<div id="MiddleColumn_internal"> <h3>भूमिका</h3> <p style="text-align: justify;">भारत का ई व्‍यापार के लिए अंत प्रयोक्‍ता की सभी व्‍यापार संबंधी कानूनी सूचना की आवश्‍यकता को पूरा करना है। जो सरकार की <a href="../../../../../e-governance/92d93e930924-92e947902-908-93693e938928/national-e-governance-plan-negp">राष्ट्रीय ई-शासन योजना</a> के अंतर्गत ''मिशन मोड परियोजना'' का उद्देश्य है। </p> <p style="text-align: justify;">यह देश के भीतर और विदेशों में व्‍यापार का विकास और विस्‍तार करना इसमें शाखा कार्यालय खोलने की नीतियों और प्रक्रियाओं की व्‍याख्‍या करता है; संयुक्‍त उद्यम शुरू करना; उपक्रम विलयन, अधिग्रहण, समावेशन और अपने कब्‍जे में लेना।</p> <p style="text-align: justify;">अपने व्‍यापार संगठन का प्रभावी रूप से संचालन करने के लिए कानूनी ढांचा जिसमें उद्यमों का कार्य करना है। यह विभिन्‍न विधानों का सार प्रस्‍तुत करना है जैसे <a href="../../../../../e-governance/online-legal-services/908-93594d92f93e92a93e930-938947-91c941947-91593e928942928-935-90592793f92893f92f92e/91592e94d200d92a928940-90592793f92893f92f92e">कम्‍पनी अधिनियम</a> 1956, विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम (फेमा), 1999, <a href="../../../../../e-governance/online-legal-services/908-93594d92f93e92a93e930-938947-91c941947-91593e928942928-935-90592793f92893f92f92e/93890293593f92693e-91593e928942928">संविदा कानून</a> पर्यावरण से संबंधित कानून, जन शक्ति संबंधी कानून (मजदूरी सामाजिक सुरक्षा, कार्य की स्थिति, व्‍यावसायिक स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा आदि) बौद्धि सम्‍पदा अधिकार को शासित करने वाले कानून।</p> <p style="text-align: justify;">कर के प्रकार और कराधान के कानून जो विभिन्‍न प्रकार के व्‍यापार संगठनों को शासित करते हैं जैसे कारपोरेट, कॉपरेटिव, संयुक्‍त उद्यम, लघु उद्योग, साझेदारी फर्म, एजेंट और प्रतिनिधि कार्यालय। इसमें सीमा शुल्‍क और उत्‍पाद शुल्‍क, सम्‍पत्ति कर, सेवा कर, पैन, टैन, टीडीएस आदि भी शामिल हैं।</p> <p style="text-align: justify;">देश का वित्तीय ढांचा। जो आवश्‍यक व्‍यापार वित्तपोषण या व्‍यापार चक्र के विभिन्‍न चरणों के दौरान विभिन्‍न प्रकार के कार्य करने के लिए उद्यमी को आवश्‍यक मौद्रिक सहायता प्रदान करता है।</p> <p style="text-align: justify;">उद्यमी के लिए निवेश के अवसर राष्‍ट्रीय और राज्‍य दोनों स्‍तरों पर। यह नीतियों और प्रत्‍येक राज्‍य/संघ राज्‍य क्षेत्र द्वारा अपने संबंधित अर्थव्‍यवस्‍था में निवेश आकर्षित करने के लिए दिए जाने वाले प्रोत्‍साहनों संबंधी सूचना मुहैया करता है।</p> <ol> <li style="text-align: justify;">देश में उपलब्‍ध मूल संरचनात्‍मक सुविधाएं मौजूदा और नई मूल संरचना परियोजनाओं में निवेश के लिए अवसर केंद्र और राज्‍य दोनों स्‍तरों पर।</li> <li style="text-align: justify;">देश के विभिन्‍न उद्योगों और सेवा क्षेत्रों में नीतियां प्रोत्‍साहन और अवसर।</li> <li style="text-align: justify;">व्‍यापार संबंधी सूचना जैसे नियंत्रण नीतियां और विधान, अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार की प्रकृति और क्षेत्रीय व्‍यापार करार।</li> <li style="text-align: justify;">विभिन्‍न अर्थव्‍यवस्‍था के संकेतकों द्वारा भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था का सांख्यिकीय सिंहावलोकन जो विगत वर्तमान अर्थव्‍यवस्‍था के निष्‍पादन को उजागर करता है।</li> </ol> <h3 style="text-align: justify;">कानूनी पहलू</h3> <p style="text-align: justify;">कानूनी पहलू किसी भी देश में सफल व्‍यवसाय माहौल के लिए अपरिहार्य अंग हैं। वे देश की नीतिगत रचना और देश की सरकारी रूपरेखा के मनोभाव के द्योतक हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्‍येक कम्‍पनी देश की सांविधिक रचना के अनुसार कार्य करती है। प्रत्‍येक उद्यम को कम्‍पनी के मूल लक्ष्‍य और उद्देश्‍य तैयार करते समय इस कानूनी पहलू को ध्‍यान में रखना है। यह इसलिए क्‍योंकि यह संगठन के सक्षम और स्‍वास्‍थ्‍य संचालन के लिए अनिवार्य है और यह इसे आगे सामना करने वाले अधिकारों, उत्तरदायित्‍वों तथा चुनौतियों के बारे में जानने में सहायता करता है।</p> <p style="text-align: justify;">भारत में कम्‍पनी संबंधी सभी पहलुओं को विनियमित करने वाला अति महत्‍वपूर्ण कानून, कम्‍पनी अधिनियम, 1956 है। इसमें कम्‍पनी के गठन, निदेशकों और प्रबंधकों के अधिकार और उनकी जिम्‍मेदारियों, पूंजी जुटाना, कम्‍पनी की बैठक आयोजित करना, कम्‍पनी के पत्रों का रखरखाव और लेखापरीक्षा, कम्‍पनी के कार्यों का निरीक्षण और जांच करने का अधिकार, कम्‍पनी का पुनर्गठन और समामेलन और यहां तक कि कम्‍पनी को बंद करने संबंधी प्रावधान सन्निहित है।</p> <p style="text-align: justify;">भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 एक अन्‍य विधान है जो कम्‍पनी के सभी संव्‍यवहारों को विनियमित करता है। यह संविदाओं के निर्माण एवं प्रवर्तन क्षमता संबंधी सामान्‍य सिद्धांतों, करार और प्रदाय के प्रावधानों को शासित करने वाले नियमों विभिन्‍न प्रकार की संविदा जिनमें क्षतिपूर्ति और गारंटी, जमानत और शपथ एवं एजेंसी के सामान्‍य सिद्धांतों का निर्धारण करता है।</p> <p style="text-align: justify;">अन्‍य मुख्‍य विधान हैं :- उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951; व्‍यापार संघ अधिनियम, प्रतिस्‍पर्द्धा अधिनियम, 2002; विवाचन निर्णय और समझौता अधिनियम, 1996; विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999; बौद्धिक सम्‍पत्ति अधिकार से संबंधित कानून तथा श्रम कल्‍याण से संबंधित कानून।</p> <p style="text-align: justify;">स्रोत: फेमा, भारत का कंपनी अधिनियम, श्रम व कल्याण विभाग, भारत सरकार</p> </div>