<p style="text-align: justify;">हम सब जानते हैं कि अभिभावक बच्चे के व्यक्तित्व के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे बच्चे के प्रथम शिक्षक होते हैं और बच्चे के विकास की मुख्य ज़िम्मेदारी उनकी होती है। इसलिए अभिभावकों व शिक्षकों को एक साथ मिलकर काम करना चाहिए। बच्चे के अधिगम और विकास में अभिभावक व शिक्षक एक साथी के रूप में भागीदार होते हैं। पूर्व-प्राथमिक कार्यक्रम तभी सफल हो सकता हैं जब उसे समुदाय व अभिभावकों का सहयोग प्राप्त होता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">माता पिता की सहभागिता </h3> <p style="text-align: justify;"><strong>पूर्व-प्राथमिक कार्यक्रम में अभिभावक दो तरह से शामिल हो सकते हैं</strong></p> <ol style="text-align: justify;"> <li> माता-पिता को बाल विकास, स्वास्थ्य और पोषण के विभिन्न पहलुओं, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा की शिक्षणप्रक्रिया और उनकी गतिविधियों के बारे में शिक्षित करना चाहिए, जिन्हें वे अपने बच्चों के साथ घर पर करना चाहते हैं जिनमें विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चे भी शामिल हों।</li> <li> पूर्व-प्राथमिक विद्यालय कार्यक्रम में माता-पिता का संसाधन के रूप में सहयोग लेना चाहिए।</li> </ol> <h3 style="text-align: justify;">बच्चों की मदद के लिए अभिभावक शिक्षा</h3> <p style="text-align: justify;">बच्चे स्कूल में जो ज्ञान प्राप्त करते हैं, उसे घर में दोहराने और सुदृढ़ करने के लिए माता-पिता का शिक्षित होना बहुत ज़रूरी है। अभिभावकों को साधारण सस्वर कविता पाठ, कहानी कहने की कला, कठपुतलियाँ बनाना और कम लागत वाले खिलौने आदि बनाना सिखाया जा सकता है। इससे अभिभावक बच्चों से अपनी बातचीत की गुणवत्ता में सुधार लाएँगे और बच्चों को खेलने के अवसर प्रदान करेंगे। उन्हें निम्नलिखित जानकारी से अवगत करवाया जाना चाहिए।</p> <ul style="text-align: justify;"> <li> विकास के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता।</li> <li> बच्चों की आयु के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित करना न कि क्रियाकलापों को उन पर थोपना जिसके लिए वे अभी तैयार नहीं हैं।</li> <li> बच्चे की देखभाल, जैसे भावनात्मक स्वास्थ्य और उसके विकास के विभिन्न चरणों में बच्चे की पोषण संबंधी जरूरतें। बच्चों के विकास में खेल एवं प्रारंभिक प्रेरणात्मक गतिविधियों का महत्व।</li> <li> पूर्व-प्राथमिक कार्यक्रम में खेल विधि को अपनाने का उद्देश्य एवं उसकी आवश्यकता।</li> <li> बच्चों के विकास में अभिभावकों की भूमिका एवं सहयोग।</li> </ul> <h3 style="text-align: justify;">अभिभावकों को संसाधन के रूप में जोड़ना</h3> <p style="text-align: justify;">पूर्व-प्राथमिक शिक्षक को अभिभावकों का सहयोग निम्नलिखित तरीकों से मिल सकता है</p> <ul style="text-align: justify;"> <li> छोटे समूह की गतिविधियों, जैसे रचनात्मक गतिविधियाँ, कहानी कहना, शैक्षिक भ्रमण में बच्चों का साथ देना आदि में एक अतिरिक्त व्यक्ति के रूप में अभिभावक का सहयोग।</li> <li> पूर्व-प्राथमिक शिक्षक के अनुपस्थित होने पर अभिभावकों का विकल्प के रूप में सहयोग।</li> <li> पूर्व-प्राथमिक विद्यालय में एकत्रित की गई बेकार की वस्तुओं का दोबारा प्रयोग करने में अभिभावकों का विशिष्ट व्यक्ति के रूप में सहयोग।