विषाणु जनित रोग के चलते ही ऐसा होता है। अरका आभा, बी.टी.-12, स्वर्ण लालिमा किस्में लगावें। आक्रांत पौधें को हटा दें। प्रारम्भ में ही मोनासिल का स्प्रे करने से इसके फैलाव को रोका जा सकता है। प्रश्न: आलू को बालू के ऊपर रखते हैं फिर भी आधा से ज्यादा सड़ जाता है। क्या करें? उत्तर: कोड़ाई के उपरान्त कटे एवं सड़े फल को छाँट दें तथा छाया में पाँच से छह दिन तक बाहर रखने के प्श्चात ही बालू के ऊपर घर के अन्दर रखें तथा इस बात का भी ध्यान रहे कि हवादार कमरा हो। प्रश्न: टमाटर काफी सस्ता बिकता है। हम सॉस, प्यूरी वगैरह बनाना चाहते हैं। उपाय बतायें? उत्तर: उद्यान विभाग से सम्पर्क कर प्रसंस्करण हेतु जानकारी प्राप्त करें। प्रश्न: पालक साग कैसे लगायेगें? उत्तर: पालक लगाने का मुखय समय रबी मौसम है। उन्न्त किस्मों में ऑल ग्रीन, पूसा ज्योति लगावें। प्रति हे. 25-30 किलो बीज का प्रयोग करें एवं 15-20 से.मी. की पंक्ति में लगावें। प्रश्न: साग एवं मूली लगाते हैं तो मर जाता है। निदान बतायें? उत्तर: लीन्डेन धूल का व्यवहार करें। प्रश्न: फूलगोभी एवं बंदगोभी रोपने का तरीका बतायें? उत्तर: 60 30 से.मी. की दूरी पर लगावें। प्रश्न: क्या मद्रासी ओल का बीज बी.ए.यू में उपलब्ध होगा? उत्तर: गजेन्द्र किस्म की उपलब्धता सीमित मात्रा में उद्यान विभाग में है। प्रश्न: मिर्चा कैसे लगायेंगे? उत्तर: एक हे. रोपाई हेतु उपचार के उपरान्त नर्सरी तैयार करें तथा रोपाई 45 45 से.मी. की देरी पर लगावें। उन्नत किस्में पूसा सदाबहार, के.ए.-2 तथा पूसा ज्वाला है। प्रश्न: भिण्डी जब छोटा-छोटा होता है तब झड़ जाता है। निदान बताये? उत्तर: उचित मात्रा में खाद एवं पानी का व्यवहार करें तथा मिराकुलोन का स्प्रे करें। प्रश्न: पालक छोटा से बड़ा होने तक में सड़ने लगता है। क्या करें? उत्तर : बीज का उपचार अति आवश्यक है। प्रश्न: मेरे पास 6-7 एकड़ जमीन है लेकिन सिंचाई की सुविधा नहीं है। हम बागवानी फसल कैसे करें? कृपया सलाह दे? उत्तर: आपके पास जमीन अधिक है, लेकिन सिंचाई की सुविधा नहीं है अतः आप बागवानी फसल में फलदार वृक्ष खेती जैसे-आँवला, अमरूद, पपीता, आम आदि फसल की खेती कर सकते हैं, इसके अलावा वर्षा के मौसम में सब्जी फसल की खेती कर सकते हैं। प्रश्न : अदरक में कन्द सड़न रोग का व्यापक प्रकोप होता है। इस रोग की रोकथाम कैसे की जा सकती है? उत्तर : सड़न रोग से बचाव के लिए अदरक के बीज को लगाने के पहले 2 ग्राम इंडोफिल और 1 ग्राम बैविस्टीन प्रति लीटर पानी में उपचार कर लगायें। प्रश्न: लहसुन की रोपनी के 70:75 दिनों के बाद ऊपर का पत्ता झुलस जाता है। कृपया सुझाव दें? उत्तर: लहसुन में पत्ता झुलस जाता है इसके मुखय कारण बोरन की कमी तथा फूफंदी जनक रोग ब्लास्ट का प्रकोप हो जाता है। अतः इसमें बचाव के लिए बोरन की उचित मात्रा तथा फूफूंदीनाशक दवा का छिड़काव करना चाहिए। प्रश्न: आदि की खेती के बारे में संक्षिप्त जानकारी दें? उत्तर: सभी प्रकार की अच्छे जल निकास वाली भूमि, छायादार जगहों में। उन्नत प्रभेद - रीयो डी जेनेरो, दिया, समस्तीपुर बीज दर : क्विंटल/हे. कटाई : फसल बोआई के 8 