खीरा कुकुमिससटाईवस, फैमिली : कुकुर बिटेसी कुकुम्बर मोजेक वायरस रोगकारक विषाणुः कुकुम्बर मोजेक वायरस, समूहः कुकुमो वायरस लक्षण इस रोग के कारण रोगग्रस्त पौधों की पत्तियां नीचे की ओर मुड़ने के साथ धब्बेदार (गहरे हरे रंग के) और विकृत हो जाती हैं। परिपक्व पत्तियों के किनारे हल्के पीले रंग के हो जाते हैं, जो बाद में भूरे रंग के (परिगलन) हो जाते हैं। फल अक्सर विकृत, मॉटल्ड (पीले-हरे), उबड़-खाबड़, आकार में कम और विरंजित दिखाई दे सकते हैं। पौधों की बढ़त रुक सकती है और वे छोटे रह जाते हैं। प्रसारण यह वायरस कई एफिड प्रजातियों द्वारा फैलता है। पपाया रिंग धब्बे वायरस रोगकारक विषाणुः पपाया रिंग धब्बे वायरस-डब्ल्यू, समूहः पोटीवायरस लक्षण इस रोग के लक्षण शुरू में पत्तियों की शिराओं में पीलेपन के रूप में दिखाई देते हैं। उसके बाद उन पर हल्के गहरे हरे रंग के मोजेक और कभी-कभी फफोले से दिखाई देते हैं। पत्तियों के किनारे विकृत हो जाते हैं। शुरूआती मौसम में संक्रमण के कारण कम पफल लगते हैं, जबकि देर के मौसम में संक्रमण का परिणाम विकृत, धब्बेदार फल हो सकते हैं। प्रसारण यह वायरस एफिड्स की कई प्रजातियों द्वारा प्रसारित होता है। जुक्खिनी येलो मोजेक वायरस रोगकारक विषाणुः जुक्खिनी येलो मोजेक वायरस, समूहः पॉटी वायरस लक्षण संक्रमित पत्तियों पर हल्के हरे रंग के धब्बे, मोजेक और फोले दिखाई देते हैं व पत्तियां फीते के समान हो जाती हैं। शुरूआती मौसम में संक्रमण होने पर पौधों की बढ़त रुक जाती है और वे छोटे रह जाते हैं तथा फल विकृत होते हैं व उनका रंग असमान दिखता है। प्रसारण यह वायरस एफिड्स की कई प्रजातियों द्वारा प्रसारित होता है। लीफ कर्ल वायरस रोगकारक विषाणुः लीफ कर्ल वायरस, समूहः बेगोमो वायरस/जेमिनी वायरस लक्षण इस वायरस से संक्रमित पौधों की पत्तियों में पीलापन, शिराओं के बीच के क्षेत्रा में गहरे हरे धब्बे, शिराएं पीली, मोटी तथा विकृत दिखती हैं तथा पत्तियों के किनारे मुड़ जाते हैं। यदि पौधों में वायरस का संक्रमण शुरुआत में ही हो जाता है तो फल धारण कम होता है तथा फलों का आकार कम हो जाता है। देर से संक्रमण में फलों पर हल्के पीले धब्बे और विकृति दिखाई देती है। प्रसारण यह वायरस सफेद मक्खी (बेमिसिया तबेसी) द्वारा फैलता है। लौकी लेजीनेरिया सिसेरिया, फैमिली : कुकुर बिटेसी कुकुम्बर मोजेक वायरस रोगकारक विषाणुः कुकुम्बर मोजेक वायरस, समूहः कुकुमो वायरस लक्षण इस वायरस के मुख्य लक्षण पत्तों पर गहरे हरे रंग के धब्बे (मोटैलिंग) और विकृति हैं। पत्तियां झुर्रीदार हो जाती हैं और उनके किनारे नीचे की ओर मुड़ने लगते हैं। संक्रमित पौधों की बढ़त कम हो जाती है और तने की गांठों के बीच का हिस्सा छोटा हो जाता है। पुराने पत्तों में, पीलापन लिए क्षेत्र धीरे-धीरे किनारों की तरफ भूरे रंग के (नेक्रोटिक) हो जाते हैं, जो बाद में पूरे पत्ते पर फैल जाते