</li> <li> बच्चों के हित के लिए किसी विशेष प्रतिभा एवं कौशल में निपुण अभिभावक सहयोग दे सकते हैं, जैसे— बढ़ई को लकड़ी के खिलौने बनाने के लिए कहा जा सकता है, ऐसी माता जो अच्छा गाती है उसका सहयोग बच्चों को गीत सिखाने में लिया जा सकता है और चित्रकार की सहायता विभिन्न प्रकार के चित्र और अलमारियों आदि में पेंट करने में ली जा सकती है।</li> <li> परिवारों की सांस्कृतिक विविधता, जैसे-भोजन, पोशाक, त्योहार आदि की जानकारी साझा करना। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के विषय में जानकारी प्राप्त करना।</li> </ul> <h4 style="text-align: justify;">अभिभावक-शिक्षक संपर्क के अवसर</h4> <ul style="text-align: justify;"> <li> आकस्मिक मिलन, जैसे जब अभिभावक अपने बच्चों को छोड़ने या लेने आते हैं।</li> <li> अपनी सुविधा के अनुसार महीने में एक बार या तीन माह में एक बार शिक्षक-अभिभावक सभा का आयोजन करना।</li> <li> अभिभावकों के साथ तालमेल बनाने और उनको उनके बच्चों की प्रगति के बारे में सूचित करने के लिए शिक्षक/कार्यकर्ता द्वारा प्रत्येक घर का (जहाँ भी संभव हो) कम-से-कम सत्र में एक बार या तिमाही दौरा।</li> <li> बाल मेला या बच्चों का मेला, जो साल में एक बार आयोजित किया जा सकता है जिसमें परिवार को भी आमंत्रित किया जाना चाहिए।</li> <li> चित्रों सहित सूचना पत्र।</li> <li> छोटे वीडियो कार्यक्रम जो अभिभावकों के साथ तकनीक के विभिन्न तरीकों के माध्यम से साझा किए जा सकें।</li> </ul> <h3 style="text-align: justify;">समुदाय की भूमिका</h3> <p style="text-align: justify;">पूर्व-प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम में समुदाय एक महत्वपूर्ण साझेदार है। समुदाय के सदस्यों की भागीदारी से बच्चोंऔर उनके परिवार को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है। यदि समुदाय जागरूक होगा तो ही बच्चों की आवश्यकताएँ पूरी हो सकती हैं। <strong>समुदाय को निम्नलिखित तरीकों से जागरूक किया जा सकता है।</strong></p> <ul style="text-align: justify;"> <li> जागरूकता सृजन कार्यक्रम जिसमें लोकगीत, नुक्कड़ नाटक, कठपुतली का खेल, जत्थे आदि का उपयोग करते हुए छोटे बच्चों के बारे में अक्षमता संबंधीभ्रांतियों को दूर किया जा सकता है।</li> <li>पूर्व-प्राथमिक विद्यालयों में ऐसे समारोह आयोजित करने चाहिए जिसमें समुदाय भाग ले सकें, जैसे उत्सव मनाना, खेल कार्यक्रम, बाल मेला आदि (कुछ अभिभावक ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन और प्रबंधन में भी मदद कर सकते हैं)।</li> </ul> <p style="text-align: justify;">एक बार जब समुदाय पूर्व-प्राथमिक शिक्षा की आवश्यकता को पहचान लेता है तब समुदाय के सदस्यों के बीच पूर्व-प्राथमिक विद्यालय के स्वामित्व की भावना अनिवार्य रूप से विकसित होती है। यह असामान्य बात नहीं है कि समुदाय के सदस्य पूर्व-प्राथमिक विद्यालयों की कई तरीकों से मदद करते हैं, जैसे-पीने का पानी प्रदान करना, पूर्व-प्राथमिक विद्यालय के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराना तथा अन्य संसाधन उपलब्ध कराना। कुछ स्थानीय सदस्यों को पूर्व-प्राथमिक विद्यालय में विभिन्न ज़िम्मेदारियाँ निभाने के लिए नियुक्त किया जा सकता है।हो सकता है कि वे उपयुक्त रूप से प्रशिक्षित या योग्य न हों, फिर भी वे आने वाले समय में पूर्व-प्राथमिक विद्यालय के उद्देश्यों और कामकाज में सुदृढ़ रूप से सहायता करने में सक्षम हो सकते हैं।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत: पूर्व प्राथमिक शिक्षा के लिए दिशा-निर्देश,राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी), श्री अरविंदाे मार्ग, नई दिल्ली।</p>