<div id="MiddleColumn_internal"> <h3 style="text-align: justify;">परिचय</h3> <p style="text-align: justify;">यह भारत सरकार, कृषि मंत्रालय, कृषि एवं सहकारिता विभाग के द्वारा चलाई जा रही एक योजना है। इसका कार्यान्वयन सभी राज्य एवं केंद्र शासित सरकारों के कृषि विभागों के माध्यम से किया जाएगा। सॉयल हेल्थ कार्ड का उद्देश्य प्रत्येक किसान को उसके खेत की सॉयल के पोषक तत्वों की स्थिति की जानकारी देना है और उन्हें की सही मात्रा के प्रयोग और आवश्यक सॉयल सुधारों के संबंध में भी सलाह देना है ताकि लंबी अवधि के लिए सॉयल हेल्थ को कायम रखा जा सके।</p> <h3 style="text-align: justify;">सॉयल हेल्थ कार्ड क्या है?</h3> <p style="text-align: justify;">एस एच सी एक प्रिंटेड रिपोर्ट है जिसे किसान को उसके प्रत्येक जोतों के लिए दिया जायेगा। इसमें 12 पैरामीटर जैसे एनपीके (मुख्य - पोषक तत्व), सल्फर (गौण – पोषक तत्व), जिंग, फेरस, कॉपर, मैग्निश्यम, बोरॉन (सूक्ष्म – पोषक तत्व), और इसी ओसी (भौतिक पैरामीटर) के संबंध में उनकी सॉयल की स्थिति निहित होगी। इसके आधार पर एसएचसी में खेती के लिए अपेक्षित सॉयल सुधार और उर्वरक सिफारिशों को भी दर्शाया जायेगा।</p> <h3 style="text-align: justify;">एसएचसी का प्रयोग किस प्रकार कर सकता है?</h3> <p style="text-align: justify;">कार्ड में किसान के जोत की सॉयल पोषक तत्व स्थिति के आधार पर सलाह निहित होगी। इसमें विभिन्न आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा की संबंध में सिफारिशों को दर्शाया जाएगा। इसमें किसानों को उर्वरकों और उसकी मात्रा के संबंध में सलाह दी जाएगी जिसका उन्हें प्रयोग करना चाहिए और मृदा सुधारकों की भी स्थिति के बारे में सलाह दी जाएगी जिसे उन्हें प्रयोग करना चाहिए जिससे की उपज का अनुकूल लाभ प्राप्त किया जा सके।</p> <h3 style="text-align: justify;">क्या किसान प्रत्येक वर्ष और प्रत्येक फसल के लिए एक कार्ड प्राप्त करेंगे?</h3> <p style="text-align: justify;">यह 3 वर्ष के अंतराल के बाद उपलब्ध कराया जाएगा, जो उस अवधि के लिए किसान की जोत के सॉयल हेल्थ की स्थिति को दर्शाएगा। अगले 3 वर्ष में दिया गया एसएचसी उस अनुवर्ती अवधि के लिए सॉयल हेल्थ में परिवर्तनों को रिकार्ड करने में समर्थ होगा।</p> <h3 style="text-align: justify;">नमूने लेने के मानक क्या है?</h3> <p style="text-align: justify;">सॉयल नमूने जीपीएस उपकरण और राजस्व मानचित्रों की मदद से सिंचित क्षेत्र में 2.5 हैक्टर और वर्षा सिंचित क्षेत्र में 10 हैक्टर के ग्रिड से ले जाएंगा।</p> <h3 style="text-align: justify;">सॉयल नमूने कौन लेगा?</h3> <p style="text-align: justify;">राज्य सरकार उनके कृषि विभाग के स्टाफ या आउटसोर्स एजेंसी के स्टाफ के माध्यम से नमूने एकत्रित करेंगी। राज्य सरकार क्षेत्रीय कृषि महाविद्यालयों अथवा साइंस कॉलेजों के विद्यार्थियों को भी शामिल कर सकती है।</p> <h3 style="text-align: justify;">सॉयल नमूने लेने का उचित समय क्या है?</h3> <p style="text-align: justify;">क्रमश: रबी और खरिफ फसलों की कटाई के बाद सॉयल नमूने सामान्यत: वर्ष में 2 बार लिए जाते हैं, या जब खेत में कोई फसल न हो।</p> <h3 style="text-align: justify;">किसान के खेत से सॉयल नमूने कैसे एकत्रित किये जाएंगे?</h3> <p style="text-align: justify;">सॉयल नमूने V आकार में सॉयल की कटाई के उपरांत 15 – 20 सें. मीटर की गहराई से एक प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा एकत्रित किये जाएंगे। यह खेत के 4 कोनों और मध्य से एकत्रित किये जाएंगे और पूरी तरह से मिलाये जाएंगे और इसमें से एक भाग नमूने के रूप में लिया जायेगा। छाया वाले क्षेत्र को छोड़ दिया जाएगा। चयनित नमूने को बैग में बंद किया जाएगा और कोड नंबर दिया जाएगा। इसके उपरांत इसे विश्लेषण के लिए सॉयल जाँच प्रयोगशाला को भेज दिया जाएगा।</p> <h3 style="text-align: justify;">सॉयल जाँच प्रयोगशाला क्या है?</h3> <p style="text-align: justify;">यह प्रश्न सं. 2 के उत्तर में दर्शाए गये अनुसार 12 पैरामीटरों पर सॉयल नमूने जाँच के लिए एक सुविधा है। यह सुविधा स्थायी, मोबाइल प्रयोगशाला या दूरस्थ क्षेत्रों में प्रयोग किए जाने हेतु पोर्टेबल भी हो सकती है।</p> <h3 style="text-align: justify;">सॉयल नमूनों की जाँच कौन और कहाँ करेगा?