रेनबो ट्राउट मछली की एक प्रजाति है। यह मूलतः विदेशों में ठंडे पानी में पायी जाती है और इसे भारत के कई इलाकों में इसका उत्पादन शुरू किय गया है। हिमालय की तराई, कश्मीर, कर्नाटक के पश्चिमी घाटों की ऊपरी इलाकों, तमिलनाडु और केरल रेनबो ट्राउट के कल्चर के लिए आदर्श स्थान है। भारत में शहरी लोगों के बीच इस मछली की माँग बहुत अधिक है। वर्तमान में भारत में इस मछली की बिक्री ताजी ठंड की गई स्थिति में की जाती है। विभिन्न प्रकार के मूल्य संवर्धित उत्पादें बनाने के लिए यह प्रजाति आदर्श मानी जाती हैं। ताजी ट्राउट का प्रबंधन कैसे करें बेहतर संरक्षण के लिए तुरंत पकड़ी गई मछली की आंत निकालकर, धोकर बर्फ में पैक कर दी जानी चाहिए। यदि बर्फ में रखे रहने की प्रक्रिया अच्छी हो, तो पूरी ताजी मछली संरक्षित की जा सकती है। जीवाणु के संदूषण को कम करने के लिए मछलियों की आँत निकाल दी जानी चाहिए, गिल हटा दी जानी चाहिए और बर्फ में पैक करने से पहले ठीक से धो देनी चाहिए। मछली की बिक्री पूरी मछली के रूप में या फिल्लेट्स (पुट्ठे का माँस) के रूप में की जा सकती है। प्रसंस्करण के विभिन्न स्तरों पर प्राप्त उत्पाद की जानकारी नीचे दी गई है: प्रसंस्करण के विभन्न स्तर उत्पादन त्वचायुक्त फिल्लेट्स त्वचाहीन फिल्लेट्स मिन्स (टुकड़ियाँ) 42.1 - 48.1 % 39.6 - 42.5 % 33.9 - 38.7 % फसल से प्राप्त रेनबो ट्राउट के विभिन्न घटक निम्नानुसार हैं: नमी 78.10 % अपरिष्कृत प्रोटीन 19.80 % वसा (फैट) 0.62 % ऐश (अपशिष्ट) 0.61 % जमी हुई ट्राउट अत्यंत ही शीत व जम जाने वाली स्थिति में संरक्षित कर रेनबो ट्राउट को अच्छी स्थिति में रखा जा सकता है। जमे हुए सामान में से ऑक्सीकरण व निर्जलीकरण को कम करने से बचाने के लिए अलग-अलग मछली को पोलिथाइलिन कवर में पैक कर देना बहुत ही प्रभावी होता है। जमी हुई पूरी ट्राउट मछली- 18 ° सेंटीग्रेड ताप पर 12 महीने तक अच्छी स्थिति में रखी जा सकती है। स्मोक्ड ट्राउट ट्राउट के मूल्य में संवर्धन का सबसे सामान्य रूप यह है कि आँत निकाली हुई पूरी मछली को हॉट स्मोक्ड उत्पाद के रूप में बनाया जाए। प्रक्रिया के दौरान इसे पर्याप्त रूप से पकाया जाता है ताकि यह खाने के लिए तैयार उत्पाद के रूप में प्रस्तुत की जा सके। सीआईएफटी द्वारा इस मछली से स्मोक्ड उत्पाद प्राप्त करने की विधि की तकनीक का मानकीकरण किया गया है। पूरी मछली में से सिर व आँत निकाल कर, उसे चीर कर खोल दिया जाता है। 15 मिनट तक 10% ब्राइन में शीतल ब्लीचिंग की जाती है। अपेक्षित रंग और फ्लेवर (स्वाद व सुगंध) प्राप्त करने के लिए इसे 3 घंटे तक 60° सेंटीग्रेड पर हॉट स्मोक्ड किया गया। शीतन स्थिति में किये गये भंडारण अध्ययन से पता चला कि वायु पैक नमूनों से तुलना की जाने पर निर्वात में पैक किये गये स्मोक्ड ट्राउट की जीवन अवधि 11 सप्ताह अधिक है। कोटेड फिल्लेट्स कोटेड उत्पाद मूल्य संवर्धित मदों में से एक है जिसकी माँग बहुत ही अधिक है। बैटरिंग और ब्रेडिंग क्रिया के माध्यम से दिखावट में निखार आती है। पूरी ट्राउट से प्राप्त त्वचाहीन फिल्लेट्स को बैटरिंग और ब्रेडिंग से पहले 10 मिनट तक 5% नमक में और 0.1% साइट्रिक एसिड में शीत ब्लीच किया जाता है। इस उत्पाद को -18 ° सेंटीग्रेड ताप पर 12 महीने तक अच्छी स्थिति में रखी जाती है। कैन्ड ट्राउट पूरी मछली की आँत को निकालकर, धोकर एक समान आकार के स्टीकों (माँस के टिक्के) में काटा जाता है। इसे 0.5% साइट्रिक एसिड वाले 10% सोडियम क्लोराइड में 10 मिनट तक ब्लीच किया जाता है और 2 घंटे तक 45 ° सेंटीग्रेड पर स्मोक्ड किया गया और फिर आंशिक रूप से 1 घंटे तक सुखाया गया। 307 X 109 टीएफएस कैन में लगभग 120 ग्राम के स्टीकों को पैक किया गया। रिफ़ाइन्ड मूंगफली के तेल में कैन को 121° सेंटीग्रेड पर ताप प्रसंस्करण किया गया। स्मोक और कैन किये हुए तेल वाले ट्राउट स्टीक एक उत्तम उत्पाद है। बढ़िया परिस्थिति में इसकी जीवन अवधि 1 वर्ष से अधिक होती है। अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें-निदेशककेन्द्रीय मत्स्य प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.सी.ए.आर),सी.आई.एफ.टी जंक्शन, मत्स्यपुरी पी.ओ.विलिंगडन आईलैंड, कोचीन - 682 029,केरल (भारत), फोन : 91(0) 484-2666845, फैक्स : 91(0) 484-2668212ई-मेल: cift@ciftmail.org स्त्रोत पोर्टल विषय सामग्री टीम