भूमिका देवघर भारत के झारखंड राज्य के 24 जिलों में से एक जिला है। देवघर उत्तरी अक्षांश 24.48 डिग्री और पूर्वी देशान्तर 86.7 पर स्थित है। इसकी मानक समुद्र तल से ऊँचाई 254 मीटर (833 फीट) है। देवघर संथाल परगना के पश्चिमी भाग में अवस्थित है तो उत्तर में बिहार का भागलपुर जिला है, तो दक्षिणी पूर्व में दुमका है और गिरिडीह पश्चिम में है। यह शहर हिन्दुओं का प्रसिद्ध तीर्थ-स्थल है। इस शहर को बाबाधाम नाम से भी जाना जाता है क्योंकि शिव पुराण में देवघर को बारह जोतिर्लिंगों में से एक माना गया है। यहाँ भगवान शिव का एक अत्यंत प्राचीन मंदिर स्थित है। हर सावन में यहाँ लाखों शिव भक्तों की भीड़ उमड़ती है जो देश के विभिन्न हिस्सों सहित विदेशों से भी यहाँ आते हैं। इन भक्तों को काँवरिया कहा जाता है। ये शिव भक्त बिहार में सुल्तानगंज से गंगा नदी से गंगाजल लेकर 105 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर देवघर में भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं। देवघर का इतिहास देवघर का अर्थ है देवों का घर यानि जहाँ देवता निवास करते हैं। देवघर के अन्य नाम है बैद्यानाथ धाम, बाबाधाम आदि। हालाकिं, इतिहास में बाबाधाम के उत्पत्ति का कोई खास उल्लेख नहीं है, लेकिन संस्कृत के कुछ लेखों में इसका उल्लेख हरिताकिवन या केतकीवन के नामों से किया गया है। यह नाम देवघर कुछ सालों पुराना ही प्रतीत होता है, संभवतः इस विशाल मन्दिर के निर्माण के पश्चात। इस मंदिर के निर्माणकर्ता के विषय में अधिक जानकारी तो उपलब्ध नहीं है, पर माना जाता है की पूरण मल, गिद्धौर के महाराज के वंशज ने 1596 में इस मंदिर का निर्माण करवाया था। जनसांख्यिकी 2011 की भारत जनगणना के अनुसार देवघर की जनसंख्या 203,116 है जिसमें से 17.62% बच्चे 6 वर्ष से कम आयु के हैं। इस आबादी का 52% भाग पुरूष हैं एवं 48% महिलाएँ हैं।2011 तक देवघर की औसत साक्षरता दर 66.34% है जो राष्ट्रीय औसत दर 74.4% से कम है। पुरूष साक्षरता 79.13% और महिला साक्षरता 52.39% है। आयाम देवघर झारखण्ड स्त्रोत साल जनसँख्या 1492073 32988134 जनगणना 2011 पुरुष 775022 16930315 जनगणना 2011 महिला 717051 16057819 जनगणना 2011 ग्रामीण 1233712 25055073 जनगणना 2011 शहरी 258361 7933061 जनगणना 2011 अनुसूचित जाति जनसँख्या 190036 3985644 जनगणना 2011 अनुसूचित जाति पुरुष 98295 2043458 जनगणना 2011 अनुसूचित जाति महिला 91741 1942186 जनगणना 2011 जनसँख्या बढ़ोतरी दर, 2001-11 (%) 28.02 22.34 जनगणना 2011 बच्चों की जनसँख्या (0-6 साल) 268453 5389495 जनगणना 2011 बच्चों की जनसँख्या और सम्पूर्ण जनसँख्या का प्रतिशत; (0-6 साल) 17.99 16.33 जनगणना 2011 लिंग अनुपात (हर 1000 पुरुष पर एक महिला) 925 949 जनगणना 2011 कुल लिंग अनुपात, जन्म के समय 952 930 जनगणना 