अवशिष्ट प्रबंधन आवश्यक वैज्ञानिक तरीके से एक कि.ग्रा. झींगा उत्पादन में लगभग 500 ग्राम जैविक अपशिष्ट निकलता है। अगर इन अपशिष्टों का उचित तरीके से प्रबंधन नहीं किया जाता है तो झींगे में बहुत सारे संक्रामक रोग हो सकते हैं। इन अपशिष्टों का प्रबंधन अति आवश्यक है। झींगा मल से निकले अपशिष्ट का कृषि के लिए कार्बनिक खाद के रूप में इस्तेमाल करके किसानों को फायदा पहुंचाया जा सकता है। जलकृषि उत्पादन बढ़ाना जरुरी खाद्य और कृषि संगठन (एपफएओ) के अनुसार जलकृषि वैश्विक मानव मछली खपत का 47 प्रतिशत (51 मिलियन टन) हिस्सा प्रदान करती है। जनसंख्या वृद्धि और प्रति व्यक्ति मछली खपत निरंतर बढ़ने के साथ-साथ जलकृषि उत्पादन को बढ़ाना भी जरुरी है।। इसकी बड़ी मात्रा हासिल करने के लिए भंडारण (स्टॉकिंग) क्षमता और तालाब की दशा सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानदंड हैं। तालाब में सघन कृषि के लिए अत्यधिक इनपुट (मुख्य रूप से तैयार खाद्य एवं उर्वरक) की जरुरत होती है। बचा हुआ खाद्य पदार्थ एवं झींगे द्वारा उत्सर्जित पदार्थों का जमाव होने से इन कार्बनिक पदार्थों का विघटन होने लगता है। इससे तालाब के तलछट में हानिकारक गैसों का निर्माण होता है। झींगा तालाब के केंद्र में एकत्रित स्लज(कीचड़) कई संक्रामक रोगों का मुख्य कारण है। कार्बनिक अपशिष्ट तालाब की तली तक पहुंच जाता है जहां अधिकांश अनोक्सिक क्रियायें होती हैं। और अमोनिया एवं हाइड्रोजन सल्फाइड का निर्माण होता है। इससे झींगों में तनाव की स्थिति उत्पन्न होती है। यह तनाव जल्दी और आसान संक्रमण का मौका देता है। ऐसी समस्याओं के निदान के लिए अब तक बहुत सारी भौतिक, रासायनिक और जैविक तकनीकों का उपयोग किया गया है जैसे-पानी का आदान-प्रदान, वायु का संचार, तलछट को हटाना एवं चूना डालना इत्यादि। आजकल झींगा तालाब से कार्बनिक अपशिष्टों के उचित प्रबंधन के लिए झींगा मल के उपयोग के तरीके तलाशे जा रहे हैं। झींगा अपशिष्ट एकत्रण दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में जैविक अपशिष्टों के जमाव की समस्या के समाधान के लिए इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। बांग्लादेश और भारत में झींगा गड्ढे की स्थापना की ओर ध्यान गया है। इसके लिए तालाब के कुल सतह क्षेत्र का लगभग 5-7 प्रतिशत का उपयोग कर रहे हैं। झींगा शौचालय की स्थापना के लिए तालाब का आकार लगभग 1000-5000 वर्ग मीटर होना चाहिए। तालाब के तल में केंद्र की ओर ढलान होना चाहिए, जिससे अपशिष्ट पदार्थ केंद्र की तरफ 2-3 फीट गहरे गड्ढ़े या पिट में एकत्रित हो जाये। यह अपशिष्ट एक साइफनिंग मोटर से हर सप्ताह बाहर निकल दिया जाता है।। आजकल नई प्रणाली में कार्बनिक अपशिष्ट को निकालने के लिए केंद्रीय नली में एक एचडीपीई और रबर पैराबोला कवर प्रयोग किया जा रहा है। झींगा गड्ढे के लाभ संक्रमण की आशंका कम झींगा तनावमुक्त हानिकारक गैसों का निर्माण कम एफ.सी.आर. नियंत्रित झींगा तालाब प्रदूषण मुक्त झींगा में मृत्युदर कम सामान्य झींगा पालन की तुलना में इस विधि का उपयोग करने से किसानों की आय में वृद्धि स्त्रोत: खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली, लेखक: नरेश राज कीर, उदयराम गुर्जर, सुमन ताकर, राजपाल यादव और खेमराज बुनकर भाकृअनुप-केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षण संस्थान, मुंबई-400061 (महाराष्ट्र)