<div id="MiddleColumn_internal"> <h3 style="text-align: justify;">बालक की पहचान के प्रकटन का प्रतिषेध</h3> <ol> <li style="text-align: justify;">किसी जांच या अन्वेषण या न्यायिक प्रक्रिया के बारे में किसी समाचारपत्र, पत्रिका या समाचार पृष्ठ या दृश्य-श्रव्य माध्यम या संचार के किसी अन्य रूप में की किसी रिपोर्ट में ऐसे नाम, पते या विद्यालय या किसी अन्य विशिष्टि को प्रकट नहीं किया जाएगा, जिससे विधि का उल्लंघन करने वाले बालक या देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बालक या किसी पीड़ित बालक या किसी अपराध के साक्षी की, जो तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन ऐसे मामले में अंतर्वलित है, पहचान हो सकती है और न ही ऐसे किसी बालक का चित्र प्रकाशित किया जाएगा; परंतु यथास्थिति, जांच करने वाला बोर्ड या समिति, ऐसा प्रकटन, लेखबद्ध किए जाने वाले ऐसे कारणों से तब अनुज्ञात कर सकेगी, जब उसकी राय में ऐसा प्रकटन बालक के सर्वोत्तम हित में हो।</li> <li style="text-align: justify;">पुलिस, चरित्र प्रमाणपत्र के प्रयोजन के लिए या अन्यथा बालक के किसी अभिलेख का, ऐसे मामलों में प्रकटन नहीं करेगी जहां कि मामला बंद किया जा चुका हो या उसका निपटारा किया जा चुका हो।</li> <li style="text-align: justify;">उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन करने वाला कोई व्यक्ति ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो दो लाख तक हो सकेगा या दोनों से दंडनीय होगा।</li> </ol> <h3 style="text-align: justify;">बालक के प्रति क्रूरता के लिए दंड</h3> <ol style="text-align: justify;"> <li>जो कोई बालक का वास्तविक भारसाधन या उस पर नियंत्रण रखते हुए उस बालक पर ऐसी रीति से, जिससे उस बालक को अनावश्यक मानसिक या शारीरिक कष्ट होना संभाव्य हो, हमला करेगा, उसका परित्याग करेगा, उत्पीड़न करेगा, उसे उच्छन्न करेगा या जानबूझकर उसका उपेक्षा करेगा या उस पर हमला किया जाना, उसका परित्याग, उत्पीड़न, उच्छन्न या उसकी उपेक्षा किया जाना कारित करेगा या ऐसा किए जाने के लिए उसे उपाप्त करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या एक लाख रुपए के जुर्माने से या दोनों से दंडनीय होगा;</li> <li>परन्तु यदि यह पाया जाता है कि जैविक माता-पिता द्वारा बालक का ऐसा परित्याग उनके नियंत्रण के परे की परिस्थितियों के कारण है, तो यह उपधारणा की जाएगी कि ऐसा परित्याग जानबूझकर नहीं है और ऐसे मामलों में इस धारा के दांडिक उपबंध लागू नहीं होंगे;</li> <li>परंतु यह और कि यदि ऐसा अपराध किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है, जो किसी संगठन द्वारा नियोजित है या उसका प्रबंधन कर रहा है, जिसे बालक की देखरेख और संरक्षण सौंपा गया है, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो पांच लाख रुपए तक हो सकेगा, दंडनीय होगा;</li> <li>परंतु यह भी कि पूर्वोक्त क्ररता के कारण यदि बालक शारीरिक रूप से अक्षम हो जाता है या उसे मानसिक रोग हो जाता है या वह मानसिक रूप से नियमित कार्यों को करने में अयोग्य हो जाता है या उसके जीवन या अंग को खतरा होता है, ऐसा व्यक्ति कठोर कारावास से, जो तीन वर्ष से कम का नहीं होगा, किंतु जो दस वर्ष तक का हो सकेगा और पांच लाख रुपए के जुर्माने से भी दंडनीय होगा।