समिति के समक्ष पेश किया जाना देखरेख और संरक्षण कफी आवश्यकता वाले किसी बालक को निम्नलिखित किसी व्यक्ति द्वारा समिति के समक्ष पेश किया जा सकेगा, अर्थात्;- किसी पुलिस अधिकारी द्वारा या विशेष किशोर पुलिस एकक या पदाभिहित बालक कल्याण पुलिस अधिकारी या जिला बालक कल्याण एकक क किसी अधिकारी या तत्समय प्रवृत्त किसी श्रम विधि के अधीन नियुक्त निरीक्षक द्वारा; किसी लोक सेवक द्वारा; ऐसी बालबद्ध सेवाओं या किसी स्वैच्छिक या गैर-सरकारी संगठन या किसी अभिकरण द्वारा, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा मान्यता दी जाए; बालक कल्याण अधिकारी या परिवीक्षा अधिकारी द्वारा; किसी सामाजिक कार्यकर्ता या लोक भावना से युक्त नागरिक द्वारा; स्वयं बालक द्वारा; या किसी नर्स, डाक्टर, परिचर्या गृह (नर्सिग होम), अस्पताल या प्रसूति गृह के प्रबंध तंत्र द्वारा; परन्तु बालक का समय नष्ट किए बिना, किन्तु यात्रा के लिए आवश्यक समय को छोड़कर चौबीस घंटे की अवधि के भीतर समिति के समक्ष पेश किया जाएगा। राज्य सरकार, जांच की अवधि के दौरान समिति को रिपोर्ट प्रस्तुत करने की रीति का और बालक को, यथास्थिति, बाल गृह या उपयुक्त सुविधा तंत्र या योग्य व्यक्ति के पास भेजने या सौंपने की रीति का उपबंध करने के लिए इस अधिनियम से संगत नियम बना सकेगी। संरक्षक से पृथक पाए गए बालक के बारे में अनिवार्य रूप से रिपोर्ट करना कोई व्यष्टि या कोई पुलिस अधिकारी या किसी संगठन या परिचर्या गृह या अस्पताल या प्रसूति गृह का कोई कृत्यकारी, जिसे किसी ऐसे बालक का पता चलता है या उसका भारसाधन लेता है या जिसे वह सौंपा जाता है जो परित्यक्त या खोया हुआ प्रतीत होता है या जिसके बारे में परित्यक्त या खोए होने का दावा किया जाता है या ऐसा बालक जो बिना कुटुंब की संभाल के अनाथ प्रतीत होता है या जिसके अनाथ होने का दावा किया जाता है, चौबीस घंटे के भीतर (यात्रा के लिए आवश्यक समय को छोड़कर), यथास्थिति, बालबद्ध सेवाओं, निकटतम पुलिस थाने को या किसी बालक कल्याण समिति को या जिला बालक संरक्षण एकक को इत्तिला देगा या बालक को इस अधिनियम को अधीन रजिस्ट्रीकृत बाल देखरेख संस्था को सौंपेगा। उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी बालक के संबंध में इत्तिला अनिवार्य रूप से, ऐसे पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा जो, यथास्थिति, केंद्रीय सरकार या समिति या जिला बालक संरक्षण एकक या बालक देखरेख संस्था द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए। रिपोर्ट न किये जाने का अपराध यदि धारा 32 के अधीन यथा अपेक्षित किसी बालक के संबंध में कोई सूचना उक्त धारा में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर नहीं दी जाती है तो ऐसे कृत्य को अपराध के रूप में माना जाएगा। रिपोर्ट न करने के लिए शास्ति कोई व्यक्ति, जिसने धारा 33 के अधीन कोई अपराध किया है वह ऐसे कारावास का जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या दस हजार रुपए तक के जुर्माने का या दोनों का भागी होगा। बालकों का अभ्यपर्ण कोई माता-पिता या संरक्षक, जो ऐसे शारीरिक, भावात्मक और सामाजिक कारणों से, जो उसके नियंत्रण के परे हैं, बालक का अभ्यर्पण करना चाहता है, बालक को समिति के समक्ष पेश करेगा। यदि, जांच और परामर्श की विहित प्रक्रिया के पश्चात् समिति का समाधान हो जाता है तो, यथास्थिति, माता-पिता या संरक्षक द्वारा समिति के समक्ष विलेख निष्पादित किया जाएगा। ऐसे माता-पिता या संरक्षक को, जिसने बालक का अभ्यर्पण किया है, बालक के अभ्यर्पण संबंधी अपने विनिश्चय पर पुन;विचार करने के लिए दो मास का समय दिया जाएगा और अंतरिम अवधि में समिति, सम्यक जांच के पश्चात् या तो बालक को माता-पिता या संरक्षक के पर्यवेक्षण के अधीन अनुज्ञात करेगी या यदि वह छह वर्ष से कम आयु का या की है तो वह बालक को किसी विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरण में रखेगी या यदि वह छह वर्ष से अधिक आयु