<h3 style="text-align: justify;">निर्धनता के कारण</h3> <p style="text-align: justify;">खेती गुमला वासियों की प्रमुख आय का साधन है। लगभग 80 प्रतिशत लोग अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर हैं। पर खेती से अच्छी आमदनी की क्षमता होते हुए भी यहाँ के किसान काफी निर्धन हैं। इसके कई कारण हैं जिनमे से कुछ कारण इस प्रकार हैं</p> <p style="text-align: justify;">सालों भर खेती के लिए भूमि के उपचार का अभाव, अनियमित वर्षा, तकनीकी जानकारी एवं उपयोगिता का अभाव, जानकारी के अभाव एवं अच्छी प्रथाओं को न अपनाने के कारण सब्जियों की उपज काफी कम, जीवन निर्वाह हेतु कुछ खास फसलों जैसे धन पर ही सारा ध्यान केन्द्रित, नजदीक क्षेत्रों में नियमित बाजार व्यवस्था का अभाव एवं सीमित जानकारी, उचित दाम, मांग एवं पूर्ति की जानकारी का अभाव, सीमित बचत एवं क्षण भंगुरता के कारण जोखिम उठाने की क्षमता का अभाव, इत्यादि।</p> <h3 style="text-align: justify;">नई शुरुआत</h3> <p style="text-align: justify;">प्रदान के हस्तक्षेप के पूर्व यहाँ के लोगों की स्थिति काफी दयनीय थी। लोग जलाऊ लकड़ी, जंगली उत्पादों या फिर पलायन से लगभग 15000 रूपये तक सालाना कमा पाते थे। खेती में भी क्षमता से काफी कम उपज हुआ करती थी। प्रदान ने यहाँ समूह में खेती को प्रोत्साहन देने के साथ कार्य का आरम्भ किया। ए. पी सी मॉडल (APC Model) 30 से 50 महिला किसानों का समूह होता है जो लागत से लेकर बाजार व्यवस्था तक साथ मिलकर खेती करते हैं। प्रदान ने भूमि परिक्षण से कार्य प्रारंभ करते हुए पाया कि क्षेत्र की अधिकांश मिटटी अम्लीय है जिसमें मैग्निशियम, जिंक एवं बोरोन की काफी कमी है। जल्द ही संस्था ने मिट्टी के उपचार हेतु किसानों को अपने अपने खेतों में डोलोमाइट, जिंक सलफेट तथा बोरोन डालने की सलाह दी एवं सालों भर अधिक से अधिक उपजाऊ भूमि के उपयोग को प्रोत्साहित किया। कम से कम दो सीजन में खेती को अनिवार्यता प्रदान की। जिला प्रशासन ने भी एपीसी क्षेत्र के कई गांवों में पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि (BRGF & Integrated action plan) के तहत ग्रेडिंग एवं छटाई केंद्र, मच्छरदानी घर, क्रेट्स, लिफ्ट के माध्यम से सिचाई की व्यवस्था की। इससे किसानों को सिचाई में काफी मदद मिली एवं घर से बाजार तक का काफी सारा नुकसान कम हो गया, साथ ही साथ बारिश के दिनों में भण्डारण की सुविधा भी प्राप्त हुयी।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/ccccccccccccccccccPIC6.jpg" width="360" height="200" /></p> <h3 style="text-align: justify;">बाजार व्यवस्था से जुड़ाव</h3> <p style="text-align: justify;">किसानों को बाजार व्यवस्था से जोड़ने के लिए दोनों ब्लाक को मिलाकर कुल 21 कृषि उद्यमी तैयार किये गए जिन्हें सारी तकनीकी जानकारी दी गयी। कृषि उद्यमी ने हर तरह से किसानों की मदद की एवं उनकी उपज को बाजार तक पहँचा कर उन्हें अच्छी कीमत दिलाई। उन्होंने गाड़ी व्यवस्था से लेकर छटाई, ग्रेडिंग एवं बिक्री तक सारी व्यवस्था का भरपूर ख्याल रखा एवं बदले में किसानों से 50 पैसे प्रति किलो प्राप्त किया। औसतन एक उद्यमी ने एक सीजन में लगभग 40000 रुपये की इस व्यवस्था में कमाई की।</p> <h3 style="text-align: justify;">महिला किसान एवं आजीविका समिति </h3> <p style="text-align: justify;">गत वर्ष रायडीह एवं गुमला ब्लाक को मिलाकर लगभग 3795 महिला किसानों ने आजीविका समिति के साथ मिलकर योजना बनायी एवं समूह में खेती की। योजना बनाने के पश्चात किसानों ने समुदाय के साधक प्रबंधक के साथ मिलकर समूह में लगत सामग्री की । खरीदारी की। किसानों ने लगभग 23 किलोग्राम टमाटर का बीज एवं 32 किलोग्राम मिर्च का बीज खरीदा एवं बांस तथा मच्छरदाना खराद कर 30 स 50 नसरा बड वाला मच्छरदानी घर बनाकर साथ में नर्सरी लगायी। पहले प्रयास में ही किसानों को समझ आ गया कि समूह में खेती करने से निगरानी भी अच्छी तरह हो पा रही थी, उचित जानकारी भी उचित वक्त पर एक ही जगह पर एक साथ मिल पा रही थी एवं जानवरों के उपद्रव का भय भी खत्म हो चुका था।</p> <h3 style="text-align: justify;">उत्पादन में बढ़ाेत्तरी </h3> <p style="text-align: justify;">एक जून को दोनों ब्लाक को मिलाकर 102 मच्छरदानी घरों में कुल 3795 महिला किसानों ने समूह में खेती की एवं 4000 मैट्रिक टन टमाटर एवं 2800 मैट्रिक टन मिर्च उगाया जिसे लोकल एवं रीजनल मार्केट्स में बेचा गया जैसे रांची, जशपुर, राउरकेला, अंबिकापुर आदि। शहरों के बाजारों में किसानों ने मिलकर सब्जिया भेजी जहाँ उनके उत्पादों को अच्छी कीमत मिली। इस प्रयास के तहत किसानो ने बाजार व्यवस्था को अच्छी तरह समझते हुए सफलता का स्वाद चखा। प्रति महिला किसान ने लगभग 30000 रूपये बस खरीफ की इस उपज से प्राप्त किया। ए पी सी क्षेत्र में इस व्यवस्था के अंतर्गत महिला किसानों ने साल भर में औसतन 50000 रूपये की कमाई की।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccccccccccccccccccccPIC5.jpg" width="250" height="220" /></p> <h3 style="text-align: justify;">आमदनी में बढ़ाेत्तरी </h3> <p style="text-align: justify;">मरियम टोली की हरियारेन टोप्पो ने 7500 रूपये की लागत से 20 ग्राम मिर्च एवं 15 ग्राम टमाटर अपने 50 डेसीमल जमीन में लगाया एवं 4 महीने में लगभग 58000 रुपये की आमदनी की। किसानों ने इस अनुभव का लाभ लेते हुए खरीफ में खरीफ, रबी में पत्ता गोभी, फूल गोभी एवं मटर तथा गर्मी में तरबूज से भी काफी अच्छी आमदनी की।</p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/cccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC4.jpg" width="400" height="220" /></p>