परिचय पश्चिमी घाट क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। इनके रखरखाव के लिए उच्च पूंजी लागत और तकनीकी कौशल की आवश्यकता होती है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और कौशल के कुशल उपयोग के प्रभावी तरीके से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की जरूरत है। हालांकि यह क्षेत्र जैव विविधता से परिपूर्ण है, इसलिए कृषक समुदाय पौधों को एक वनस्पति अवरोध के विकल्प के रूप में आर्थिक महत्व के लिए भी कर सकते हैं। अनन्नास बड़े पैमाने पर पश्चिमी घाट क्षेत्र में उगाया जाता है। यह बेहतर रिटर्न अन्य फसलों की तुलना में प्रदान करता है और इस प्रकार एक वनस्पति अवरोध के रूप में भी प्रभावी माना जाता है। प्रारंभिक वर्षों के दौरान इसकी संरक्षण दक्षता बढ़ाने के लिए घास की एक या दो पंक्तियों को अनन्नास के साथ लगाए जाने की जरूरत होती है। इस मिश्रित वनस्पति अवरोध के रूप में संसाधन संरक्षण के लिए क्षेत्र की वार्षिक और बारहमासी दोनों फसलों के लिए यह सबसे उपयुक्त है। कार्यप्रणाली घास को जब अनन्नास पंक्तियों की निकली सतह पर लगाया जाता है तब कटी हुई मिट्टी को रोकने में प्रभावी तथा मिट्टी में नमी की उपलब्धता को बनाए रखने में मदद करती है। इससे अनन्नास की बेहतर बढ़वार में मदद मिलती है। अनन्नास का रोपण अनन्नास का प्रवर्धन मुख्यतया सकर से होता है, लेकिन स्लिप को ज्यादा पसंद किया जाता है। सकर से विकसित हुए पौधों में फल 18 महीने में आ जाता है, जबकि स्लिप से प्रवर्द्धित पौधों में फल 2 वर्ष में आता है। बढत के लिए 500 ग्राम के वजन के स्वस्थ सकर का चयन करना चाहिए। दोहरी पंक्ति के 110 मीटर सीधी लंबाई वाले अवरोध में लगभग 667 सकर की आवश्यकता होती है। सकर को सुखाने के लिए 7 दिनों तक एक परत छाया में खुली जगह में रखना आवश्यक है। घास का रोपण जड़ स्लिप या कलमों के माध्यम से बढ़ी हुई घास त्वरित स्थापना के लिए तैयार रहती है। ग्वाटेमाला या हाइब्रिड नेपियर घास अनन्नास की दो पंक्तियों के साथ लगानी चाहिए। ग्वाटेमाला घास स्लिप के द्वारा बढ़ती है, जबकि हाइब्रिड नेपियर घास कलम के माध्यम से बढ़ती है। घास की लगभग 500 जड़ स्लिप या कलमों की एकल पंक्ति 10 मीटर अवरोध की सीधी लंबाई में रोपण के लिए आवश्यक है। अवरोधों का लेआउट ढाल मैदान की लंबाई से अवरोधों की संख्या और सतह के बीच की वांछित दूरी का निर्धारण निम्न प्रकार से किया जाता है: अवरोधों की संख्या = (ढाल क्षेत्र की लंबाई (मीटर)/ (दो अवरोधों के बीच की सतह दूरी (मीटर) क्षेत्र में रोपण के लिए आवश्यक अनन्नास का सकर और घास की संख्या की गणना इस प्रकार है: रोपण क्षेत्र = (खेत का क्षेत्रफल (वर्ग मीटर) x पंक्तियों की संख्या)/(अवरोधों का बीच की सतह दूरी (मीटर) x पंक्ति में पौधों के बीच की दूरी (मीटर) अथवा रोपण क्षेत्र = (वनस्पति अवरोध की कुल लंबाई)/ (एक पंक्ति में पौधों के बीच की दूरी (मीटर) x प्रत्येक अवरोध में पंक्ति यहाँ वनस्पति अवरोध की कुल लंबाई क्षेत्र की चौड़ाई के आधार पर प्रत्येक अवरोध की लंबाई का योग। अवरोधों को रोपने से पहले क्षेत्र में समोच्च लाइनों का निशान बना लेना चाहिए। एक साधारण उपकरण A-फ्रेम के रूप में समोच्च लाइनों के संरक्षण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। रोपण के बाद एक छोटे से कुंड या 15-20 सेंमी. गहराई की खाई अवरोध के ऊपर की तरफ खोदी जाती है ताकि अनन्नास के आकार के लिए बेहतर तलछट और नमी संरक्षण हो सके। अनन्नास पंक्ति से 30 सेंमी. नीचे की तरफ पौधे से पौधे के बीच की दूरी 20 सेंमी. के साथ ग्वाटेमाला या हाइब्रिड नेपियर घास लगानी चाहिए। प्रबंधन स्थान को शुरुआत से अच्छी तरह भरते रहना चाहिए और रखरखाव जारी रखना चाहिए। जब तक वनस्पति अवरोध पूरी तरह से स्थापित न हो जाए। घास को 20 सेंमी. की लंबाई तक काटते रहना चाहिए ताकि अधिक संख्या स्लिप निकलकर पूरी तरह से अवरोध क्षेत्र को कवर कर लें। अनन्नास से बेहतर फल उत्पादन के लिए उर्वरक की मात्रा 8:4:8 ग्राम एन:पी: के प्रति पौधा प्रति वर्ष देना आवश्यक होता है। अनन्नास में कोई गंभीर कीट या रोग का प्रकोप नहीं होता है। लीफ स्पॉट और मिलीबग के लिए रोग वाले स्थान पर एक प्रतिशत बोर्डो मिश्रण या 0.2 प्रतिशत जिनेब/मैंकोजेब का स्प्रे करना चाहिए। अनन्नास के 100 दिनों वाले पौधे में मिलीबग के नियंत्रण के लिए फोरेट कणिकाओं को 2.0 किग्रा./हैक्टर की दर से देना चाहिए। यह प्रौद्योगिकी प्रकृति के लिए रक्षात्मक और उत्पादक दोनों है तथा अपनाने के लिए बेहद आसान है। इसके अलावा यह किफायती और पर्यावरण के अनुकूल भी है। पश्चिमी घाट क्षेत्र, जहां खेती योग्य क्षेत्र अत्यधिक ढलान के साथ झुका हुआ है और वार्षिक तथा बारहमासी फसलों की खेती की जा रही है, यह तकनीक टिकाऊ उत्पादन और प्राक्रतिक संसाधनों के प्रबंधन दोनों के लिए सबसे उपयुक्त है। इस तकनीकी को संसाधनविहीन किसानों द्वारा भी अपनाया जा सकता है। स्त्रोत: कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार