परिचय डाक-टिकट, जिसकी शुरुआत कागज के एक टुकड़े के रूप में हुई और जो डाक-शुल्क की प्राप्ति के रूप में प्रदान किया जाता था, ने अतिरिक्त कार्य ग्रहण किए हैं। यह राष्ट्री्य धरोहरों एवं घटनाओं को स्मरण करने, मनाने एवं प्रोत्सारहित करने का माध्यम है। यह किसी डाक प्रशासन की ब्रांड छवि है और देश की संप्रभुता की अभिव्यक्ति है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद प्रारंभ में डाक-टिकटों का प्रयोग विज्ञान एवं प्रौ़द्योगिकी के क्षेत्र में देश की प्रगति के साथ-साथ पंचवर्षीय योजनाओं, इस्पारत संयंत्रों, बांधों आदि जैसे विषयों को आधार बनाते हुए देश के सामाजिक-आर्थिक विकास को प्रतिबिंबित करने के लिए किया गया था। तत्पश्चात, देश की समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की जाने लगी और विषय-आधारित सेटों में कला, वास्तु कला, शिल्प , समुद्री विरासत, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, रक्षा और सिनेमा पर अनेक आकर्षक डाक-टिकट जारी किए गए। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व के अनेक महान नेताओं पर भी स्मारक डाक-टिकट जारी किए जा चुके हैं। इनमें सबसे प्रमुख हैं, राष्ट्रपिता महात्माह गांधी जिनको स्मारक और नियत डाक टिकटों से सम्मानित किया गया है। पेंटिंग, साहित्य, विज्ञान, संगीत,सामाजिक उत्थान आदि क्षेत्रों में योगदान देने वाले व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया। विशेष शौक के रूप में फिलैटली का महत्व क्या है? फिलैटली आनन्दप्रद शौक है जो आपके सौन्दर्यपरक अभिरुचियों को तीव्र और तृप्त करता है। आपके ज्ञान के क्षेत्र का विस्तार कर आप जिस दुनिया में रहते हैं उससे परस्पर संवाद करते हुए आप राजनीति, इतिहास, प्रमुख व्यक्तियों, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं, भूगोल, पादप और जन्तु जगत, कृषि, विज्ञान, स्मारकों, सैनिकों, योद्धाओं, वैज्ञानिकों, अस्त्रम एवं शस्त्रम, परिवहन के माध्यमों आदि के बारे में रोचक जानकारियां प्राप्त करते हैं। सीखने की यह प्रक्रिया दृश्य-सामग्रियों और संक्षिप्तर आलेखों के माध्यम से और आनन्ददायक बन जाती है। इसके अलावा, डाक-टिकट संग्रहण जानकारियों के प्रति अत्यन्त सूक्ष्म और संकेन्द्रित ध्यान दे पाने की क्षमता उत्पन्न करता है। यह आपको आयु और सीमा के परे दोस्त बनाने में भी सहायता करता है। मैं क्या संग्रहीत कर सकता हूँ? मिन्ट-डाक-टिकट (अप्रयुक्त डाक-टिकट) और प्रयुक्त डाक-टिकट, दोनों संग्रहीत किए जा सकते हैं। ये डाक-टिकट वर्षवार, राष्ट्रवार या विषयवार संग्रहीत किए जा सकते हैं। आरंभ के लिए इसे और अधिक आसान तथा आकर्षक बनाने के लिए फिलैटलिविद आपको अपनी अभिरुचि के अनुसार डाक-टिकट संग्रह करने की सलाह देते हैं जिसे विषयपरक संग्रहण कहा जाता है। चुने जाने वाले विषय