परिचय एक वाद्य यंत्र का निर्माण या प्रयोग, संगीत की ध्वनि निकालने के प्रयोजन के लिए होता है। सिद्धांत रूप से, कोई भी वस्तु जो ध्वनि पैदा करती है, वाद्य यंत्र कही जा सकती है। वाद्ययंत्र का इतिहास, मानव संस्कृति की शुरुआत से प्रारंभ होता है। कैसे बजता है घन वाद्य - इसमें धातु से निर्मित वाद्य आते हैं। जैसे, झांझ, झाल, करताल, घंटा, काठी, थाला आदि। इनमें एक दो को छोड़ कर सभी वाद्य कांसा धातु से बनते हैं। इसकी वजह से इनकी टन-टन आवाज दूर-दूर तक सुनायी देती है। ये सभी सहायक ताल वाद्य की श्रेणी में ही आते हैं। कैसे बजता है करताल करताल में दस इंच व्यास के दो चपटे व गोलाकार प्याले होते हैं। इन प्यालों के बीच का हिस्सा उपर की ओर उभरा रहता है। उभरे हिस्से के बीच में छेद होता है। छेद में रस्सी पिरो दी जाती है। रस्सियों को हाथों की उंगलियों में फंसाकर दोनों प्यालों से ताली बजाने की तर्ज पर एक-दूसरे पर चोट की जाती है। कैसे बजता है झांझ करताल का बड़ा आकार ही झांझ कहलाता है। आकार में बड़ा होने की वजह से इसकी आवाज में करताल से ज्यादा गूंज होती है। थाला कांसा से निर्मित थाली होती है। इसका गोलाकार किनारा दो-तीन इंच उठा हुआ होता है। बीच में छेद होता है, जिसमें रस्सी पिरोकर झुलाया जाता है। बायें हाथ से रस्सी थाम कर हाथ दायें से इसे भुट्टे की खलरी से बजाया जाता है। कैसे बजता है काठी काठी भी घन वाद्य है। इसमें 'कुडची' की लकड़ी के दो टुकड़े होते हैं। वे जब आपस में टकराते हैं तो मीठी आवाज निकलती है। स्त्रोत एवं सामग्रीदाता : संवाद