का या की है तो बाल गृह में रखेगी। जाँच धारा 31 के अधीन बालक को पेश किए जाने पर या रिपोर्ट की प्राप्ति पर, समिति, ऐसी रीति से जांच करेगी, जो विहित की जाए और समिति अपनी स्वयं की या धारा 31 की उपधारा (2) में यथाविनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति या अभिकरण से प्राप्त रिपोर्ट पर बालक को बाल गृह या आश्रय गृह या उपयुक्त सुविधा तंत्र या योग्य व्यक्ति के पास भेजने के लिए और किसी सामाजिक कार्यकर्ता या बालक कल्याण अधिकारी या बालक कल्याण पुलिस अधिकारी द्वारा शीघ्र सामाजिक अन्वेषण करने के लिए आदेश पारित कर सकेगी; परंतु छह वर्ष से कम आयु के सभी बालकों को, जो अनाथ और अभ्यर्पित हैं या परित्यक्त प्रतीत होते हैं, विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरण में, जहां कहीं उपलब्ध हैं, रखा जाएगा। सामाजिक अन्वेषण पंद्रह दिन के भीतर पूरा किया जाएगा जिससे समिति को, बालक को पहली बार पेश करने के चार मास के भीतर अंतिम आदेश पारित करने के लिए समर्थ बनाया जा सके; परंतु अनाथ, परित्यक्त या अभ्यर्पित बालकों के लिए जांच पूरी करने का समय वह होगा जो धारा 38 में विनिर्दिष्ट किया जाए। जांच पूरी हो जाने के पश्चात्, यदि समिति की यह राय है कि उक्त बालक का कोई कुटुंब या उसका कोई दृश्यमान संभालने वाला नहीं है या उसे देखरेख या संरक्षण की लगातार आवश्यकता है तो वह तब तक बालक को, यदि बालक छह वर्ष से कम आयु का है तो विशिष्ट दत्तक ऋण अभिकरण में, बाल गृह में या उपयुक्त सुविधा तंत्र या योग्य व्यक्ति या पोषण कुटुंब के पास भेज सकेगी जब तक बालक के लिए ऐसे पुनर्वास उपयुक्त साधन नहीं मिल जाते, जो विहित किए जाएं, या जब तक बालक अठारह वर्ष की आयु प्राप्त नहीं कर लेता है; परंतु बाल गृह में अथवा उपयुक्त सुविधा तंत्र या योग्य व्यक्ति या पोषण कुटुंब में रखे गए बालक की स्थिति का समिति द्वार ऐसा पुनर्विलोकन किया जाएगा, जो विहित किया जाए। समिति, जिला मजिस्ट्रेट को लंबित मामलों का पुनर्विलोकन करने के लिए, ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, मामलों के निपटारे की प्रकृति पर और लंबित मामलों की तिमाही रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। जिला मजिस्ट्रेट, उपधारा (4) के अधीन पुनर्विलोकन करने के पश्चात्, समिति को, लंबित मामलों को दूर करने के लिए आवश्यक उपचारात्मक उपाय, यदि आवश्यक हो, करने का निदेश देगा और ऐसे पुनर्विलोकन की रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजेगा जो अतिरिक्त समितियों का गठन, यदि अपेक्षित हो, करवा सकेगी; परंतु यदि, ऐसे निदेशों के प्राप्त होने के तीन मास के पश्चात् भी समिति द्वारा लंबित मामलों को पूरा करने पर ध्यान नहीं दिया जाता है तो राज्य सरकार उक्त समिति को समाप्त कर देगी और नई समिति का गठन करेगी। समिति की समाप्ति के पूर्वानुमान में और इस बात को देखते हुए कि नई समिति के गठन में कोई समय नष्ट न हो, राज्य सरकार, समिति के सदस्यों के रूप में नियुक्त किए जाने वाले पात्र व्यक्तियों का एक स्थायी पैनल बनाए रखेगी। उपधारा (5) के अधीन नई समिति के गठन में हुए किसी विलंब की दशा में, पास के जिले की बालक कल्याण समिति, अंतरिम कालावधि के लिए उत्तरदायित्व ग्रहण करेगी। देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता समिति, जांच द्वारा यह समाधान हो जाने पर कि समिति के समक्ष लाए गए बालक को देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता है, बालक कल्याण अधिकारी द्वारा प्रस्तुत सामाजिक अन्वेषण की आवश्यकता वाले रिपोर्ट पर विचार करके और यदि बालक विचार प्रकट करने के लिए पर्याप्त रूप से परिपक्व है तो बाल के बारे में बालक की इच्छाओं को ध्यान में रखते हुए, निम्नलिखित आदेशों में से एक या अधिक आदेश पारित कर सकेगी, अर्थात्— बालक को देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता होने की घोषणा; माता-पिता या संरक्षक या कुटुंब को, बालक कल्याण