प्रस्तावना: मध्य प्रदेश के धार जिले की सरदारपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक नगर राजगढ़ (वार्ड क्रमांक 9, शनि गली) में एक ऐसा अद्वितीय और प्राचीन मंदिर स्थित है, जो पूरी दुनिया में प्रकृति संरक्षण और धार्मिक आस्था का सबसे अनूठा उदाहरण है। यहाँ स्थित "श्री शनि शीतला माता मंदिर" में स्थापत्य कला और प्राकृतिक जीवंतता का एक ऐसा दुर्लभ नजारा देखने को मिलता है जो देश में अन्यत्र कहीं नहीं है। मुख्य विशेषता (अद्भुत गर्भगृह और जीवित विग्रह): इस मंदिर की सबसे बड़ी विशिष्टता इसका गर्भगृह है। सामान्यतः मंदिरों में मूर्तियाँ पत्थरों या धातुओं की बनी होती हैं और उन्हें प्रकृति से अलग स्थापित किया जाता है। परंतु, इस प्राचीन मंदिर में साक्षात एक विशाल और सदियों पुराना जीवित वटवृक्ष (बरगद का पेड़) मंदिर के मुख्य गर्भगृह के भीतर समाहित है। मंदिर की दीवारें और छत इस जीवित वृक्ष के विशाल तने के चारों ओर इस प्रकार बनाई गई हैं कि वृक्ष को कोई नुकसान न पहुँचे। सबसे विस्मयकारी बात यह है कि इस जीवित वटवृक्ष का मुख्य तना और उसकी जड़ें ही साक्षात भगवान शनिदेव के मुख्य विग्रह के रूप में विराजमान हैं। इस जीवित तने पर ही सिंदूरी चोला चढ़ाया जाता है और इसी स्वरूप की मुख्य पूजा की जाती है। यह संभवतः भारत का इकलौता ऐसा मंदिर है जहाँ वृक्ष का तना ही मुख्य आराध्य देव का रूप है। पर्यावरण और सांस्कृतिक महत्व: यह मंदिर प्राचीन भारतीय संस्कृति के 'प्रकृति देवो भवः' के सिद्धांत को साक्षात चरितार्थ करता है। मंदिर प्रबंध समिति और स्थानीय नागरिकों ने सदियों से इस वृक्ष को बिना काटे, इसके चारों ओर मंदिर का निर्माण करके पर्यावरण संरक्षण का एक महान संदेश दिया है। आज के डिजिटल और आधुनिक युग में यह स्थल शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण धरोहर है। स्थान विवरण: स्थान: वार्ड नं. 9, शनि गली, राजगढ़तहसील: सरदारपुरजिला: धार, मध्य प्रदेश (पिन कोड: 454116)