परिचय एक मिशन मोड परियोजना (एमएमपी) राष्ट्रीय ई-शासन योजना (एनईजीपी) के अंदर एक वैयक्तिक परियोजना है जो बैंकिंग, भूमि अभिलेख या वाणिज्यिक कर आदि के एक पक्ष पर केन्द्रित है। एनईजीपी के अंदर ''मिशन मोड'' का अर्थ है वे परियोजनाएं जिनमें उद्देश्यों, विस्तारों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है और इनके कार्यान्वयन की समय सीमा तथा पड़ाव और मापन योग्य परिणाम तथा सेवा स्तर भी परिभाषित हैं। एनईजीपी में 44 मिशन मोड परियोजनाएं (एमएमपी) हैं, जिन्हें पुन: राज्य, केन्द्र या समेकित परियोजनाओं में वर्गीकृत किया गया है। प्रत्येक राज्य सरकार पांच विशिष्ट एमएमपी को वैयक्तिक जरूरतों के अनुसार भी परिभाषित कर सकती है। केन्द्रीय मिशन मोड परियोजना (केन्द्रीय एमएमपी) बैंकिंग बैंकिंग एमएमपी प्रचालन दक्षता और हैंडलिंग में शामिल प्रयासों में सुधार लाने तथा लेन देन निपटान में होने वाले विलंब को कम करने की दिशा में उठाया गया एक अन्य कदम है। बैंकिंग उद्योग द्वारा कार्यान्वित एमएमपी का लक्ष्य अलग अलग बैंकों द्वारा किए गए विभिन्न ई-सेवा प्रयासों को सुचारू बनाने पर लक्षित है। इनका कार्यान्वयन बैंकिंग विभाग द्वारा दी गई एक व्यापक रूप रेखा तथा मार्गदर्शन सहित संबंधित बैंक द्वारा किया जा रहा है। भारत में कोर बैंकिंग प्रौद्योगिकी के विकास से भारतीय ग्राहकों को ''किसी भी समय, कहीं भी बैंकिंग'' की सुविधा मिली है। अब यह अभियान विभिन्न बैंकों के कोर बैंकिंग समाधानों को समेकित करने की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे प्रचालन दक्षता आने और हैंडलिंग तथा लेन देन निपटान में शामिल समय और प्रयासों में कमी आने की आशा है, और इससे ग्राहक सेवा में सुधार आएगा और इसके विनियामक पालन की सुविधा मिलेगी। बैंकिंग एमएमपी में निम्नलिखित सेवाएं शामिल हैं एसएआरएफएईएसआई अधिनियम, 2002 के तहत इलेक्ट्रॉनिक केंद्रीय रजिस्ट्री एक भारत एक खाता – सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए इलेक्ट्रॉनिक बृहत भुगतान प्रणाली केंद्रीय उत्पाद शुल्क केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सेवा कर निर्मितियों द्वारा अपने नियमित व्यापार के साथ ट्रेड और उद्योग को चलाने के लिए केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सेवा कर (एसीईएस) के स्वचालन नामक सॉफ्टवेयर अनुप्रयोग के विकास और तैनाती द्वारा एक बड़ा परिवर्तन किया है। एसीईएस का लक्ष्य करदाता सेवाओं में सुधार, भारत में अप्रत्यक्ष कर में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता लाना है। इस अनुप्रयोग से वेब आधारित और कार्य प्रवाह आधारित प्रणाली के माध्यम से केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सेवा कर की सभी प्रमुख प्रक्रियाओं का स्वचालन किया गया है। केंद्रीय उत्पाद शुल्क एमएमपी में निम्नलिखित सेवाएं शामिल हैं केंद्रीय उत्पाद शुल्क निर्धारिती का ऑनलाइन पंजीकरण और ऑनलाइन संशोधन सेवा कर निर्धारिती का ऑनलाइन पंजीकरण और ऑनलाइन संशोधन