भिण्डी विभिन्न सब्जियों के बीच ओकरा जिसे आम तौर पर भिंडी के नाम से जाना जाता है, और देश भर में बड़े पैमाने पर पैदा की जाती है। इसके उत्पादन में एक प्रमुख पहचान की कमी, कीटों, रोगों और सूत्रक्रमि में वृद्धि के रूप में की गयी है, जिसके परिणामस्वरूप कभी-कभी उपज में बहुत घाटा होता है। इसकी नरम और कोमल प्रकृति तथा उच्च नमी और लागत के क्षेत्रों के अधीन इसकी खेती के कारण, भिंडी पर कीट हमले का खतरा अधिक होता है और एक अनुमान के अनुसार कम से कम 35-40% का नुकसान होता है। किस्में : पूसा ए-4, प्रभनी क्रांति, पंजाब-7, पंजाब-8, आजाद क्रांति हिसाह उन्नत, वर्षा उपहार, अर्का अनामिका संकर किस्में : डी.वी.आर. 1, डी.वी.आर. 2, डी.वी.आर. 3 जलवायु : भिंडी गर्मी तथा खरीफ मौसम की मुख्य सब्जी है। यह 40 डिग्री से. से ज्यादा तापमान सहन नहीं कर सकती है। बीज जमाव के लिए उपयुक्त तापमान 17-22 डिग्री से. है तथा पौधे की बढ़वार के लिए 35 डिग्री से. तक का तापमान उपयुक्त है। मिट॒टी : बुमट व बलुई बुमट मिट॒टी जिसका पी.एच. मान 6.0-6.8 हो और वह पोषक तत्व युक्त हो तथा सिंचाई की सुविधा व जल निकास का अच्छा प्रबंध होनो चाहिए। बीज की मात्रा : गर्मी के मौसम के लिए 20-22 कि.ग्रा. व खरीफ (वर्षा) के मौसम में 10-12 कि.ग्रा./हेक्टेयर की आवश्यकता है। बुवाई : बीज बुवाई हल की सहायता से या सीड ड्रिल के द्वारा गर्मियों में 45 ग 20 सें.मी. तथा वर्षा के मौसम में 60 ग 20 सें.मी. की दूरी पर करें। बीज की गहराई लगभग 4.5 सें.मी. रखें। बुवाई का समय : गर्मी के मौसम में 20 फरवरी से 15 मार्च तथा खरीफ (गर्मी के मौसम) में 25 जून से 10 जुलाई तक का समय बुवाई के लिए उपयुक्त है। उव्ररण व खाद : बुवाई से पहले गोबर व अच्छी तरह गली-सड़ी कम्पोस्ट लगभग 20 से 25 टन प्रति हेक्टेयर मिट॒टी में अच्छी तरह मिला दें। नवजन 40 कि.ग्रा. की आधी मात्रा, 50 कि.ग्रा. फास्फोरस व 60 कि.ग्रा. पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से अंतिम जुताई के समय प्रयोग करें तथा बची हुई आधी नत्रजन की मात्रा फसल में फूल आने की अवस्था में डालें। तुड़ाई व उपज : भिण्डी की फलियों को उनकी उपरिपक्व अवस्था में फूल खिलने से 3-4 दिन बाद 3 दिन के अंतराल पर लगाकर तोड़ते रहें। भिण्डी की फली की उपज गर्मी की फसल में 90-100 क्विंटल तथा वर्षा के मौसम में 150 से 175 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से मिलती है। तुड़ाई उपरांत प्रोद्योगिकी भिण्डी की फलियों की तुड़ाई उनकी नर्म अवस्था, उनके कड़े होने या बीज बनने से पहले की स्थिति में करके छाया में रखें। फलियों की तुड़ाई नियमित अंतराल पर करते रहें। स्थानीय बाजार के लिए सुबह तुड़ाई करके बाजार में भेज सकते हैं लेकिन दूरस्थ बाजार के लिए शाम के समय तुड़ाई करके भिण्डी की फलियों को जूट के बोरों या टोकरी में भरकर सुबह बाजार में भेजते हैं जिससे फलियों को कोई हानि न हो। फलियों को 40 डिग्री से. तापमान पर 4-5 दिन तक भण्डारित