मंत्रालय के बारे में गृह मंत्रालय विभिन्न प्रकार के दायित्वों का निर्वहन करता है जिनमें देश की आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, केंद्र-राज्य संबंध, संघ राज्य क्षेत्रों का प्रशासन, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों का प्रबंधन, आपदा प्रबंधन आदि महत्वपूर्ण हैं। यद्यपि भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची में सूची II-“राज्य सूची” की प्रविष्टि 1 और 2 के अनुसार, “लोक व्यवस्था” और “पुलिस” राज्यों के उत्तरदायित्व हैं, तथापि संविधान के अनुच्छेद 355 में संघ को यह दायित्व सौंपा गया है कि वह प्रत्येक राज्य को बाहरी आक्रमण और आंतरिक गड़बड़ी के संबंध में सुरक्षा प्रदान करे और यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य का शासन संविधान के उपबंधों के अनुरूप चलाया जा रहा है। इन दायित्वों के अनुसरण में, गृह मंत्रालय, राज्यों के संवैधानिक अधिकारों की उपेक्षा किए बिना, सुरक्षा, शांति और सदभावना बनाए रखने के लिए आंतरिक सुरक्षा की स्थिति की लगातार निगरानी करता है, राज्य सरकारों को उपयुक्त सलाह जारी करता है, सूचना संबंधी जानकारी का आदान-प्रदान करता है, जनशक्ति और वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन तथा सुविज्ञ राय प्रदान करता है। उद्देश्य: कानून और व्यवस्था बनाए रखना। आंतरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन का प्रबंधन करना। मादक पदार्थों पर नियंत्रण और सीमा प्रबंधन। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) का प्रबंधन करना। गृह मंत्रालय के प्रभाग प्रशासन प्रभाग : इस प्रभाग का दायित्व मंत्रालय के सभी प्रशासनिक और सतर्कता मामलों को देखना, मंत्रालय के विभिन्न प्रभागों में कार्य का आबंटन करने और सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत सूचना प्रदान किए जाने पर निगरानी रखना है। यह अग्रता सारणी, पद्म पुरस्कार, शौर्य पुरस्कार, जीवन रक्षा पदक पुरस्कार, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय गान, भारत के राष्ट्रीय संप्रतीक और सचिवालय सुरक्षा संगठन संबंधी मामले को भी देखता है| सीमा प्रबंधन प्रभाग-I : सीमा प्रबंधन के प्रमुख उद्देश्यों में देश की सीमाओं की देश के शत्रुरूपी तत्वों से रक्षा करना और वैध व्यापार तथा वाणिज्य को सुविधाजनक बनाने के साथ-साथ ऐसी प्रणालियाँ स्थापित करना सम्मिलित है जो ऐसे तत्वों को रोकने में सक्षम हों। सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए रणनीति के रूप में और देश के सीमावर्ती इलाकों में अवसंरचना का निर्माण करने के लिए सीमा प्रबंधन-1 प्रभाग द्वारा अनेक पहलें शुरू की गई हैं । इनमे भारत-पाकिस्तान, भारत-बांग्लादेश, भारत-चीन, भारत-नेपाल, भारत-भूटान एवं भारत-म्यांमार सीमाओं पर बाड़ का निर्माण, फ्लडलाइटों, सड़कों और बॉर्डर आउट पोस्ट (बीओपी) और कंपनी ऑपरेटिंग बेस (सीओबी) की स्थापना करना तथा प्रौधोगिकीय समाधान लगाना शामिल है । भारत की सीमा निम्नलिखित देशों के साथ लगती हैं :- बांग्लादेश - पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों में 4096.70 कि.मी. पाकिस्तान - गुजरात, राजस्थान, पंजाब राज्यों में और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में 3323 कि.मी. चीन - अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में 3488 कि.मी. नेपाल - उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम राज्यों में 1751 कि.मी. भूटान - सिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम और अरुणाचल प्रदेश में 699 कि.मी. म्यांमार - अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम राज्यों में 1643 कि.मी. अफगानिस्तान - केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में 106 कि.मी. सीमा प्रबंधन प्रभाग-II- यह प्रभाग अंतर्राष्ट्रीय सीमा प्रबंधन, सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम, तटीय सुरक्षा और एकीकृत जांच चौकियों की स्थापना के लिए भारतीय भू-पतन प्राधिकरण की स्थापना के लिए देश की प्रशासनिक, राजनयिक, सुरक्षा, अधिसूचना, कानूनी, विनियामक और आर्थिक एजेंसियों द्वारा की जाने वाली सम्मिलित कार्रवाई और समन्वय से संबंधित मामलों को देखता है। संगठनात्मक संरचना : यह प्रभाग केंद्र-राज्य संबंधों के कार्य देखता है, जिनमें इस प्रकार के संबंधों को शासित करने वाले संवैधानिक प्रावधानों का कार्यान्वयन, राज्यपालों की नियुक्ति, नए राज्यों का सृजन, राज्य सभा/लोक सभा के लिए नामांकन, अंतर्राज्यीय सीमा विवाद, राज्यों में अपराध के हालात पर नज़र रखना, राष्ट्रपति शासन लगाना और क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) संबंधी कार्य इत्यादि शामिल हैं| समन्वय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग (सी एंड आईसी) प्रभाग : यह यूनिट मंत्रालय के समन्वय कार्य, संसदीय मामले, लोक शिकायत (पीजी), मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के प्रकाशन, रिकॉर्ड रिटेंशन शिड्यूल, मंत्रालय की वार्षिक कार्य योजना, मंत्रालय के वर्गीकृत और अवर्गीकृत रिकार्डों की अभिरक्षा, अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों और निःशक्त व्यक्तियों से संबंधित विभिन्न रिपोर्टें प्रस्तुत करने आदि से संबंधित है। आतंकवाद-रोधी एव कट्टरवाद रोधी (सीटीसीआर) प्रभाग : यह डिवीजन आतंकवाद, आतंकवाद से मुकाबला करने, कट्टरपंथीकरण, आतंकवाद से मुकाबला करने, यूएपीए, एनआईए अधिनियम, एफआईसीएन, एफएटीएफ से संबंधित है। साइबर एवं सूचना सुरक्षा (सी एंड आई एस) प्रभाग : यह प्रभाग साइबर सुरक्षा, साइबर अपराध, राष्ट्रीय सूचना सुरक्षा नीति एवं दिशानिर्देश (एनआईएसपीजी) और एनआईएसपीजी, नैटग्रिड आदि के कार्यान्वयन से संबंधित मामले देखता है। आपदा प्रबंधन प्रभाग : यह प्रभाग प्राकृतिक आपदाओं तथा मानवजनित आपदाओं (सूखा और महामारी को छोड़कर) के दौरान तुरन्त हरकत में आने, राहत-कार्य तथा सदैव मुस्तैद रहने हेतु उत्तरदायी है| यह प्रभाग इस हेतु विधान, नीति निर्धारण, क्षमता-निर्माण, निवारण, प्रशमन तथा दीर्घकालिक पुनर्वास के लिए भी उत्तरदायी है| वित्त प्रभाग : यह प्रभाग एकीकृत वित्त योजना के अंतर्गत मंत्रालय का बजट तैयार करने और इसके संचालन तथा नियंत्रण के लिए उत्तरदायी है| विदेशी प्रभाग : यह प्रभाग वीजा, आप्रवासन, नागरिकता, भारतीय नागरिक द्वारा विदेशी नागरिकता ग्रहण करने और विदेशी अभिदाय तथा आतिथ्य स्वीकार करने के सभी मामलों से संबंधित कार्य करता है| स्वतंत्रता सेनानी और पुनर्वास प्रभाग आंतरिक सुरक्षा प्रभाग-I - यह प्रभाग विभिन्न गुटों/ उग्रवादी संगठनों की राष्ट्रविरोधी तथा विध्वंसात्मक गतिविधियों तथा आंतरिक सुरक्षा तथा कानून एवं व्यवस्था, आतंकवाद संबंधी नीति एवं सामरिक मुद्दों, सुरक्षा-मंज़ूरियों, आईएसआई की गतिविधियों पर नज़र रखने संबंधी मुद्दों और सामासिक वार्ता प्रक्रिया के एक हिस्से के रूप में आतंकवाद पर एवं नशीले पदार्थों की तस्करी पर पाकिस्तान के साथ गृह सचिव स्तरीय वार्ताओं से जुड़े मामलों से संबंधित कार्य करता है| आंतरिक सुरक्षा प्रभाग-II - यह प्रभाग आयुध अधिनियम 1959, आयुध नियम 1962, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 और अन्य संबंधित मामलों; आपराधिक मामलों में पारस्परिक विधिक सहायता हेतु निवेदन पत्र, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 और इसके तहत अभ्यावेदन, स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के प्रशासन, आतंकवादी/साम्प्रदायिक एवं नक्सली हिंसा के पीड़ितों को केंद्रीय सहायता प्रदान करने, संसद सदस्यों के विशेषाधिकारों के उल्लंघन आदि के मामलों से संबंधित कार्य करता है | जम्मू, कश्मीर और लदाख विभाग - यह प्रभाग भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 तथा जम्मू-कश्मीर संबंधी संवैधानिक मामलों तथा सामान्य नीति विषयक मामलों और उस राज्य में आतंकवाद/उग्रवाद से जुड़े मामलों से संबंधित कार्य करता है| यह प्रभाग जम्मू-कश्मीर के लिए प्रधान मंत्री के पैकेज के क्रियान्वयन के लिए भी उत्तरदायी है| वामपंथी उग्रवाद प्रभाग - पी. एस. इस पोर्टल में माओवाद के बारे में सभी संदर्भ सी पी आई (माओवादी) तथा विधि-विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 के अंतर्गत आतंकवादी संगठनों की अनुसूची में शामिल अन्यि वामपंथी उग्रवादी संगठनों के संदर्भ में हैं। पूर्वोत्तर प्रभाग - पूर्वोत्तर क्षेत्र में आठ राज्य अर्थात् अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा शामिल हैं। यह क्षेत्र सांस्कृतिक और जातीय रूप से विविध है, जिसमें 200 से अधिक जातीय समूह हैं जिनकी अलग-अलग भाषाएं, बोलियां और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान हैं। यह क्षेत्र देश के 7.97% भू-भाग को कवर करता है और यहां देश की 3.78% जनसंख्या रहती है। इसकी 5,484 किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय सीमा है अर्थात बांग्लादेश (1,880 किमी), म्यांमार (1,643 किमी), चीन (1,346 किमी), भूटान (516 किमी) और नेपाल (99 किमी)। भू-भाग, सामाजिक-आर्थिक विकास की स्थिति और ऐतिहासिक कारकों जेसै कि भाषा/जातीयता, जनजातीय प्रतिद्वंदिता, प्रवासन, स्थानीय संसाधनों पर नियंत्रण और लम्बी तथा सुभेद्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के कारण पूर्वोत्तर राज्यों में एक नाजुक सुरक्षा स्थिति उत्पन्न हुई है। इसके परिणामस्परूप विभिन्न भारतीय विद्रोही समूहों (आई.आई.जी.), जिनके पड़ोसी देशों में सुरक्षित आश्रय/कैम्प हैं, के द्वारा हिंसा, जबरन वसूली और कई प्रकार की मांगें की जाती हैं। पुलिस प्रभाग I - यह प्रभाग भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के संवर्ग नियंत्रण प्राधिकारी के रूप में कार्य करता है तथा सराहनीय/विशिष्ट सेवा तथा शौर्य के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक पुरस्कारों आदि से जुड़े मामलों से संबंधित कार्य करता है| पुलिस प्रभाग II - यह प्रभाग सीमा सुरक्षा बल के हवाई विंग तथा सभी केंद्रीय पुलिस बलों से संबंधित नीति, कार्मिक, प्रचलनात्मक (तैनाती सहित) एवं वित्तीय मामलों से संबंधित कार्य करता है| यह प्रभाग सेवारत एवं सेवानिवृत केंद्रीय पुलिस बलों के कल्याण एवं संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में तैनातियों के मामलों से संबंधित कार्य भी करता है| पुलिस बलों के आधुनिकीकरण - यह प्रभाग राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण, केंद्रीय पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए विभिन्न मदों की व्यवस्था करने/प्रापण से संबंधित मुद्दों, पुलिस सुधार और पुलिस मिशन संबंधी कार्य करता है| संघ राज्य. क्षेत्र प्रभाग - यह प्रभाग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सहित संघ राज्य क्षेत्रों से संबंधित सभी विधायी और संवैधानिक मामले देखता है| यह भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस)/भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अरुणाचल-गोवा-मिजोरम और संघ राज्य क्षेत्रों (एजीएमयू) संवर्ग एवं दिल्ली व अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह सिविल सेवा (दानिक्स)/दिल्ली-अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह पुलिस सेवा (दानिप्स) के संवर्ग नियंत्रण प्राधिकारी के रूप में भी कार्य करता है| इसके अतिरिक्त, यह संघ राज्य क्षेत्रों में अपराध और कानून एवं व्यवस्था की स्थिति पर निरंतर नजर रखने के लिए भी उत्तरदायी है | महिला की सुरक्षा - गृह मंत्रालय ने देश में महिलाओं की सुरक्षा के नियमों को शक्तिशाली करने के लिए 28 मई, 2018 को एक नया “महिला सुरक्षा प्रभाग” स्थापित किया है। और समग्र रूप से न्याय के तीव्र और प्रभावी प्रशासन के माध्यम से और महिलाओं के लिए एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करके उनमें सुरक्षा की अधिक भावना उत्पन्न करना। नया प्रभाग इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों की सहायता के लिए नीति निर्माण योजना समन्वय निर्माण और परियोजनाओं / योजनाओं को लागू करने के साथ.साथ जेल सुधार मानव तस्करी विरोधी और संबंधित विषयों के लिए जिम्मेदार है। इसमें अन्य बातों के साथ साथ आपराधिक न्याय प्रणाली में आईटी और टैकनोलॉजी का बढ़ा हुआ उपयोग और फोरेंसिक विज्ञान और अपराध और आपराधिक रिकॉर्ड के लिए एक सहायक ईको सिस्टम को सक्षम करना शामिल है। संबद्ध संगठन राष्ट्रीय सांप्रदायिक सदभाव प्रतिष्ठान, लोक नायक भवन, खान मार्किट, नई दिल्ली-3 राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थाकन, आई. पी. एस्टेट, रिंग रोड, नई दिल्ली-2 राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, एन डी एम ए भवन, ए-1, सफदरजंग एन्किलेव, नई दिल्ली योजना जेलों के आधुनिकीकरण की योजनाएं