केंद्रीय उत्पाद शुल्क विवरणी की इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग सेवा कर विवरणी की इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग विभाग अनुमतियों, सूचनाओं की इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग के साथ कार्य के दौरान निर्धारितियों द्वारा जमा किए गए दावों, विशिष्ट दस्तावेज पहचान संख्या सहित दस्तावेजों की तत्काल ई-पावती ऑनलाइन जमा किए गए दस्तावेजों को देखना, फाइल करना तथा स्थिति का ट्रेक निर्धारितियों द्वारा जमा किए गए दावों, अनुमतियों, सूचनाओं का संसाधन राजस्व पुनर्विनियोजन (इजिएस्ट का उपयोग करते हुए बैंकों से भुगतान सूचना की प्राप्ति और निर्धारितियों द्वारा जमा की गई विवरणी में दी गई सूचना के साथ पुनर्विनियोजन) व्यापार संबंधित मामलों पर प्रयोक्ताओं को ऑनलाइन संदेश / एलर्ट स्वचालित रिपोर्ट तैयार करना जोखिम पैरामीटरों से यूनिट आधारित चयन सहित लेखा परीक्षण मॉड्यूल और लेखा परीक्षण परिणामों की ट्रेकिंग कारण बताओ सूचना के उत्तर ऑनलाइन जमा करना अनंतिम आकलन के लिए आवेदन ऑनलाइन जमा करना दावों की वापसी ऑनलाइन जमा करना चुने गए निर्यात संबंधी दस्तावेजों को ऑनलाइन जमा करना ई-कार्यालय भारत सरकार ने सूचना और संचार प्रौद्योगिकी को आरंभ करने के माध्यरम से केंद्र सरकार के कार्यालयों के आधुनिकीकरण की आवश्य कता को पहचाना है। प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरएंडपीजी) द्वारा ई-कार्यालय मिशन मोड परियोजना ली गई है ताकि सरकारी कार्रवाइयोंद और सेवा प्रदायगी प्रक्रियाओं में दक्षता सुधारी जा सके। इस उत्पांद का लक्ष्यों कार्य प्रवाह के उपयोग को बढ़ाने और नियम आधारित फाइल रूटिंग, फाइलों एवं कार्यालय आदेशों की शीघ्र खोज और पुन: प्राप्ति, अभिप्रमाणन के लिए डिजिटल हस्ताक्षर, प्रपत्र और रिपोर्टिंग घटक। ई-कार्यालय द्वारा दी जाने वाली सेवाएं इस प्रकार हैं फाइल भेजते / प्राप्त करते समय डिजिटल हस्ता्क्षर प्रमाणपत्र और इंक्रिप्शकन के माध्यम से सुरक्षा बढ़ाना प्रयोक्ता् के नाम और पासवर्ड के माध्यम से साइन इन हस्ताक्षर सहित अभिप्रमाणन। ई-फाइलों / रसीदों को देखने / संपादन के लिए भूमिका आधारित पहुंच, इस प्रकार उच्च गोपनीय प्रकार की फाइलों / रसीदों को सुरक्षित रखना। फाइलों / रसीदों की पुन: प्राप्ति के लिए शक्तिशाली खोज प्रणाली और इनके लंबित होने का संकेत देने के लिए एलर्ट प्रदान करना, प्राप्तर फाइलों / रसीदों की विशिष्ट श्रेणी। एमआईएस / रिपोर्ट उत्पा्दन तथा फाइलों / रसीदों के एक पारदर्शी लेखा परीक्षण / अवगमन विवरण है। कार्य प्रवाह आधारित प्रणाली के माध्यम से आपदा प्रबंधन के लिए ठोस बैक अपनीति फाइल के मानक और रिकॉर्ड प्रबंधन के रूप में सामान्यआ भंडार, केएमएस, डीएमएस द्वारा शीघ्र निर्णय लेने के लिए ज्ञान को बढ़ाने में वृद्धि विभागों के बीच संचार और समन्वसय में सुधार लाने के लिए संदेश भेजने, निर्देशिका सेवा, चर्चा फोरम बनाना तथा फाइलों / रसीदों के स्थानांतरण के लिए संदेश वाहकों को हटाना। आयकर