पृष्ठभूमि बच्चे राष्ट्र की सबसे बड़ी पूँजी बच्चे निःसन्देह, किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूँजी हैंI जैसा कि अँग्रेजी कवि बर्डसवर्थ ने सही व्याख्या की है, बच्चा आदमी का पिता होता हैI किसी राष्ट्र में बच्चों की देखभाल कैसे की जाती है एवं किस प्रकार उनका पालन किया जाता है यह राष्ट्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण सूचक हैI सामान्य तौर से विद्यालय एवं खेल के मैदान ही वे स्थल हैं जहाँ बच्चों को होना चाहिए। सही उम्र में शिक्षा एवं आनन्दपूर्ण शारीरिक एवं मनोरंजक गतिविधियाँ बच्चों के बौद्धिक एवं शारीरिक क्षमता के विकास के लिए परमावश्यक हैं। किन्तु प्रायः ऐसा भी देखने को मिलता है कि परिस्थितियों के दबाव में बच्चे गरीबी की मार झेल रहे अपने माता-पिता की अल्प आय की कमी को पूरा करने के लिए स्कूल एवं खेल-मैदान के बदले कार्य स्थल पर पाये जाते हैंI यहाँ तक कि कभी-कभी तो खतरनाक पेशों एवं प्रक्रियाओं में भी इन्हें कार्य करना पड़ता हैI यह किसी भी बच्चे के लिए, जबतक वह वयस्क नहीं हो जाता, अत्यन्त ही दुष्कर है एवं उसके स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए हानिकारक हैI यह इस बात को भी प्रबल रूप से उद्घाटित करता है कि हम राष्ट्र के रूप में सभी नहीं तो कुछ बच्चों की ही देखभाल एवं पालन-पोषण किस प्रकार कर रहे हैंI बच्चों के स्कूल की बजाय काम पर जाने के कारण देश में स्कूल के बाहर पाये जाने वाले बच्चों में कामकाजी बच्चों की संख्या काफी बड़ी हैI बच्चों के स्कूल की बजाय काम पर जाने के कई कारण हैंI हालांकि स्कूलों के वातावरण एवं पठन-पाठन में लगातार सुधार भी इस समस्या के समाधान के लिए जरूरी है, किन्तु इस समस्या के कारण काफी गहरे हैंI इस समस्या की जड़ में कामकाजी बच्चों के अस्तित्व को प्रभावित करने वाली सामाजिक-आर्थिक संरचना है। कामकाजी बच्चों में सबसे भयावह स्थिति बाल श्रमिकों की होती है जिन्हें अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक कार्य करने को विवश होना पड़ता हैI कार्य की अवधि जिनकी शिक्षा, मनोरंजन एवं विश्राम को बाधित करती है, जिनकी मजदूरी किये गये कार्य के अनुरूप नहीं होती, एवं जिन पेशों में वे कार्य करते हैं उससे उनके स्वास्थ्य एवं सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगता है, यानी जब वे शोषण के शिकार हो जाते हैं। बाल श्रम गरीबी, आर्थिक-प्रवंचना एवं अशिक्षा का परिणाम बाल श्रम मूलतः गरीबी, आर्थिक-प्रवंचना एवं अशिक्षा का परिणाम है। ऐसा भी कहा जाता है कि यह खंडित श्रम बाजारों एवं कमजोर स्तर के श्रम सशक्तिकरण का प्रतिफलन है। गरीबी बाल श्रम को जन्म देती है क्योंकि गरीब परिवार किसी भी संभव तरीके से जीने के लिए संघर्षरत रहते हैं। परन्तु यह भी समान रूप से सत्य है कि बाल-श्रम गरीबी को स्थायी बनाता है। बच्चे विनाशकारी/विकृत, पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलने वाली शोषण व्यवस्था एवं गरीबी के दुष्चक्र के शिकार हो जाते हैं। भेदभाव, सामाजिक सुरक्षा की कमजोर एवं अक्षम व्यवस्था एवं गुणात्मक शिक्षा के अभाव में बच्चों के समक्ष कार्य करने के अलावा अन्य कोई बेहतर विकल्प नहीं रह जाता है। कामकाजी बच्चों के प्रति माता-पिता एवं समुदाय की मनोवृति के साथ-साथ इस अमानुषिक अस्तित्व से मुक्ति के साधन के रूप में शिक्षा के महत्व को नहीं समझने की सोच का भी बाल श्रम एवं कामकाजी बच्चों की बढ़ रही संख्या में योगदान है। बाल श्रम की समस्या राष्ट्र के समक्ष चुनौती बाल श्रम की समस्या राष्ट्र के समक्ष चुनौती के रूप में खड़ी है। सरकार के द्वारा इसके समाधान के लिए सक्रियता पूर्वक कई तरह के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। फिर भी इस समस्या की महत्ता एवं विस्तार को ध्यान में रखते हुए तथा यह मानकर कि यह मूल रूप से सामाजिक- आर्थिक समस्या है, जो विकट रूप से गरीबी, अशिक्षा एवं अनुचित सामाजिक-व्यवस्था से जुड़ी है, इसका हल मूल कारण के समाधान में निहित है न कि अकेले मूल कारण के प्रतिफलन का समाधान करने में । यदि हम सही माने में इस समस्या से कारगर ढ़ग से निपटना चाहते हैं तो यह आवश्यक है कि सरकार एवं समाज द्वारा गरीबी, आर्थिक प्रवंचना, अशिक्षा एवं सामाजिक सशक्तिकरण जैसे मुख्य मुद्दों पर केन्द्रित एवं समन्वित प्रयास किये जाएँ । फिर भी खतरनाक पेशों एवं प्रक्रियाओं में कार्यरत बाल श्रमिकों की पहचान, विमुक्ति एवं पुनर्वास हेतु प्रभावकारी कदम भी उठाया जाना आवश्यक है क्योंकि ऐसे कार्यो में बच्चों के नियोजन से न केवल कानून का उल्लंघन होता है बल्कि यह बच्चों के स्वास्थ्य एवं उनके भविष्य के विकास के लिए भी हानिकारक है। गुरूपदस्वामी समिति की अनुशंसायें सबसे पहले वर्ष 1979 में बाल-श्रम की समस्या के अध्ययन एवं इसके समाधान के लिए उपाय सुझाने हेतु भारत सरकार ने एक समिति बनाई जिसे गुरूपदस्वामी समिति के नाम से जाना जाता है। समिति ने समस्या की विस्तृत रूप से जाँचोपरान्त व्यापक अनुशंसाये प्रस्तुत की । समिति ने यह माना कि जब तक गरीबी रहेगी तब तक बाल श्रम का समूल उन्मूलन कठिन होगा, अतः मात्र कानून का सहारा लेकर इसका उन्मूलन करना व्यावहारिक नहीं होगा । समिति ने यह महसूस किया कि ऐसी परिस्थिति में एक ही विकल्प है कि खतरनाक कामों में बाल श्रम को प्रतिषिद्ध किया जाय एवं अन्य क्षेत्रों में बाल मजदूरी के काम की शर्त्तों में सुधार किया जाय । कामकाजी बच्चों की समस्या के निवारण के लिए बहु-नीति दृष्टिकोण अपनाने की समिति ने अनुशंसा की । गुरूपदस्वामी समिति की अनुशंसाओं के आधार पर बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 बनाया गया । यह अधिनियम विशेष रूप से उल्लेखित खतरनाक पेशों एवं प्रक्रियाओं में बच्चों के नियोजन को प्रतिषिद्ध करता है एवं अन्य में सेवा -शर्तो का विनियमन करता है। इस अधिनियम के अन्तर्गत बनाई गई बाल श्रम तकनीकि परामर्शदातृ समिति की अनुशंसा के आलोक में खतरनाक पेशों एवं प्रक्रियाओं की सूची उत्तरोत्तर बढ़ती गई है। मार्गदर्शक नीतियाँ/सम्मेलन/अधिनियम संवैधानिक प्रावधान अनुच्छेद 21 ए - शिक्षा का अधिकार। राज्य कानून बनाकर 6-14 आयु वर्ग के बच्चों को निशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा प्रदान करेगा। अनुच्छेद 23 - मनुष्य का अवैध व्यापार तथा बेगार प्रतिबन्धित है। अनुच्छेद 24 - कारखाने आदि में बच्चों का नियोजन प्रतिबन्धित। चौदह साल से कम उम्र का कोई भी बच्चा किसी भी कल-कारखाने, खान तथा अन्य नियोजनों में नियोजित नहीं किया जायगा। अनुच्छेद 39,(ईएवं एफ)-राज्य, विशेषकर अपने नीति -निर्देशों के तहत, निश्चित करेगा ''कि श्रमिकों, पुरूष एवं महिला, के स्वास्थ्य एवं शारीरिक बल तथा बच्चों के सुकोम उम्र का दुरूपयोग न हो, तथा नागरिकों को अपनी आर्थिक जरूरतों के कारण ऐसा करने को बाध्य न होना पड़े जो उनकी उम्र तथा शारीरिक ताकत के अनुकूल न '' हो तथा ''बच्चों को ऐसे अवसर एवं सुविधाएँ प्रदान की जाए जहाँ स्वतंत्रता और सम्मान पूर्वक उनका विकास हो सके तथा बचपन एवं युवावस्था शोषण एवं नैतिक एवं भौतिक परित्यगता से संरक्षित रहे ।'' प्रमुख कानूनी प्रावधान बाल (श्रमिक बन्धक) अधिनियम 1933 इस कानून द्वारा ऐसे समझौते, जो बच्चों को नियोजन के लिए बंधक रखने के उद्देश्य से किए गए हों, निषेधित हैं। कारखाना अधिनियम1948 यह कानून 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के कल-कारखाने में नियोजन को निषेधित करता है। यद्यपि 14-15 साल की उम्र सीमा के बच्चों को कानून में उल्लेखित नियंत्रण के अन्तर्गत नियोजित किया जा सकता है। बगान श्रमिक अधिनियम 1951 इस कानून के अन्तर्गत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का बाग-बगीचों में नियोजन निषेधित है। खान अधिनियम 1952 यह कानून 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का ऐसे कार्यों में, जहाँ खनिज पदार्थ की खोज एवं प्राप्ति के लिए उत्खनन कार्य किया जाता है, नियोजन को निषेधित करता है। यह जमीन के अन्दर तथा खुले खान में बच्चों के नियोजन को भी निषेधित करता है। मोटर परिवहन अधिनियम 1961 यह कानून परिवहन सम्बन्धित कार्य में बच्चों के नियोजन को निषेधित करता है। बीडी एवं सिगार कामगार अधिनियम 1966 यह कानून 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के बीड़ी तथा सिगार के उद्योगों में नियोजन को निषेधित करता है। बिहार दूकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम 1954 यह अधिनियम, जैसा कि 2007 में संशोधित हुआ है, 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चो के नियोजन को इस अधिनियम के अन्तर्गत आनेवाले दूकानों एवं प्रतिष्ठानों में प्रतिबंधित करता है। बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम 1976 यह अधिनियम बंधुआ मजदूरी प्रथा को समाप्त करता है। यह वयस्क और बच्चे दोनों पर लागू है। बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 इस अधिनियम के अनुसार 'बच्चे' का मतलब ऐसे व्यक्ति से है जिसने अपनी आयु का चौदहवाँ वर्ष पूरा नहीं किया है। यह अधिनियम विर्निदिष्ट पेशों एवं प्रक्रियाओं में बच्चों के नियोजन को प्रतिबंधित करता है एवं अन्य नियोजनों में कार्य करने वाले बच्चों की सेवा-शर्तो को विनियमित करता है। अधिनियम की धारा 3 में यह स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि अनुसूची के भाग ए में उल्लेखित किसी भी पेशे या किसी वर्कशॉप में जहाँ अनुसूची के भाग बी में दिये गये किसी भी प्रक्रिया के अन्तर्गत कार्य होता हो, वहाँ बच्चे नियोजित नहीं किये जाएगे या उन्हें कार्य करने की अनुमति नहीं दी जाएगी । केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या 1742 (ई) दिनांक 10.7.2006 द्वारा अनुसूची के भाग 'ए' में दो पेशों को जोडे़ जाने के पश्चात् अब 16 पेशों एवं 65 प्रक्रियाओं में बच्चों का नियोजन प्रतिषिद्ध कर दिया गया है। इन दो जोड़े गये पेशों (i) घरेलू कामगारों या नौकरों एवं (ii) ढ़ाबा, रेस्टूरेन्ट्स, होटलों, मोटलों, चाय दूकानों, रिसोर्टस, स्पा