जनवरी 2 कुन्तल प्रति हैक्टर की दर से चूने का प्रयोग करें। मछलियों को खीचने वाले जाल से पकड़ कर पोटेशियम परमैगनेट के हल्के घोल में डुबो कर पुनः तालाब में छोड़ दें। तालाब में पानी का स्तर 1 से 1.5 मी. तक बनाये रखें । खाद व उर्वरक न डालें । फरवरी खाद व उर्वरक का प्रयोग करें। कृत्रिम आहार की मात्रा बढ़ा दें ( 3-4 प्रतिषत)। तालाब में पानी का स्तर कम से कम 1.5 मी. बनाये रखें। जाल चलाकर मछलियों की बढ़ोत्तरी की जाँच करें। मार्च खीचने वाले जाल को चलाकर मछलियों को पकड़े तथा उन्हे बेचने के लिए बाजार भेजें । उत्प्रेरित प्रजनन द्वारा मत्स्य बीज उत्पादन का लक्श्य हो तो बड़ी स्वस्थ नर व मादा मछलियों को आवश्यकतानुसार चुन कर अलग तालाब में रखें व पालन पोषण करें। अप्रैल मछली पालन के तालाब बनाने के लिये स्थान का चुनाव उपयुक्त करें। पुराने तालाबों का सुधार/मरम्मत करें। नये तालाबों का निर्माण करें। मई तालाबों की मिट्टी का रासायनिक विश्लेशण करें। पानी की जांच करें। अवांछनीय एवं भक्षक मछलियों को निकाल दें (1 मी. पानी की गहराई वाले तालाब में 25 कुन्तल महुआ की खली डालकर बार बार जाल चलाकर तालाबों से जलीय कीटों व खरपतवारों की सफाई सुनिश्चित करें। जून तालाब में पानी आने जाने के रास्तों पर जाली लगाएं। चूना का प्रयोग करें। (250 किग्रा./है) व 1 से 1.5 मी. तक पानी भरें। उर्वरा षक्ति की वृद्धि हेतु 10-20 कुन्तल/है. माह कच्चे गोबर की खाद का प्रयोग करें । जुलाई तालाब में पानी आने जाने के रास्तों पर जाली लगाएं। चूना का प्रयोग करें। (250 किग्रा./है) व 1 से 1.5 मी. तक पानी भरें। उर्वरा शक्ति की वृद्धि हेतु 10-20 कुन्तल/है./माह कच्चे गोबर की खाद का प्रयोग करें। अगस्त तालाब के पानी में प्लवकों का निरीक्षण करें व संतोषप्रद मात्रा को कायम रखें। मछलियों के भार का 2-3 प्रतिशत की दर से परिपूरक आहार दें। सितम्बर तालाब के पानी में प्लवकों का निरीक्षण करें व संतोषप्रद मात्रा को कायम रखें। मछलियों के भार का 2-3 प्रतिशत की दर से परिपूरक आहार दें। अक्टूूबर मछलियों की वृद्धि की नाप जोख करें। कृत्रिम भोजन का प्रयोग करें। मछलियों के स्वास्थ्य की जाँच करते रहें व एवं जलीय कीटों का नियंत्रण करें। नवंबर खाद व उर्वरक का प्रयोग करें। मछलियों को पर्याप्त मात्रा में परिपूरक आहार दें। अवांछनीय जलीय जीव जन्तुओं को निकालते रहें। दिसम्बर जलीय खरपतवारों को निकालते रहे। बीमारी का निरीक्षण एवं उपचार करें। मछलियों को पर्याप्त मात्रा में परिपूरक आहार दें। खाद व उर्वरक का प्रयोग करें। स्त्रोत: कृषि विज्ञान केंद्र,आईसीएआर,भारतीय पशुचिकित्सा शोध संस्थान,बरेली,उ.प्र.।