किया जा सकता है। बीजोत्पादन : बीज उत्पादन के लिए खेत का चुनाव करते समय ध्यान रखें कि उस खेत में पिछले साल भिण्डी की फसल न उगाई गइ्र हो। आधार बीज के लिए पृथक्करण दूरी 400 मी. तथा प्रमाणित बीज के लिए 200 मी. रखें जिससे बीज की शुद्धता बनी रहे। अवांछनीय पौधों को फूल आने की अवस्था में उनके पौधों के गुणों के आधार पर निकाल दें तथा दूसरी बार जब फलियाँ तैयार हां गई हों तब फलियों के गुणों के आधार पर निकाल दें । पीत शिरा रोगी पौधो को समय-समय पर निकालते रहें। फलियाँ जब पक कर बादामी रंग की हो जाए तो उनसे बीज छिटकने से पहले ही काटकर बीज निकालकर अलग कर लें। बीज सूखे व शुष्क स्थान पर बीज नमी 8-10 प्रतिशत की अवस्था में भण्डारित करें। बीज का जमाव प्रतिशत 70 प्रतिशत होना चाहिए। बीज उपज : अच्छी फसल से 12-15 क्विंटल बीज प्रति हेक्टेयर तक होती है। प्रमुख रोग एवं नियंत्रण रोग का कारण लक्षण नियंत्रण मेजेक तथा पूर्ण कुंचन (मोजेक एंड लीफ कर्ल) पत्तियों पर छोटे-छोंटे पीले रंग के चितकबरे धब्बे बनते हैं। पत्तियों का रंग पीला पड़ जाता है। हरा भाग छिछले गड्ढों का रुप ले लेता है, पत्तियों के किनारे नीचे झुक जाते हैं और कटे हुए से हो जाते हैं। बाद में पत्ती के पीले भाग सूख कर नष्ट हो जाते हैं। कन्फीडोर-200 एस.एल. (2.0 मि.लि. प्रति 1.0 लिटर पानी की दर से) रोपाई के 20 दिन बाद तथा आवश्यकतानुसार 15 दिन के अंतराल पर प्रयोग करें। कीट प्रकोप एवं प्रबंधन 1. सफेद मक्खी पत्तियों के रस चूसने से पत्तियाँ सिकुड़ जाती है। कांफिडोर या डेसिस का 0.3 मि.लि. दवा प्रति लिटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। 2. फली तथा तना छेदक कीड़ा फलियों में छेद कर अंदर बीज को हानि पहुँचाता है तथा फली खाने योग्य नहीं होती है। पौधे की अंतिम शिरा में छेद कर पौधे का ऊपरी हिस्सा मुर्झा जाता है। कांफिडोर का डेसिस का 0.3 मि.लि. दवा प्रति लिटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। 3. जैसिड किटट पत्तियों का रस चूस लेता है जिससे पत्तियाँा किनारों पर ऊपर की तरफ मुड़ जाती हैं तथा पत्तियों का रंग पीला हो जाता है जो बाद में सूख जाती हैं। कांफिडोर का डेसिस का 0.3 मि.लि. दवा प्रति लिटर पानी में छिड़काव करें। क्या करें और क्या न करें क्या करें क्या नहीं करें समय पर बुवाई खेत की स्वच्छता हमेशा ताज़ा तैयार किये गये नीम के बीज के गूदे का सत्व उपयोग करे केवल जब आवश्यक हो तभी कीटनाशकों का उपयोग करें खपत से पहले भिंडी के फल को धोएं कीटनाशक की अनुशंसित खुराक से ज्यादा नहीं डालें एक ही कीटनाशक लगातार नहीं दोहराएं कीटनाशकों के मिश्रण का प्रयोग न करें सब्जियों पर मोनोक्रोटोफ़ॉस जैसे अत्यधिक खतरनाक कीटनाशक का प्रयोग नहीं करें कटाई से ठीक पहले कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करें कीटनाशकों के प्रयोग के बाद 3-4 दिन तक सब्ज़ी का उपयोग नहीं करें स्त्रोत: कृषि विभाग, झारखण्ड सरकार; ज़ेवियर समाज सेवा संस्थान