या अन्य मनोरंजन केन्द्रों में बच्चों के नियोजन प्रतिषिद्ध किये गये है। बाल श्रम की समस्याओं के गंभीरतापूर्वक निराकरण के उद्देश्य से यह अधिनियम अत्यन्त ही प्रभावशाली है। किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं सुरक्षा ) अधिनियम 2000 इस अधिनियम के अन्तर्गत कोई भी व्यक्ति जो बच्चों के दुरूपयोग, उन पर हमला करने, उन्हें उपेक्षित करने या शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न देने का जिम्मेदार होगा, तो उसे 6 माह की सजा या जुर्माना अथवा दोनों किया जा सकता है। इसके अलावा यदि कोई भी व्यक्ति जो किशोर या बच्चों को खतरनाक कार्य हेतु रखता है, बंधुआ बनाकर रखता है और उनकी कमाई को रख लेता है या अपने उद्देश्य के लिए उसका उपयोग करता है, तो वह तीन वर्षो की कैद या जुर्माना का भागी होगा । इस अधिनियम में बच्चों के पुनर्वास एवं सुपुर्दगी के माध्यम से उनकी सामाजिक, गोद लेने, प्रायोजित करने और देखभाल करने वाली संस्था को सुपुर्द करने का भी प्रावधान है। बच्चों के अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र का सम्मेलन (1989) 'बाल अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन' के अनुच्छेद 32 के अनुसार बाल श्रम से अभिप्रेत है कोई कार्य जो खतरनाक/जोखिमपूर्ण हो या जो बच्चों की शिक्षा को प्रभावित करता हो या जो बच्चों के स्वास्थ्य या शारीरिक, बौद्धिक, नैतिक, समाजिक विकास के लिए हानिकारक हो । यह अनुच्छेद सभी सदस्य राष्ट्रों से बच्चों के अधिकार को सुरक्षित रखने का आग्रह करता है। अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के सम्मेलन एवं अनुशंसायें अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के 182 वें सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया है कि बाल श्रम के वीभत्स स्वरूपों को तुरंत प्रतिषिद्ध किया जाय एवं इसका उन्मूलन किया जाय । 138 वें सम्मेलन ने बाल श्रम के प्रभावशाली उन्मूलन के लिए दूरगामी कार्य स्वरूप तैयार किया है। बाल श्रम के लिए राष्ट्रीय नीति भारत सरकार द्वारा वर्ष 1987 में बाल श्रम पर एक राष्ट्रीय नीति तैयार की गई। इस नीति के अनुसार प्रथमतः खतरनाक पेशों एवं प्रक्रियाओं में कार्यरत बाल श्रमिकों के पुनर्वास पर क्रम वद्ध तरीके से ध्यान केन्द्रित किया जाना है। इस नीति के अन्तर्गत इस समस्या के निदान के लिए तैयार की गई कार्य योजना की रूपरेखा निम्न प्रकार है ।- विधायिका कार्य योजना- यह योजना जोर देती है कि बाल श्रम अधिनियम एवं अन्य श्रम कानूनों का कार्यान्वयन कड़ाई से हो ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बच्चे खतरनाक नियोजनों मे न लगायें जाएं एवं जो अन्य गैर खतरनाक क्षेत्रों में कार्यरत हैं उनकी सेवा शतोर्ं का विनियमन बाल श्रम कानून के अनुरूप हो। यह इस पर भी जोर देता है कि ऐसे प्रयोगों और प्रक्रियाओं की पहचान की जाए जो बच्चो के स्वास्थ और सुरक्षा के लिए हानिकारक हैं। सामान्य विकास कार्यक्रमों से बाल श्रमिकों को लाभान्वित करने पर जोर- बाल श्रम का मूल कारण गरीबी है, अतः यह कार्य योजना इस पर जोर देती है कि इन बच्चों और इनके परिवार को सरकार के विभिन्न गरीबी उन्मूलन एवं रोजगार सृजन कार्यक्रमों से लाभान्वित किया जाए। परियोजना पर आधारित कार्य योजना-इस कार्य योजना के अनुसार सघन रूप से बाल श्रम से प्रभावित क्षेत्रो मे परियोजनाएँ शुरू की जानी हैं। इस नीति को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना (एन0सी0एल0पी0) वर्ष 1988 में देश के 9 बाल श्रम से प्रभावित जिलों में शुरू हुई। इस योजना के अन्तर्गत कार्य से विमुक्त कराए गये बाल श्रमिकों के लिए विशेष विद्यालय चलाये जाते हैं। इन विशेष विद्यालयों में, इन बच्चों को औपचारिक/अनौपचारिक शिक्षा सहित व्यवसायिक शिक्षा तथा प्रतिमाह 100 रू. छात्रवृति प्रदान की जाती है। साथ ही उन्हें पूरक पोषण एवं नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधा दी जाती है जिससे कि उन्हें नियमित रूप से मुख्यधारा के स्कूलों में पढने के लिए तैयार किया जा सके । इस योजना के तहत बाल श्रमिकों के लिए विशेष विद्यालय चलाने हेतु केन्द्र सरकार द्वारा सीधे जिलाधिकारी को राशि आवंटित की जाती है। अधिकाशतः ये विद्यालय गैर सरकारी संगठनों द्वारा चलाये जाते है। बच्चों के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना का लक्ष्य वर्ष 2007 तक जोखिम भरे कार्यों से बाल श्रम को समाप्त कर दिया जाए तथा सभी प्रकार के बाल श्रम को समाप्त करने की दिशा में उत्तरोत्तर बढ़ा जाए। बच्चों को सभी प्रकार के आर्थिक शोषण से बचाया जाए । एम0सी0मेहता बनाम तमिलनाडु राज्य के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने दिनांक 10.12.2006 को दिये गये निर्णय में यह स्पष्ट निदेश दिया है कि खतरनाक नियोजनों एवं पेशों में कार्यरत बाल श्रमिकों को विमुक्त कराया जाय एवं उनका पुनर्वास किया जाय । इस आदेश में गैर-खतरनाक पेशों में नियोजित बाल श्रमिकों की सेवा-शर्तो के विनियमन