</li> </ol> <h3 style="text-align: justify;">भीख मांगने के प्रयोजन के लिए बालक का नियोजन</h3> <ol style="text-align: justify;"> <li>जो कोई भीख मांगने के प्रयोजन के लिए बालक को नियोजित करता है या किसी बालक से भीख मंगवाएगा वह कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष की हो सकेगी और एक लाख रुपए के जुर्माने से भी दंडनीय होगा;</li> </ol> <p style="text-align: justify;">परंतु यदि भीख मांगने के प्रयोजन के लिए व्यक्ति बालक का अंगोच्छेदन करता है या उसे विकलांग बनाता है तो वह कारावास से, जो सात वर्ष से कम का नहीं होगा, किंतु जो दस वर्ष तक का हो सकेगा और पांच लाख रुपए के जुर्माने से भी दंडनीय होगा।</p> <ol style="text-align: justify;"> <li>जो कोई बालक का वास्तविक भारसाधन या उस पर नियंत्रण रखते हुए उपधारा (1) के अधीन किसी अपराध के कारित करने का दुष्प्रेरण करता है, वह उपधारा (1) में यथा उपबंधित दण्ड से, दंडनीय होगा और ऐसा व्यक्ति इस अधिनियम की धारा 2 के खंड (14) के उपखंड (v) के अधीन अयाग्य माना जाएगाः परंतु ऐसे बालक को किन्हीं भी परिस्थितियों में विधि का उल्लंघन करने वाला नहीं माना जाएगा और उसे ऐसे संरक्षक या अभिरक्षक के भारसाधन या नियंत्रण से हटा लिया जाएगा और समुचित पुनर्वास के लिए समिति के समक्ष पेश किया जाएगा।</li> </ol> <p style="text-align: justify;">बालक को मादक लिकर या स्वापक औषधि या मन;प्रभावी पदार्थ देने के लिए शास्ति –</p> <p style="text-align: justify;">जो कोई सम्यक रूप से अहिंत चिकित्सा व्यवसायी के आदेश के सिवाय किसी बालक को किसी बालक का किसी मादक लिकर, स्वापक औषधि या तंबाक् उत्पाद या मन;प्रभावी पदार्थ देगा या दिलवाएगा, वह कठोर कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा।</p> <p style="text-align: justify;">किसी बालक का किसी मादक लिकर, स्वापक ओषधि, मन;प्रभावी पदार्थ के विक्रय, फुटकर क्रय-विक्रय, साथ रखने, पूर्ति करने या तस्करी करने के लिए उपयोग किया जाना -</p> <p style="text-align: justify;">जो कोई किसी बालक का किसी मादक लिकर, स्वापक ओषधि, मन;प्रभावी पदार्थ के विक्रय, फुटकर क्रय-विक्रय, साथ रखने, पूर्ति करने या तस्करी करने के लिए उपयोग करेगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी और एक लाख रुपए तक के जुर्माने से भी, दंडनीय होगा।</p> <h3 style="text-align: justify;">किसी बाल कर्मचारी का शोषण</h3> <p style="text-align: justify;">तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जो कोई किसी नियोजन के प्रयोजन के लिए बालक को दृश्यमानत; लगाएगा या उसे बंधुआ रखेगा या उसके उपार्जनों को विधारित करेगा या उसके उपार्जन को अपने स्वयं के प्रयोजन के लिए उपयोग में लाएगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक हो सकेगी और एक लाख रुपए के जुर्माने से भी, दंडनीय होगा।</p> <p style="text-align: justify;">स्पष्टीकरण</p> <p style="text-align: justify;">इस धारा के प्रयोजनों के लिए 'नियोजन' पद के अंतर्गत माल और सेवाओं का विक्रय और आर्थिक लाभ के लिए लोक स्थानों में मनोरंजन करना भी आएगा।</p> <p style="text-align: justify;">विहित प्रक्रियाओं का अनुसरण किये बिना <a href="../../../../../../../e-governance/online-legal-services/92e93992494d93592a94293094d923-90592793f92893f92f92e/92c91a94d91a94b902-938947-91c941940-90592793f92893f92f92e/91593f93694b930-92894d92f93e92f-90592793f92893f92f92e-2015/92692494d924915-91794d930939923">दत्तक ग्रहण</a> करने के लिए दांडिक उपाय</p> <p style="text-align: justify;">यदि कोई व्यक्ति या संगठन किसी अनाथ, परित्यक्त या अभ्यर्पित बालक को इस अधिनियम में यथा उपबंधित उपबंधों या प्रक्रियाओं का अनुसरण किए बिना दत्तक ग्रहण करने के प्रयोजन के लिए प्रस्थापना करता है, उसे देता है या प्राप्त करता है, तो ऐसा व्यक्ति या संगठन, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या एक लाख रुपए के जुर्माने से या दोनों से, दंडनीय होगाः</p> <p style="text-align: justify;">परंतु ऐसे मामले में जहां अपराध किसी मान्यताप्राप्त दत्तक ग्रहण अभिकरण द्वारा किया जाता है, दत्तक ग्रहण अभिकरण के भारसाधक और दिन-प्रतिदिन कार्यों के संचालन के लिए उत्तरदायी व्यक्तियों पर अधिनिर्णीत उपरोक्त दंड के अतिरिक्त, ऐसे अभिकरण का धारा 41 के अधीन रजिस्ट्रीकरण और धारा 65 के अधीन उसकी मान्यता को भी कम से कम एक वर्ष की अवधि के लिए वापस ले लिया जाएगा।</p> <h3 style="text-align: justify;">बालकों का किसी प्रयोजन के लिए विक्रय और उपापन</h3> <p style="text-align: justify;">ऐसा कोई व्यक्ति, जो किसी बालक का किसी प्रयोजन के लिए विक्रय या क्रय करता है या उसे उपाप्त करता है, कठिन कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा और एक लाख रुपए के जुर्माने का भी दायी होगा;</p> <p style="text-align: justify;">परंतु जहां ऐसा अपराध बालक का वास्तविक भारसाधन रखने वाले किसी व्यक्ति द्वारा, जिसके अंतर्गत किसी अस्पताल या परिचर्या गृह या प्रसूति गृह के कर्मचारी भी हैं, किया जाता है, वहां कारावास की अवधि तीन वर्ष से कम की नहीं होगी और सात वर्ष तक की हो सकेगी।</p> <h3 style="text-align: justify;">शारीरिक दंड</h3> <ol style="text-align: justify;"> <li>किसी बालक देखरेख संस्था का भारसाधक या उसमें नियोजित कोई व्यक्ति, जो किसी बालक को अनुशासनबद्ध करने के उद्देश्य से किसी बालक को शारीरिक दंड देगा, वह प्रथम दोषसिद्धि पर दस हजार रुपए के जुर्माने से और प्रत्येक पश्चात्वर्ती अपराध के लिए ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से, दंडनीय होगा।</li> <li>यदि उपधारा (1) में निर्दिष्ट संस्था में नियोजित कोई व्यक्ति, उस उपधारा के अधीन किसी अपराध का दोषसिद्ध होता है तो ऐसा व्यक्ति सेवा से पदच्युति का भी दायी होगा और उसे उसके पश्चात् प्रत्यक्षतः बालकों के साथ कार्य करने से भी विवर्जित कर दिया जाएगा।</li> <li>ऐसे मामले में, जहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी संस्था में किसी शारीरिक दंड की रिपोर्ट की जाती है और ऐसी संस्था का प्रबंधतंत्र किसी जांच में सहयोग नहीं करता है या समिति या बोर्ड या न्यायालय या राज्य सरकार के आदेशों का अनुपालन नहीं करता है, वहां ऐसी संस्था के प्रबंधतंत्र का भारसाधक व्यक्ति, ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष से कम की नहीं होगी, दण्डनीय होगा और वह जुर्माने का भी, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, दायी होगा।</li> </ol> <h3 style="text-align: justify;">उग्रवादी समूहों या अन्य वयस्कों द्वारा बालक का उपयोग</h3> <ol style="text-align: justify;"> <li>कोई गैर-राज्यिक, स्वयंभू उग्रवादी समूह या दल, जिसकी केंद्रीय सरकार द्वारा उस रूप में घोषणा की गई है, यदि किसी प्रयोजन के लिए किसी बालक की भर्ती करता है या उसका उपयोग करता है, तो वह कठोर कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष तक ही हो सकेगी, भागी होगा और पांच लाख रुपए के जुर्माने का भी, दायी होगा।</li> <li>कोई वयस्क या कोई वयस्क समूह, बालकों का व्यष्टिक रूप से या किसी गैंग के रूप में अवैध कार्यकलापों के लिए उपयोग करता है, वह कठोर कारावास का, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, भागी होगा और पांच लाख रुपए तक के जुर्माने का भी दायी होगा।