एक बार पौधे के वायरस से संक्रमित होने पर उसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन निम्न कुछ उपायों द्वारा इन रोगों को कम किया जा सकता हैः वायरसमुक्त स्वस्थ बीज/पौधों का इस्तेमाल करें एवं कीटरोधक नायलाॅन नेट (60-100 mesh) में पौधों की रोप तैयार कर उनका उपयोग करें। टमाटर के बीज को 0.3 प्रतिशत ट्राइसोडियम फाॅस्फेट घोल में डुबोकर 48 घंटे तक उपचारित करें। उपचार के बाद बीज को अच्छी तरह से धो लें, हवा में सुखाएं और फफूंदनाशक से उपचारित करें। नर्सरी में बीज बुआई से पहले 3 वर्ग मीटर की क्यारी (15 सें.मी. ऊंची) में 25 ग्राम थिमेट डालें। दानेदार कीटनाशक जैसे फुरादान 10 कि.ग्रा. एआई/हैक्टर की दर से बीज की बुआई के समय उर्वरकों की बुनियादी खुराक के साथ खेत में डालें। रोपाई से 10 मिनट पहले पौध को 0.15 प्रतिशत डिमेथोएट/0.05 प्रतिशत इमिडाक्लोप्रिड के घोल से उपचारित किया जाना चाहिए। बेलवर्गीय फसल जैसे खरबूजा, तरबूज के पौधों को पहली पत्ती अवस्था के बाद क्रॉप कवर/फ्लोटिंग रो कवर से ढक दें।पौधों में 10 प्रतिशत फूल आने की अवस्था के बाद उन्हें निकालें। विषाणुवाहक कीट (वेक्टर) को आकर्षित करने और उन्हें फंसाने के लिए खेत के बाहर पीले और नीले रंग के चिपचिपे बोर्ड स्थापित करें। फूल अवस्था तक 10-12 दिनों के अंतराल पर 0.2 प्रतिशत नीम तेल, 0.1 प्रतिशत डिमेथोएट, 0.05 प्रतिशत इमिडाक्लोप्रिड कीटनाशक का अदल-बदल कर छिड़काव करने से रोग के फैलाव को रोकने में मदद मिलती है। अगर किसान तंबाकू उत्पादों के संपर्क में हैं तो टमाटर/मिर्ची के खेत में किसी भी कार्य से पहले हाथ अवश्य धोएं। सिल्वर कलर के प्लास्टिक मल्च का उपयोग विषाणु रोग के कीट वेक्टर को भगाने के लिए करना चाहिए। रोपाई से चार से छह सप्ताह पहले मुख्य खेत के चारों ओर मक्का/ज्वार/बाजरा जैसी अवरोध फसलों की छह पंक्तियां उगाएं। उपलब्ध होने पर वायरस प्रतिरोधी उपयुक्त किस्मों को उगाएं। पौधों के बीच पत्ती के संपर्क को रोकने के लिए उपयुक्त दूरी पर रोपण करना चाहिए। पत्ती और जड़ के संपर्क से कुछ वायरस फैलते हैं। यदि खेत ड्रिप सिंचित नहीं है तो खेत की अच्छी जल निकासी सुनिश्चित करें। कुछ विषाणु मिट्टी तथा पानी द्वारा भी फैलते हैं। खेत के भीतर और आसपास के क्षेत्र में खरपतवार नियंत्रण और स्वच्छता आवश्यक है। यह वायरस और उनके वेक्टर के प्रसार को कम करने में मदद करता है। खेत और उसके आसपास वैकल्पिक पफसल/खरपतवार को नियंत्रित करें। संक्रमित फलों को भी खेत से हटा दें। संक्रमित पौधे को शुरूआती अवस्था में उखाड़ फेंकने से रोग के संक्रमण को रोकने में मदद मिलती है। रोगग्रस्त पौधों को हटाते समय स्वस्थ पौधों को न छुएं। फसल की अंतिम कटाई/तुड़ाई के बाद जितनी जल्दी हो सके पुरानी फसल को नष्ट कर दें। यह विषाणु तथा रोगवाहक कीट को एवं इसके फैलाव को कम करने में सहायक होता है। अन्य फसलों में सफेद मक्खी के प्रवास को कम करने के लिए पुरानी फसलों को नष्ट करने से पहले वयस्क सफेद मक्खी को कीटनाशक के छिड़काव द्वारा नियंत्रित कर लेना चाहिए। खेत में काम आने वाले उपकरणों को जीवाणुरहित करना चाहिए। रोगग्रस्त पौधों को हटाने के बाद और विशेष रूप से स्वस्थ पौधों के खेत में काम करने से पहले अच्छी तरह से हाथ धोएं। पौधों को छंटाई, कटाई और छिड़काव करते समय और एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में ले जाते हुए उपकरण और हाथ को धोकर साफ करें। स्त्राेत: सावर्णि त्रिपाठी, अभिषेक वर्मा और राज वर्मा भाकृअनपु-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली-110012,संदीप कुमार-ओडिशा कृषि और प्राैद्याेगिकी विश्वविद्यालय, भुबनेश्वर (ओडिशा),वीरेन्द्र कुमार बरनवाल भाकृअनपु-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र, पुणे (महाराष्ट्र), खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर)।