एवं उनकी कार्य-स्थिति में सुधार किये जाने का भी निदेश दिया गया । उपरोक्त न्यायादेश की मूल बातें इस प्रकार हैं । बाल श्रमिकों की पहचान के लिए सर्वेक्षण। खतरनाक पेशों एवं प्रक्रियाओं में कार्यरत बच्चों को विमुक्त कराकर समुचित संस्थान में उनके शिक्षा की व्यवस्था करना। बाल श्रमिकों के कल्याण के उद्देश्य से स्थापित कल्याण कोष में दोषी नियोजकों द्वारा 20000/- रूपये प्रति बाल श्रमिक जमा किया जाना । बाल मजदूरी से मुक्त कराये गये बच्चों के घर के एक व्यक्ति को रोजगार दिया जाना । अगर यह संभव ना हो तो राज्य सरकार द्वारा 5000/- का योगदान कल्याण कोष में किया जाएगा । कल्याण राशि में संग्रहित राशि करीब रू0 20,000/- रू0 25,000/- के ब्याज से उक्त बाल मजदूर के परिवार को तबतक वितीय सहायता दिया जाए, जबतक कि वह बाल मजदूर विद्यालय जाना शुरू ना कर दे। गैर-खतरनाक पेशों में कार्यरत बच्चों के कार्यावधि का विनियमन करना ताकि उनकी कार्यावधि प्रतिदिन छः घटे से अधिक न हो एवं दो घंटो की पढ़ाई सुनिश्चित हो सके । शिक्षा पर होने वाला व्यय संबंधित नियोजक द्वारा वहन किया जाएगा । बाल श्रम एवं बिहार भूमिका जनगणना 2001 के अनुसार बिहार में 5-14 वर्ष के बाल श्रमिकों की संख्या देश के कुल बाल श्रमिकों की 8.9% हैं। 'मुख्य श्रमिक' के रूप में कार्यरत 5-14 वर्ष के बाल श्रमिकों की संख्या की दृष्टि से बिहार का देश में तीसरा स्थान है। बिहार में 5-14 साल की उम्र के 5.4 लाख बच्चे 'मुख्य श्रमिक' की कोटि में आते हैं एवं 5.8 लाख बच्चे 'सीमान्त श्रमिक' की कोटि में आते हैं। मुख्य श्रमिक वे हैं जो वर्षभर में 6 माह अथवा उउसे ज्यादा दिनों तक काम करते हैं एवं सीमान्त श्रमिक वे हुये जो 1 साल में 6 महीने से कम कार्य करते हैं। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद् का सर्वेक्षण बिहार शिक्षा परियोजना परिषद् द्वारा वर्ष 2005 में सर्वेक्षण कराया गया था जिसके अनुसार 23.15 लाख बच्चे विधालय से बाहर हैं। इन बच्चों के स्कूल नहीं जाने का मुख्य कारण बाल श्रम बताया गया है। 5.6 लाख बच्चे इस कारण विद्यालय नहीं जाते क्योंकि उन्हें कार्य करना पड़ता है। टाइम्स आफ इंडिया, पटना में दिनांक 27 सितम्बर 2006 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार पूर्वी चम्पारण, बेगूसराय, दरभंगा, कटिहार, खगड़िया, मधुबनी, मधेपुरा एवं सिवान जिलों में बाल श्रम का विस्तार सबसे अधिक है।यद्यपि कि सही आंकड़ो का संग्रहण एवं उनका विश्लेषण दुष्कर कार्य है, फिर भी ऐसी आम धारणा है कि बिहार में लाखों बच्चे घरों, ढ़ाबों, होटलों, भोजनालयों एवं कारखानों में नियमित रूप से कार्य करते हैं। ऐसा माना जाता है कि अन्य राज्यों में बाल-श्रमिकों की आपूर्ति में बिहार अग्रणी है। एक मोटे अनुमान के अनुसार बिहार के लगभग पाँच लाख प्रवासी बच्चे अन्य राज्यों में कार्य करते हैं। कामकाजी बच्चे एवं बाल श्रमिक - वैधानिक स्पष्टीकरण इस बिन्दु पर पहुँचने पर कामकाजी बच्चों एवं कानूनी रूप से चिन्हित बाल श्रमिकों के बीच के एक प्रमुख अन्तर को रेखांकित किया जाना आवश्यक है। कानूनी रूप से बात की जाए तो सभी बाल श्रमिक कामकाजी बच्चों की श्रेणी में आते हैं, परन्तु इसका उलटा पूरी तरह सही नहीं होगा । हालाँकि सभी कामकाजी बच्चों को देख-भाल, पालन-पोषण एवं गुणात्मक शिक्षा की उतनी ही जरूरत होती है, जितने की बाल श्रमिक को, परन्तु कानूनी दृष्टि से सभी कामकाजी बच्चों को हम बाल श्रमिक नहीं कह सकते । इस अन्तर को स्पष्ट करने के लिए कहा जा सकता है कि ऐसे बच्चे भारी तादाद में होंगे जो अपने परिवार के खेतों, परिवार द्वारा संचालित प्रतिष्ठानों एवं दस्तकार परिवारों में काम करते है एवं उन्हें देखभाल, पालन पोषण एवं गुणात्मक शिक्षा की उतनी ही जरूरत हो सकती है। किन्तु वे बच्चे कानून के अन्तर्गत बाल श्रमिक की कोटि में नहीं आते । इस प्रकार ऐसे बच्चे जो पारिवारिक कृषि फार्म, परिवार आधारित सेवा प्रतिष्ठानों एवं दस्तकार परिवारों में कार्य करते हैं, के अलावा सभी कामकाजी बच्चे बाल श्रमिक हैं। बच्चों का नियोजन प्रतिबंधित है तथापि, जिन नियोजनों एंव प्रक्रियाओं में विभिन्न श्रम अधिनियमों के अन्तर्गत बच्चों का नियोजन प्रतिबंधित है, वहाँ बच्चों का नियोजन बाल श्रम का अत्यन्त ही घातक एवं निकृष्ट रूप है। ऐसे नियोजनों एवं प्रक्रियाओं में कार्यरत बच्चों को संगठित प्रयास से विमुक्त एवं पुनर्वासित करने की आवश्यकता होगी तथा सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी व्यवस्था का सर्वदा के लिए उन्मूलन हो जाए । जहाँ तक गैर-खतरनाक पेशों में नियोजित बच्चों का प्रश्न है, संगठित प्रयास करना होगा कि इनके माता-पिता बच्चों को कार्य से वापस लें एवं उन्हें स्कूल भेजें । किन्तु जबतक ऐसा नहीं होता, तबतक बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के अन्तर्गत इनकी सेवा-शर्तो का विनियमन, एम0सी0मेहता बनाम तामिलनाडू सरकार के मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निये गये निदेश के आलोक