परिचय एक वाद्य यंत्र का निर्माण या प्रयोग, संगीत की ध्वनि निकालने के प्रयोजन के लिए होता है। सिद्धांत रूप से, कोई भी वस्तु जो ध्वनि पैदा करती है, वाद्य यंत्र कही जा सकती है। वाद्ययंत्र का इतिहास, मानव संस्कृति की शुरुआत से प्रारंभ होता है। भारतीय वाद्य यंत्रों को मोटे तौर पर चार वर्गों में बांटा जा सकता है- तारयुक्त वाद्ययंत्र, हवा से बजने वाले वाद्ययंत्र, झिल्ली के कम्पन वाले वाद्ययंत्र तथा इडियोफोन। क्या है केंदरी वाद्य यंत्र संथालों का यह प्रिय वाद्य है। इसे झारखंडी वायलिन भी कहा जाता है। कछुए की खाल या नारियल के खोल से इसका तुम्बा बनाया जाता है। तुम्बा से बांस या लकड़ी का दंड जुड़ा रहता है। उस पर तीन तार लगे रहते हैं। घोड़े की पूंछ के बाल से गज बनाया जाता है। गज और दंड के तारों की रगड़ से स्वर निकलते हैं। स्त्रोत एवं सामग्रीदाता : संवाद