पुष्प, पक्षियों, पशु, वास्तुकला, रेलवे, स्मारक, रेड-क्रास आदि हो सकते हैा। एक विषय के रूप में नियत डाक-टिकट और स्टेशनरी भी संग्रह की जा सकती है। सबसे महत्ववपूर्ण बात यह है कि संग्रहण किसी कहानी की भांति किसी विषय के विभिन्नर पहलुओं को प्रकट कर देता है। डाक-टिकटों के प्रकार डाक-टिकट स्मारक और नियत प्रकार के होते हैं। स्मारक डाक-टिकट, जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट होता है, महत्वपूर्ण घटनाओं, विभिन्नं क्षेत्रों के प्रमुख व्यक्तियों, प्रकृति के पहलुओं, सुन्दर या विलुप्त प्राय पेड़-पौधे, पर्यावरणीय मुद्दों, कृषि के कार्यकलापों, राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय मामलों, खेलों आदि के स्मारण में जारी किए जाते हैं।ये डाक-टिकट केवल फिलैटली ब्यूरो और काउंटरों में या फिलैटली जमा खाता स्की़म के तहत मिलते हैं। इनका मुद्रण सीमित मात्रा में होता है। दूसरी और नियत डाक-टिकट दिन-प्रतिदिन के डाक प्रेषण प्रयोजन हेतु प्रयोग में लाए जाते हैं और 20 पैसे से अधिक के भिन्न-भिन्न आरोही मूल्यवर्गों में सभी डाक काउंटरों में उपलब्ध हैं। मैं प्रयुक्त डाक-टिकट किस प्रकार संग्रहीत कर सकता हूं? जो पत्र आप प्राप्त करते हैं उसे यूं ही फेंक न दें। आप इनके जरिए प्रयुक्त डाक-टिकट संग्रह कर सकते हैं। इन्हें अत्यतन्त सावधानीपूर्वक डाक-सामग्री से अलग किया जा सकता है। अपने हाथों या मुलायम ब्रश के जरिए उस बरतन में साफ करें जिसमें सतही तौर पर पानी रखा हुआ हो। इन्हें अंधेरे स्थान में सावधानीपूर्वक सुखाएं क्योंकि सूर्य की पराबैंगनी किरणें रंग को नुकसान पहुंचा सकती हैं। डाक टिकटों को उस लिफाफे के साथ रखना भी महत्वपूर्ण है जिन पर इन्हें चिपकाया गया है क्योंकि इससे इनका इस्तेमाल अधिप्रमाणित होता है। मैं डाक–टिकट कहां प्राप्त कर सकता हूं? मिन्ट डाक-टिकट नामोद्दिष्ट डाकघरों के फिलैटली ब्यू्रो और काउंटरों में उपलब्धं होते हैं| जिनके ब्योरे आपके निकटतम प्रधान डाकघर में मिल जाएंगे। आप स्थानीय फिलैटलीविदों से सम्पर्क करें जो शायद आपका इस संबंधों में मार्गदर्शन कर पाएंगे| देश और विदेश दोनों में पत्र मित्र बनाएं-आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि अनेकों लोगों की रुचियां आपसे मिलती हैं। आप एलबम किस प्रकार प्राप्त कर सकते हैं और कैसे इनका इस्तेमाल कर सकते हैं? प्रमुख पुस्तक तथा स्टेशनरी स्टोरों और फिलैटलीविदों के पास एलबम उपलब्ध हैं। उन पर डाक-टिकट चिपकाने से ये खराब हो जाते हैं एलबम में इन्हें रखने के लिए पेपर हिन्जल या हैविड का इस्तेमाल करें। अब प्लास्टिक स्ट्रिप अलबम भी उपलब्ध हैं जो आरंभकों के प्रयोग के लिए आदर्श हैं। डाक-टिकटों को चिमटे के साथ हैंडल करें ताकि आपकी अंगुलियों से इन पर धब्बा नहीं पड़े अथवा उन्हें कोई नुकसान नहीं हो। फिलैटली ब्यूरो में कौन-कौन सी फिलैटली सामग्री उपलब्ध हैं? फिलैटली सामग्री में निम्नलिखित सम्मिलित हैं :- मिन्ट डाक-टिकट (अप्रयुक्त डाक-टिकट) प्रथम दिवस आवरण (जो प्रत्येक स्मारक डाक-टिकट के साथ जारी किया जाता है) विवरणिका (प्रत्येंक स्मारक डाक-टिकट के साथ निकाली जाने वाली सूचनापरक शीट) कलेक्टकर्स पैक, वर्षवार। लघुकृत/स्मा्रिका शीट जो कभी-कभी जारी की जाती है। स्मारक डाक-टिकट। 1947 से अब तक भारत के डाक टिकटों की सूची। फिलैटली ब्यूरो, फिलैटली काउंटर और प्राधिकृत डाकघर क्या है? फिलैटली ब्यूरो सर्किल हैड ऑफिसों या प्रमुख जिला स्तरीय शहरों के 68 प्रधान डाकघरों में चल रहे हैं। 68 फिलैटली ब्यूरो तथा 1111 फिलैटलिक काउंटर हैं जिसमें देश के सभी प्रधान डाकघर अथवा मुख्य डाकघर शामिल हैं। फिलैटली सभी आयु समूहों में एक शौक के रूप में लोकप्रिय होता जा रहा है। वर्ष 2009 के दौरान 69 निर्गमों के साथ कुल 105 डाक टिकट जिसमें स्माररक/विशेष डाक टिकट शामिल हैं, जारी किए गए हैं। जारी किए गए अंतिम महत्वपूर्ण एवं सुंदर डाक टिकटों में “ध्रुवीय क्षेत्रों तथा हिमानियों का संरक्षण,” “पूर्वोत्तणर के दुर्लभ वन्य जन्तु,” “जयदेव तथा गीत गोविन्द” (दशावतार विषय) तथा भारत फिलीपिन्स संयुक्त डाक टिकट, भारत के घोड़े तथा पारम्परिक भारतीय वस्त्र पर डाक टिकटों का उल्लेख किया जा सकता है। सभी व्यक्तियों को आश्रित काउंटरों तथा अधिकृत डाकघरों से फिलैटलिक वस्तुरओं की बिक्री की जाती है। इन ब्यूरो पर फिलैटलिक जमा खाता खोला जा सकेगा। फिलैटलिक काउंटर सभी फिलैटलिक वस्तुओं की आपूर्ति करते हैं लेकिन वे विशेष विरुपण को जारी करने के लिए प्राधिकृत नहीं है जो प्रत्येक स्मारक डाक टिकट के साथ संलग्नक है। वे मानकीय प्रथम दिवस निर्गम, प्रथम दिवस आवरण पर विरुपण प्रदान करते हैं। अधिकृत डाकघर केवल स्मा्रक/विशेष डाक टिकट, रिक्त प्रथम दिवस आवरण तथा ब्राउचर बेचते हैं। भारतीय डाक टिकटों की सूची 1947 से आगे जारी भारतीय डाक टिकटों की सूची समय-समय पर अद्यतन की जाती है और इसे फिलैटली ब्यूरो में बिक्री हेतु उपलब्ध कराया जाता है। यदि आप विदेश में इसे मंगवाना चाहते हैं तो कृपया निदेशक, मुम्बई जीपीओ, मुम्बई, महाराष्ट्र, भारत से सम्पार्क करें। फिलैटलीविदों से सम्पर्क करना डाक-टिकटों का संग्रहण करने के संबंध में मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए विशेष कर आरंभकों द्वारा बहुत पूछताछ की जाती है। आप भारतीय फिलैटली कांग्रेस से sahadevas@yahoo.com पर जानकारी प्राप्त या परामर्श कर सकते हैं। हालांकि, डाक विभाग भारतीय फिलैटली कांग्रेस द्वारा दी गई जानकारी आदि के लिए उत्तपरदायी नहीं होगा क्यों कि डाक विभाग फिलैटली के द्वितीयक बाजार की देखरेख नहीं करता है। प्रकाशन डाक विभाग द्वारा हिन्दी और अंग्रेजी में प्रकाशित फिलैटली प्रकाशन, जिसका शीर्षक है, “भारतीय डाक टिकटों के माध्यम से भारत का स्वंतंत्रता संग्राम," 500/- रु. में 40% डिस्काउंट के साथ फिलैटली ब्यूरों में बिक्री हेतु उपलब्ध है। लेकिन क्रेता द्वारा पुस्त्क के मूल्य के साथ पैकिंग एवं अग्रेषण प्रभार की अदायगी अग्रिम रूप से की जाएगी। अग्रेषण के मद में भारत के भीतर देय प्रभार पंजीकरण के माध्यम से 220/- रु. और पंजीकृत पार्सलों के माध्यम से 60/- रु. है। निवल राशि ग्राह्य डिस्का्उंट की कटौती करके और पैकिंग तथा अग्रेषण प्रभार जोड़ करके मनीआर्डर या डिमांड ड्राफ्ट (चैक नहीं) माध्यम से प्रेषित की जा सकती है। इसलिए, पंजीकृत पत्रों के लिए कुल राशि 520/- रु. और पंजीकृत पार्सल के लिए 360/- रु. है। विदेश से प्राप्त आर्डरों के लिए श्रेणी-। में आने वाले देशों के लिए शुद्ध राशि 830/- रु. है और श्रेणी-।। में आने वाले देशों के लिए 1070/- रु. हैं। इसे केवल मुम्बई जीपीओ में भेजा जाए जो ऐसे आर्डर करने के लिए प्राधिकृत है। डाक-टिकट तस्वीरों को पुन: प्रस्तुत करने की शर्तें डाक-टिकटों को पुन: बनाने की अनुमति फिलैटली प्रकाशन में चित्रण अथवा पूर्णतया डाक-टिकटों से संबंधित लेखों के लिए दी जा सकती है जो किसी पत्रिका, समाचार पत्र अथवा सामान्यण प्रकृति के प्रकाशन में छपते हों। यह पुन: प्रस्तुतीकरण केवल काले रंग में होना चाहिए। यदि प्रचार के प्रयोजनों से डाक-टिकटों को रंगीन रूप में प्रस्त करना है, तो डाक महानिदेशक की पूर्वअनुमति ली जानी आवश्यकक है। पोस्टेज में समरूपता से बचने के लिए यह पुन: प्रस्तीकरण वास्तविक डाक-टिकट से छोटे अथवा बड़े आकार में होना चाहिए और इसके किनारों में छिद्रण नहीं होना चाहिए। डाक-टिकट के एक कोने में मूल्यो को काटते हुए आर-पार एक रेखा होनी चाहिए। यह ध्यान दिया जाए कि डाक-टिकट के वास्तविक आकार में और रंगीन होने पर तथा किनारों पर छिद्रण होने पर उसे वास्तविक डाक-टिकट का बनाया जाना माना जाएगा। विशेष विरुपण/आवरण हेतु दरें विभागीय शुल्क विशेष विरुपण / आवरण हेतु पुरानी दरें विशेष विरुपण/आवरण हेतु संशोधित/बढ़ी हुई दरें रु. में प्रतिदिन प्रति डाकघर प्रतिदिन यदि यह प्रस्तावक के परिक्षेत्र में है। (रुपये में) रु. में प्रतिदिन प्रति डाकघर प्रतिदिन यदि प्रस्तावक के परिक्षेत्र में है। (रुपये में) कार्य दिवसों पर 1,500/- 3,000/- 5,000/- 10,000/- रविवार/छुट्टी के दिन 3,000/- 6,000/- 10,000/- 20,000/- नई दरें 01.08.2010 से लागू हो गयी है। विभाग के फिलैटलिक कार्यकलाप में निम्नलिखित शामिल हैं विशेष/स्मारक डाक-टिकटों की डिजाइनिंग, मुद्रण और इनका वितरण नियत डाक-टिकटों एवं डाक लेखन-सामग्री, जैसे लिफाफे, अंतर्देशीय पत्र कार्ड, पोस्ट कार्ड, ऐरोग्राम, रजिस्टर्ड कवर आदि की डिजाइनिंग, मुद्रण और इनका वितरण-फिलैटली का प्रोत्साहन तथा फिलैटली प्रदर्शनियों के आयोजन के साथ-साथ राज्य/क्षेत्रीय तथा जिला स्तर पर प्रदर्शनियों की मानीटरिंग करना। राष्ट्रीय डाक टिकट संग्रहलाय, डाक भवन का रख-रखाव - डाक विभाग फिलैटलिक तालिका प्रबंधन के लिए साफ्टेवयर को रोल आउट करने की प्रक्रिया में है। इनका प्रयोग भविष्य वाणी, मांगपत्र, इनवाइसिंग, मानीटरिंग आपूर्ति तथा मांग सहित फिलैटली से संबंधित सभी कार्यकलापों तथा बिक्री तथा राजस्व के रख-रखाव में किया जाएगा। - स्मारक डाक-टिकट जारी करने की वार्षिक योजना पर विभाग को परामर्श प्रदान करने लिए एक फिलैटली सलाहकार समिति (पीएसी) का गठन किया गया है। विभाग को प्रतिवर्ष डाक-टिकट जारी करने के लिए विभिन्न स्रोतों से बड़ी संख्या में प्रस्ताव प्राप्त होते हैं। इन स्रोतों में सांसद, विधायक, राज्य सरकारें तथा अन्य सार्वजनिक व निजी संगठन/संस्थान तथा निजी व्यक्ति शामिल हैं। समिति इन प्रस्तावों को कुछ दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए जांच किए जाने पर डाक-टिकटों के फिलैटलिक महत्व को ध्यान में रखते हुए तथा मुद्रण एवं उनके विक्रय की क्षमता के मद्देनजर डाक-टिकटों को जारी करने का वार्षिक कार्यक्रम निर्धारित करती है। फिलैटली सलाहकार समित (पीएसी) द्वारा फिलैटली तथा उसके संवर्द्धन से संबंधित नीतिगत विषयों पर भी विचार किया जाता है और सिफारिशें प्रस्तुत की जाती हैं। इस समिति की अध्यक्षता प्रभारी मंत्री महोदय करते हैं तथा डाक विभाग और आर्थिक कार्य विभाग के आधिकारिक सदस्य तथा नामित किए गए गैर-आधिकारिक सदस्य इसमें शामिल होते हैं। गैर-आधिकारिक सदस्यों में संसद सदस्य, जाने माने फिलैटलीविद तथा जन-जीवन के अन्य क्षेत्र जैसे कला, वास्तुशास्त्रय, डिजाइन, फोटोग्राफी, मीडिया एवं शिक्षण की गणमान्य विभूतियों को शामिल किया जाता है। फिलैटली प्रोत्साहन डाक विभाग द्वारा कई डाक प्रशासक जैसे ब्रिटेन, फ्रांस, यूएसए, हांगकांग, थाईलैंड इत्यादि के अनुभव के क्रम में राजस्व सृजन हेतु एक कार्यकलाप के रूप में फिलैटली को अपनाया गया है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान फिलैटली के विकास एवं प्रोत्साहन हेतु डाक विभाग द्वारा किए गए विभिन्न उपायों में निम्नलिखित शामिल हैं :- समूचे देश में डाक टिकटों की प्रद्र्शनियों का आयोजन, फिलैटलिक ब्यूरो का सौन्दर्यकरण तथा प्रौद्योगिकी उन्नइयन, टिकट डिजाइन प्रतियोगिताएं, फिलैटली वस्तुओं की बिक्री फिलैटली कार्यकलापों के मुहिम सृजन में जागरुकता लाना, संपर्क करें भारत से निदेशक (फिलैटली) डाक भवन, संसद मार्ग, नई दिल्ली1-110001 दूरभाष+91-11-23096020 फैक्स+91-11-23096020 ई-मेल – directorphilately@indiapost.gov.in विदेशों से निदेशक मुम्बई जनरल पोस्ट ऑफिस, मुम्बई -400001 दूरभाष:91-22-22620693 फैक्स 91-22-22624199 ई-मेल- mgpo400001@gmail.com , mumbaigpophilately@gmail.com स्त्रोत: भारतीय डाक