अनावश्यक एवं खाऊ मछलियों का उन्मूलन दोनों तरह की मछलियाँ आपस में मुख्य रूप से भोजन, जगह, एवं ऑक्सीजन में स्पर्धा करती है । अनावश्यक मछलियों जैसे - पोठिया, धनहरी, चंदा, चेल्हवा, खेसरा इत्यादि । खाऊ मछलियाँ – चेंगा, गरई, शौरा, बोआरी, टेंगरा, कबइ, बुल्ला, मांगुर, पवन इत्यादि | अनावश्यक एवं खाऊ मछलियों के उन्मूलन के तरीके बार-बार जाल डालकर पानी निकालकर जहर का प्रयोग करें महुआ का खली का प्रयोग करें अमोनिया का प्रयोग करें ब्लीचिंग पाउडर का प्रयोग करें प्लांट डेरीभेटीव का प्रयोग करें मैनेजेवल तालाब के लिए सबसे अच्छा तरीका है जिसमें महआ का खली का प्रयोग उत्तम है जो जहर के साथ साथ बाद में जैविक खाद का काम करता है| (अन्य जानकारी के लिए स्थानीय जि.म. कार्यों से सम्पर्क करें) महआ के खली का प्रयोग 2000 -2500 किलो प्रति हे./मी. गहरा पानी के लिए प्रयोग किया जा सकता है जिससे 4 से 10 घंटे के अंदर सभी मछलियाँ मर जाती है यहाँ तक की मेढ़क, घोंगा इत्यादि भी 3-4 घंटे में मर जाते हैं। फायदे मरी हुई मछलियों का उपयोग खाने के लिए किया जा सकता है। महुआ की खली बाद में कार्बनिक उर्वरक का काम करती है। इसके जहर का प्रभाव 20-25 दिनों तक रहता है । महआ की खली के अभाव में ब्लीचिंग पाउडर का प्रयोग @ 25-30पीपीएम की दर से किया जा सकता है जो 3-4 घंटे में अपना प्रभाव कर देता है। जहर का प्रभाव 7 से 8 दिनों तक रहता है । मरी हुई मछलियाँ खाने योग्य रहती हैं ।