कोरोना संक्रमण हेतु देशव्यापी तालाबंदी के दौरान कई राज्यों में परिवहन सेवा सहित मात्स्यिकी और जलीय कृषि गतिविधियों में छूट दी गई है। चूंकि मछलियां जल्दी नष्ट होने लगती हैं इसलिए उन्हें नष्ट होने से पहले ही बाजारों में उनको ले जाना और उनकी बिक्री को अपरिहार्य सेवाओं के तहत रखा गया है। कोरोना बीमारी के संक्रमण और प्रसार को रोकने के लिए मछुआरों को सरकार द्वारा सुझाये गये सुरक्षा उपायों का पालन करना अनिवार्य है। सरल उपायों में एक दूसरे के बीच कम से कम 3 से 4 ft की दुरी बनाये रखना, साबुन से बार-बार हाथ धोकर व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना, चेहरे पर मास्क पहनना, सुरक्षात्मक कपड़े और जाल की नियमित सफाई महामारी के प्रसार को रोकने में सक्षम हो सकती है। नदी, ज्वारनदमुख, मुहाने और नहर क्षेत्र के लिए परामर्शी दिशानिर्देश मछुआरों और मछुआरा सहकारी समितियों के लिए परामर्श मछली पकड़ने जाल संचालन के समय और मछलियों की लैंडिंग तक मछुआरों को व्यक्तिगत स्वच्छता और सामाजिक दूरी जैसे नियमों का पालन करना चाहिए। मछली पकड़ने की गतिविधियों में शामिल मछुआरों को अपने चेहरे पर हमेशा मास्क का उपयोग करना चाहिए और नियमित अंतराल पर साबुन से बार-बार हाथ धोना चाहिए। अंतर्थलीय क्षेत्र में मछली प्रग्रहण समूह में की जाती है। इसलिए, हस्तचालित नाव और जाल के संचालन में प्रत्येक मछुआरों के बीच कम से कम 3-4 ft की दूरी बनाए रखना चाहिए। मछली पकड़ने के लिए नाव का संचालन केवल दो व्यक्तियों द्वारा किया जाना चाहिए। किसी भी दो नावों के बीच 3 मीटर से अधिक की दूरी बनाए रखना आवश्यक है। आराम करते समय, भोजन लेने के समय और लैंडिंग सेंटर में मछली के हस्तांतरण के दौरान एक दूसरे से 3-4 ft की दूरी बनाए रखना चाहिए। यदि संभव हो तो, प्रत्येक कार्य के बाद जालों, नावों और अन्य मछली पकड़ने के उपकरण की सफाई या उन्हें कीटाणुरहित किया जा सकता है। साबुन के घोल से धोने के बाद उन्हें 5 मिनट के लिए 1प्रतिशत सोडियम हाइपोक्लोराइट के घोल में डुबोकर रखना चाहिए, उसके बाद उन्हें धूप में सुखाया जा सकता है। जालों को घरेलु तौर पर निर्मित नीम के घोल में भिगो कर धूप में सुखाया जा सकता है। किसी भी परिस्थिति में भीड़ इकट्ठा होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। समय-समय पर उपकरणों को कीटाणुरहित करना चाहिए। मछलियों के लैंडिंग केंद्र को स्वच्छ और कीटाणुरहित करने हेतु नियमित अंतराल पर ब्लीचिंग पाउडर, सोडियम हाइपोक्लोराइट या अन्य किसी प्रक्षालक के साथ साफ किया जा सकता है । मछलियों की नीलामी के स्थानों को एक नियमित अवधि के लिए ही खोला जा सकता है और नीलामी केंद्र में नीलामी करने वालों के प्रवेश को मछुआरा समाजों द्वारा नियंत्रित किया जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में कोविद 19 के सुरक्षा दिशानिर्देशो का पालन करना अति आवश्यक है । मछुआरों के परिवार के जो सदस्य नौकरी करने के लिए बाहर गए हुए है, अगर लॉकडाउन अवधि में वापस आते हैं तो उन्हें 14 दिनों के लिए संगरोध/ क्वारंटाइन में अपने घर पर रहने के लिए कहा जाना चाहिए। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को उनके आस-पास जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए । जलाशय और आर्द्रक्षेत्र के लिए परामर्शी दिशानिर्देश मछुआरों और मछुआरा सहकारी समितियों के लिए परामर्श मछुआरों को छोटे समूहों में काम करना चाहिए; जब भी वे अपने घर से किसी भी मत्स्ययन कार्य के लिए बाहर निकले तब उन्हें सुरक्षात्मक मास्क/कवर पहनना चाहिए और थोड़े-थोड़े अंतराल पर अपने हाथों को बार-बार साबुन से धोना चाहिए । साथ ही, उन्हें 1 से 1.5 मीटर की सामाजिक दूरी बनाए रखनी चाहिए। उत्पादित मछलियों को संभालने और पैक करने के दौरान दस्ताने का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। संदिग्ध या विषाणु वाहक व्यक्तियों से बचाव के लिए केवल स्वस्थ व्यक्तियों को कार्य में सम्मिलित करें। विशेष रूप से ऐसे बाढकृत आर्द्रक्षेत्र और मौसमी तालाबो में मछली पकड़ने की सलाह दी जाती है जिसमें न्यूनतम संख्या में मछुआरों को शामिल किया जाय । कम आय वाले मछुआरे व्यक्तिगत तौर पर कास्ट जाल, गिल जाल और ट्रैप को संचालित कर सकते हैं। बारहमासी जलाशयों में सामुदायिक तौर पर मछली पकड़ने पर फिलहाल रोक होना चाहिए। इन जल क्षेत्रों में कम आय वाले मछुआरे एक या दो व्यक्तियों के साथ गिल नेट द्वारा देशी नाव से मछली पकड़ सकते हैं । मछुआरों की न्यूनतम भागीदारी के साथ जाल और नाव की मरम्मत जैसी सहायक गतिविधियां की जा सकती हैं। बाढ़कृत आर्द्रक्षेत्र में, प्रति नाव 1 या 2 मछुआरे जलीय पादपों (मैक्रोफाइट्स) को साफ़ करने का कार्य कर सकते है। खुले टैंक एवं आद्रक्षेत्रों में मछुआरा सहकारी समितियो को मत्स्य आहार का परिमाण 50 प्रतिशत तक घटा देना चाहिए और इन जालों में उच्च मत्स्य भण्डारण के कारण पानी में होने वाली ऑक्सीजन की कमी का समय-समय पर जांच करना चाहिए। पिंजरे / पेन में मछली पालन पद्धति में, अधिकतम एक या दो स्वस्थ व्यक्तियों को नियमित गतिविधियों जैसे कि मछली को भोजन खिलाना और निगरानी करने के लिए रखा जा सकता है। घेरे में पालित मछलियों में कुपोषण से होने वाली फसल हानि और मृत्यु दर से बचने के लिए पिंजरों में मछली को नियमित रूप से आहार देना चाहिए | जाल, बाल्टियाँ, चारा ट्रे इत्यादि सहित सभी यंत्र नियमित अंतराल पर कीटाणुरहित और साफ किया जाना चाहिए। सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करते हुए और सामाजिक दूरी बनाए रखते हुए हैचरी में प्रजनन और लार्वा पालन किया जा सकता हैं। नर्सरी और पालन तालाब की तैयारी भी पर्याप्त आत्म–सुरक्षा उपायों के साथ की जा सकती है। मछुआरा सहकारी समितियो को मत्स्य पालन से जुड़ी गतिविधियों में लगे मछुआरों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और राज्य मत्स्य विभागों / गैर-सरकारी संगठनों की सहायता से मास्क और साबुन / सैनिटाइज़र की उपलब्धता भी सुनिश्चित करना चाहिए। मछली को उतारते समय लोगों की भीड़ से बचने के लिए सावधानी बरतना चाहिए और स्थानीय स्तर पर मत्स्य विपणन किया जाना चाहिए। प्रग्रहित उपज को छोटे समूहों में मछुआरों द्वारा एकत्र किया जा सकता है और बाजार में परिवहन के लिए 3 या 4 निर्दिष्ट व्यक्तियों को सौंपा जा सकता है। राज्य मत्स्य विभाग को मत्स्य विपणन के लिए बर्फ की न्यूनतम आवश्यकताओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना चाहिए। मछली पकड़ने के बाद ही जाल / ट्रैप्स / नाव आदि को कीटाणुरहित (सैनिटाइज) किया जाना चाहिए और संपर्क के कारण संक्रमण के फैलाव की जोखिम को कम करने के लिए केवल स्वस्थ व्यक्तियों को ही नाव का संचालन करना चाहिए। मत्स्य आहार, खाद, रसायन जैसे ऑक्सीजन टैबलेट, जिओलाइट आदि वस्तुओं की खरीद और मछली के विपणन के लिए बाजारों तक पहुंचाने के समय भारत सरकार और राज्य सरकारों की सूचनाओं और दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। स्त्रोतऔर ज्यादा जानकारी के लिए, संपर्क करें: आईसीएआर-सीआइएफआरआइ- बैरकपुर, कोलकाता।