2011 जन्म के समय लिंग अनुपात, ग्रामीण 952 943 जनगणना 2011 जन्म के समय लिंग अनुपात, शहरी 947 884 जनगणना 2011 बच्चों का लिंग अनुपात (0-6 वर्ष; हर 1000 लड़कों पर लड़कियां) 950 948 जनगणना 2011 शिक्षा आयाम देवघर झारखण्ड स्त्रोत साल साक्षरता दर प्रतिशत 64.9 66.4 जनगणना 2011 साक्षरता दर प्रतिशत -पुरुष 76.9 76.8 जनगणना 2011 साक्षरता दर प्रतिशत – महिला 51.8 55.4 जनगणना 2011 लड़के (6-17)साल जो स्कूल जा रहे है 91.7 91.6 वार्षिक स्वास्थ्य सर्वे 2012-13 लड़कियां (6-17) साल जो स्कूल जा रहीं हैं 90.3 91.8 वार्षिक स्वास्थ्य सर्वे 2012-13 6-14 साल के बच्चों का प्रतिशत जिन्होंने स्कूल छोड़ दिया है 4.8 4.4 वार्षिक स्वास्थ्य सर्वे 2012-13 प्रखंडों की जनसांख्यिकी आयाम जनसँख्या पुरुष महिला बच्चों की जनसँख्या लिंग अनुपात बच्चों का लिंग अनुपात साक्षरता दर प्रतिशत (7 साल और ऊपर) उप-प्रखंड देवघर 346089 182595 163494 53405 895 907 76.75 मोहनपुर 175845 91477 84368 32766 922 955 58.66 सरवन 90757 47269 43488 16570 920 955 63.99 सोना राय थरही 76116 39394 36722 14957 932 97 58.03 देवीपुर 107015 55679 51336 20784 922 970 59.43 मधुपुर 190748 98716 92032 34439 932 971 65.60 मार्गो मुंडा 86733 44284 42449 18862 959 968 58.46 करों 88251 45317 42934 16759 947 973 59.61 सराथ 169238 87698 81540 29953 930 960 62.63 पलोजोरी 161281 82593 78588 29958 953 942 60.27 मुख्य आकर्षण बाबा बैद्यनाथ ऐतिहासिक मंदिर झारखंड कुछ प्रमुख तीर्थस्थानों का केंद्र है जिनका ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्व है। इन्हीं में से एक स्थान है देवघर। यहस्थान संथाल परगना के अंतर्गत आता है। देवघर शांति और भाईचारे का प्रतीक है। यह एक प्रसिद्ध हेल्थ रिजॉर्ट है। लेकिन इसकी पहचान हिंदु तीर्थस्थान के रूप में की जाती है। यहां बाबा बैद्यनाथ का ऐतिहासिक मंदिर है जो भारत के बारह ज्योतिर्लिगों में से एक है। माना जाता है कि भगवान शिव को लंका ले जाने के दौरान उनकी स्थापना यहां हुई थी। प्रतिवर्ष श्रावण मास में श्रद्धालु 100 किमी. लंबी पैदल यात्रा करके सुल्तानगंज से पवित्र जल लाते हैं जिससे बाबा बैद्यनाथ का अभिषेक किया जाता है। देवघर की यह यात्रा बासुकीनाथ के दर्शन के साथ सम्पन्न होती है। बैद्यनाथ धाम के अलावा भी यहां कई मंदिर और पर्वत हैं जहां दर्शन कर अपनी इच्छापूर्ति की कामना की जा सकती है। बैद्यनाथ की यात्रा श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) शुरु होती है। सबसे पहले तीर्थयात्री सुल्तानगढ़ में एकत्र होते हैं जहां वे अपने-अपने पात्रों में पवित्र जल भरते हैं। इसके बाद वे बैद्यनाथ और बासुकीनाथ की ओर बढ़ते हैं। पवित्र जल लेकर जाते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वह