महीने बाद, जब पत्ते पीले पड़ने लगे तथा कंद सूखने लगे, तैयार हो जाती हैं। उपज : 50-100 क्विं/हे. शुष्क अदरक की प्राप्ति 15-25/क्विंटल रह जाती है। प्रश्न: हल्दी की मार्केटिंग के बारे में जानकारी दें? उत्तर: हल्दी के उपज के बाद उसे सुखाकर उससे पावडर बनाकर बाजार में बिक्री की जाए तो उचित लाभ लिया जा सकता है। फूलों की खेती प्रश्न: हाइब्रीड गेंदा फूल का नर्सरी एवं रोपाई किस तरह किया जाता हैं? उत्तर: हाइब्रीड गेंदा काफी मेंहगे होते हैं। इसकी रोपाई सावधानीपूर्वक, पॉलीबैग या बड़े गमले में की जाती है। इसे गमले में औसत में औसत दूरी पर लगाया जाता है ताकि बिचड़े को आसानी से निकाला जा सके। पॉली ट्रे/बैग को गोबर, मिट्टी, बालू की बराबर या 2:1:1 के अनुपात में मिश्रण तैयार कर पॉली ट्रे/बैग/गमले में भरा जाता है तथा एक-एक बीज को हरेक छेद/बैग में लगाया जाता है। प्रश्न: ग्लेड के बल्ब से कैसे पता चलेगा कि टिशु कल्चर है या लोकल। साथ ही कैसे पता चलेगा कि ग्लेड किस रंग का हैं। बतायें? उत्तर: ग्लेड के फूल दो तरह के होते है डबल और सिंगल तथा इसके बल्ब का औसत आकार 4 सें.मी. का होता है जो मुखयतः डबल (दोहरे) किस्म वाले ग्लेड होते हैं। बल्ब के रंगों में भी अंतर पाया जाता है। क्रीम रंग के बल्ब से हल्के पीले, क्रीम, सफेद रंगों-वालें ग्लेड, ग्लेड के फूल तथा गहरे लाल या कत्थई रंग के बल्ब से लाल, कत्थई, रानी पिंक तथा पीले रंगो वाले बल्ब से मुखयतः नारंगी, पीले मिक्स रंग के ग्लेड के फूल होते है। प्रश्न: ग्लेडीयोलस (Gladiolus) की खेती के बारे में जानकारी दें? उत्तर: यह मुखयतः जाड़े के मौसम का फूल है इसके लिए हल्की बलुवाही मिट्टी उपयुक्त होती है जिसे कंद के द्वारा लगाया जाता है। इसे लगाने की देरी 10-15 20 सें.मी. (पौधा से पौधा तथा कतार से कतार) होती है। एक कंद से फूल के एक या दो कंठल आते हैं। जो तुड़ाई के बाद गुलदस्ते में 10-12 दिनो तक लगातार खिलते रहते हैं साथ ही नीचे छोटे-छोटे कंद भी जमते हैं जो अगले वर्षों के लिए बीज के रूप में उपयोग में आते हैं। प्रश्न : फ्लोरिकल्चर के बारे में बताएं ? उत्तर: फ्लोरिकल्चर में फूलों की खेती की जाती है। ये फूल मौसमी, वार्षिक/द्विवार्षिक/बहुवार्षिक हो सकते हैं। साथ ही लॉनग्रास,शोभाकार पौधे, वृक्ष भी इसके अन्तर्गत आते हैं। व्यावसायिक फूलों के अंतर्गत मुखयतः गुलाब, ग्लेडियोलस, जरवेरा, कारनेशन, ऑर्किड, एन्युरियम, रजनीगंधा तथा आते हैं। जिन्हें आसानी से खुले या पॉलिहाउस, नेटशेह में लगाया जा सकता है। प्रश्न : जरबेरा की खेती के बारे में जानकारी दें? उत्तर: जरबेरा एक वार्षिक फूल है जिसमें सालों भर फूल आते हैं सिर्फ भारी वर्षा (जुलाई-सितम्बर) के माह को छोड़कर। इसकी रोपाई बरसात के बाद गांठ के द्वारा की जाती है जिसमें दो-तीन जड़ें भी होती हैं। इसके फूल तथा पत्ते साथ-साथ निकलते रहते हैं, इसमें मुखयतः लाल, गुलाबी, कत्थई, सफेद तथा पीला होता है। तुड़ाई के बाद इनके हाइब्रिड किस्मों को पानी में 10-12 दिनों तक तथा साधारण किस्मों को 5-7 दिनों तक रखा जा सकता है। प्रश्न: गेंदा फूल में सफेद जाला