भारत के आयकर विभाग द्वारा एक ऐसी व्यापक सेवा की स्थापना के लिए योजना का कार्यान्वयन किया गया है जिससे नागरिक विभाग के साथ कहीं भी, किसी भी समय अपने लेन देन के सभी कार्य कर सकें। कंपनियों के लिए आयकर की विवरणी हर वर्ष ऑनलाइन जमा करना अनिवार्य है। सेवाएं इस प्रकार से हैं पैन और टैन का आबंटन चालान स्थिति की पूछताछ पैन / टैन आवेदन की ई-फाइलिंग आयकर विवरणियों का कम्प्यूटरीकृत संसाधन अपनी पैन / टैन सुविधाओं को जानें डिजिटाइज़ आईटीआर में आय की विवरणी की ई-फाइलिंग पैन / टैक आवेदनों की स्थिति की ट्रेकिंग और शिकायत निपटान विभाग के वेबसाइट के माध्यम से वेब पर कर सूचना का प्रसार बैच विधि में पैन की पूछताछ ओएलटीएएस के माध्यम से कर भुगतानों का लेखा ऑनलाइन कर गणना सभी टीडीएस कार्यों का कम्प्यूटरीकरण, फाइलिंग, भुगतान से लेकर संसाधन तक डाउनलोड करने योग्य ई-प्रपद्ध ऑनलाइन एआईआर विवरणी जमा करना और एआईआर भरने वाली की सूचना ऑनलाइन विवरणी तैयार करने का सॉफ्टवेयर करों का ई-भुगतान चालान डाउनलोड करना रिफंड की शीघ्र प्रदायगी के लिए बैंकर फंड बीमा बीमा को आज भारत में एक बहुत बड़े व्यापार अवसर के रूप में देखा जाता है। विशाल जनसंख्या आधार और बड़े स्तर पर पहुंच से दूर बाजार के क्षेत्रों से पिछले कुछ वर्षों में इस व्याखपार को अपार वृद्धि मिली है। प्रभावशाली वृद्धि के बावजूद देश में बीमा कराने वालों की संख्या अब भी कम है। भारतीय आबादी में अधिकांश लोगों के पास जीवन और स्वास्थ्य कवर नहीं होता है। इससे आने वाले वर्षों में इसे क्षेत्र की वृद्धि संभाव्याता की एक झलक मात्र मिलती है। सामान्य बीमा व्यापार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम 1972 के माध्यम से 107 बीमाकर्ताओं को चार कंपनियों अर्थात नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लि., न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लि., द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लि. और यूनाइटिड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लि. में सम्मिलित और समाहित किया गया था। निजी भागीदारी के लिए बीमा क्षेत्र को खोलने से गतिशील चुनौतियां मिली हैं। पिछले कुछ वर्षों में जीवन और गैर जीवन, दोनों पकार के बीमाकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भारत में अपनी उपस्थिति बनाई है, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों के लिए प्रतियोगिता बढ़ी है। निजी कंपनियां नवाचारी उत्पादों, स्मार्ट विपणन और सक्रिय वितरण के माध्य्म से नए ग्राहकों को आकर्षित करने में प्रौद्योगिकी पर निर्भर करती हैं। ग्राहक सेवा इस क्षेत्र का हॉल मार्क है और इसलिए यह सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों के लिए अनिवार्य हो गया है कि वे अपने प्रचालनों का कम्प्यूटरीकरण करे तथा वैयक्तिक उत्पादों और सेवाओं के माध्यम से ग्राहकों को एक विश्वक स्तबरीय सेवा अनुभव प्रदान करने के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकी अपनाएं। इस विचार के साथ बीमा एमएमपी की संकल्पना की गई थी। बीमा एमएमपी का मिशन है।''