चन्द्रमनी देवी-वर्तमान स्थिति चन्द्रमनी देवी अपने पति दन्दूर उराँव एवं दो बच्चों के साथ गुमला जिले के टोंगरी टोली गाँव में रहती हैं। उनकी उम्र 42 साल है एवं वह अपने परिवार के साथ कच्चे पक्के मकान में रहती हैं। उनके पास वर्तमान में जरूरत की सभी वस्तुएँ उपलब्ध हैं जैसे टी.वी., पंखा, गैस, फर्नीचर इत्यादि | घर के समीप उनके 1.9 एकड़ की निजी जमीन में साल भर विभिन्न प्रकार की फसल देखी जा सकती हैं जिसकी सिंचाई वह अपने कुएँ से लिफ्ट इरीगेशन के माध्यम से करती हैं। वह अपनी वर्तमान स्थिति से बहुत ही खुश हैं। लेकिन कुछ वर्ष पहले उनकी स्थिति ऐसी नहीं थी। सिंचाई के पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण वे अच्छी खेती नहीं कर पाते थे। गाँव में जीविका के अन्य साधन उपाय भी नहीं थे जिसके कारण चन्द्रमनी देवी के पति को मजबूरी में वर्ष 1995 में नगालैंड जाना पडा जहाँ गाँव के अन्य लोग जीविका हेतु जाते थे। परिवार का भरण-पाेषण चन्द्रमनी देवी पर अकेले अपने दो बच्चों, सास, ससुर एवं स्कूल में पढ़ने वाले देवर के देखभाल की जिम्मेदारी आ गई। उनके पति उन्हें प्रति महीने 2,000 भेज पाते थे जो घर के खर्च के लिए पर्याप्त नहीं हो पाता था साथ ही खेती में श्रम करने योग्य व्यक्ति की घर में कमी थी। अतः असहाय होकर चन्द्रमनी देवी ने हड़िया (स्थानीय शराब) बना कर बेचना शुरु कर दिया। उन्हें यह पता था कि यह एक प्रतिष्ठा रहित कार्य है फिर भी उन्हें मजबूरी में घर की जरुरतों के कारण यह करना पड़ा। उनके ग्राहक के परिवार शराब के कारण घर में होने वाली अशांति के लिए चन्द्रमनी देवी को जिम्मेदार ठहराने लगे। इस व्यवसाय के कारण उनके गाँव की सुख समृद्धि पर असर पड़ रहा था। परिस्थितियाें में बदलाव इन सबके बावजूद उनकी परिस्थिति बदलने वाली थी। वर्ष 2001 में उन्हें अपने निकटवर्ती गाँव सिलम में स्वयं सहायता समूह के बारे में पता चला, जिससे महिलाएँ जुड़कर, बचत कर, आय के नए स्रोत का उपार्जन कर अपनी जिंदगी सुधार रही थीं। चन्द्रमनी देवी इस स्वयं सहायता समूह में शामिल हुई एवं अपने साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी शामिल कराया। फिर वर्ष 2004 में उन्होंने गुमला ग्रामीण पोल्ट्री स्वावलम्बी सहकारी समिति लि. के बारे में जाना जो स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा स्थापित सहकारी समिति है जिसमें महिलाओं को लघु पोल्ट्री उद्यमी के रूप में प्रशिक्षित कर पोल्ट्री उद्योग से जोड़ा जाता है। पाेल्ट्री व्यवसाय की शुरुआत चन्द्रमनी देवी इस समिति की सदस्य बन कर पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़ गई। समिति की सहायता से उन्हें बैंक ऑफ इंडिया से रु 20,000 प्राप्त हुए जिसमें से 10,000 रूपये अनुदान की राशि थी। सबसे पहले उन्होंने 300 मुर्गियों को पालने की क्षमता का शेड बनाया जिससे उन्हें प्रति बैच रु 2500 से 3000 तक की आमदनी प्राप्त होने लगी एवं सालाना वह इस व्यवसाय से रु 18,000 तक की आमदनी प्राप्त करने लगीं। 2005 में उन्होंने समिति की सहायता से राबो फाइनेंस के द्वारा अपने शेड की क्षमता को बढ़ा कर 500 मुर्गीयों को पालने की क्षमता का कर दिया। क्षमता के विस्तार से उनकी आमदनी प्रति बैच रु 6,000 से रु 8,000 एवं सालाना रु.45,000 तक बढ़ गई। उनका चयन समिति के निदेशक मंडल के सदस्य के रुप में भी किया गया। वर्ष 2008 में उन्हें अपनी समिति का उपाध्यक्ष चुना गया। पाेल्ट्री व्यवसाय से आया आत्मविश्वास पोल्ट्री व्यवसाय से हो रही आमदनी ने उन्हें इतना आत्मविश्वास दिया कि उन्होंने नागालैंड से अपने पति को वापस बुला लिया जिससे वह गाँव में ही रहकर खेती के संसाधन को बढ़ा सकें । वर्ष 2009 में उन्हें मनरेगा से कुएँ के निर्माण के लिए पूरा अनुदान प्राप्त हुआ। पोल्ट्री एवं खेती से हो रही आमदनी के कारण वे अपने बच्चों को "केन्द्रीय विद्यालय गुमला" में अच्छी शिक्षा के लिए भेज पा रहे हैं। महिला सुपरवाइजर के रुप में नियुक्ति वर्ष 2013 में चन्द्रमनी देवी को समिति में सुपरवाइजर के रुप में नियुक्त किया गया जिससे वह समिति के शेडों के प्रबन्धन को देख सकें। यह पहली बार हुआ था कि किसी महिला को सुपरवाइजर के रुप में नियुक्त किया गया क्योंकि एक सुपरवाइजर को शेडों के निरीक्षण के लिए दिन रात गाँव में घूमने की जरुरत होती है। चन्द्रमनी देवी अपने शेड के प्रबन्धन के साथसुपरवाइजर की जिम्मेदारी भी पुरी निष्ठा से | निभा रही हैं। वह अपने समिति की 29 शेडों की देखभाल कर रही हैं। पहचान बनाने की आकांक्षा चन्द्रमनी देवी को अपनी पिछली जीविका के साधन पर बहुत पछतावा है एवं कुछ लोग आज भी उनहें हडिया बनाने वाली के नाम से जानते हैं लेकिन वह समिति के सुपरवाइजर के रूप में अपनी पहचान बनाना चाहती हैं। वर्तमान में आमदनी वर्तमान में चन्द्रमनी देवी प्रति बैच रु 8,000 से रु 9,000 तक आमदनी कर सालाना रु 1.10.000 तक आय अर्जित कर पाती हैं। इसके साथ ही कृषि से उनके परिवार को सालाना रु 30,000 तक आमदनी हो जाती है। चन्द्रमनी देवी के बेटे ने अपनी इन्टरमीडियट तक की शिक्षा पूरी कर ली है एवं वह आई.टी.आई की तैयारी कर रहा है, बेटी 'केन्द्रीय विद्यालय गुमला' में नौवीं कक्षा में अध्ययन कर रही है। अपने माता पिता के देहान्त के बाद चन्द्रमनी देवी ने अपने भाई की भी शिक्षा की जिम्मेदारी ली। स्त्राेत : गुमला जिला प्रशासन,जिला गुमला, झारखंड