<div id="MiddleColumn_internal"> <h3><span>पृष्ठभूमि</span></h3> <p style="text-align: justify; ">नागरिक सेवाओं में पारदर्शिता तथा उत्कृष्टता लाने के लिए ई-प्रोक्योरमेंट परियोजना प्रारंभ की गयी है। शासकीय, अर्धशासकीय विभागों तथा शासन के अधीनस्थ उपक्रमों के लिए यह योजना प्रारंभ की गयी है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य अधोसंरचना विकास निगम, पशुधन तथा दुग्ध विभाग,पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, लोक निर्माण विभाग, नगरी प्रशासन विभाग, जल संसाधन विभाग में यह योजना क्रियान्वित की गयी है।इस योजना के अन्तर्गत 20 लाख से अधिक राशि की विभागों की खरीदी तथा निविदा प्रक्रिया को कम्प्यूटरीकृत किया गया है। इसके अन्तर्गत ई-टेंडरिंग, इंडेन्ट मैनेजमेंट, ई-आटोमेशनख् कान्ट्रेक्ट मैनेजमेंट, केटलॉग मैनेजमेंट, ई-पेमेंट, केद्रिय आपूर्ति पंजीयन आदि अनेक गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। यह परियोजना सार्वजनिक-निजी सहभागिता तथा बिल्ट ऑन आपरेट मॉडल पर कार्य कर रही है। इस परियोजना के लिए चिप्स को नोडल एजेंसी बनाया गया है।</p> <h3><span>कार्यक्रम का उद्देश्य </span></h3> <p style="text-align: justify; ">छत्तीसगढ़ शासन का सालाना प्रोक्योरमेंट व्यय लगभग रू. 4000 करोड़ तीव्र आर्थिक विकास के लिए माना जाता है। यह राशि आने वाले वर्षों में और अधिक बढ़ने की संभावना है। अत: इस प्रक्रिया को पारदर्शी, मितव्ययी, उत्कृष्ट बनाने तथा शासकीय व्यय में कमी लाने, समान अवसर उपलब्ध कराने तथा अनावश्यक शासकीय व्यय में कमी लाने के उद्देश्य से यह परियोजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।</p> <h4 style="text-align: justify; ">पारदर्शिता</h4> <p style="text-align: justify; ">इस योजना के लागू किये जाने से शासन की खरीदी एवं जारी किये जाने वाली निविदाओं के साथ-साथ अनेक प्रोक्योरमेंट कार्यों में पारदर्शिता में वृद्धि करना प्रमुख उद्देश्य हैं।</p> <h4 style="text-align: justify; ">अनावश्यक शासकीय व्यय में कमी</h4> <p style="text-align: justify; ">ई-प्रोक्योरमेंट के द्वारा शासन के कई व्यय जैसे कई विज्ञापन, मेनपावर,स्टेशनरी व्यय में आश्चर्यजनक कमी लायी जा सकती है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए यह योजना लागू की गयी है।</p> <h4 style="text-align: justify; ">लागत में कमी</h4> <p style="text-align: justify; ">ई-प्रोक्योरमेंट के माध्यम से शासन की निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा के माध्यम से स्वस्थ प्रतियोगिता का निर्माण होता है। इस निविदा प्रक्रिया में कोई भी पंजीकृत ठेकेदार भाग ले सकता है जिससे लागत में कमी आती है।</p> <h4 style="text-align: justify; ">प्रभावशाली निविदा प्रक्रिया</h4> <p style="text-align: justify; ">सभी पंजीकृत ठेकेदारों को अवसर मिलने के कारण निविदा का क्षेत्र व्यापक हो जाता है तथा प्रभावशाली बनता है। इससे कार्यों की गुणवत्ता भी बढ़ती है।</p> <h4 style="text-align: justify; ">खुली स्पर्धा</h4> <p style="text-align: justify; ">ई-प्रोक्योरमेंट योजना के माध्यम से जारी किये गये निविदा में कोई भी भाग ले सकता है। इससे खुली स्पर्धा को प्रोत्साहन मिलता है तथा स्वस्थ प्रतियोगिता का निर्माण होता है।</p> <h4 style="text-align: justify; ">स्मार्ट गवर्नेंस</h4> <p style="text-align: justify; ">ई-शासन व्यवस्था लागू करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण परियोजना है। इससे शासन के स्मार्ट गर्वनेंस का सपना पूरा होता है।</p> <h3 style="text-align: justify; ">ई-प्रोक्योरमेंट परियोजना का कार्य</h3> <p style="text-align: justify; ">ई-प्रोक्योरमेंट परियोजना का उद्धाटन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने 14 अगस्त 2007 को किया था। पायलेट परियोजना के लिए चयनित विभागों के रू. 20 लाख से अधिक राशि की निविदाएं ई-प्रोक्योरमेंट से जारी करना आवश्यक है। इस योजना के निर्माण के लिए सरकार के चिप्स संस्थान के द्वारा निम्नांकित कार्य किये गये हैं।</p> <h4><span>कार्यात्मक भाग का निर्माण </span></h4> <p style="text-align: justify; ">संपूर्ण प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया को स्वचलित बनाने के लिए अनेक कार्यात्मक भाग का निर्माण किया है जिनमें प्रमुख निम्नांकित हैं:</p> <ol style="text-align: justify; "> <li>आपूर्तिकर्ता/निविदाकर्ताओं हेतु केंद्रीकृत पंजीयन व्यवस्था</li> <li>मांग पत्र प्रबंधन</li> <li>ई टेंडरिंग</li> <li>ई नीलामी</li> <li>अनुबंध प्रबंधन</li> <li>नामावली प्रबंधन</li> <li>ई-भुगतान</li> <li>लेखा-विधि </li> <li>प्रबंधन सूचना प्रणाली</li> </ol> <h4 style="text-align: justify; ">सुरक्षा तंत्र का विकास</h4> <p style="text-align: justify; ">पारदर्शी तथा विश्वसनीय (प्रोक्योरमेंट) सरकारी खरीद/निविदा तंत्र विकसित करने के लिए सुरक्षा तंत्र का मजबूत तथा अभेद्य बनाया जाना आवश्यक है। इस परियोजना में सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए डिजिटल हस्ताक्षर एवं इंक्रप्टन प्रक्रिया को अपनाया गया है। इससे खरीददार तथा आपूर्तिकर्ता के मध्य विश्वसनीय तथा सुरक्षित प्रोक्योरमेंट व्यवस्था पनपती है। इसके अलावा फायरवाल तथा नेटवर्क घुसपैठ का पता लगाने वाले तंत्र का भी उपयोग इस परियोजना के अन्तर्गत किया जा रहा है।</p> <h4><span>परियोजना के परिचालन की व्यवस्था </span></h4> <p style="text-align: justify; ">ई-प्रोक्योरमेंट परियोजना आरंभ होने के पश्चात् उसके सुचारू रूप से संचालन के लिए शासन द्वारा समय समय पर प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जाता है। अभी तक इस योजना के तहत संबंधित विभागों के 725 अधिकारियों तथा 114 ठेकेदारों को ई-प्रोक्योरमेंट संबंधी प्रशिक्षण दिया जा चुका है। परियोजना के लिए हेल्पडेस्क (नम्बर 0771-4066277) का निर्माण भी किया गया है। इसके अतिरिक्त ई-प्रोक्योरमेंट की वेबसाईट का भी निर्माण परियोजना के संचालन की व्यवस्था की गयी है। योजना से संबंधित विभागों को ई-प्रोक्योरमेंट के संचालन के लिए 200 डेस्कटॉप कम्प्यूटर प्रदान किया गया है।</p> <h4 style="text-align: justify; "><span style="text-align: justify; ">निजी-सार्वजनिक सहभागिता</span></h4> <p style="text-align: justify; "><span>परियोजना के कार्य निजी-सार्वजनिक सहभागिता के अन्तर्गत किये जाते हैं। इसके अतिरिक्त परियोजना के संचालन के लिए सचिव (पी डबल यू) को राज्य का नोडल अधिकारी मनोनीत किया गया है तथा सभी विभाग इस योजना के लिए अपने-अपने एक अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त कर संचालन करते हैं।</span></p> <p style="text-align: justify; ">कुल 3574 ठेकेदारों का पंजीयन किया जा चुका है।</p> <p style="text-align: justify; ">अन्य उपलब्धियाँ :-</p> <ol> <li>छत्तीसगढ़ ई-प्रोक्योरमेंट परियोजना लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य है।</li> <li>मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन की अध्यक्षता में इंपावर कमेटी का गठन किया गया है जो परियोजना से संबंधित निर्णय लेती है।</li> <li>प्रोक्योरमेंट का सबसे अधिक कार्य होने के कारण सचिव लोक निर्माण विभाग को ई-प्रोक्योरमेंट परियोजना का छत्तीसगढ़ का नोडल अधिकारी बनाया गया है।</li> <li>शासन के समस्त कार्य एक ही छत के नीचे।</li> </ol> <h3><span>परियोजना के लाभ </span></h3> <ol> <li><span>राज्य के सालाना व्यय में 5 से 10% की बचत होगी।</span></li> <li>शासकीय क्रय की गुणवत्ता में वृध्दि होगी, निविदा में लगने वाले समय में कमी आयेगी, शासन का व्यय भी कम होगा।</li> <li>एक जैसी निविदा प्रक्रिया अपनानेसे निविदा साफ सुथरी तथा भय रहित होगी।</li> <li>(4) सामाग्री, सेवा, कार्यों का डेटाबेस उपलब्ध होगा । आवश्यकता के अनुरूप धन की व्यवस्था संभव होगी। निविदा मूल्य में कमी आयेगी तथा पारदर्शिता बढ़ेगी।</li> </ol> <p style="text-align: justify; ">स्रोत: छत्तीसगढ़ राज्य सरकार।</p> </div>