सार्वजनिक क्षेत्र बीमा कंपनियों की बेहतर सेवा प्रदायगी प्रक्रिया के लिए एक समेकित सूचना प्रौद्योगिकी समाधान का विकास''| बीमा द्वारा दी जाने वाली सेवाएं इस प्रकार है : पॉलिसी को ऑनलाइन जारी करना / नवीकरण प्रीमियम गणना और प्रीमियम की ऑनलाइन प्राप्ति दावों का ऑनलाइन संसाधन और दावों का निपटान पॉलिसी दस्तावेजों को सॉफ्ट रूप में भंडारित करना शिक्षा और सूचना द्वारा ग्राहक जागरूकता में सुधार शिकायतों का ऑनलाइन पंजीकरण / निपटान (सीधे ग्राहकों से) शिकायतों का ऑनलाइन पंजीकरण / निपटान / डीपीजी / भारत सरकार / वीआईपी से संदर्भित आईवीएफआरटी भारत एक बड़े पर्यटन गंतव्य के रूप में उभरा है और यहां बड़े व्यापार तथा सेवा केन्द्र भी हैं। आप्रवास जांच चौकी संपर्क का पहला बिन्दु है जहां देश के बारे में सार्वजनिक और लोकप्रिय अवधारणा बनती है, इस प्रकार यहां शीघ्र और प्रयोक्ता अनुकूल सेवाओं के आधुनिकतम रूप होना अनिवार्य है। सुरक्षा में समझौता किए बिना वैध यात्रियों को जेनेरिक उद्देश्य के अंदर यह अनिवार्य है कि सुरक्षा को बढ़ाने के लिए एक निरापद, समेकित सेवा प्रदायगी रूपरेखा का विकास किया जाए और वीसा जारी करने की प्रक्रिया में सुविधा दी जाए, और आप्रवास कार्य विदेशियों पर प्रभावी निगरानी के लिए विदेशी पंजीकरण प्रक्रिया की पूर्ति भी करें। पासपोर्ट, वीसा जारी करना और वाणिज्य दूतावास संबंधित मामले, आप्रवास, विदेशी पंजीकरण और ट्रेकिंग एवं उत्प्रवास आपस में संबधित विषय हैं जिसमें गृह मंत्रालय (एमएचए), विदेश मंत्रालय (एमईए), विदेशी भारतीय कार्य मंत्रालय (एमओआईए), केन्द्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्के बोर्ड और नागर विमानन शामिल हैं। भारत सरकार के अन्य अनेक मंत्रालय (स्वास्थ्य और परिवार कल्या्ण मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय आदि) भी इस परियोजना में भागीदारी रखते हैं। आप्रवास सेवाओं के आधुनिकीकरण और उन्नयन की परियोजना को अभिज्ञात किया गया है तथा इसे गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय ई-शासन योजना (एनईजीपी) के तहत एक मिशन मोड परियोजना के रूप में लिया गया है। इस परियोजना को राज्य और / जिला मुख्यालयों में 169 मिशनों, 77 आईसीपी (प्रवास जांच चौकियों), 5 एफआरआरओ (विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय), और एफआरओ (विदेशी पंजीकरण कार्यालय) में कार्यान्वित किया जाएगा। सेवाएं इस प्रकार है कुल 37 सेवाओं में से 9 केन्द्रीय सेवाएं वीसा, आप्रवास और विदेशी पंजीकरण एवं नजर रखने की प्रक्रियाओं को समेकित और सुचारु बनाने के लिए एनएमपी के तहत लाई जानी है। इन 9 केन्द्रीय सेवाओं को इस परियोजना के तहत लाने की संकल्पाना की गई है : संगत सूचना तक बहु मार्ग पहुंच देकर यात्रियों के लिए सुविधा सेवाएं और प्रपत्र जमा कराना ऑनलाइन समय तय करना, आवेदन की स्थिति पर नजर रखना, फीडबैक और शिकायत निपटान, वीसा जारी करने की सेवा प्रभावी संग्रह और यात्री सूचना प्रसार के लिए यात्रियों हेतु 'विशिष्ट प्रकरण फाइलों' के डेटाबेस का समेकन मिशन, आप्रवास और एफआरआरओ में दस्ता वेज सत्यापन और अधिप्रमाणन सेवाएं आप्रवास के समय यात्रियों को प्रभावी सुविधा प्रदान करना प्रोफाइलिंग, जोखिम आकलन और निगरानी सूचीकरण में समेकित मार्ग के माध्यम से लक्षित प्रभावी हस्त्क्षेप एजेंसियों के अंदर की सूचना और एलर्ट जारी करने की सेवाएं एलर्ट उत्पन्न करना और प्रसार सेवा निगम कार्य मंत्रालय (एमसीए)21 निगम कार्य मंत्रालय (एमसीए), भारत सरकार द्वारा कार्यान्वित एमसीए21 परियोजना की संकल्पना "शासकीय सेवाओं की डिजाइन और प्रदायगी में एक सेवा उन्मुगख मार्ग आरंभ करना" है। इसका मिशन "एक सुरक्षित पोर्टल का निर्माण है जो दस्तावेजों को जमा करने, कंपनियों के पंजीकरण तथा निगम सूचना पर सार्वजनिक पहुंच सहित रजिस्ट्री संबंधी सभी सेवाओं की उपलब्ध ता प्रस्तावित करता है। पोर्टल की सेवाएं कहीं भी और किसी भी समय उपयोग की / प्राप्तं की जा सकती हैं जो नैगम इकाइयों, व्या वसायिकों और आम जनता के लिए सर्वोत्तम हो।" इस परियोजना को राष्ट्रीय ई-शासन सेवा प्रदायगी गेटवे (एनएसडीजी) के साथ समेकित किया जाएगा, जो अनेक फ्रंट एण्डव प्रदायगी चैनलों के माध्यम से व्यागपारों में एमसीए सेवाओं का विस्तावर करने में सहायता देंगे तथा अन्या मूल्यवर्धित सेवाओं के अलावा एमसीए21 द्वारा प्रस्तावित आधारभूत सेवाएं प्रदान करने में भी सहायता देंगे। एमसीए21 के विस्तार में 100 से अधिक सेवाएं शामिल की गई हैं। इनमें प्रमुख सेवाएं इस प्रकार हैं नाम अनुमोदन नई कंपनियों के निगमन वार्षिक सांविधिक रिटर्न जमा करना नाम / पते / निदेशक विवरण के बदलाव के लिए फार्म जमा करना प्रभारों का सृजन / संशोधन / संतुष्टि और सत्यापन कंपनी अधिनियम के तहत आवश्य क विभिन्न सांविधिक सेवाएं जमा करना कंपनी के दस्तावेजों का निरीक्षण (सार्वजनिक रिकॉर्ड) निवेशक शिकायत निपटान विशिष्ट पहचान परियोजना की संकल्पना (यूआईडी) विशिष्ट पहचान परियोजना की संकल्पना एक ऐसे प्रयास के रूप में की गई थी जो देश के प्रत्येंक निवासी को पहचान प्रदान करेगा और इसका उपयोग कल्याण सेवाओं की दक्ष प्रदायगी के आधार के रूप में प्राथमिक रूप से कार्य करेगा। यह सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं की प्रभावी निगरानी के लिए एक साधन के रूप में भी कार्य करेगा। विशिष्ट पहचान की संकल्पना पर सबसे पहले 2006 में चर्चा की गई और इस पर कार्य किया गया जब 3 मार्च 2006 को सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा परियोजना – ''गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों के लिए विशिष्ट आईडी'को प्रशासनिक अनुमोदन दिया गया। इस परियोजना को 12 माह की अवधि तक एनआईसी द्वारा कार्यान्वित किया गया था। विभिन्न पणधारियों द्वारा चर्चाओं के कई दौरों के बाद और दो योजनाओं – राष्ट्री य जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) / नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत एमएनआईसी और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की विशिष्टा पहचान संख्या1 (यूआईडी) के सम्मिलन के लिए मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह (ईजीओएम) की सिफारिश पर भारतीय विशिष्टप पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) (EGoM) का गठन किया गया और 28 जनवरी 2009 को योजना आयोग द्वारा इसे अधिसूचित किया गया (अधिसूचना संख्याअ ए-43011/02/2009-प्रशासन-1) द्वारा अधिसूचित किया गया और इसे योजना आयोग के अधीन एक संलग्न कार्यालय बनाया गया। यूआईडीएआई को यूआईडी योजना के कार्यान्वयन की नीतियों तथा योजनाओं को बनाने का कार्य सौंपा गया, इसे यूआईडी डेटाबेस का नियंत्रण और प्रचालन करने का कार्य सौंपा गया तथा यह निरंतर आधार पर इसे अपडेट करने और इसके अनुरक्षण के लिए जिम्मे दार बनाया गया। सेवाएं इस प्रकार है यूआईडीएआई द्वारा निवासी की केवल मूलभूत जनसंख्यां और बायोमेट्रिक सूचना जमा की जाएगी और उसे एक विशिष्ट पहचान संख्या जारी की जाएगी। यूआईडीएआई की योजना है कि रजिस्ट्रार के साथ भागीदार द्वारा मनरेगा, आरएसबीवाय, पीडीएस जैसी योजनाओं में बड़ी संख्या में गरीबों और लाभ वंचित लोगों को यूआईडी प्रणाली में सहायता मिलेगी। पासपोर्ट विदेश मंत्रालय का वाणिज्य दूतावास, पासपोर्ट और वीसा (सीपीवी) प्रभाग केन्द्रीय पासपोर्ट संगठन (सीपीओ) भारतीय नागरिकों को पासपोर्ट तथा कंसुलर सेवाएं और विदेशी नागरिकों को कंसुलर और वीसा सेवाएं तथा विदेश में 160 मिशन तथा पोस्ट के माध्यम से विदेशों में रहने वाले भारतीयों को पासपोर्ट, वीसा कंसुलर स्कंध के माध्यम सेवाएं प्रदान करता है। पासपोर्ट एमएमपी केन्द्रीय पासपोर्ट संगठन द्वारा प्रक्रियाओं में बदलाव और प्रौद्योगिकी को शामिल करते हुए नवाचारी उपायों द्वारा कार्यभार में असाधारण वृद्धि के साथ ताल मेल बनाए रखने के लिए केन्द्रीय पासपोर्ट संगठन द्वारा किया गया एक प्रयास है। निम्नंलिखित तालिका में इस एमएमपी की सेवाओं की सूची दी गई है क्र. स. पासपोर्ट इंश्योरेंस प्रक्रिया का मद प्रभाव 1. तत्कावल पासपोर्ट हेतु लिया गया समय 1 दिन 2. सामान्य पासपोर्ट हेतु लिया गया समय 3 दिन 3. पासपोर्ट आउटलेट्स की संख्या 77 (प्रत्येक महानगर में 2 से 3 सहित) 4. पासपोर्ट आउटलेट्स में सार्वजनिक मेल जोल काउंटर्स की संख्या 1250 5. सार्वजनिक मेल जोल प्रति कार्य दिवस घण्टे 7 6. पासपोर्ट आउटलेट / काउंटरों के विस्तार की संभावना पासपोर्ट सेवा केन्द्रों का नेटवर्क बढ़ती मांग के अनुसार तेजी से बढ़ाया जाएगा। 7. पासपोर्ट आवेदन जमा करने के लिए प्रतीक्षा अवधि आरामदेह परिस्थितियों में एक घण्टा 8. कर्मचारियों की जवाबदेही सभी कर्मचारियों के लिए डिजिटल हस्तायक्षर प्रणाली। सभी नीलामियों का लेखा परीक्षण ट्रेल। किसी असामान्य गतिविधि की स्वचालित रिपोर्टिंग 9. कर्मचारियों का प्रशिक्षण निरंतर प्रशिक्षण 10. आवेदकों के लिए सूचना पोर्टल और कॉल सेंटर द्वारा। आवेदकों को एसएमएस द्वारा पासपोर्ट संसाधन के प्रत्येक चरण की सूचना