<h3 style="text-align: justify;">जुक्खिनी येलो मोजेक वायरस </h3> <p style="text-align: justify;">कुकुमिइसमेलो फैमिलीः कुकुरबिटेसी </p> <p style="text-align: justify;">रोगकारक विषाणुः जुक्खिनी येलो मोजेक वायरस, समूहः पॉटी वायरस </p> <h4 style="text-align: justify;">लक्षण </h4> <p style="text-align: justify;">इस रोग के प्रारंभिक लक्षणों में शिराओं का पीला होना, पत्तों पर हल्के पीले रंग के धब्बे और नई पत्तियों पर मोजेक आदि हैं। इसके बाद पीले मोजेक, पफपफोले, गंभीर विकृति, गहरे हरे रंग की शिराएं, पत्तियों केआकार में कमी के कारण पफीते जैसी दिखना आदि लक्षण दिखाई देते हैं। गंभीर रूप से संक्रमित पौधों की बढ़त रुक जाती है। फल भी विकृत होते हैं, जो उन्हें बाजार में बेचने के अयोग्य बना देते हैं। </p> <h4 style="text-align: justify;">प्रसारण </h4> <p style="text-align: justify;">यह वायरस एफिड्‌स द्वारा प्रसारित होता है। </p> <h3 style="text-align: justify;">कुकुम्बर मोजेक वायरस </h3> <p style="text-align: justify;">रोगकारक विषाणुः कुकुम्बर मोजेक वायरस, समूहः कुकुमो वायरस </p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccccccccccccPic2.jpg" width="237" height="180" /></p> <h4 style="text-align: justify;">लक्षण </h4> <p style="text-align: justify;">इस वायरस से संक्रमित पौधों की पत्तियां धब्बेदार, विकृत और झुर्रीदार हो जाती हैं और उनके किनारे नीचे की ओर मुड़ने लगते हैं। तने की दो गांठों के बीच का भाग छोटा हो जाता है तथा पत्तियां आकार में कम हो जाती हैं। प्रारंभिक अवस्था में वायरस के संक्रमण के कारण तने से निकलने वाली बेलों तथा फूलों की संख्या में कमी हो जाती है। फल धारण अधिकतर नहीं होता है या वे विकृत होते हैं। परिपक्व पत्तियों पर हल्के पीले एवं भूरे रंग के क्षेत्र दिखाई देते हैं, जो बाद में पूरे पत्ते पर फैल जाते हैं। उत्पादित फलों पर हल्के हरे या सपेफद क्षेत्रा दिखाई देते हैं, जिनके बीच में गहरे हरे, ऊबड़-खाबड़ हिस्से होते हैं। इनके कारण फल विकृत दिखाई देते हैं। </p> <h4 style="text-align: justify;">प्रसारण </h4> <p style="text-align: justify;">यह वायरस एफिड्‌स की कई प्रजातियों द्वारा फैलता है। </p> <h3 style="text-align: justify;">लीफ कर्ल वायरस </h3> <p style="text-align: justify;">रोगकारक विषाणुःटोमेटो लीफ कर्ल वायरस, समूहः बेगोमोवायरस /जेमिनीवायरस </p> <h4 style="text-align: justify;">लक्षण </h4> <p style="text-align: justify;">इस वायरस से पौधों की बढ़त गंभीर रूप से रुक जाती है तथा पत्तियां मुड़ने लगती हैं। इसके साथ ही उन पर मोजेक तथा गहरे हरे रंग के धब्बे दिखते हैं। पौधे के नये बढ़ते हुए भाग पर पत्तियों का मुड़ना दिखाई देता है। पौधे के विकास के साथ परिपक्व पत्तियों में यह नहीं होता है। इसके साथ ही देर से संक्रमित पौधों में भी यह दिखाई नहीं देता है। </p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccccccccccPic3.jpg" width="260" height="190" /></p> <h4 style="text-align: justify;">प्रसारण</h4> <p style="text-align: justify;">यह वायरस सफेद मक्खी (बेमिसिया तबेसी) द्वारा फैलता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">पपाया रिंग धब्बे वायरस </h3> <p style="text-align: justify;">रोगकारक विषाणुः पपाया रिंग धब्बे वायरस, समूहः पोटीवायरस </p> <h4 style="text-align: justify;">लक्षण </h4> <p style="text-align: justify;">इस रोग का प्रारंभिक लक्षण पत्तियों की शिराओं का पीला होना है। जैसे ही यह लक्षण बढ़ता है, पत्तों पर गहरे हरे रंग के मोजेक तथा विकृति और फफोले दिखाई देते हैं। पौधों के शुरूआत में ही संक्रमित होने पर फल कम संख्या में बनते हैं, जबकि देर से संक्रमण की स्थिति में धब्बेदार फल लगते हैं। </p> <h4 style="text-align: justify;">प्रसारण</h4> <p style="text-align: justify;">यह वायरस एफिड्‌स की प्रजातियों द्वारा फैलता है।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत: सावर्णि त्रिपाठी, अभिषेक वर्मा और राज वर्मा भाकृअनपु-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012,संदीप कुमार-ओडिशा कृषि और प्राैद्याेगिकी विश्वविद्यालय, भुबनेश्वर (ओडिशा),वीरेन्द्र कुमार बरनवाल भाकृअनपु-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र, पुणे (महाराष्ट्र), खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर)।</p>