सामान्य नाम कॉमन कार्प, सामान्य सफर, अमरीकन रोहु, चाईनीज कार्प, स्केल कार्प आदि | सामान्य लक्षण उठा हुआ मुख, उदार में ज्यादा गोलाई, होंठ पतले उभारदार सुकर की तरह | पृष्ट पंख शरीर के पिछले हिस्से तक पहुंचात है | शरीर का रंग उपरी भाग में लाल और नीचे चांदी की तरह | दुसरे प्रजातियों में शरीर का अधिकतर भाग चाँदी रंग का होता है | कॉमन कॉर्प की जैविकी भारत में यह मछली पहली बार श्रीलंका से सन 1939 में लायी गयी थी, फिर दूसरी बार सन 1957 में बैंकाक से | गर्म क्षेत्रों में यह मछली 6-8 महीने में परिपक्व हो जाती है | झारखण्ड में यह मछली वर्ष में दो बार जनवरी/फ़रवरी तथा अगस्त/सितम्बर में प्रजनन करती है | इसके अंडे चिपकने वाले तथा पीले रंग के होते है | एस मछली की अंडजनन क्षमता 1.0 – 1.5 लाख/ कि.ग्रा. होती है | कॉमन कॉर्प एक सर्वभक्षी मछली है और यह तालाब में उपलब्ध जीवाणुओं तथा सड़े गले वनस्पतियों एवं मलबों को भक्षण करती है | प्रजनकों की देखभाल प्रजनन समय से 2 या 3 महीने पूर्व प्रजनकों को प्रजनक तालाब में संचित किया जाता है | 1 से 2 कि.ग्रा. वजन की नर एवं मादा प्रजनकों को अलग-अलग तालाबों में 1500 से 2000 कि.ग्रा./हे. की दर से संग्रहित किया जाता है | भोजन के रूप में चावल का कोढ़ा और सरसों या मूंगफली की खल्ली 1.1 के अनुपात में मिलाकर प्रतिदिन प्रजनकों को इनके शारीरिक भार का 1 से 2 प्रतिशत की दर से दिया जाता है | भोजन को भिगोकर गोला बनाया जाता है जिसे तालाब के किनारों पर पानी में रख दिया जाता है | तालाब में समय-समय पर जाल चला कर प्रजनकों के स्वास्थ्य और यौन परिपक्वता की जांच की जाती है | प्रजनक मछलियों का चयन नर और मादा प्रजनक मछलियों का चयन निम्नलिखित लक्षणों के आधार पर किया जाता है | नर v पेक्टोरल पंख खुरदुरा होता है | v पेट दबाने से सफेद दूध जैसे मिल्ट निकलता है | v जननांग धंसा हुआ प्रतीत होता है | v पेट साधारण रूप से फुला हुआ होता है | मादा v पेक्टोरल पंख मुलायम होता है | v पेट दबाने से परिपक्व अंडे बाहर आ जाते हैं | v जननांग उभरा हुआ एवं लालिमायुक्त होता है | v पेट मुलायम और पर्याप्त रूप से फुला हुआ होता है | नियंत्रित प्रजनक तकनीक कॉमन कार्प के नियंत्रित प्रजनन के लिए कपड़े से बने हुए चौकोर हापा को बाँस की सहायता से तालाब में लगाया जाता है | 2 किलोग्राम मादा मछली के लिये 2 x 1 x 1 मी. आकार का हापा उपयुक्त होता है | इससे ज्यादा वजन होने से कॉमन कार्प का नियंत्रित प्रजनन छोटे तालाब अथवा सीमेंट के बने टैंक में भी किया जा सकता है | प्रजनकों के एक जोड़े से भार के अनुसार 2:1 नर एवं मादा रखा जाता है | कॉमन कार्प के अण्डों के चिपकनेवाले गुण के कारण, प्रजनकों हापा में जलीय पौधों जैसे – हाईड्रिला , नाजा, कारा, जलकुम्भी आदि अंडे इक्कठे करने के लिए उपयोग किये जाते हैं | इसके अलावा अंडों को निकालने के लिये पटुआ व् नारियल की रस्सी एवं प्लास्टिक रस्सी का भी उपयोग किया जाता है | कॉमन कार्प के नियंत्रित प्रजनन प्राकृतिक प्रक्रिया से होती है | प्रजनन हापा में प्रजनकों को रखने के 10 से 12 घंटों बात प्रात: काल में मछलियाँ प्रजनन करती है | मादा मछली अंडे छोड़ती है तथा नर मछली उसे ऊपर मिल्ट-डालता/छोड़ता है | अंडे जलीय पौधों को एक दुसरे हापा में स्थानान्तरित कर दिया जाता है | जहां अंडे प्रस्फुटि होते हैं | हैचिंग प्रक्रिया अंडा से बच्चा निकलने की प्रक्रिया को हैचिंग कहते हैं | हैचिंग के लिए अंडे चिपके हुए जलीय पौधों व् अन्य सामग्री को मारकीन कपड़े में बने हुए 2 मी. x 1मी. x 1मी. के हैचिंग हापों में फैला कर रख दिया जाता है | अण्डों का स्फुटन जाल के 28o से 31o से.ग्रे. तापमान में 48 से 72 घंटों के अंदर होता है और अंडों से हैचलिंग अथवा शिशुमीन निकलती है | अंडों से शिशुमीन (स्पान) निकलने के बाद जलीय पौधों व् अन्य सामग्री को बाहर निकाल दिया जाता है | हैचिंग के समय से 24 घंटों तक शिशुमीन (स्पान) को हैचिंग हापा में रखा जाता है | एस प्रकार प्राप्त स्पान को किसी तैयार नर्सरी तालाब में 16 – 20 लाख/एकड़ की दर से संचित किया जाता है, जहां ये स्पान 15 से 20 दिनों में फ्राई रूप धारण कर लेती है | स्त्रोत: मत्स्य निदेशालय, राँची, झारखण्ड सरकार