पात्र जिसमें जल है, वह कहीं भी भूमि से न सटे। बासुकीनाथ मंदिर बासुकीनाथ अपने शिव मंदिर के लिए जाना जाता है। बैद्यनाथ मंदिर की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक बासुकीनाथ में दर्शन नहीं किए जाते। यह मंदिर देवघर से 42 किमी. दूर जरमुंडी गांव के पास स्थित है। यहां पर स्थानीय कला के विभिन्न रूपों को देखा जा सकता है। इसके इतिहास का संबंध नोनीहाट के घाटवाल से जोड़ा जाता है। बासुकीनाथ मंदिर परिसर में कई अन्य छोटे-छोटे मंदिर भी हैं। बैजू मंदिर बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर के पश्चिम में देवघर के मुख्य बाजार में तीन और मंदिर भी हैं। इन्हें बैजू मंदिर के नाम से जाना जाता है। इन मंदिरों का निर्माण बाबा बैद्यनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी के वंशजों ने करवाया था। प्रत्येक मंदिर में भगवान शिव का लिंग स्थापित है। त्रिकुट देवघर से 16 किमी. दूर दुमका रोड पर एक खूबसूरत पर्वत त्रिकूट स्थित है। इस पहाड़ पर बहुत सारी गुफाएं और झरनें हैं। बैद्यनाथ से बासुकीनाथ मंदिर की ओर जाने वाले श्रद्धालु मंदिरों से सजे इस पर्वत पर रुकना पसंद करते हैं। नौलखा मंदिर देवघर के बाहरी हिस्से में स्थित यह मंदिर अपने वास्तुशिल्प की खूबसूरती के लिए जाना जाता है। इस मंदिर का निर्माण बालानंद ब्रह्मचारी के एक अनुयायी ने किया था जो शहर से 8 किमी. दूर तपोवन में तपस्या करते थे। तपोवन भी मंदिरों और गुफाओं से सजा एक आकर्षक स्थल है। नंदन पहाड़ इस पर्वत की महत्ता यहां बने मंदिरों के झुंड के कारण है जो विभिन्न भगवानों को समर्पित हैं। पहाड़ की चोटी पर कुंड भी है जहां लोग पिकनिक मनाने आते हैं। कैसे पहुंचे देवघर नजदीकी हवाई अड्डे : राँची, गया, पटना और कोलकाता सड़क मार्ग द्वारा : कोलकाता से 373 कि.मी., गिरिडीह से 112 कि.मी., पटना से 281 कि.मी. रेल द्वारा : निकटतम रेलवे स्टेशन जसीडिह यहाँ से 10 कि॰मी॰ है जो हावड़ा पटना दिल्ली लाइन पर स्थित है। देवघर सड़क मार्ग द्वारा कलकत्ता (373 किमी.), गिरीडीह (112 किमी.), पटना (281 किमी.), दुमका (67 किमी.), मधुपुर (57 किमी.) और शिमुलतला (53 किमी.) से जुड़ा हुआ है। बस : भागलपुर, हजारीबाग, रांची, जमशेदपुर और गया से देवघर के लिए सीधी और नियमित बस सेवा उपलब्ध है। धार्मिक पृष्ठभूमि के अतिरिक्त देवघर की अपनी ऐतिहासिक पहचान भी है। यहां के वैद्यनाथ मंदिर के निर्माण का अपना इतिहास है। यहां अनेक पुरातात्विक और ऐतिहासिक धरोहर, मूर्तियां, शिलालेख और अन्य प्रतीक विद्यमान हैं। इसके साथ ही अनेक महापुरुष भी समय-समय पर देवघर आकर यहां का महत्व बढ़ाते रहे हैं। इन सबको ऐतिहासिक चित्रों के माध्यम से 'इतिहासघर' में सहेजा गया है। स्त्रोत: जिला आधिकारिक वेबसाइट, देवघर, झारखण्ड सरकार