दक्षिण-पश्चिम मानसून - एक अवलोकन जून से सितंबर तक की अवधि को 'दक्षिण-पश्चिम मानसून' अवधि कहा जाता है। दक्षिण-पश्चिम मानसून अवधि भारतीय उपमहाद्वीप के लिए प्रमुख वर्षा ऋतु है। पूरे देश में लगभग 75% वर्षा इसी अवधि के दौरान होती है। भारतीय मुख्य भूमि पर दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने का संकेत, केरल में मानसून की शुरुआत से मिलता है और यह गर्म और शुष्क मौसम से बरसात के मौसम में संक्रमण को दर्शाने वाला एक महत्वपूर्ण संकेतक है। जैसे-जैसे मानसून उत्तर की ओर बढ़ता है, क्षेत्रों में चिल-चिलाती गर्मी से राहत मिलती है। दक्षिण-पश्चिम मानसून आमतौर पर 1 जून को केरल में लगभग 7 दिनों के मानक विचलन के साथ आता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) वर्ष 2005 से केरल में मानसून के आगमन की तिथि के लिए परिचालन पूर्वानुमान जारी करता रहा है। 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत की तिथि - केरल में 2026 इस वर्ष, केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन का पूर्वानुमान 26 मई को होने की संभावना है, जिसमें ± 4 दिन की मॉडल त्रुटि थी। दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति देखने के लिए यहां क्लिक करें । दैनिक मानसून गतिविधि देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दैनिक गतिविधि देखने के लिए यहां क्लिक करें । 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ऋतु की वर्षा के लिए दीर्घावधि पपूर्वानुमान - 13 अप्रैल 2026 - मुख्य बातें 2026 में पूरे देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की ऋतु (जून से सितंबर) में होने वाली वर्षा सामान्य से नीचे (दीर्घावधि औसत (LPA) का 95-90%) रहने की सबसे ज़्यादा संभावना है। मात्रा के हिसाब से, पूरे देश में ऋतुनिष्ठ वर्षा दीर्घावधि औसत LPA का 92% रहने की संभावना है, जिसमें मॉडल की त्रुटि ± 5% हो सकती है। 1971-2020 की अवधि के आधार पर, पूरे देश में इस ऋतु की वर्षा का दीर्घावधि औसत (LPA) 87 सें.मी. /cm है। वर्तमान में, भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में कमज़ोर ला नीना जैसी स्थितियाँ ईएनएसओ/ENSO-तटस्थ स्थितियों में बदल रही हैं। उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में वायुमंडलीय परिसंचरण की विशेषताएँ कमज़ोर ला नीना जैसी स्थितियों के अनुरूप बनी हुई हैं। मॉनसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (एमएमसीएफएस / MMCFS) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की ऋतु के दौरान अल नीनो जैसी स्थितियाँ विकसित होने की संभावना है। वर्तमान में, हिंद महासागर में तटस्थ हिंद महासागर द्विध्रुव इंडियन ओशन डाइपोल (आईओडी/IOD) की स्थितियाँ मौजूद हैं, और नवीनतम जलवायु मॉडलों के पूर्वानुमानों से संकेत मिलता है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ऋतु के अंत तक सकारात्मक IOD स्थितियाँ विकसित होने की संभावना है। पिछले तीन महीनों (जनवरी से मार्च 2026) के दौरान उत्तरी गोलार्ध में बर्फ से ढके क्षेत्र का विस्तार सामान्य से थोड़ा नीचे रहा। उत्तरी गोलार्ध के साथ-साथ यूरेशिया में सर्दियों और वसंत ऋतु में बर्फ से ढके क्षेत्र का विस्तार का, उसके बाद देश में होने वाली दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की ऋतुनिष्ठ वर्षा के साथ आम तौर पर विपरीत संबंध होता है। IMD मॉनसून ऋतु में होने वाली वर्षा के लिए अद्यतन पूर्वानुमान मई अंतिम सप्ताह में जारी करेगा। 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ऋतु की वर्षा के लिए दीर्घावधि पपूर्वानुमान - 13 अप्रैल 2026 दक्षिण-पश्चिम मानसून 2025 2025 के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून मौसमी वर्षा के लिए दीर्घकालिक पूर्वानुमान - पहला चरण 2025 के दौरान पूरे देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) की मौसमी वर्षा सामान्य से अधिक (दीर्घ अवधि औसत (LPA) का 104% से अधिक) होने की संभावना है। मात्रात्मक रूप से, पूरे देश में मौसमी वर्षा ± 5% की मॉडल त्रुटि के साथ LPA का 105% होने की संभावना है। 1971-2020 की अवधि के लिए पूरे देश में मौसमी वर्षा का LPA 87 सेमी है। पूरा पूर्वानुमान देखने के लिए, यहाँ क्लिक करें। दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत की तिथि - केरल में 2025 इस वर्ष, केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन का पूर्वानुमान 27 मई को होने की संभावना थी, जिसमें ± 4 दिन की मॉडल त्रुटि थी। दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून की सामान्य तिथि के बजाय 24 मई, 2025 को केरल में प्रवेश कर गया है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति देखने के लिए यहां क्लिक करें । दैनिक मानसून गतिविधि देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दैनिक गतिविधि देखने के लिए यहां क्लिक करें । चक्रवात की जानकारी चक्रवात की जानकारी देखने के लिए यहां क्लिक करें । चेतावनियाँ उपखंड और जिला स्तर पर पांच दिन के लिए चेतावनी जारी की जाती है। जारी की गई चेतावनियों को देखने के लिए यहां क्लिक करें । स्रोत : आईएमडी