हैं। रोगग्रस्त फलों पर गहरे-हरे रंग के ऊबड़खाबड़ धब्बे होते हैं, जिनके कारण वे विकृत दिखते हैं और बाजार में बिकने योग्य नहीं रहते। प्रसारण यह वायरस एफिड्स की कई प्रजातियों द्वारा पफैलता है। जुक्खिनी येलो मोजेक वायरस जुक्खिनी मोजेक वायरस, समूहः पॉटी वायरस लक्षण इस वायरस के मुखय लक्षणों में शिराओं में पीलापन, हल्के पीले चकत्ते, मोजेक, पफपफोले, परिपक्व पत्तियों में शिराओं का गहरे हरे रंग का होना तथा पत्तियों के आकार में कमी का होना है। गंभीर संक्रमण होने पर पत्तियों में विकृति होकर वे पफीते के समान पतली हो जाती हैं। पफल विकृत हो जाते हैं व बाजार में बिकने योग्य नहीं रहते। प्रसारण यह वायरस एफिड्स की कई प्रजातियों द्वारा प्रसारित होता है। पपाया रिंग धब्बे वायरस रोगकारक विषाणुः पपाया रिंग धब्बे वायरस-डब्ल्यू समूहः पॉटी वायरस लक्षण इस वायरस से पत्तियों पर शिराओं का पीलापन, गहरे हरे रंग की शिराओं के साथ मोजेक, पत्तियों में सिकुड़न, फफोले, विकृति व उनका संकीर्ण होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। फल अक्सर विकृत होता है और हल्के तथा गहरे रंग का पैटर्न दिखाते हैं। प्रसारण यह वायरस एफिड्स की कई प्रजातियों द्वारा फैलता है। भिन्डी अबेल्मोस्क्स एस्कुलेंट्स, फैमिलीः मालवेसी येलो वेन मोजेक वायरस रोगकारक विषाणु: भिन्डी यलो वेन मोजेक वायरस, समूहः बेगोमो वायरस/जेमिनीवायरस लक्षण इस रोग के कारण प्रमुख शिराएं पीली हो जाती हैं तथा दो शिराओं के बीच का भाग हरा रहता है। मुख्य तथा अन्य शिराएं मोटी हो जाती हैं और इन शिराओं का पीले रंग का जाल विशिष्ट रूप से दिखाई देता है। रोग की संक्रामकता तीव्र होने पर रोगग्रस्त पौधे हल्के पीले और बौने रह जाते हैं।पफल हल्के पीली रंग के दिखते हैं और उनकी गुणवत्ता कम हो जाती है। प्रसारण यह वायरस सफेद मक्खी (बेमिसिया तबेसी) द्वारा फैलता है। ईनेश्न लीफ कर्ल रोगकारक विषाणुः ओक्रा ईनेश्न लीफ कर्ल वायरस, समूहः बेगोमो वायरस/जेमिनी वायरस लक्षण रोग की शुरूआत में पत्तियों की निचली सतह के कुछ हिस्से खुरदरे तथा उभरे हुए दिखते हैं। बाद में पत्तियां ऊपर की तरफ मुड़ने लगती हैं। तने, शाखाएं तथा पत्ती के डंठलों में घुमाव देखा जाता है। पत्तियां मोटी एवं चमड़े के समान हो जाती हैं। गंभीर रूप से संक्रमित पौधों में फल कम लगते हैं तथा बीजधारण नहीं के बराबर होता है। प्रसारण यह वायरस सफेद मक्खी द्वारा (बेमिसिया तबेसी) फैलता है। स्त्राेत: सावर्णि त्रिपाठी, अभिषेक वर्मा और राज वर्मा भाकृअनपु-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012,संदीप कुमार-ओडिशा कृषि और प्राैद्याेगिकी विश्वविद्यालय, भुबनेश्वर (ओडिशा),वीरेन्द्र कुमार बरनवाल भाकृअनपु-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र, पुणे (महाराष्ट्र), खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर)।