में इनकी पढ़ाई की व्यवस्था तथा ऐसे उपाय करने होंगे ताकि इनका शोषण रोका जा सके । कामकाजी बच्चों तथा बाल श्रमिकों के बीच का अन्तर वैसे, कामकाजी बच्चों तथा बाल श्रमिकों के बीच का अन्तर कानून की नजरों में है। परन्तु यदि गरीबी, अशिक्षा एवं सामाजिक-आर्थिक प्रवंचना की समस्याओं को हल करने के प्रयास नहीं किये गये, तो प्रत्येक कामकाजी बच्चा अंततः बाल श्रमिक की कोटि में आ जाएगा। अतः इस कार्य योजना के अन्तर्गत, अन्य बातों के अलावा, प्रतिषिद्ध नियोजनों एवं प्रक्रियाओं से बाल श्रमिकों की विमुक्ति एवं उनका पुनर्वास सुनिश्चित कराने हेतु कारगर कदम उठाए जाएगे, गैर-खतरनाक पेशों में कार्यरत बच्चों की सेवा-शर्तो का विनियमन किया जाएगा एवं यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी कामकाजी बच्चे काम से मुक्त होकर स्कूलों में दाखिल हों। कार्ययोजना दृष्टिकोण बाल श्रम, जिसमें कामकाजी बच्चे भी शामिल हैं, जैसी परिघटना सारतः, गरीबी, आर्थिक प्रवंचना एवं अशिक्षा का परिणाम है। अतः बाल श्रम जैसी घातक समस्या का उन्मूलन तभी किया जा सकेगा जब कि गरीबी, आर्थिक प्रवंचना एवं अशिक्षा को कम करने के संयुक्त प्रयासों के साथ-साथ वैधानिक प्रावधानों को कड़ाई से लागू किया जाए एवं प्रतिबंधित नियोजनों से बाल श्रमिकों की विमुक्ति एवं उनके पुनर्वास की कार्रवाई की जाय । सरकार की मंशा है कि बिहार एक 'बाल श्रम मुक्त राज्य' बने एवं ऐसा वातावरण तैयार हो जो विद्यालय से बाहर रह गए सभी बच्चों को विद्यालय जाने, उनके समुचित पोषण एवं उनके मानसिक, शारीरिक एवं नैतिक विकास में सहायक हो। केन्द्रीय कार्य इस योजना का केन्द्रीय कार्य है बाल श्रम एवं कामकाजी बच्चों की अवस्थिति जैसी समस्या का समाधान उसके उद्गम स्थल पर, बच्चों के उनके घर से कार्य स्थल तक जाने के मार्गस्थ अवधि में एवं बच्चे जहाँ कार्यरत हैं, वहाँ पर किया जाए। उद्गम स्थल पर समस्या के समाधान का अर्थ हैः कामकाजी बच्चों के परिवारों की गरीबी, आर्थिक प्रवंचना एवं अशिक्षा जैसे मुद्दों का सीधा समाधान करना, सभी साझेदारों की सक्रिय भागीदारी से एक अनुकूल वातावरण तैयार करना, स्कूल से बाहर रह गए बच्चों की शिक्षा के लिए संगठित रूप से कार्रवाई करना एवं सामाजिक कानूनों, यथा, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, समान पारिश्रमिक अधिनियम, बंधुआ मजदूरी अधिनियम इत्यादि एवं अन्य अधिनियमों एवं नियमों जो मेहनतकश अवाम के अच्छे जीवन एवं सामाजिक सुरक्षा की गारन्टी देते हैं, के कार्यान्वयन के माध्यम से 'अधिकारों' के मुद्दों को आगे बढ़ाना । मार्गस्थ अवधि में समस्या के निराकरण का मतलब हैः बच्चों के अवैध व्यापार को रोकना, एवं कार्य स्थल पर समस्या के समाधान का अर्थ हैः प्रतिबंधित नियोजनों एवं प्रक्रियाओं से बाल-श्रमिकों की विमुक्ति एवं उनका पुनर्वास करना। यह कार्य योजना बाल श्रमिकों एवं कामकाजी बच्चों की समस्याओं को सिर्फ वैधानिक परिप्रेक्ष्य में ही नहीं देखती अपितु इसे 'अधिकार एवं हकदारी' के मुद्दे के रूप में देखती है एवं इस प्रयास में सरकार, समुदाय, असैनिक सामाजिक संगठनों एवं बच्चों एवं उनके परिवारों सहित सभी साझेदारों की सक्रिय भागीदारी की अपेक्षा रखती है। उद्गम स्थल पर समस्या के समाधान एवं विमुक्त बाल श्रमिकों के पुनर्वास हेतु कार्य योजना इस बात का ध्यान रखेगी कि राज्य एवं केन्द्र सरकार द्वारा चलाये जा रहे सामाजिक प्रक्षेत्र की सभी योजनाओं एवं कार्यक्रमों, जिनका संबंध गरीबी- आर्थिक प्रवंचना एवं अशिक्षा को दूर करने से है, का अभिसरण हो । इन योजनाओं एवं कार्यक्रमों का सफल कार्यान्वयन एक अनुकूल वातावरण बनाने में काफी हद तक सहायक होगा जिसमें बच्चों का पालन-पोषण समुचित ढंग से हो सके । यह भी सोच है कि इस कार्य योजना का कार्यान्वयन प्रारम्भ होने पर जब यथार्थ की परतें खुलने लगेंगी, तब संचितः अनुभवों के आलोक में बाल-श्रम एवं कामकाजी बच्चों की अवस्थिति की इस घातक-प्रथा के उन्मूलन हेतु राज्य सरकार द्वारा नई-नई योजनायें एवं कार्यक्रम प्रारम्भ किये जा सकेंगे । यह कार्य योजना, बाल श्रम (कामकाजी बच्चों सहित) की घातक व्यवस्था के लिए जवाबदेह मुख्य मुद्दों का समाधान करने, एवं व्यवस्था को गरीबों, अभिवंचितों, उपेक्षितों एवं उनके जो स्कूल जाने एवं शिक्षा से वंचित हैं, के पक्ष में चलाए जाने के सरकार के संकल्प की अभिव्यक्ति है। आवश्यकता है कि कामकाजी बच्चों के माता-पिता एवं उनके परिवार को उत्पादक काम के अवसर एवं आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाए ताकि बच्चों को काम पर भेजने में जो लाभ उन्हें दीखते हैं, बच्चों के काम न करने की दशा में उनकी भरपाई की जा सके । सरकार के विभागों के कार्य एवं दायित्व श्रम संसाधन विभाग इस कार्य योजना को लागू करने के लिए श्रम संसाधन विभाग नोडल विभाग होगा। श्रम संसाधन विभाग, अन्य बातों के अलावा, मानव संसाधन विभाग / बिहार शिक्षा परियोजना से समन्वय स्थापित कर समय-समय पर बाल श्रमिकों के सर्वेक्षण की कार्रवाई करेगा, बाल श्रमिकों के पुनर्वास से संबंधित विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों के प्रभावकारी अभिसरण के लिए राज्य सरकार के सभी विभागों से समन्वय स्थापित करेगा एवं बाल श्रम प्रथा के उन्मूलन हेतु यूनिसेफ, गैर सरकारी संस्थाओं एवं अन्य असैनिक सामाजिक संगठनों का सहयोग प्राप्त करेगा । इस विभाग के विशिष्ट कार्य एवं दायित्व निम्नलिखित होंगे - समय-समय पर बाल श्रमिकों का सर्वेक्षण विभाग समय-समय पर कामकाजी बच्चों के सर्वेक्षण कराएगा एवं सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ो का उपयोग बाल श्रम के उन्मूलन, विमुक्ति एंव पुनर्वास के उद्देश्य से करेगा । ऐसा करते समय विभाग मानव संसाधन विभाग एवं बिहार शिक्षा परियोजना से समन्वय स्थापित करेगा । सामुदायिक लामबंदी एवं जागरुकता पैदा करना विभाग सामुदायिक लामबंदी एवं जागरूकता पैदा करने वाले क्रियाकलाप शुरू करेगा ताकि बाल श्रम के विरूद्ध 'इच्छुक ताकतों का गठजोड़' खड़ा किया जा सके । बच्चों के अवैध व्यापार को रोकने एवं बाल श्रमिकों के उद्धार / विमुक्ति हेतु कानूनों का कार्यान्वयन करना बच्चों के अवैध व्यापार को रोकने, प्रतिबंधित नियोजनों एवं प्रक्रियाओं से बाल श्रमिकों का उद्धार /विमुक्ति तथा गैर प्रतिबंधित नियोजनों में उनकी सेवा-शर्तों का विनियमन करने हेतु यह विभाग विभिन्न अधिनियमों, यथा बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986, के कार्यान्वयन के लिए सघन अभियान चलाएगा । इस उद्देश्य से राज्य एवं सभी जिलों के स्तर पर धावा दलों का गठन किया जाएगा । संबंधित जिलाधिकारी/आरक्षी अधीक्षक द्वारा इन धावा- दलों को कार्यपालक दण्डाधिकारी एवं पुलिस बल उपलब्ध कराये जाएँगे । गैर सरकारी संगठनों एवं मनोवैज्ञानिक परामर्शियों को भी इन दलों के साथ जोड़ने का प्रयास किया जाएगा । धावा दलों द्वारा बच्चों का उद्धार/विमुक्ति करने के पश्चात् उन बच्चों को, अन्य बातों के अलावा, उनके परिवार तक पहुँचाने एवं उनके पुनर्वास के संबंध में अनुवर्त्ती कार्रवाई की जाएगी । विमुक्त किये गये बाल श्रमिकों को उनके परिवार तक पहुँचाने के क्रम में उनके लिए अस्थायी आवास की व्यवस्था, दोषी नियोजकों के विरूद्ध अभियोजन दायर करना, एम0 सी0 मेहता बनाम तमिलनाडू सरकार के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा दिये गये फैसले के आलोक में दोषी नियोक्ता से 20,000/- वसूलने की कार्रवाई करना, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के अन्तर्गत वैधानिक कार्रवाई करने के साथ-साथ जहाँ बच्चों को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ हो उन मामलों में अभियोजन दायर करना, बच्चों को उनके परिवार तक पहुँचाना स्कूलों में उनके पढ़ने की व्यवस्था करना एवं ऐसे मामलों में समय-समय पर दिए गए न्यायिक निर्णयों तथा इस कार्य योजना के आलोक में उनके पुनर्वास की व्यवस्था करना, इस कार्र्य-योजना की अनुवर्त्ती कार्रवाई के अन्तर्गत शामिल हैं। न्यूनतम मजदूरी एवं समान पारिश्रमिक अधिनियम का कार्यान्वयन जिन श्रमिक परिवारों से बच्चे स्कूल जाने के बदले कार्य पर जाते हैं, उनकी गरीबी को दूर करने के लिए न्यूनतम मजदूरी एवं समान पारिश्रमिक अधिनियम का सखत कार्यान्वयन आवश्यक है। अतः विभाग, अन्य बातों के अलावा, यह सुनिश्चित करेगा की न्यूनतम मजदूरी का समय पर पुनरीक्षण / निर्धारण हो, श्रमिकों को उनके हकों एवं विशेषाधिकारों के संबंध में सशक्त किया जाए तथा इन अधिनियमों का, प्राथमिकता के आधार पर, पूरे राज्य में कड़ाई से प्रवर्त्तन करने हेतु अभियान चलाया जाए । अन्य श्रम कानूनों का प्रवर्त्तन उपर्युक्त कानूनों के साथ-साथ विभाग कारखाना अधिनियम 1948, बीड़ी एवं सिगार वर्कर्स अधिनियम, बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम, मोटर परिवहन कामगार अधिनियम, बिहार दूकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम आदि का प्रभावकारी रूप से प्रवर्त्तन करेगा ताकि उद्गम स्थल पर ही समस्या के निराकरण का प्रयास हो सके । श्रम कल्याण की योजनाओं का कार्यान्वयन विभाग द्वारा बीड़ी एवं निर्माण श्रमिकों, ग्रामीण, भूमिहीन परिवारों के लिए आम आदमी बीमा योजना एवं गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना जैसे कल्याणकारी योजनाओं को कारगर ढंग से लागू किया जाएगा । अन्य राज्यों से विमुक्त बाल श्रमिकों की घर वापसी बिहार अन्य राज्यों यथा दिल्ली, महाराष्ट्र और गुजरात में बाल श्रमिकों के मुख्य आपूर्तिकर्त्ता के रूप में कुख्याति प्राप्त कर चुका है। इन राज्यों ने बाल श्रमिकों के विमुक्ति का अभियान चला रखा है एवं इस राज्य के विमुक्त कराए गए बाल श्रमिकों को उनके परिवारों में पुनर्स्थापन हेतु बिहार भेजते हैं। इन राज्यों से यह अनुरोध किया गया है कि घर वापस भेजे जाने वाले ऐसे बच्चों के यात्रा- कार्यक्रम की पूर्व जानकारी राज्य सरकार को दें । सरकार ने दिल्ली में संयुक्त श्रमायुक्त का कार्यालय स्थापित किया है जिसकी यह जिम्मेदारी है कि दिल्ली एवं अन्य पड़ोसी राज्यों