भूमिका महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तथा इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग दोनों के सहयोग से 'खोया-पाया' पोर्टल प्रारंभ किया गया। लापता बच्चों की खोज के लिए सरकार डिजिटल तकनीक का पूरा सहारा लेगी। अब हजारों लोग मिलकर लापता बच्चों को ढूंढेंगे और कोई ऐसा भी हो सकता है जो बच्चे का पता बता दे। इसके लिए बस आपको गुमशुदा बच्चे का ब्योरा और फोटो 'खोया-पाया' पोर्टल पर डालना होगा। सरकार ने गुमशुदा बच्चों की सूचना आदान प्रदान करने के लिए 'खोया-पाया' पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल पर कोई भी नागरिक गुमशुदा या कहीं मिले बच्चे अथवा वयस्क की सूचना अपलोड कर सकता है। पोर्टल की शुरुआत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तथा इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने मिलकर 2 जून 2015 को 'खोया-पाया' पोर्टल जारी किया। पोर्टल के प्रारंभ होने पर महिला बाल विकास मंत्री मेनका गांधी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि गुमशुदा बच्चों का पता लगाने के लिए यह पोर्टल सशक्त मंच साबित होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि डिजिटल तकनीकी का इस्तेमाल गरीबों की मदद के लिए हो और यह पोर्टल विशेषतौर पर गरीबों के गुमशुदा बच्चों को ढूंढने का जरिया बनेगा। उनका कहना था कि अमीरों के बच्चे गायब नहीं होते और अगर गुम भी हो जाते हैं तो मिल जाते हैं। लेकिन गरीब का बच्चा अगर गुम हो जाता है, तो जल्दी नहीं मिलता। गरीब व्यक्ति कुछ दिन तक अपना बच्चा ढूंढता है और फिर संसाधनों की कमी के चलते चुपचाप बैठ जाता है। यह पोर्टल ऐसे ही साधनहीन लोगों की मदद करेगा। इस पोर्टल की मदद से लोग अपने आप सूचना अपलोड कर सकते हैं.' इस वेबसाइट पर आमलोग जहां ऐसे गुम बच्चों के फोटो और डाल सकते हैं वहीं इन बच्चों के अभिभावक भी अपने बच्चे के बारे में सूचना डाल सकते हैं। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के अनुसार हर साल लापता होने वाले बच्चों का आंकड़ा 70 हजार है। इस पोर्टल को मोबाइल फोन से भी संचालित किया जा सकता है। इसलिए यह दूर दराज के गांवों में भी कारगर साबित होगा। इस पोर्टल से पुलिस सहायता और बाल सहायता वेबसाइट भी जोड़ी गई है। लापता बच्चे की सूचना आदान प्रदान करने वाला 'खोया-पाया' एप मुफ्त में मोबाइल पर भी डाउनलोड किया जा सकता है। इसमें सिर्फ लापता नहीं बल्कि पाए गए बच्चों की भी जानकारी दी जा सकती है। पूर्वस्थिति और नई व्यवस्था भारत में लापता बच्चों का पोर्टल है, लेकिन यह पोर्टल फिलहाल पुलिस द्वारा संचालित होता है। इसमें उन्हीं लापता बच्चों का ब्योरा होता है, जिसकी पुलिस में सूचना दी जाती है। लेकिन इस नये पोर्टल में पुलिस में केस दर्ज कराने से पहले भी गुमशुदा की सूचना डाली जा सकती है। उन्होंने कहा कि भारत में ऐसा पोर्टल पहली बार शुरू हो रहा है। वैसे विदेश में ऐसे पोटर्ल हैं और करीब 25 फीसद गुमशुदा बच्चे पुलिस में मामला दर्ज होने से पहले ही