पानी को लेकर पूरी दुनिया में बढ़ने वाली मुश्किलों के चलते बेहतर है कि बारिश की एक-एक बूँद को बचाया जाए और हर नागरिक को अपनी इस जिम्मेदारी का अहसास कराया जाए। सदियों से हमारे पूर्वज इस दिशा में काम करते रहे हैं। हाल-फिलहाल में भी इस दिशा में तेजी से काम हुआ है। जलशक्ति अभियान के तहत जल-संरक्षण हेतु 5 लाख से अधिक बुनियादी ढाँचे बनाए गए हैं। जल-संरक्षण अभियान केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री ने 1 जुलाई, 2019 को जल-संरक्षण अभियान की शुरुआत की। इसके तहत देश के 256 जिलों के ज्यादा प्रभावित 1592 ब्लॉकों को प्राथमिकता के आधार पर चुना गया। मनरेगा के तहत जल संरक्षण पिछले पाँच वर्षों के दौरान मनरेगा एक ऐसी प्रमुख ताकत बनकर उभरा है, जो समस्त ग्रामीण भारत में जल संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ा रहा है। इस योजना के जरिए पहले मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्रों में गहरा संकट कम करने पर ध्यान दिया जाता रहा है, लेकिन अब यह राष्ट्रीय संसाधन प्रबंधन (एनआरएम) से जुड़े कार्यों के जरिए ग्रामीण आमदनी बढ़ाने के एक केन्द्रित अभियान में तब्दील हो गई है। वर्ष 2014 में मनरेगा अनुसूची-1 में संशोधन किया गया, जिसके तहत यह अनिवार्य किया गया है कि कम-से-कम 60 प्रतिशत व्यय कृषि एवं उससे जुड़ी गतिविधियों पर करना होगा। परिणामस्वरूप अधिनियम के तहत स्वीकृति योग्य कार्यों की एक सूची तैयार की गई है, जिसमें ऐसी लगभग 75 प्रतिशत गतिविधियों या कार्यकलापों का उल्लेख किया गया है जो जल सुरक्षा एवं जल संरक्षण के प्रयासों को सीधे तौर पर बेहतर बनाते हैं। पिछले पाँच वर्षों के दौरान एनआरएम से जुड़े कार्यों पर किए गए खर्चों में निरन्तर बढोत्तरी दर्ज की गई है। जिला पंचायत दमाेह के प्रयास इस वीडियाे के अंतर्गत दिखाया गया है किस प्रकार बुंदेलखंड क्षेत्र के दमाेह ने सूखे क्षेत्र की अपनी पुरानी पहचान काे बदलते हुए हरियाली क्षेत्र में बदल लिया। जिला पंचायत दमाेह के प्रयासाें के अंतर्गत लगभग 76 जल संरचनाओं काे पुन: जीवित किया गया एवं गर्मियाें के माैसम में हाेने वाली पानी की समस्या से भी निजात पाई । अधिक जानने के लिए देखें वीडियाे एवं इसे यूट्यूब पर लाइक करें। स्त्राेत : सीईओ जिला पंचायत एवं ओआईसी,नीति आयाेग ।