<h3 style="text-align: justify;">भारतीय जल प्रणाली की राजा </h3> <p style="text-align: justify;">सुनहरी महाशीर को वैज्ञानिक रूप से टौर प्युटिटौरा के रूप में निर्दिष्ट किया जाता है। यह एक बड़ी साइप्रिनिड है। ये दक्षिण-पूर्वी एशिया के जंगलों की ऊष्ण कटिबंधीय नदियों से लेकर हिमालय की भीमताल जल वाली नदियों, एशिया की तेज बहाव वाले पुरातन स्वच्छ जल स्रोतों में वास करती हैं। अपने सजावटी सौन्दर्य, संघर्ष कौशल व बेहतर स्वाद के लिए इनकी अत्यधिक मांग है। भारतीय उपमहाद्वीप में सुनहरी महाशीर भारतीय जल प्रणाली के राजा के रूप में वर्णित है, जिसका विस्तार प्रायद्वीपीय भारतीय नदियों के निचले क्षेत्रों तक विस्तृत है।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cimage003Z5HQ.jpg" width="202" height="179" /></p> <h3 style="text-align: justify;">मात्स्यिकी विकास के लिए एक सम्भावित मत्स्य प्रजाति</h3> <p style="text-align: justify;">टौर प्युटिटौरा हिमालय क्षेत्रा की बहुमूल्यवान देसी मछली के रूप में स्वीकार की जाती है। मध्य हिमालय क्षेत्र की अधिकांश नदियों, धाराओं सहित असोम, जम्मू व कश्मीर, सिक्किम, अपफगानिस्तान, बांग्लादेश, चीन, बर्मा (म्यांमार), थाइलैंड, कम्बोडिया, लाओस, नेपाल, पाकिस्तान, वियतनाम, इंडोनेशिया एवं मलेशिया से टौर की लगभग 20 विभिन्न प्रजातियों का पता लगा है। महाशीर हिमालयी देशों में कृषि सहित मात्स्यिकी विकास के लिए एक सम्भावित मत्स्य प्रजाति है। महाशीर का अर्थ है ‘ब़डे मुखवाला’। इसका उपयुक्त नाम है लम्बी पतले आकार वाली मछली, जिसे ताजे पानी की सभी शिकारी मछलियों में प्रबलतम लड़ाकू मछली के रूप में माना जाता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">कुशल तैराक</h3> <p style="text-align: justify;">भारतीय नदियों की र्निविवाद राजा महाशीर है। प्रचंड एवं तेज बहाव वाले क्षेत्रा इसके आवास स्थल हैं इसलिए यह मछली एक कुशल तैराक है। यह मछली विश्व में कार्प परिवार की सबसे महत्वपर्ण सदस्य है। यह प्रतिकूल धारा में 20-25 वर्ष की आयु तक जिन्दा रहती है। ताजे पानी की शिकारी मछलियों में इसको सबसे शक्तिशाली मछली के रूप मे जाना जाता है। इसका शरीर लम्बा और थूथन नुकीली होती है। जबडे़ समान आकार के होते हैं। मैैक्सीलैरी की अपेक्षा रोस्ट्रल स्पर्शक छोटे होते हैं।</p> <h3 style="text-align: justify;">आर्थिक महत्व</h3> <p style="text-align: justify;">यह एक अत्यधिक नखरेबाज और मूडी मछली है। इसके शरीर का रंग सुनहरा, पृष्ठीय हिस्सा भूरा तथा पंख लाल पीले रंग के होते हैं। इसके आवास स्थल उच्च ऑक्सीजनयुक्त पानी में स्थित चट्टानों के किनारे होते हैं। हिमालय से निकलने वाली अनेक नदियों में यह महाशीर पायी जाती है। उपलब्धता के कारण इसका बहुत आर्थिक महत्व है। महाशीर की विभिन्न प्रजातियों के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र हैं, जहां गर्मियों में तापमान 35 डिग्री तथा उप हिमालय क्षेत्रों में जल का तापमान 6 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। इसी प्रकार वे मुश्किल से कुछ मीटर की दूरी पर समुद्र स्तर से ऊपर 200 मीटर की उंचाई पर पायी जा सकती हैं। विभिन्न प्रकार के पर्यावरण और भोजन के अनुकूलन में यह मछली असाधारण है। एक समय में इनकी बहुतायत के बावजूद भी प्राकृतिक जल स्रोतों में महाशीर के आकार और संख्या में गिरावट आई है, जिससे इसके विलुप्त होने के गंभीर खतरे पैदा हो गए हैं।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्रोत : खेती पत्रिका, आईसीएआर, देबाजीत सर्मा’ ’निदेशक, भाकृअनुप-शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान निदेशालय, भीमताल, नैनीताल (उत्तराखण्ड)</p>