लोबिया की खेती चारे व दाने के लिए की जाती है। प्रदेश के पश्चिमी जनपदों में यह बहुत लोकप्रिय है। भूमि की तैयारी दोमट भूमि उपयुक्त होती है। खेत समतल तथा उचित जल निकास वाला होना चाहिए एक जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करके दो जुताइंया देशी हल अथवा कल्टीवेटर से करनी चाहिए। बुवाई का समय एवं बीज दर लोबिया की बुवाई वर्षा प्रारम्भ होने पर जुलाई में करें। मुख्य प्रजातियां बीज दर एवं उपज प्रजाति बीज दर कि.ग्रा./हे. तैयार होने की अवधि (दिन) उपज (कु./हे.) टा-5269 20 50-60 50-60 (फलिया) टा-2 40 60-65 300-325 (हरा चारा) टा-2 30 130-135 14-16 (दाना) यू.पी.सी.-4200 30 70-80 350 (हरा चारा) रसियन जाइंट - - - आई.जी.एफ.-450 - - - यू.पी.सी.-5287 - - - बीजोपचार बुवाई के पूर्व बीज को 2 ग्राम थीरम से प्रति किग्रा. की दर से शोधित करने के बाद लोबिया को विशिष्ट राइजोबियम कल्चर से अरहर की फसल के लिए दी गयी विधि के अनुसार उपचारित करके बोना चाहिए। बुवाई दाना व हरी फलियों के लिए बुवाई पंक्तियों में करनी चाहिए। दाने वाली प्रजाति लोबिया टा-2 की बुवाई पंक्तियों में 45-50 सेमी. तथा 5269 लोबिया की प्रजाति की बुवाई फलियों के लिए 50 सेमी. की दूरी पर करनी चाहिए। चारे तथा हरी खाद के लिए लोबिया की बुवाई छिटककर करनी चाहिए। खाद नत्रजन 10-15 किग्रा. तथा फास्फोरस 20 किग्रा. प्रति हेक्टर की दर से बुवाई के पहले प्रयोग करना चाहिए। सिंचाई सूखे की अवस्था में एक या दो सिंचाई अवश्य करें। निराई-गुड़ाई बुवाई के 20-25 दिन बाद एक निकाई यदि खरपतवार हो, तो करनी चाहिए। फसल सुरक्षा माहू कीट यह कीट झुण्डों में पाैधाें पर चिपका रहता है था पत्तियों, फूलों एवं फलियों से रस चूसकर फसल को हानि पहुँचता है। उपचार इसकी रोकथाम हेतु निम्न रसायन का छिड़काव करना चाहिए। डाइमिथोएट 30 ई.सी. 1 लीटर प्रति हेक्टर फली बेधक इनकी सूंड़ियां फली के अन्दर दाने को खाकर नुकसान पहुंचाती हैं। उपचार इनकी रोकथाम हेतु निम्न रसायन का प्रयोग फसल में फूल आने पर करना चाहिए मोनोक्रोटोफास 36 ई.सी. 600 मि. लीटर प्रति हेक्टर। सूत्रकृमि सूत्रकृमि की रोकथाम के लिए ज्वार की मिश्रित खेती करें। स्त्राेत : पारदर्शी किसाना सेवा याेजना, कृषि विभाग, उत्तरप्रदेश।