जहां चाह वहां राह 28 वर्षीय युवा श्री नोरतमल कहार अजमेर शहर के नजदीकी गांव नदी द्वितीय के निवासी हैं। इनके पिता अपनी 55 बीघा भूमि पर परम्परागत फसलें उगाकर अपने परिवार का जीवनयापन करते थे। श्री नोरतमल, दसवीं के बाद इलेक्ट्रिकल विधा में आईटीआई करने के बाद नौकरी न मिलने पर पिता को खेती में सहायता करने लगे। खेती से अपेक्षित आय प्राप्त न होने की वजह से खेती से मन विमुख होने लगा। युवा मन कुछ नया करने की चाह खोजने लगा। किसी ने सच ही कहा है जहां चाह होती है, वहां राह अवश्य बनने लगती है। राह को सरल व सर्वोच्च बनाने के लिए ज्ञान आवश्यक होता है। इसी क्रम में एक प्रशिक्षण में श्री नोरतमल कहार ने कृषि विज्ञान केंद्र, अजमेर के वैज्ञानिकों से अपने खेत पर उपलब्ध संसाधनों के बारे में जानकारी देते हुए अधिकतम आय प्राप्त करने की योजना तैयार कर, बताने का आग्रह किया। श्री नोरतमल में मौजूद उन्नत खेती के प्रति जुनून एवं इच्छा को समझते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने उनके खेत का भ्रमण कर सिंचाई की उपलब्धता एवं अजमेर शहर की नजदीकी को मद्देनजर रखते हुए आपसी चर्चा कर परम्परागत फसलों के स्थान पर फूलों, सब्जियों, मसाला फसलों को अपनाने पर जोर देते हुए एक वर्षीय कैलेंडर बनाकर दिया। फूलों की मांग अजमेर में विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा साहब की दरगाह एवं ब्रह्मा जी के मंदिर के प्रति धार्मिक आस्था की वजह से फूलों की मांग अधिक रहती है। उर्स एवं पुष्कर मेले में तो फूलों की मांग चरम पर रहती है। ऐसे में श्री नोरतमल कहार की एक वर्षीय योजना में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने बाजार में फूलों की मांग की आपूर्ति अनुसार फूलों की खेती को वरीयता दी। वैज्ञानिकों ने अजमेर शहर के नजदीक होने की वजह से सब्जियों एवं फूलों की खेती को अंतरासस्य के रूप में अपनाने पर जोर दिया। श्री नोरतमल ने वैज्ञानिकों की सलाहनुसार गेंदा एवं गुलदाउदी की उन्नत किस्मों के बीज प्राप्त कर बुआई कर फूलों की खेती को अपनी आय का मुख्य जरिया बनाया। वे अब उद्यान विभाग के सहयोग से एक हैक्टर खेत में आंवले के बगीचे में कुल 200 आंवले के पौधों के बीच अंतरासस्य के रूप में मौसम अनुसार सब्जियों की खेती कर रहे हैं। श्री नोरतमल कहार के अनुसार फूल एवं ककड़ी, लौकी जैसी सब्जियां इन आंवलों के पौधों के नीचे गर्मी में भी अच्छी उपज प्रदान कर रही हैं। कृषि आय 3-4 गुना श्री नोरतमल बीज की व्यवस्था कर गेंदे की बुआई अप्रैल-मई में नर्सरी में कर जून-जुलाई में खेत में रोपाई कर देते हैं। वे बाजार मांग के अनुभव से गेंदे की खेती लगभग 5 हैक्टर क्षेत्रफल में करते हैं। अप्रैल में गोभी की अगेती पौध की रोपाई करने के 20 दिनों बाद गेंदे को अंतरासस्य के रूप में लगाते हैं, जिससे गेंदे की फसल का गोभी की फसल की बढ़वार पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है। गेंदे एवं गुलदाउदी से नवरात्रि व दीपावली के समय की अवधि में अच्छी उपज प्राप्त कर बाजार में फूलों की अच्छी दर से आकर्षक आय प्राप्त कर रहे हैं। इसी प्रकार बाजार की मांग के अनुसार सितंबर-अक्टूबर एवं जनवरी में गेंदा की फसल लगाकर वर्षभर फूलों की उपज प्राप्त कर रहे हैं। श्री नोरतमल एवं क्षेत्र के अन्य फूल उत्पादक कृषक अच्छे बाजार भाव प्राप्त करने के लिए अजमेर के साथ-साथ इन फूलों को दिल्ली की मंडियों में विक्रय के लिए भेजते हैं। ये किसान गेंदे एवं गुलदाउदी की फसल के साथ फूलगोभी, पत्तागोभी एवं प्याज की फसल प्राप्त कर अपनी कृषि आय को 3-4 गुना तक कर पा रहे हैं। श्री नोरतमल के अनुसार प्रतिवर्ष लगभग 6 बीघा में पत्तियों वाले प्याज के लिए अगस्त में प्याज की बुआई कर देते हैं। इस वर्ष तो प्याज के रिकाॅर्ड दाम मिलने से नवंबर में ही हरी प्याज को बाजार में जबरदस्त दाम प्राप्त किये। सारणीः आय-व्यय विवरण विवरण क्षेत्रफल(हैक्टर) कुल आय(रुपये) कुल व्यय (रुपये) शुद्ध आय (रुपये) प्याज उत्पादन 1-0 3,0,0000 1,20,000 1,80,000 आंवला उत्पादन एवं सब्जियां/फूल 1-0 2,50,000 2,40,000 60,000 90,000 1,90,000 1,50,000 गुलदाउदी एवं धनिया पत्ती/फूल गोभी/पत्ता गोभी/प्याज 1.5 14,40,000 3,60,000 7,65,000 1,35,00 6,75,00 2,25,000 गेंदा एवं धनिया पत्ती/फूल गाेभी/ पत्ता गोभी/प्याज 5.0 30,00,