अधिकारी या पदाभिहित सामाजिक कायकता क पर्यवेक्षण सहित या उसके बिना बालक का प्रत्यावर्तन; ऐसे बालकों को रखने के लिए संस्था की क्षमता को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक या अस्थायी देखरेख के लिए दत्तकग्रहण के प्रयोजन के लिए या तो इस निष्कर्ष पर पहुंचने के पश्चात् कि बालक के कुटुंब का पता नहीं लगाया जा सकता है या यदि उसका पता लग भी गया है तो कुटुंब में बालक का प्रत्यावर्तन, बालक के सर्वोत्तम हित में नहीं है बाल गृह या उपयुक्त सुविधा तंत्र या विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरण में बालक का स्थानन; दीर्घकालिक या अस्थायी देखरेख के लिए योग्य व्यक्ति के पास बालक का स्थानन; (ड) धारा 44 के अधीन पोषण देखरेख के आदेश; (च) धारा 45 के अधीन प्रवर्तकता की आदेश; ऐसे व्यक्ति या संस्थाओं या सुविधा तंत्रों को, जिनकी देखरेख में बालक को, बालक की देखरेख, संरक्षण और पुनर्वास के संबंध में रखा गया है, निदेश जिनके अन्तर्गत आवश्यकता आधारित परामर्श, व्यावसायिक चिकित्सा या व्यवहार उपांतरण चिकित्सा, कौशल प्रशिक्षण, विधिक सहायता, शैक्षणिक सेवाओं और यथा अपेक्षित अन्य विकासात्मक क्रियाकलापों और जिला बालक कल्याण एकक या राज्य सरकार और अन्य अभिकरणों के साथ अनुवर्तन और समन्वय सहित तत्काल आश्रय और सेवाओं से, जैसे कि चिकित्सा देखरेख, मनोविकार चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता संबंधी निदेश भी हैं, बालक की, धारा 39 के अधीन दत्तकग्रहण के लिए विधिक रूप से मुक्त होने की घोषणा । समिति— पोषण देखरेख के लिए योग्य व्यक्ति की घोषणा का; धारा 46 के अधीन पश्व देखरेख सहायता प्राप्त करने के लिए; या किसी अन्य कुत्य के संबंध में जो विहित किया जाए कोई अन्य आदेश करने के लिए, भी आदेश पारित कर सकेगी। किसी बालक की दत्तकग्रहण के लिए विधिक रूप से मुक्त घोषित करने की प्रक्रिया अनाथ और परित्यक्त बालक की दशा में, समिति, बालक के माता-पिता या संरक्षकों का पता लगाने का सभी प्रयास करेगी और ऐसी जांच पूरी होने पर यदि यह स्थापित हो जाता है कि बालक या तो अनाथ है, जिसकी देखरेख करने वाला कोई नहीं है या परित्यक्त है, तो समिति बालक को दत्तकग्रहण के लिए विधिक रूप से मुक्त घोषित करेगी; परन्तु ऐसी घोषणा ऐसे बालकों के लिए, जो दो वर्ष तक की आयु तक के हैं, बालक के पेश किए जाने की तारीख से दो मास की अवधि के भीतर और ऐसे बालकों के लिए, जो दो वर्ष से अधिक आयु के हैं, चार मास के भीतर की जाएगी; परन्तु यह और कि इस बारे में तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन किसी परित्यक्त या अभ्यर्पित बालक के संबंध में जांच की प्रक्रिया में किसी जैविक माता-पिता के विरुद्ध कोई प्रथम इतिला रिपोर्ट रजिस्टर नहीं की जाएगी। अभ्यर्पित बालक की दशा में वह संस्था, जहां अभ्यर्पण संबंधी आवेदन पर समिति द्वारा बालक को रखा गया है, धारा 35 के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि के पूरा होने पर बालक को दत्तकग्रहण के लिए विधिक रूप से मुक्त घोषित करने के लिए उस मामले को समिति के समक्ष लाएगी। मानसिक रूप से विकृत माता-पिता के बालक या लैंगिक हमले से पीड़ित व्यक्ति के अवांछित बालक की दशा में उस बालक को समिति द्वारा इस अधिनियम के अधीन प्रक्रिया का अनुसरण करते हुए, इस बारे में तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, दत्तकग्रहण के लिए मुक्त घोषित किया जा सकेगा। अनाथ, परित्यक्त और अभ्यर्पित बालक को दत्तकग्रहण के लिए विधिक रूप से मुक्त घोषित करने का विनिश्चय समिति के कम से कम तीन सदस्यों द्वारा किया जाएगा। समिति, दत्तकग्रहण के लिए विधिक रूप से मुक्त घोषित किए गए बालकों की संख्या और विनिश्चयार्थ लंबित मामलों की संख्या के बारे में राज्य अभिकरण और प्राधिकरण को, ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, प्रतिमास सूचित करेगी। स्रोत; विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार