परिचय मछली के बिना कांटे वाले मांस के टुकड़े को फिलेट तथा मछली के कांटेयुक्त रिंग नुमा टुकड़े को स्टिक कहते हैं | अत्याधुनिक मार्केट/सुपर मार्केट/ डिपार्टमेंटल स्टोर में मछली के फिलेट था स्टिक अलग-अलग साइज तथा प्रकार के उपलब्ध है | मछली के फिलेट के प्रयोग बच्चों, बूढों, तथा बीमार व्यक्तियों के लिए बहुत ही फायदेमंद है क्योंकि इसमें काँटा नहीं होता है तथा अपनी इच्छा के अनुसार उसकी कटिंग की जा सकती है | आज-कल भाग दौड़ की जिंदगी में भोजन बनाने के समय कम है ऐसी स्थिति में फिलेट रेडी टू कुक का अच्छा उपाय है | ताजा मछली की जांच मछली खरीदने से पहले उसकी जांच कर लेनी चाहिए | इसके लिए मछली के आँख को सर्वप्रथम देखना चाहिए | ताजा मछली की आँखें चमकदार, साफ तथा उभरे हुए होती है जबकि बासी मछली की आँखें धंसे हुए तथा हलके रंग के धुंधली होती है | ताज़ी मछली की बाह्य त्वचा नमीयुक्त तथा चमकीले, गलफड़े गहरे लाल तथा स्लेष्मायुक्त होती हैं तथा शारीर पर उंगली से दबा कर छोड़ने पर मांस अपनी पूर्व अवस्था में आ जाता है | ताजा मछली की गंध भी अलग किस्म की होती है | फिलेट एवं स्टिक नमीयुक्त तथा गहरे रंग की हो तभी खरीदें | यदि फिलेट एवं स्टिक का रंग धुंधला या मध्यम हो तो उस्मेनी बदबू आ रही हो तो उसे ना खरीदें | फ्रोजेन फिश खरीदना हो तो उसके सही आकार तथा रैपर को देखें | उसमें आइस क्रिसटल, खून के धब्बे तथा रंगहीन त्वचा एवं मांस रैपर में नहीं रखे गये हो | इसका ध्यान रहे कि जब बर्फ पिघले तो पैकेट में रखे मांस से दूर रहे अन्यथा नमी के सम्पर्क में आने से वे रंगहीन तथा बदबू देने लगेगी | मछली को फ्रिजर में रखने से पहले मछली मांस के टुकड़े को टिशू पेपर या हेवी ड्यूटी प्लास्टिक थैली में ही लपेटे | पैकेट के ऊपर लेवल लगा दें, जिसमें मछली के प्रजाति, काटन के प्रकार, वजन तथा पैकिंग तिथि जरूर हो | लीन फिश को छ: महीनों तक तथा वसायुक्त मछली को 3 महीने तक फ्रीजर में रखा जा सकता है | उसकी बनावट तथा गुणवत्ता को बरकरार रखने के लिए मछली के टुकड़े को फ्रीजर में से निकल कर रात भर खुले में छोड़ देना चाहिए | उसके बाद पानी से डूबाकर धोने के बाद पकाने के काम में लाना चाहिए | भारत में मछलियाँ सिर, धड, एवं पूंछ के साथ ही अधिकतर बिक्री की जाती है | छोटी मछली को पकाने के पहले उकसे चोंयटे तथा आँतों को निकाल दिया जाता है | बड़ी मछलियों के सर गलफड़े, चोयटे तथा आँतों को निकाल कर पकाया जाता है | मछली की त्वचा जो एक प्रकार से मछली के मांस के रक्षक होते हैं, मछली को अत्यधिक स्वादिष्ट तथा रसदार बनाते है | फिलेटिंग चमड़ी के साथ या बिना चमड़ी के भी हो सकती है | साधारणत: ताजा मछली को मांस की गुणवत्ता के अनुसार दो भागों में बांटा जा सकता है : - (1) लीन एवं वसायुक्त मछली – इसमें 1-5 % तक वसा होती है | (2) वसायुक्त मछली – इसमें 5-35% तक वसा होती है | वसायुक्त मछली का मांस गहरे लाल, काले तथा तीखे स्वाद वाली होती है | फिलेटिंग कैसे करें फिलेटिंग हेतु सामग्री – कटिंग बोर्ड, तेजधार वाली चाकू, पानी ट्रे, बाल्टी इत्यादि | सबसे पहले मछली को धो लें | मछली को कटिंग बोर्ड पर लिटा दे | गिल के पास नरम मुलायम माँस का पता लगाए | मछली के सिर के पीछे से रीढ़ तक चीरा लगा दें | मछली के सिर को एक हाथ से पकडे तथा दूसरी हाथ से चाकू की सहायता से 60 के कोण बनाते हुए चीरा लगाएँ तथा चीरे को सर से पूंछ तक बढ़ाएं | ध्यान रहे कि मछली के आंतों तथा गाल ब्लाडर को क्षति ना पहुंचे | चाकू से क्षैतिज दिशा में मेरुदंड के समानन्तर चीरा लगा दें | धीरे-धीरे नाजुक माँस के भाग को सर से पूंछ की तरफ काटते जायें | रीढ़ की हड्डी को काट दें तथा मांस के भाग को उठाते रहें | फिलेट को निकाल कर अलग रख दें | मछली के दूसरी तरफ का फिलेट इसी प्रकार निकाल लें | प्रथम बार में पूर्ण रूप से माँस अलग नहीं होती है | तो चिंता न करें | कोशिश यह होनी चाहिए कि कुछ तो फिलेट के साथ माँस के टुकड़े मिले | त्वचा अलग करने के लिए त्वचा सहित फिलेट को इस प्रकार रखें कि त्वचा नीचे की तरह हो | यदि त्वचा सहित फिलेट करना हो तो चोंयटे को भोथरी चाकू से खुरच कर अलग कर दें | चाकू से क्षैतिज चीरा लगा कर त्वचा अलग करें और उसके बाद चाकू से धीरे-धीरे समान्तर मछली के माँस को अलग करें तथा चमड़ी को एक हाथ से पकड़े दूसरी हाथ से चाकू के माध्यम से फिलेट निकाल लें | फिलेट निकालने के बाद उसे साफ पानी में धो ले जालीदार बर्तन में 30 मिनट तक रखें ताकि पानी सूख जाए, तत्पश्चात उसे प्लास्टिक पैकिंग कर फ्रीजर में रखें या फिर आइस बाक्स में रखें | स्त्रोत: मत्स्य निदेशालय, झारखण्ड सरकार