केला की फसल के लिए चरणबद्ध समेकित कीट प्रबन्धन प्रक्रिया कीट/व्याधि अवस्था अनुशंसित कीट प्रबन्धन प्रक्रिया केला धड़ 5वां माह विभिल के अनुश्रवण हेतु 30 से. मी० लम्बाई वाले कटे हुए स्युडोस्टेम स्थापित करें। विभिल 6वां माह मोनोक्रोटोफॉस (2 मि०ली०/लीटर) से स्युडोस्टेम को सराबोर कर दें। 7वां माह अगर कीड़ा खाने से बर्बादी नजर आये तो मोनोक्रोटोफॉस(150 मि०ली० 350 मि० ली० पानी) का 2 मि०ली०/प्रति पौध के दर से दो जगह 30 कोण पर स्टेम इंजेक्टर स एफ्ला जमीन से २ की ऊंचाई पर दूसरा 4 की ऊंचाई पर सुई दें। कटाई के पश्चात स्युडोस्टेम को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर फसल को बचे भाग को नष्ट कर दें। विभिल को नो नष्ट करने एवं फसल के बचे भाग को सुखाने के लिए सकर को जड़ से निकाल दें। एवं छोटे टुकड़ों में काटकर जमीन की अंदर गाड़ दें। केला कार्म विभिल बुआई के पूर्व स्वस्थ एवं असंक्रमित सकर का चयन करें। बुआई के समय सकर को काट-छांट कर साफ कर लें, फिर 30 मिनट तक गर्म पानी (50-50 सेंटीग्रेड) से उपचारित करें। विभिल के अण्डों एवं ग्रब्स को नष्ट करने हेतु सकर को 05% मोनोक्रोटोफॉस घोल में 30 मिनट तक डुबो कर रखें एवं 72 घंटों तक छाया में सुखा लें। तीसरा महीना कस्मोल्युर ट्रैप-4 संख्या/हेक्टेयर या स्टमप ट्रैप पर लम्बाई के कटे हुए स्यूडोस्टेम और डिस्क स्थापित करें। तीसरा महीना, पांचवां, सातवाँ महीना प्रति पौध 20 ग्राम की दर से कार्बोफ्यूरॉन से मिट्टी उपचार करें। केला, पत्ती खाने वाला कैटरपीलर तीसरा महीना- पांचवां महीना अण्डों को हाथ से चुनकर बर्बाद कर दें। सूत्रकृमि बुआई के पूर्व स्वस्थ एवं संक्रमण रहित सकर का चयन करें। बुआई के समय सकर को साफ कर गर्म पानी से उपचारित करें। तीसरा महीना 40 ग्रा०/पौध की दर से कार्बोफ्यूरान का प्रयोग करें। 6वां-7वां महीना 500 ग्राम/पौध नीम खल्ली का प्रयोग करें। सामान्य बुआई के पूर्व वील्ट एवं वायरस रहित सकर का ध्यान करें व्याधियां बुआई के समय सकर को कार्बेन्डाजीम(0.2%) में 30-45 मिनट तक डुबो कर रखें। बुआई के पश्चात बायोकंट्रोल एजेंट ट्राईकोडर्मा स्पेसीज 15 ग्राम/प्रति गड्ढा की दर से उपयोग करें। वील्ट एवं वायरल बीमारियाँ बुआई के पूर्व व्याधि रहित बलशाली सकर का चयन कर बुआई करें। बुआई के पश्चात जब व्याधि के लक्षण दिखाई दे, पौध को जड़ से निकालकर जला दें। खरपतवार बुआई के पूर्व गहरी जुताई एवं खरपतवार की निकौनी कर साफ फसलोत्पादन करें। बुआई के पश्चात दलहन जैसे काउपीआ का फसलोत्पादन करें। बुआई के 2 माह पश्चात 1200 लीटर पानी में 3 कि०ग्राम/हेक्टेयर डियोरॉन का छिड़काव करें। दलहनी हरी खाद का प्रयोग करें। बुआई के 3रा-5वां माह पश्चात 1200 लीटर पानी में ग्लाईफोस्ट ग्रामोजोन 1.5 लीटर/प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें। बुआई के 6 माह पश्चात 1200 लीटर पानी में ग्लाईफोस्ट ग्रामोजोन 1.5 लीटर/प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें। यांत्रिक निकाई एवं कोड़ाई करें। पत्तों के कारण ज्यादा छाया हो जाने से खरपतवार पर स्वयं नियंत्रण हो जाता है। स्त्रोत एवं सामग्रीदाता: कृषि विभाग, झारखण्ड सरकार