पोटर्ल में दी गई सूचना से मिल जाते हैं। हालांकि उन्होंने कहाकि लापता बच्चे की पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई जानी चाहिए। फिलहाल लापता बच्चों के लिए 'ट्रैक चाइल्ड' नामक एक वेबसाइट है जो पुलिस और नागरिक समेत संबंधित पक्षों के बीच नेटवर्किंग प्रणाली उपलब्ध कराती है ताकि गुम बच्चे का पता लगाने में आसानी हो। मेनका गांधी ने कहा, 'यह अनोखी पहल है। वैसे हमारे पास ट्रैक चाइल्ड वेबसाइट है लेकिन इसकी कुछ सीमाएं हैं क्योंकि यह मूल रूप से पुलिस की है। अतएव, एक पोर्टल की जरुरत महसूस की गयी जिसमें सभी हिस्सा ले सकें। 'खोया-पाया' पोर्टल की विशेषताएँ पोर्टल के माध्यम से खोये बच्चे का पता जान पाएंगे, समय की बचत होगी। पाये बच्चे की वेबसाइट के माध्यम से जानकारी दी जा सकेगी। खोया-पाया' पोर्टल पर सूचनाएं जानकारी, फोटो,वीडियो, और अन्य माध्यम से दी जा सकेगी। रिपोर्ट किये गये मामले की प्रारंभिक जाँच के पश्चात ही जानकारी पोर्टल पर सार्वजानिक की जाएगी। 'खोया-पाया' पोर्टल पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 1. कौन खोया-पाया पोर्टल के साथ रजिस्टर कर सकते हैं ? भारत का कोई भी नागरिक खोया-पाया पोर्टल के साथ रजिस्टर कर सकते हैं। 2. मुझे मोबाइल फोन की सुविधा नहीं है। मैं कैसे पोर्टल के साथ रजिस्टर कर सकता हूँ? आप मोबाइल फोन के बिना पोर्टल के साथ पंजीकृत नहीं कर सकते हैं। 3. क्या मैं लॉगिन और पासवर्ड के साथ रजिस्टर कर सकता हूँ? आप लॉगिन और पासवर्ड के साथ पंजीकृत नहीं कर सकते। आपको एक मोबाइल फोन की जरूरत होगी। 4. मैंने अपना मोबाइल नंबर दर्ज किया है लेकिन OTP नहीं आया था। नेटवर्क व्यस्त हो सकता है। इंतजार करें या कुछ समय के बाद प्रयास करें। 5. मैंने पोर्टल में एक मामले की सूचना दी है। लेकिन यह खोज सूची में दिखाई नहीं दे रहा है। पोर्टल में दर्ज मामलों केवल प्रारंभिक जांच के बाद ही सार्वजनिक किया जाएगा। 6. मैंने पोर्टल में एक मामले की सूचना दी है। मैं बाद में उस मामले के बारे में कुछ और जानकारी जोड़ सकते हूँ ? हाँ, कृपया पोर्टल के “माय एकाउंट” अनुभाग में जाएँ और “एडिट” बटन दबाएँ जिस मामले को संशोधित करनी है। 7. क्या पहले से सूचित किया मामले को मैं बंद कर सकता हूँ। हाँ, कृपया पोर्टल के “माय एकाउंट” अनुभाग में जाएँ और “क्लोजर” बटन दबाएँ जिस मामले को बंद करनी है। 8. मैं खोया-पाया पोर्टल में बच्चे लापता के एक मामले की सूचना दी है। क्या मुझे पुलिस को भी सूचित करना चाहिए? हाँ, यह खोये हुए बच्चे के मामले में पुलिस के साथ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए अनिवार्य है। 9. पंजीकरण के दौरान मैं एसएमएस के माध्यम से एक पासवर्ड प्राप्त हुआ है। कैसे मैं इस पासवर्ड का उपयोग कर प्रवेश कर सकते हैं? पंजीकरण के दौरान दिए गए पासवर्ड मोबाइल एप्लिकेशन में लॉग इन के लिए है। पोर्टल में लॉग इन के लिए एक बार पासवर्ड (OTP) का उपयोग करने के लिए है जो मोबाइल में भेजा जाती रही है । स्रोत: https://trackthemissingchild.gov.in/