<h3 style="text-align: justify;">बढ़ती आय </h3> <p style="text-align: justify;">आधुनिक मत्स्य संवर्धन की विधाओं में रेन्बो ट्राउट पालन पर्वतीय क्षेत्रा के किसानों के लिए आमदनी का एक अच्छा साधन होते हुए जीविजोकोपार्जन का एक मुख्य आधार बनता जा रहा है। लगभग 30 वर्ग मीटर के तालाब से 1.27 लाख रुपये की सालाना आमदनी के साथ पर्वतीय क्षेत्रों के मत्स्यपालकों का यह एक मुख्य आकर्षण है। पर्वतीय क्षेत्र के प्रति मत्स्यपालकों की रुचि एवं ट्राउट पालन की बढ़ती उत्सुकता के फलस्वरूप पिछले एक दशक में हमारे देश का ट्राउट उत्पादन 147 टन से बढ़कर 842 टन तक पहुंच गया है।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccdownload.jpg" width="194" height="172" /></p> <h3 style="text-align: justify;">राज्य अनुसार भागीदारी </h3> <p style="text-align: justify;">इसमें मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश एवं सिक्किम राज्य की भागीदारी रही है। वर्तमान में इस मछली की मांग को देखते हुए हिमालय के इन तीन राज्यों के साथ-साथ उत्तराखण्ड एवं अरुणाचल प्रदेश में भी इस मछली के उत्पादन बढ़ने की कई गुना संभावनाएं हैं। आमतौर पर इसका लगभग 500 कि.ग्रा. प्रति रेश-वे उत्पादन किया जाता है, जो कि अच्छी प्रबंध व्यवस्था, 100 अंगुलिकाएं प्रति घन मीटर संचय दर, उत्तम आहार प्रबंधन तथा वैज्ञानिक तौर-तरीकों से 700-1000 कि.ग्रा./रेश-वे तक उत्पादन किया जा सकता है। आधुनिकतम तकनीक का प्रसार करके रेन्बो-ट्राउट पालन की व्यापक पहल की गई है। यह किसानों की आय वृद्धि में अत्यन्त महत्वपूर्ण है।</p> <h3 style="text-align: justify;">रेन्बो ट्राउट पालन के मापदण्ड</h3> <p style="text-align: justify;">रेन्बो ट्राउट पालन के मापदण्ड शीतजल मत्स्य पालन हेतु कम तापमान का शु( एवं प्रदूषणरहित बहता हुआ पानी अत्यन्त आवश्यक है। लगभग 1 टन ट्राउट उत्पादन के लिए 300 लीटर प्रति मिनट बहते हुए पानी की आवश्यकता रहती है। पानी का तापमान 0 से 20 डिग्री सेल्सियस उपयुक्त रहता है। पानी का 13-18 डिग्री सेल्सियस तापमान ट्राउट की बढ़वार के लिए उत्तम होता है अतः इस तापमान का पानी जितने अधिक समय तक उपलब्ध रहता है उतना ही उत्पादन अधिक तथा मछली स्वस्थ रहती है। पानी में घुली हुई सल्ट मिट्टी या कार्बनिक पदार्थों का रहना अवांछनीय है।</p> <h3 style="text-align: justify;">मूलभूत आवश्यकताओं की जानकारी</h3> <p style="text-align: justify;">ट्राउट मछलीपालन की सफलता के लिए मूलभूत आवश्यकताओं की जानकारी आवश्यक है। एक या दो रेस-वे में छोटे स्तर पर या पिफर बड़े स्तर पर ट्राउट पालन करने के लिए इस महत्वपूर्ण बिंन्दुओं की जानकारी आवश्यक होती है, जिनमें पानी में पर्याप्त घुलित ऑक्सीजन ;7 मि.ग्रा./लीटर से अधिकद्ध रहना आवश्यक है। अधिक अम्लीय या क्षारीय पानी भी उपयुक्त नहीं है अतः पानी का पी-एच मान 6.8-8 के मध्य ठीक रहता है। पानी की उपलब्धता के अनुसार ही ट्राउट प्रक्षेत्रा का आंकलन किया जा सकता है या उत्पादन लक्ष्य के अनुसार आवश्यक पानी की व्यवस्था अति आवश्यक है। </p> <p style="text-align: justify;">स्त्रोत : खेती पत्रिका, आईसीएआर, देबाजीत सर्मा’ ’निदेशक, भाकृअनुप-शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान निदेशालय, भीमताल, नैनीताल (उत्तराखण्ड)</p>