दी जाएगी 11. सेवा स्तर फोन, ऑनलाइन और मेल द्वारा शिकायत निपटान तत्काल 12. कागजी कार्य कम्प्यूटरों पर 100% 13. पुलिस के साथ सूचना का आदान प्रदान अधिकांशत: ऑनलाइन 14. सूचना प्रणाली प्रबंधन प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रबंधन के पास उपलब्ध सूचना की व्यापक परास पेंशन पेंशन एमएमपी प्राथमिक रूप से पेंशन / सेवानिवृत्ति संबंधी सूचना, सेवाओं और शिकायतों, हैंडलिंग प्रक्रिया पर लक्षित हैं जो जरूरतमंद पेंशनभोगियों के लिए एक अंत:क्रियात्मैक और गैर अंत:क्रियात्मरक घटकों के ऑनलाइन संयोजन द्वारा उपलब्ध है और इस प्रकार पेंशनभोगियों तथा सरकार के बीच का अंतराल कम करने में सहायता मिलती है। पेंशनभोगी पोर्टल तीन स्तिरों पर कार्य करता है, जो आपस में जुड़े हुए हैं : पेंशनभोगी संघ स्तर (आरंभ में राज्य मुख्यालय पर) / पेंशनभोगी स्तर केन्द्रीय मंत्रालय / विभाग स्तर केन्द्रीय स्तर (नोडल) – पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग पेंशनभोगी पोर्टल द्वारा निम्नलिखित सेवाएं प्रदान की जाती हैं : शिकायतों का ऑनलाइन पंजीकरण – ये शिकायतें ऑनलाइन तथा डाक द्वारा संबंधित मंत्रालय / विभाग को निपटान हेतु भेजी जाती हैं। सूचना का प्रसार – संबंधित पेंशन और सेवानिवृत्ति संबंधी लाभों की जानकारी पेंशनभोगियों, अन्य पणधारियों आदि के लाभ हेतु। सभी आदेश / अनुदेश प्रयोक्तायओं के लिए पेंशनभोगी पोर्टल पर अपलोड किए गए हैं। एक अतिरिक्तं सुविधा के रूप में प्रयोक्ताओं को विभिन्न राज्यों के पेंशन के राज्यभ निदेशालयों और एजी की वेबसाइटों के हाइपर लिंक देकर पेंशनभोगी पोर्टल पर प्रयोक्तांओं के लिए एक युटिलिटी सेवा भी बनाई गई है, जबकि विभाग राज्य् सरकार के पेंशनभोगियों के मामले में कोई भूमिका नहीं निभाता है। डाक राष्ट्रीय ई - शासन योजना (एनईजीपी) सर्वोच्च समिति द्वारा कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में एनईजीपी के तहत एक मिशन मोड परियोजना (एमएमपी) के रूप में प्रविष्टियों को शामिल किए जाने के लिए मंजूर की गयी है | डाक सेवा का आधुनिकीकरण कंप्यूटरीकरण के माध्यम से डाक विभाग द्वारा किया जा रहा है ।इसके तहत कंप्यूटरीकृत पंजीकरण केंद्र (सीआरसी) की स्थापना की गयी है जो सभी पोस्ट कार्यालयों को नेटवर्किंग केंद्रीय सर्वर आधारित प्रणाली का उपयोग कर जोड़ती है | सेवाएँ इस प्रकार हैं डाक सेवा का आधुनिकीकरण कंप्यूटरीकरण के माध्यम से डाक विभाग द्वारा किया जा रहा है ।इसके तहत कंप्यूटरीकृत पंजीकरण केंद्र (सीआरसी) की स्थापना की गयी है जो सभी पोस्ट कार्यालयों को नेटवर्किंग केंद्रीय सर्वर आधारित प्रणाली का उपयोग कर जोड़ती है। डाक विभाग आईसीटी के उपयोग से धन हस्तांतरण के संचालन में सुधार,अंतरराष्ट्रीय भुगतान, ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम को व्यवस्थित करने , पार्सल पंजीकृत आइटम आदि के लिए इंटरफेस की परिकल्पना कर प्रवेश द्वार खोल रहा है । स्रोत: इलेक्ट्रॉनिकी व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार