भूमिका जनता को सशक्त बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी को शुरू करने के उद्देश्य से अनेक पहल की गई हैं। कुछ पहल के परिणामस्वरूप स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम और रोजगार तथा वाणिज्य आदि से संबंधित क्षेत्रों में विभिन्न सेवाओं का विस्तार हुआ है। डिजिटल इंडिया की भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञानपूर्ण अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करने के लिए एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के रूप में परिकल्पना की गई है। ज्ञानपूर्ण अर्थव्यवस्था बनाने के लिए और समस्त सरकार की समकालिक और समन्वित भागीदारी द्वारा प्रत्येक नागरिक के लिए सुशासन लाने के उद्देश्य से इस अकेले कार्यक्रम के अधीन विभिन्न पहलों को शामिल किया गया है। कार्यक्रम की परिकल्पना व क्रियान्वयन यह कार्यक्रम इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा विभिन्न केन्द्रीय मंत्रालयों/विभागों और राज्य सरकारों के सहयोग से तैयार और समन्वित किया गया है। प्रधानमंत्री डिजिटल इंडिया की निगरानी समिति के अध्यक्ष हैं। सभी वर्तमान और आगामी ई-शासन पहलों को डिजिटल इंडिया के सिद्धांतों के अनुसार संशोधित और पुन: तैयार किया गया। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के विजन का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स सेवाओं, उत्पादों, विनिर्माण और रोजगार के अवसरों आदि के क्षेत्रों का समग्र विकास करने का भी है। डिजिटल इंडिया का विजन डिजिटल इंडिया का विजन तीन मुख्य क्षेत्रों पर केन्द्रित है- डिजिटल बुनियादी ढांचा प्रत्येक नागरिक की उपयोगिता के रूप में। मांग पर शासन एवं सेवायें। नागरिकों का डिजिटल सशक्तिकरण। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का उद्देश्य उपरोक्त विजन के साथ डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का उद्देश्य ब्रॉडबैंड हाईवे, मोबाइल जुड़ाव के लिए वैश्विक पहुंच, सार्वजनिक इंटरनेट पहुंच कार्यक्रम, ई-शासन : प्रौद्योगिकी के माध्यम से सरकार में सुधार, ई-क्रांति सेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक आपूर्ति की जानकारी, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण : लक्ष्य शून्य आयात, रोजगार के लिए सूचना प्रौद्योगिकी और शीघ्र हार्वेस्ट कार्यक्रम उपलब्ध कराने का है। अनेक परियोजनायें/उत्पाद या तो पहले ही लांच किये जा चुके है या लांच किये जाने के लिए तैयार है। जैसाकि नीचे दर्शाया गया है- डिजिटल लॉकर प्रणाली का उद्देश्य वस्तुगत दस्तावेजों के उपयोग को न्यूनतम करना और विभिन्न एजेंसियों में ई-दस्तावेज की हिस्सेदारी में समर्थ बनाना है। ई-दस्तावेज की हिस्सेदारी पंजीकृत संग्राहकों के माध्यम से की जाएगी, जिससे ऑनलाइन दस्तावेजों की प्रमाणिकता सुनिश्चित होगी। माईगव डॉट इन ''डिस्कस'' ''डू'' और ''डिसिमिनेट'' पहुंच के द्वारा शासन में लगे प्रत्येक नागरिक के लिए एक प्लेटफॉर्म के रूप में लागू की गई है। माईगोव के लिए मोबाइल ऐप एक मोबाइल फोन पर प्रयोगकर्ताओं के लिए ये विशिष्टताएं उपलब्ध कराई जाएंगी। स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) मोबाइल ऐप का उपयोग स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए जनता और सरकारी संगठनों द्वारा किया जा सकेगा। ई-हस्ताक्षर ढांचे से नागरिक आधार प्रामाणिता उपयोग करते हुए ऑनलाइन दस्तावेजों पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर कर सकेंगे। ई-हॉस्पिटल एप्लीकेशन के अधीन ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम (ओआरएस) शुरू किया गया है। यह एप्लीकेशन ऑनलाइन पंजीकरण, शुल्क और मिलने के निश्चित समय का भुगतान, ऑनलाइन निदान रिपोर्ट, ऑनलाइन रक्त की उपलब्धता की जानकारी जैसी मुख्य सेवायें उपलब्ध कराएगी। नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल से छात्रों के आवेदन पत्र जमा करने, सत्यापन, स्वीकृति