लग गया है और पूरा पौधा उजला हो गया है। किसान द्वारा मोनोसिल, डायथेन एम-45 और रोगन का छिड़काव किया गया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके रोकथाम के क्या उपाय हैं? उत्तर: गेंदा फूल की पत्तियों में सफेद पाउडर की तरह लग जाते हैं जिसे पाउड्री मिल्डूय कहा जाता है। जिसकी रोकथाम के लिए घुलनशील सल्फर का 0.2 प्रतिशत - 0.3 प्रतिशत तक छिड़काव करें। प्रश्न: गेंदे के फूल में दीमक के प्रकोप को पूर्णरूपेण कैसे रोका जा सकता है? उत्तर: दीमक की रोकथाम के लिए लिण्डेन धूल 10 किलो/एकड़ की दर से जमीन की तैयारी के समय या क्लोरोपायरिफॉस 2 मि.ली. से 2.5 मि.ली.प्रति लीटर घोल बनाकर पौधों में डालें। जड़ी-बूटी की खेती प्रश्न: जड़ी-बूटी का मार्केटिंग के लिए क्या कुछ व्यवस्था किया जा रहा हैं? उत्तर: जड़ी-बूटी की खेती अभी प्रारम्भिक अवस्था में है। अभी कुछ आयुर्वेदिक कंपनी इन जड़ी-बूटीयों की खरीद कर रही है। सरकारी स्तर से इसकी मार्केटिंग की व्यवस्था नहीं हो पाई है। प्रश्न: स्टीविया की खेती कैसे की जाती है, इसको बीज द्वारा बोया जाता है या कोई अलग तरीका हैं? उत्तर: स्टीविया की खेती कटिंग के द्वारा करना अधिक लाभदायक है। बीज द्वारा इसे लगाने से समय अधिक लगता है। प्रश्न: औषधीय खेती में सफेद मूसली का बहुत प्रचार के बाद उचित विपणन की विशेष समस्या है। इसे कैसे दूर किया जा सकता है? उत्तर: सफेद मूसली हेल्थटॉनिक के रूप में बहुत ही लाभकारी है। अभी इसके विपणन की कुछ समस्या है। मुखय रूप से इसका प्रयोग आयुर्वेदिक कंपनी के च्यवनप्राश बनाने में कया जा रहा है। यदि आयुर्वेदिक कंपनियों के आवश्यकता के अनुसार इसकी खेती की जाए, तब इसके विपणन में कोई परेशानी नहीं होगी। इसके अलावा विदेशों में भी इसकी काफी माँग है। सरकारी एजेंसी यदि निर्यात करने में सहयोग कमरे तो इसके विपणन की समस्या खत्म हो जाएगी। प्रश्न: सफेद मुसली किस प्रकार की मिट्टी में लगाया जा सकता है एवं एक साधारण किसान किस प्रकार इतनी मेंहगी खेती कर सकता हैं? उत्तर: चिकनी और काली मिट्टी को छोड़कर इसे हर प्रकार की मिट्टी जिसमें जल निकासी की व्यवस्था हो, इसकी खेती के लिए उपयुक्त है। इसका बीज काफी मेंहगा है इसलिए छोटे किसान कम मात्रा में इसकी खेती की शुरूआत कर सकते हैं। प्रश्न: औषधीय पौधों की खेती इसके प्राकृतिक अवस्था में की जाती है। इसमें कौन सा खाद उपयुक्त होगा? उत्तर: इसमें रासायनिक खाद का व्यवहार उचित नहीं है। अतः इसकी खेती गोबर खाद, केचुआ खाद तथा करेंज या नीम की खल्ली की मदद से करनी चाहिए। ज्यादातर औषधीय पौधे खरीफ के मौसम में लगाए जाते हैं जैसे कि सफेद मुसली, घृतकुमारी अश्वंगधा इत्यादि। खेत की अच्छी तरह से जोताई कर कम्पोस्ट 20 टन/हे. की दर से जमीन में मिला दें। इसके अलावा 10 क्विं./हे. की दर से नीम की खल्ली भी मिला दें। खेत में पानी निकालने की व्यवस्था रखें। प्रश्न : काली हल्दी के बारे में जानकारी चाहिए? उत्तर : काली हल्दी को नरकचूर भी कहते हैं। इसकी पहचान पत्ते की काली मीडरीब को देखकर होती है। इसका मूल्य साधारण हल्दी से अधिक होता है। खेती पीली हल्दी की तरह ही की जाती है। प्रश्न : स्टीविया की खेती के बारे में जानकारी चाहिए? उत्तर: स्टीविया एक प्रमुख औषधीय पौधा है। यह चीनी रोग से ग्रसित लोगों के लिए फायदेमेंद है। इसकी खेती अधिक गर्मी और अधिक ठंड को छोड़कर सालों भर की जा सकती है। इसे खेतों में 15 40 सें.मी. की दूरी पर लगाया जाता है। एक बार लगाने के बाद पाँच साल तक इससे फसल लिया जा सकता है। इसके खेती के लिए कटिंग से पौधा तैयार किया जाता है। गोबर की खाद या केचुआ खाद से इसकी खेती की जाती है। प्रश्न : औषधीय पौधों के बारे में जानकारी चाहिए? उत्तर : औषधीय पौधे उन पौधों को कहते हैं जिसमें औषधीय गुण हो। यह औषधीय गुण पौधे के जड़, धड़, या पत्तों में पाए जाते हैं। बीमारी के अनुसार अलग-अलग औषधीय पौधों की आवश्यकता होती है। इनकी खेती भी अलग-अलग तरीका और समय से की जाती है। प्रश्न : सफेद मुसली की खेती के बारे में जानकारी दें? उत्तर: सफेद मुसली के लिए प्रति एकड़ 4 क्विंटल कंद या फिंगर की आवश्यकता होती है। इन कंदो को (1:10) के अनुपात में गौमुत्र से उपचारित कर खेत में लगाया जाता है। गामुत्र में एक से डेढ़ घंटा तक रखने के बाद इसे छाया में सुखाय जाता है। तब खते में मेड़ बनाकर 15 सें.मी. 3सें.मी. की देरी पर लगाया जाता है। प्रश्न: सोना हल्दी की खेती के बारे में जानकारी दें? उत्तर: सोना हल्दी या काली हल्दी की मार्केटिंग की व्यवस्था सरकारी स्तर पर नहीं है। दवा बनाने वाल कम्पनियों से सम्पर्क कर मार्केटिंग की जा सकती है। मार्केटिंग की व्यवस्था सुनिश्चित कने के बाद ही बड़े पैमाने पर इसकी खेती करें। सोना हल्दी या काली हल्दी की खेती भी पीली हल्दी की तरह ही की जाती है। प्रश्न: सफेद मुसली की मार्केटिंग के बारे में जानकारी दें? उत्तर: सफेद मुसली की खेती करने वाले को चाहिए कि आसपास के खरीदारों या दूर के खरीददारों से सम्पर्क बनाए। इंटरनेट के जरिय भी खरीददारों से संपर्क किया जा सकता है। किसान समुह बनाकर सफेद मुसली की खेती कर सकते हैं। इसका मुखय खपत आयुर्वेदिक कंपनी में हैं। इन कंपनियों से सम्पर्क कर वायबैक गांरटी के साथ खेती करना उत्तम होगा। बिना मार्केटिंग के सफेद मुसली की खेती करना उचित नहीं है। प्रश्न: जेट्रोफा की खेती के बारे में जानकारी दें? उत्तर: जेट्रोफा की खेती के लिए रेतीली, पथरीली, बलुर्अ व कम गहराई वाला भूमि उपयोगी होती है, जहाँ जल का जमाव न होता हो। शुष्क व अर्द्धशुष्क जलवायु इसके लिए उपयुक्त होता है। इसके लिए खेत की 3-4 जुताई वर्षा प्रारम्भ होने के बाद जुलाई के माह में की जाती है तथा भूमि को पाटे की सहायता से सममतल कर दिया जाता है। पौधे के रोपण हेतु सम्पूर्ण खेत में 2 मी.- 2 मी. की दूरी पर गड्ढे बनाये जाते हैं जिनका आकार 45-45-45 सें.मी.3 होता है। प्रत्येक गड्ढे में एक टोकरी कम्पोस्ट की खाद और 200 ग्राम नीम की खल्ली का पाउडर मिलाकर भर देना चाहिए। नर्सरी में बीजों की बुआई मई-जून के महीने में की जाती है। जब पौधा 6-8 इंच ऊँचा हो जाए तो उसे जुलाई माह में लगा देना चाहिए। प्रश्न : घृतकुमारी (अलोइवेरा) के पौधे के बारे में बताये? उत्तर: घृतकुमारी (अलोइवेरा) के पौधे बगैर तने वाले, पत्तियाँ रसभरी होती हैं। इन पौधों की जड़ों के पास से छोटे-छोटे पौधे प्रकन्द निकल आते हैं और फिर इन कन्दों का रोपण खेत में वर्षाकाल अर्थात् जुलाई-अगस्त माह में कर दिया जाता है। दो पौधों के बीच कम से कम 50 सें.मी. दूरी अवश्य रखी जाती है| इस प्रकार एक हेक्टर में लगभग 32000 पौधे लगेंगे। बोने के पहले खेत में गोबर की खाद या कम्पोस्ट डालने से इसमें पौधे अधिक उपज देते हैं। प्रश्न: लेमन ग्रास बेचना चाहता हूँ। क्या विश्वविद्यालय खरीदेगा? उत्तर: लेमन ग्रास एक सुगंधित पौधा है, इसके पत्तों द्वारा इसका तेल निकालकर विभिन्न उपयोग में लाया जाता है। विश्वविद्यालय इसके पत्ते से तेल निकालने में मदद कर सकता है। प्रश्न: औषधीय एवं जड़ी-बूटी की खेती कैसे करें? उत्तर: औषधीय एवं जड़ी-बूटी की खेती से पूर्व निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए : किसी भरोसेमेंद संस्था जो इस कार्य में संलग्न हो से पूर्ण प्रशिक्षण प्राप्त करना। किसी सफल किसान के साथ सीखना व देखना। कम जमीन का प्रयोग या मेड़ों के किनारे की खेती। अगले साल संवर्धन हेतु स्वयं का बींज स्वयं का बीज होने से कम उत्पादन से ही बाजार के नब्ज का पता करने में आसानी। इस तरह से छोटे स्तर पर मिले सीख को अगले सालों की खेती में प्रयोग। प्रश्न: औषधि युक्त खेती कौन सा हैं और उसका बीज कहाँ उपलब्ध हैं? उत्तर: औषधीय पौधों की खेती करने से पहले अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी एवं खेत का सही आंकलन एवं परीक्षण कर लें तथा यह सुनिश्चित कर लें कि जो फसल आप लगाना चाहते हैं वे उस जलवायु में उगने में सक्षम हैं तभी उसकी खेती प्रारम्भ करें। औषधीय पौधों के बीज एवं प्लान्टिंग मैटेरियल के प्रमाणीकरण के लिए अभी कोई संस्था नहीं बन पायी है न ही इनकी अभी तक बहुत ज्यादा प्रजातियाँ विकसित की गयी है, इसलिए अभी इस क्षेत्र में कार्य होना शेष है। अतः जिसे औषधीय पौधों की खेती करनी हो उसकी बीज या प्लान्टिंग मैटेरियल उसली किसान से खरीदना चाहिए जो स्वयं इसकी खेती कर रहा हो तथा उसकी फसल अच्छी हो। जहाँ तक सम्भव हो बीज, विक्रेता या दलाल से न खरीदें। बीज की प्रमाणिकता उसकी खड़ी फसलों को देखकर ही निश्चित करें। प्रश्न: औषधीय पौधों में मुसली की खेती के सम्बन्ध में आर्थिक तौर-तरीका बताने की कृपा करेंगें? उत्तर: प्रति हेक्टेयर (सफेद मुसली) उत्पादन में लागत खेत की तैयारी (3 जुताई), 1250रू. प्रति जुताई: 3750रू. हरी खाद उगाकर खेत में मिलाना :7500 रू. गोबर की सड़ी खाद 25 ट्राली, 600/ट्राली:15000 रू. वेड मेड़ बनाने की लागत 60/-60 दिन :3600रू. दवा और टॉनिक: 15000 रू. निकाई - गुड़ाई (2 बार:7500 रू. बीज की लागत 10 क्विंटल, 300/-किलो :3,00000 रू. हारवेस्टिंग, साफ करना :12500 रू. छीलने, सुखाने आदि पर(100/किलो सुखी मुसली पर 10 क्विंटल) :10,0000 रू. विविध खर्च :5000 रू. 10 क्विंटल सुखी मुसली 500/- किलो:500000 रू. 10 क्विंटल गोली मुसली 300/-किलो : 300000रू. स्रोत: बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी,राँची|