भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) का उद्देश्य, अंतरिक्ष विजन 2047 के अंतर्गत, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (बीएएस) की स्थापना करना है। भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (बीएएस)-एक अवलोकन भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण अनुसंधान और जीवन विज्ञान एवं चिकित्सा सहित विभिन्न क्षेत्रों में वैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पांच मॉड्यूलों से युक्त समग्र संरचना तैयार कर ली है। राष्ट्रीय स्तर की समीक्षा समिति द्वारा इस समग्र संरचना की समीक्षा की जा चुकी है। सितंबर 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गगनयान कार्यक्रम के दायरे में संशोधन के अंतर्गत वर्ष 2028 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (बीएएस-01) के पहले मॉड्यूल के विकास और शुभारंभ को मंजूरी दी। इसरो केंद्रों/इकाइयों में बीएएस-01 मॉड्यूल की समग्र प्रणाली अभियांत्रिकी और विभिन्न उप-प्रणालियों के प्रौद्योगिकी विकास कार्य प्रगति पर हैं। उन्नत जीवन रक्षक प्रणालियों जैसी तकनीकी विशेषताओं से युक्त भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन निम्न पृथ्वी कक्षा (एलईओ) में दीर्घकालिक रूप से मानव को बसाने को संभव बनाएगा। इससे निम्न पृथ्वी कक्षा में उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रौद्योगिकी प्रदर्शन गतिविधियों को अंजाम देना संभव होगा, जिनका सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है, साथ ही निम्न पृथ्वी कक्षा से परे भारतीय मानव अंतरिक्ष अन्वेषण अभियानों को भी समर्थन मिलेगा। इसरो, बीएएस-01 उप-प्रणालियों के डिज़ाइन में आवश्यक अंतर्राष्ट्रीय मानकों को शामिल कर रहा है ताकि अन्य अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों की प्रदत्त प्रणालियों के साथ बीएएस-01 की अंतर-संचालनीयता सुनिश्चित हो सके। विभिन्न पूर्ववर्ती मिशनों, बीएएस-1 के विकास और प्रक्षेपण के लिए बजटीय आवंटन को गगनयान कार्यक्रम के संशोधित दायरे में शामिल किया गया है, जिसे सितंबर 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के आधार पर पहले से स्वीकृत गगनयान कार्यक्रम में अतिरिक्त निधि जोड़कर 20,193 करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया गया है। बीएएस के लिए समयरेखा पहले मॉड्यूल अर्थात बेस मॉड्यूल (बीएएस-01) का विकास और प्रक्षेपण 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है तथा पांच मॉड्यूलों के साथ बीएएस का पूर्णतः परिचालन 2035 तक पूरा होने की उम्मीद है। स्रोतः पीआईबी