और सभी लाभार्थियों को भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही छात्रवृत्तियों के वितरण तक की प्रक्रिया का एक मुश्त समाधान हो सकेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने देश में व्यापक स्तर पर रिकॉर्ड को डिजिटाइज करने के लिए डिजिटाइज इंडिया प्लेटफॉर्म (डीआईपी) नामक एक पहल शुरू की गई है, जो नागरिकों को कुशल सेवायें प्रदान करेगी। भारत सरकार ने भारत नेट नामक एक पहल शुरू की है, जो देश की ढ़ाई लाख ग्राम पंचायतों को जोड़ने के लिए उच्च गति का डिजिटल हाईवे है। बीएसएनएल ने 30 साल पुराने एक्सचेंजों को हटाने के लिए नेस्ट जनरेशन नेटवर्क (एनजीएन) शुरू किया है, जो वॉयस, डाटा, मल्टीमीडिया/वीडियो और अन्य सभी प्रकार की पैकेट स्विच संचार सेवाओं को नियंत्रित करने के लिए आईपी आधारित प्रौद्योगिकी है। बीएसएनएल ने पूरे देश में वाई-फाई, हॉटस्पोट्स की तैनाती की है। इससे उपयोगकर्ता अपने मोबाइल उपकरणों द्वारा बीएसएनएल वाई-फाई नेटवर्क का उपयोग कर सकता है। नागरिक सेवायें इलेक्ट्रॉनिक रूप से उपलब्ध कराने और नागरिकों तथा प्राधिकारियों की एक दूसरे के साथ बातचीत में सुधार लाने के लिए यह देशव्यापी जुड़ाव बहुत जरूरी है। सरकार ने इस जरूरत को महसूस किया है और यह डिजिटल इंडिया में ब्रॉडबैंड हाईवे को डिजिटल इंडिया का एक मुख्य स्तम्भ के रूप में शामिल करके दर्शाया गया है। देश के नागरिकों को सेवाओं की आपूर्ति में सहायता करने के लिए प्रौद्योगिकीको उपलब्ध कराने और समर्थ बनाने के लिए जुड़ाव एक मानदंड है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने ई-शासन में ई-क्रांति ढांचा, भारत सरकार के लिए ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर अपनाने पर नीति, ई-शासन प्रणालियों में ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर अपनाने के लिए ढांचा, भारत सरकार के लिए ओपन एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेसेज (एपीआई) के लिए नीति, भारत सरकार की ई-मेल नीति, भारत सरकार की सूचना प्रौद्योगिकी संसाधनों के उपयोग पर नीति, सरकारी एप्लीकेशन के साधन कोड को खोलने के लिए सहयोगपूर्ण एप्लीकेशन विकास पर नीति, कलाउड रेडी एप्लीकेशन के लिए एप्लीकेशन विकास एवं रि-इंजीनियरिंग दिशानिर्देश जैसी नीति पहल शुरू की हैं। विभिन्न पूर्वोत्तर राज्यों और अन्य राज्यों के छोटे और मुफस्सिल शहरों में बीपीओ केन्द्र खोलने के लिए बीपीओ नीति को मंजूरी दी गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निधि (ईडीएफ) नीति का उद्देश्य नवाचार, अनुसंधान और विकास, उत्पाद और विकास को प्रोत्साहन देने उपक्रम निधियों के आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी प्रणाली का सृजन करने के लिए देश में आईपी का संसाधन पूल स्थापित करना है। फिलेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स के उभरते हुये क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए फलेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए राष्ट्रीय केन्द्र एक पहल है। इंटरनेट ऑन थिंक्स (आईओटी) के लिए उत्कृष्टता केन्द्र इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, ईआरएनईटी और नेस्सोकेम की संयुक्त पहल है। 2019 तक डिजिटल इंडिया के अनुमानित प्रभाव से सभी पंचायतों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से लेकर स्कूलों और विश्वविद्यालयों में वाई-फाई और सार्वजनिक रूप से वाई-फाई हॉटस्पोर्ट उपलब्ध हो जाएंगे। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस कार्यक्रम से भारी संख्या में सूचना प्रौद्योगिकी, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स रोजगार पैदा होंगे। इस कार्यक्रम की सफलता से भारत डिजिटल रूप से सशक्त बनेगा और स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, बैंकिंग जैसे क्षेत्रों से संबंधित सेवाओं की आपूर्तिमें सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग में शीर्ष स्थान पर होगा। इस कार्यक्रम की प्रमुखता डिजिटल इंडिया देश भर में इलेक्ट्रॉनिक गवर्नेंस और यूनिवर्सल फोन कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए एक बड़े पैमाने पर तकनीक विस्तार देने का काम करेगा। इसका एक उद्देश्य ऐसी प्रौद्योगिकी का निर्माण करना होगा, जो देश के डिजिटल डिवाइड की खाई को पाट सके। इसे भारत के भविष्य के बदलाव के रूप में पेश किया है। प्रधानमंत्री का मानना है कि पहले जिस प्रकार बच्चा पढ़ाई की नकल करने के लिए घर के किसी व्यक्ति का चश्मा लगाकर बैठ जाता था अब उसी तरीके से वह मोबाइल का उपयोग करेगा। अब ई गवर्नेंस को एम गवर्नेंस में बदलना है। एम गवर्नेंस का मतलब मोदी सरकार नहीं है बल्कि मोबाइल सरकार है। उन्होंने इस बात को समझाने की पूरी कोशिश की कि किस प्रकार यह हमारे लिए जरूरी है। इसका उद्देश्य 2020 तक भारत को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का है। इसके साथ ही वह 100 मिलियन रोजगार भी उत्पन्न किए जाएंगे। बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था और मोबाइल की गिरती हुईं कीमतों ने भारत को स्मार्टफोन का विश्व में एक बहुत बड़ा बाजार बना दिया है। अब तकनीक के माध्यम से इस बाजार का उपयोग शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भी किया जाना है । ब्रॉडबैंड हाईवे: डिजिटल इंडिया का प्रमुख स्तम्भ ब्रॉडबैंड हाईवे एक काल्पनिक डिजिटल सड़क है, जिस पर हर प्रकार की सुविधाएं ई-गवरनेंस के माध्यम से मिलेंगी। नागरिक सेवायें इलेक्ट्रॉनिक रूप से उपलब्ध करायी जायेंगी और नागरिकों तथा प्राधिकारियों की एक दूसरे के साथ बातचीत कराने के लिये माध्यम बनाये जायेंगे। डिजिटल इंडिया में ब्रॉडबैंड हाईवे को डिजिटल इंडिया का एक मुख्य स्तम्भ के रूप में माना जा रहा है। देश के नागरिकों को सेवाओं की आपूर्ति में सहायता करने के लिए प्रौद्योगिकी को उपलब्ध कराने और समर्थ बनाने के लिए जुड़ाव एक मानदंड है यह। देश को जोड़ेगा ब्रॉडबैंड हाईवे विभिन्न पूर्वोत्तर राज्यों और अन्य राज्यों के छोटे और मुफस्सिल शहरों में बीपीओ केन्द्र खोलने के लिए बीपीओ स्थापित किये जायेंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निधि (ईडीएफ) नीति का उद्देश्य नवाचार, अनुसंधान और विकास, उत्पाद और विकास को प्रोत्साहन देने उपक्रम निधियों के आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी प्रणाली का सृजन करने के लिए देश में आईपी का संसाधन पूल स्थापित किया जायेगा। फलेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स के उभरते हुये क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए फलेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए राष्ट्रीय केन्द्र बनाया जायेगा। इसके अंतर्गत् इंटरनेट ऑन थिंक्स (आईओटी) के लिए उत्कृष्टता केन्द्र इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, ईआरएनईटी और नेस्सोकेम की संयुक्त पहल है। 2019 तक डिजिटल इंडिया के अनुमानित प्रभाव से सभी पंचायतों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से जोड़ा जायेगा। कन्या कुमारी से लेकर श्रीनगर तक सभी स्कूलों और विश्वविद्यालयों में वाई-फाई और सार्वजनिक रूप से वाई-फाई हॉटस्पोर्ट उपलब्ध हो जाएंगे। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस कार्यक्रम से भारी संख्या में सूचना प्रौद्योगिकी, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स रोजगार पैदा होंगे। इस ब्रॉडबैंड हाईवे के माध्यम से पूरा भारत डिजिटल रूप से सशक्त बनेगा। यह वो हाईवे है जो स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, बैंकिंग जैसे क्षेत्रों से संबंधित सेवाओं की आपूर्ति में सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग में शीर्ष स्थान पर ले जायेगा। डिजिटल इंडिया पर देखिए यह कहानी स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय,भारत सरकार एवं दैनिक समाचार, https://loksabhadocs.nic.in