</h3> <p style="text-align: justify;">सॉयल नमूने निम्नलिखित तारीके से सहमत किए गये सभी 12 पैरामीटरों पर अनुमोदित मानकों के अनुसार जाँच किये जाएंगे –</p> <p style="text-align: justify;">I. कृषि विभाग के स्वामित्व में एसटीएल पर और उनके स्वयं के स्टाफ के द्वारा</p> <p style="text-align: justify;">II. कृषि विभाग के स्वामित्व में एसटीएल पर परंतु बाह्य सोर्स एजेंसी के स्टाफ द्वारा</p> <p style="text-align: justify;">III. बाह्य सोर्स एजेंसी स्वामित्व एसटीएल पर और उनके स्टाफ द्वारा</p> <p style="text-align: justify;">IV. केवीके और एसएयू सहित आईसीएआर संस्थानों पर</p> <p style="text-align: justify;">V. एक प्रोफ़ेसर/ वैज्ञानिक के पर्यवेक्षण के तहत विज्ञान कॉलजों/विश्वविद्यालयों की प्रयोगशालाओं पर विद्यार्थियों द्वारा।</p> <h3 style="text-align: justify;">सॉयल हेल्थ परिक्षण की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित की जाएगी?</h3> <p style="text-align: justify;">राज्य सरकारों द्वारा प्राथमिक प्रयोगशालाओं के परिणामों के विश्लेषण एवं प्रमाणीकरण हेतु एक वर्ष में जांचे गये कुल नमूनों का 1 प्रतिशत रैफरल प्रयोगशाला में भेजा जायेगा। राज्य सरकारों को आवश्यक रैफरल प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए सहायता प्रदान की जाएगी।</p> <h3 style="text-align: justify;">प्रत्येक नमूनों हेतु कितना भुगतान किया जायेगा?</h3> <p style="text-align: justify;">राज्य सरकारों को प्रत्येक सॉयल नमूने के लिए कुल 190 रू. प्रदान किया जाता है। इसमें सॉयल सेम्पलिंग, टेस्टिंग, सॉयल हेल्थ कार्ड सृजन एवं किसानों कोवितरण की लागत शामिल है।</p> <h3 style="text-align: justify;">स्कीम का कुल परिव्यय क्या है? क्या स्कीम की शुरूआत की गई है?</h3> <p style="text-align: justify;">3 वर्षों की अवधि के लिए स्कीम का कुल परिव्यय 568.54 करोड़ रू. है। स्कीम को चालू वर्ष अर्थात 2015 – 2016 के दौरान सभी राज्यों में शुरू किया गया है।</p> <h3 style="text-align: justify;">सॉयल हेल्थ कार्ड तैयार करने के लिए तीन वर्षों में कितने मृदा नमूनों का परिक्षण किया जाएगा?</h3> <p style="text-align: justify;">मंत्रालय द्वारा अपनाएं गये निर्धारित प्रतिमानों के अनुसार लगभग 14 करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड तैयार करने के इए प्रत्येक तीन वर्षों में 253 लाख सॉयल नमूनों का परीक्षण किया जायेगा।</p> <h3 style="text-align: justify;">देशभर में एक समान सॉयल हेल्थ कार्डों की तैयारी के लिए क्या कोई सॉफ्टवेयर मौजूद है?</h3> <p style="text-align: justify;">जी हाँ, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) ने एकसमान हेल्थ कार्ड के सृजन एवं उर्वरक सिफारिशों के लिए एक वेब पोर्टल (<a href="http://www.soilhiealth.dac.gov.in/">www.soilhiealth.dac.gov.in</a>) विकसित किया है जिसके चार मॉड्यूल हैं –</p> <p style="text-align: justify;">क. सॉयल नमूनों का पंजीकरण</p> <p style="text-align: justify;">ख. सॉयल परिक्षण प्रयोगशालाओं में नमूनों का परिक्षण ।</p> <p style="text-align: justify;">ग. सॉयल टेस्ट क्रॉप रिस्पॉस (एसटीसीआर) समीकरण पर आधारित उर्वरक सिफारिशें।</p> <p style="text-align: justify;">घ. एमआईएस रिपोर्ट</p> <h3 style="text-align: justify;">कृषि मंत्रालय का कौन सा प्रभाग स्कीम के कार्यान्वयन के संबंध में राज्य सरकारों को दिशा निर्देश प्रदान करेगा?</h3> <p style="text-align: justify;">समेकित पोषक प्रबंधक (आईएनएम) प्रभाग, कृषि एवं सहकारिता विभाग नियमित रूप से राज्यों का दौरा करेगा और उन्हें तकनीकी मामलों में दिशा निर्देश प्रदान करेगा।</p> <h3 style="text-align: justify;">संबंधित केंद्र और राज्य सरकार का सम्पर्क संबंधी ब्यौरा?</h3> <p style="text-align: justify;">केंद्र सरकार – अपर आयुक्त (आईएनएम) भारत सरकार, कृषि मंत्रालय कृषि एवं सहकारिता विभाग, कृषि भवन, नई दिल्ली</p> <p style="text-align: justify;">फैक्स – 011-23384280</p> <p style="text-align: justify;">राज्य सरकार – राज्य कृषि निदेशक/जिला कृषि अधिकारी</p> <p style="text-align: justify;">स्त्रोत: <a class="external_link ext-link-icon external-link" title=" कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार (नए विंडोज में खुलने वाली अन्य वेबसाइट लिंक)" href="https://static.vikaspedia.in/media/images_hi/agriculture/crop-production/92e94392693e-93894d93593e93894d92594d92f/”http:/agricoop.nic.in/hi/" target="_blank" rel="noopener"> कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार</a></p> </div>