तालाब में जैविक एवं रसायनिक उर्वरक के प्रयोग से प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होनेवाली मछलियों के भोज्य पदार्थ में कई गुना वृद्धि ही जाती है । जैविक खाद - चूना डालने के 3 दिनों के बाद जैविक खाद के रूप में गोबर5000 कि. प्रति हेक्टेयर के दर से प्रयोग में लाया जाता है | रासायनिक खाद – गोबर डालने के 15 दिनों के बाद रसायनिक खाद काप्रयोग निम्लिखित आनुसार करना चाहिए: नाइट्रोजन एवं फॉस्फेट खादों में से किसी एक का प्रयोग होना चाहिए | किलो /हेक्टेयर /माह मिट्टी का उर्वरक अमोनियम सलफेट या यूरिया उच्च मध्यम निम्न अमोनियम सलफेट या यूरिया 70 Kg/Ha 30 Kg/Ha 90 Kg/Ha 40 Kg/Ha 140 Kg/Ha 60 Kg/Ha SSP या TSP 40 Kg/Ha 15 Kg/Ha 50 Kg/Ha 20 Kg/Ha 70 Kg/Ha 30 Kg/Ha पानी का pH एवं उत्पादकता पानी का pH उत्पादकता 5.5 से कम उत्पादन क्षमता नहीं 5.5-6.5 निम्न 6.5-7.5 औसत 7.5-8.5 उत्तम 8.5-10.5 निम्न 10.5 से ज्यादा उत्पादन क्षमता नहीं प्रजाति का नाम भोजन की आदत भोजन का क्षेत्र कतला जूप्लांक्टोनफीडर ऊपरी सतह रोहू हर्बीभोरस बीच का सतह मृगल ओमनी भोरस /डेट्रीटिभोरस नीचे का सतह सिल्वर कार्प फाईटोंप्लांक्टोनफीडर ऊपरी सतह ग्रास कार्प हर्बीभोरस बीच का सतह कॉमन कार्प ओमनी भोरस / डेट्रीटिभोरस नीचे का सतह मछली की प्रजाति एवं उनकी संचयन दर प्रजाति का नाम तीन प्रजाति चार प्रजाति छः प्रजाति कतला कतला 40 30 15 रोहू 30 30 20 मृगल 30 20 15 सिल्वर कार्प - - 15 ग्रास कार्प - - 15 कॉमन कार्प - 20 20 कृषक बंधु यह ध्यान रखेंगे कि कम से कम 10 से. मी. आकार के मत्स्य अंगुलिकाओं का संचयन अपने तालाब / पोखर में उपर्युक्त अनुपात में करें । मत्स्य बीज संचयन के उपरांत तालाब की उर्वरकता बनी रहे एवं मछलियो को आहार मिलता रहे जिसके लिए उर्वरकका प्रयोग करते रहना चाहिए साथ ही मछलियो की वृद्धि एवं देखभाल आवश्यक है | उर्वरक का प्रयोग - उर्वरक का प्रयोग प्रति माह कल 11 माह तक करना चाहिए |जैविक खाद-गोबर-1000 कि. /हे . प्रति माह रसानयिक खाद-पूर्व मे दिये गये तालिका के अनुसार प्रति माह के हिसाब से रसायनिक खाद का प्रयोग करना चाहिए | ध्यान रहे की जब तालाब का पानी का रंग हरा हो जाए तो सभी खाद का प्रयोग बंदकर देना चाहिए तथा शैवाल ब्लूम की रोकथाम करनी चाहिए कृत्रिम आहार-कृत्रिम आहार के रूप में सरसों की खल्ली या मूंगफली की खल्ली एवंचावल का कडा या गेहूँ का चोकर बराबर 1:1 अनुपात में मिलाकर एक निश्चित समय एवं स्थान पर देना चाहिए | आवश्यकतानुसार संचित प्रजाति के लिए पौष्टिक तत्वों की कमी के अनुसार परिपूरक आहार का प्रयोग करना चाहिए | संचित मछलियो के वजन का 2 से 3% की दर से प्रतिदिन एक निश्चित समय एवं स्थान पर आहार निम्न अनुसार देना चाहिए । प्रथम क्वाटर - 1.5 से 3 किलो प्रतिदिन दूसरा क्वाटर - 3 से 6 किलो प्रतिदिन तृतीय क्वाटर - 6 से 9 किलो प्रतिदिन चतुर्थ क्वाटर - 9 से 12 किलो प्रतिदिन मछलियों के वृद्धि की जाँच एवं बीमारी से बचाव प्रतिमाह तालाब मे जाल लगाकर मछलियों की वृद्धि की जाँचकरनी चाहिए । बीमारी से बचाव-मछली में बीमारी कई कारणों से होता हैजिसका उपचार एवं बचाव जरूरी है । कहावत के अनुसार रोग के उपचार से रोग का बचाव ही अच्छा है खासकर मत्स्य पालन मे इसपर ज्यादा ध्यान देना चाहिए । सभी फिजीयोकेमिकल पारामीटर जैसे pH, घुलित ऑक्सीजन क्षारीयता, तापक्रम, टरबीडिटी इत्यादि को यदि मेंटेन किया जाय तो बीमारी होने से बचा जा सकता है । साथ ही जाल एवं अन्य उपकरणों को उपचरित कर प्रयोग करना चाहिए। प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट मत्स्य निदेशालय, पटना, बिहार