</li> </ol> <h3 style="text-align: justify;">बालक का व्यपहरण और अपहरण</h3> <p style="text-align: justify;">इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, भारतीय दंड संहिता की धारा 359 से धारा 369 के उपबंध यथावश्यक परिवर्तनों सहित किसी ऐसे बालक या अवयस्क को लागू होंगे जो अठारह वर्ष से कम आयु का है और सभी उपबंधों का अर्थान्वयन तदनुसार किया जाएगा।</p> <h3 style="text-align: justify;">नि:शक्त बालकों पर किए गए अपराध</h3> <p style="text-align: justify;">जो कोई इस अध्याय में निर्दिष्ट अपराधों में से किसी अपराध को, किसी बालक पर, जिसे किसी चिकित्सा व्यवसायी द्वारा इस प्रकार नि:शक्त रूप में प्रमाणित किया गया है, करता है, वहां ऐसा व्यक्ति ऐसे अपराध के लिए उपबंधित दुगुनी शास्ति का दायी होगा।</p> <p style="text-align: justify;">स्पष्टीकरण इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, “नि:शक्तता'' पद का वही अर्थ होगा जो नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 की धारा 2 के खंड (झ) में उसका है।</p> <h3 style="text-align: justify;">अपराधों का वर्गीकरण और अभिहित न्यायालय</h3> <ol style="text-align: justify;"> <li>जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध सात वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय है, वहां ऐसा अपराध संज्ञेय, अजमानतीय और बालक न्यायालय द्वारा विचारणीय होगा।</li> <li>जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध ऐसे कारावास से दंडनीय है जिसकी अवधि तीन वर्ष और उससे अधिक किंतु सात वर्ष से कम है, वहां ऐसा अपराध संज्ञेय, अजमानतीय होगा और प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय होगा।</li> <li>जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध तीन वर्ष से कम अवधि के कारावास से या केवल जुर्माने से दंडनीय है, वहां ऐसा अपराध असंज्ञेय, जमानतीय और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय होगा।</li> </ol> <h3 style="text-align: justify;">दुष्प्रेरण</h3> <p style="text-align: justify;">जो कोई इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का दुष्प्रेरण करेगा, यदि दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप दुष्प्रेरित कृत्य कर दिया जाता है, वह उस अपराध के लिए उपबंधित दंड से दंडित होगा।</p> <p style="text-align: justify;">स्पष्टीकरण – कोई कृत्य या अपराध, दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया गया तब माना जाएगा जब वह उकसाने के परिणामस्वरूप या षड्यंत्र के अनुसरण में या ऐसी सहायता से, जिससे दुष्प्रेरण गठित होता है, किया जाता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">वैकल्पिक दंड</h3> <p style="text-align: justify;">जहां कोई कार्य या लोप कोई ऐसा अपराध गठित करता है जो इस अधिनियम और तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन भी दंडनीय है, वहां ऐसी किसी विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, ऐसे अपराध का दोषी पाया गया अपराधी ऐसी विधि के अधीन उस दंड का भागी होगा, जो ऐसे दंड का उपबंध करता है जो मात्रा में अधिक है।</p> <h3 style="text-align: justify;">इस अध्याय के अधीन बालक द्वारा किया गया अपराध</h3> <p style="text-align: justify;">कोई बालक जो इस अध्याय के अधीन कोई अपराध करता है वह इस अधिनियम के अधीन विधि का उल्लंघन करने वाला बालक माना जाएगा।</p> स्रोत: <a class="external_link ext-link-icon external-link" title="नए विंडोज में खुलने वाली अन्य वेबसाइट लिंक" href="https://legislative.gov.in/hi" target="_blank" rel="noopener"> विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार </a></div>