लक्की ग्राहक और डिजिटल धन व्यापार योजना पर वीडियो देखें डिजिटल भुगतान प्रोत्साहन नीति आयोग ने निजी उपभोग पर व्यय के लिए डिजिटल भुगतान माध्यमों का प्रयोग करने वाले व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं को नकद पुरस्कार देने की लक्की ग्राहक योजना और डिजिटल धन व्यापार योजना की घोषणा गई थी। इस स्कीम का मुख्य लक्ष्य था कि गरीब, निम्न मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों को डिजिटल भुगतान के दायरे में लाना। यह इस निर्णय के अनुसार राष्ट्रीय पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) इस स्कीम को लागू करने वाली मुख्य एजेंसी थी जिसे भारत को नकदी-रहित बनाने की दिशा में मार्गदर्शक की जिम्मेदारी दी गई है। इन योजनाओं का मुख्य लक्ष्य डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित करना है जिससे की समाज के सभी वर्ग, विशेष रूप से गरीब और मध्यम वर्ग इलेक्ट्रॉनिक भुगतानों को अपना सकें। इसे समाज के सभी वर्गों और उनके उपयोग की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। श्रेणियां इसमें दो मुख्य भाग शामिल थे, एक उपभोक्ताओं के लिए और दूसरा व्यापारियों के लिए: लक्की ग्राहक योजना (उपभोक्ताओं के लिए) 100 दिनों तक की अवधि के लिए 15,000 लक्की ग्राहकों को हर रोज 1000 रुपये का ईनाम दिया गया। एक लाख रुपये, 10,000 रुपये और 5,000 रुपये के मूल्य के साप्ताहिक ईनाम उन उपभोक्ताओं को दिये गये जो डिजिटल भुगतानों के वैकल्पिक माध्यमों का उपयोग करते थे। डिजी-धन व्यापार योजना(व्यापारियों केलिए) व्यापारिक प्रतिष्ठानों में किए गए सभी डिजिटल लेनदेनों केलिए व्यापारियों के लिए ईनाम 50,000 रुपये, 5,000 रुपये और 2500 रुपये मूल्य के साप्ताहिक पुरस्कार दिये गये मेगा ड्रॉ मेगा ड्रॉ-14 अप्रैल, 2017 को अम्बेडकर जयंती पर आयोजित किया गया । 8 नवम्बर, 2016 से 13 अप्रैल, 2017 के बीच किए जाने वाले डिजिटल भुगतानों केलिए 1 करोड़ रुपये, 50 लाख रुपये और 25 लाख रुपये के मूल्य के 3 मेगा ईनाम 14 अप्रैल, 2017 को घोषित किए गये इस स्कीम का लक्ष्य था छोटे लेन-देनों (सामान्य नागरिक द्वारा) केलिए सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहन राशियां 50 रुपये और 3000 रुपये के बीच में किए जाने वाले लेन-देनों केलिए प्रदान की गईंय़उपभोक्ताओं और व्यापारियों/उपभोक्ताओं तथा सरकारी एजेंसियों के बीच सभी लेन-देनों और सभी एईपीएस लेन-देनों को प्रोत्साहन योजना में शामिल किया गया। इस स्कीम के विजेताओं को एनपीसीआई द्वारा इस उद्देश्य के लिए विशेष रूप से विकसित किए जाने वाले सॉफ्टवेयर द्वारा पात्र लेन-देन आईडी संख्या (जो कि लेन-देन पूर्ण होते ही स्वचालित रूप से उत्पन्न हो जाती है।) के यादृच्छिक (क्रम रहित) ड्रॉ के माध्यम से पहचाना गया। एनपीसीआई को इसके तकनीकी और सुरक्षा ऑडिट को सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिये गये थे जिससे कि इस प्रक्रिया की तकनीकी अखंडता को भी सुनिश्चित किया जा सके। स्त्रोत: पीआईबी