से बाल श्रमिकों के बिहार वापस भेजे जाने के मामले में समन्वय स्थापित करे । ऐसे बच्चों के अपने परिवार में पुनर्स्थापन हेतु निम्नांकित प्रक्रिया का अनुपालन किया जाएगा- विमुक्त बाल श्रमिकों के सुरक्षित एवं सुविधाजनक घर वापसी हेतु संबंधित राज्य सरकारों/जिला पदाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करना। घर वापसी की व्यवस्था करना। रेलवे स्टेशनों पर बच्चों के स्वागत की व्यवस्था करना। विमुक्ति के तुरंत बाद एवं / अथवा दूसरे राज्यों से घर वापसी के दौरान उनके रहने-खाने एवं कपड़े इत्यादि की व्यवस्था करना। घर वापसी की यात्रा के दौरान आवश्यक अस्थायी आवासन के लिए समाज कल्याण विभाग अथवा स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा संचालित शरण/बचाव घरों (पटना स्थित 'अपना घर''निशांत' इत्यादि) का उपयोग किया जाएगा। वापसी यात्रा के दौरान तथा घर पहुँचने के बाद बच्चों को मनोवैज्ञानिक सलाह देना एवं चिकित्सकीय सुविधाएँ उपलब्ध करवाना । यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण है कि विमुक्त करवाए गए बच्चों की चिन्ताओं, मांनसिक उलझनों एवं उनके जीवन में उत्पन्न संकट के पलों को उचित मनोवैज्ञानिक परामर्श देकर दूर किया जाए। स्वास्थ्य विभाग/कर्मचारी राज्य बीमा डिस्पेन्सरी की जिम्मेवारी होगी कि वे आवश्यकतानुसार इन बच्चों को चिकित्सकीय सुविधाएँ उपलब्ध करवांए। यूनिसेफ एवं अन्य गैर सरकारी संगठनों की सहायता इन बच्चों को मनोवैज्ञानिक परामर्श देने में ली जाएगी। वापस आये बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्थाः अपने परिवारो में इन बच्चों की वापसी के तुरन्त बाद उनके पढ़ाई की व्यवस्था सर्वशिक्षा अभियान या राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के अन्तर्गत संचालित विद्यालयों में की जाएगी । अभिलेख एवं रिकार्ड संधारित करना। किये जा रहे कार्यों का अभिलेखीकरण, रिकार्ड का संधारण, विमुक्त बच्चों की केस स्टडी एवं विमुक्ति के पश्चात् किए जाने वाले सभी कार्यो में लगे लोगों के साथ योजनाबद्ध संवाद एवं समन्वय स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा जिला एवं राज्य स्तर पर बाल श्रमिक कोषांगों की भी स्थापना की जाएगी। पुलिस/रेलवे पुलिस/गैर सरकारी संगठनों/रेल अधिकारियों को बच्चों की वापसी के दौरान पर्याप्त ध्यान देने की दिशा में संवेदनशील बनाना। समाज कल्याण विभाग/ गैर सरकारी संगठनों के साथ समन्वय स्थापित कर उन विमुक्त बाल श्रमिकों को जिनके कोई अभिभावक नहीं हों ।अल्प अवधि आवासों /बचाव घरों, जिनका संचालन समाज कल्याण विभाग के द्वारा किया जाता है, में सुरक्षित आवासन की व्यवस्था करना तथा विद्यालय में नामांकन अथवा विशेष व्यवसायिक प्रशिक्षण के द्वारा उनका पुनर्वास सुनिश्चित करना। विमुक्त बाल श्रमिकों की जिला एवं ग्राम स्तर पर सहायता ।इसका उद्देश्य बच्चों की विमुक्ति के बाद घर वापसी के बाद भी उनको मदद पहुँचाना है। इस उद्देश्य से पंचायतों एवं गैर सरकारी संगठनों की सहायता ली जाएगी तथा जिला एवं गाँव स्तर पर बाल श्रमिकों की पहचान और अनुश्रवण की व्यवस्था की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विमुक्त बाल श्रमिकों का शैक्षिक एवं आर्थिक पुनर्वास पूरा हो सके एवं वे वापस काम पर नहीं लौटें। एम0 सी0 मेहता बनाम तमिलनाडू सरकार के वाद में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का अनुपालन विभाग द्वारा प्रभावकारी अनुश्रवण कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बाल श्रमिकों की विमुक्ति एवं पुनर्वास के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए दिशा -निर्देशों का अनुपालन सभी संबंधितों द्वारा किया जाय। संवेदनशील बनाना एवं क्षमता विकास बाल श्रम के उन्मूलन, विमुक्ति, घर वापसी एवं पुनर्वास से जुड़े विभिन्न साझेदारों को संवेदनशील बनाने एवं उनके क्षमता निर्माण की कोशिश की जाएगी ताकि ये कार्य कुशलता पूर्वक हो सकें ।विभाग द्वारा इस क्षेत्र में निम्नलिखित गतिविधियाँ सम्पादित की जाएँगी- प्रवर्त्तन तंत्र को संवेदनशील बनाना एवं क्षमता विकास करना । विभाग के प्रवर्त्तन तंत्र से जुड़े पदाधिकारियों को संवेदनशील बनाने एवं उनके क्षमता विकास के लिए लगातार प्रशिक्षण चलाया जाएगा । इस कार्य हेतु बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान, ए0एन0सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान, पटना एवं राज्य तथा राष्ट्र स्तर पर खयाति प्राप्त अन्य संस्थानों की सेवाएँ प्राप्त की जाएंगी । इसके अलावा अधिकारियों को वी0वी0गिरी राष्ट्रीय श्रम संस्थान एवं देश के अन्य संस्थानों में बाल श्रम पर आयोजित/विभिन्न सेमिनार/कान्फ्रेंस मंय भाग लेने के लिए प्रतिनियुक्त किया जाएगा। राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के कर्मियों का क्षमता निर्माण एवं परियोजनाओं का प्रभावी अनुश्रवण राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के कर्मियों के क्षमता-निर्माण के उद्देश्य से बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान, ए0एन0सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान तथा राज्य / राष्ट्र स्तरीय अन्य संस्थाओं के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे, एवं एन0सी0एल0पी0 विद्यालयों का समुचित अनुश्रवण किया जाएगा ''ताकि शिक्षा के द्वारा पुनर्वास ''की भूमिका वे अच्छी तरह निभा सकें। राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजनान्तर्गत संचालित स्कूलों के शिक्षकों का क्षमता निर्माण बिहार शिक्षा परियोजना की मदद से राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजनान्तर्गत स्कूलों के शिक्षकों के शिक्षण-अधिगम कौशल का निरंतर विकास एवं उन्नयन किया जाएगा। अन्य सभी साझेदारों को संवेदनशील बनाना एवं उनका क्षमता विकास शोषितों को भविष्य में उत्पीड़न से बचाने के लिए दूसरे साझेदारों को भी जागरुक बनाने की आवश्यकता होती है। अतएव बाल श्रम के मुद्दे पर पुलिस अधिकारियों, जिला स्तरीय अधिकारियों एवं अन्य विभागों के अधिकारियों, जो इस कार्य में जुड़े हैं, को संवेदनशील एवं जागरूक बनाने की आवश्यकता होगी । इस कार्य हेतु विपार्ड / खयातिप्राप्त राष्ट्रीय संस्थानों की सेवाएँ ली जाएगी। बाल श्रम मुद्दों पर अध्ययन एवं शोध करना, केस स्टडीज का अभिलेखन तथा उनका प्रचार-प्रसार- बड़ी उम्र (13-14) के बाल श्रमिकों के लिए समुचित व्यवसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की पहचान एवं उसकी व्यवस्था ऐसे बच्चे हो सकते हैं जो स्कूल समाप्ति के उम्र के हों एवं जो विमुक्ति के पश्चात स्कूलों में पढ़ना नहीं चाहते हों । ऐसे बच्चों के लिए अच्छा होगा कि उनके मनोनुकूल व्यवसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चुनकर उनकी कुशलता को बढ़ाया जाए ताकि रोजगार के बाजार में अपनी अर्जित कुशलताओं के आधार पर वे बेहतर मजदूरी प्राप्त कर सकें। ऐसे मामलों में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का सहयोग लेने पर विचार किया जाएगा। प्रभावकारी अनुश्रवण एवं टै्रकिंग तंत्र स्थापित करना एक प्रभावकारी अनुश्रवण एवं टै्रकिंग तंत्र को विकासित एवं स्थापित किया जाएगा ताकि प्रत्येक मुक्त हुए बाल श्रमिक की प्रगति पर नजर रखी जाए एवं सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी बच्चा पूर्व की परिस्थितियों में वापस न लौट जाए। अनुश्रवण एवं ट्रेकिग तंत्र के विशिष्ट उद्देश्य निम्नांकित होगें - विमुक्त किये गए बाल श्रमिकों के पुनर्वास की अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराना। विमुक्त करवाए गए बाल श्रमिकों का विद्यालय में अथवा एन0 सी0 एल0 पी0 स्कूल में नामांकन एवं ठहराव की अद्यतन स्थिति की जानकारी देना। एन0 सी0 एल0 पी0 स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के मुख्यधारा में शामिल होने के संबंध में अद्यतन जानकारी रखना। बच्चों के आर्थिक शोषण को प्रभावित कर सकने वाली परिस्थितियों एवं कारकों की पहचान कर बाल श्रम के रुझान का अनुश्रवण करना। बाल श्रमिकों एवं शिक्षा की योजनाओं के बीच के संबंध को सशक्त बनाना। ग्रामीण विकास विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों को लागू करने की जिम्मेदारी इस विभाग पर है, यथा, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के अंतर्गत योजनायें (नरेगा), स्वर्ण जयंती ग्रामीण स्वरोजगार योजना, इन्दिरा आवास योजना इत्यादि । इसे सुनिश्चित करते हुए कि इन योजनाओं का लाभ इनके लक्ष्य समूहों, जो गरीब एवं हाशिये पर खड़े लोग होते हैं, तक पहुँचे, विभाग द्वारा इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि इन कार्यक्रमों के लाभ बाल श्रमिकों के परिवारों को भी मिलें ताकि बाल श्रमिकों के माता-पिता/ परिवारों का आर्थिक पुनर्वास सुनिश्चित हो सके। बाल श्रमिकों के माता-पिता/परिवारों को निम्नलिखित विशिष्ट लाभ दिए जाएँगे - नरेगा योजनान्तर्गत रोजगार कार्ड (बिहार के सभी जिलों को इस योजना के अंतर्गत आच्छादित किया गया है) यथा संभव इन्दिरा आवास योजना, एवं एस0जी0एस0वाई0 के अन्तर्गत सहायता । विभाग द्वारा उपरोक्त उद्देश्यों के लिए प्रभावकारी अनुश्रवण-तंत्र स्थापित किया जाएगा, कार्यकारी एजेन्सीओं की क्षमता का विकास किया जाएगा तथा श्रम संसाधन विभाग के साथ इस प्रकार समन्वय बनाए रखा जाएगा ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के बाल श्रमिकों के मुद्दों पर दोनों विभागों में सहक्रियात्मक सहयोग स्थापित हो सके। शहरी विकास विभाग यह विभाग शहरी क्षेत्रों में स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेवार है। यह सुनिश्चित करते हुए कि इस योजना का कार्यान्वयन इस प्रकार हो ताकि शहरी क्षेत्रों में निवास करने वाले लक्ष्य-समूहों तक इन योजनाओं का लाभ सफलतापूर्वक पहुँच सके, विभाग इस बात पर भी अपना ध्यान केन्द्रित करेगा कि - स्वर्ण जयंती ग्रामीण स्वरोजगार योजना का लाभ शहरी बाल श्रमिकों के परिवार तक भी पहुँच सके, जो हर हाल में गरीब एवं हाशिएं पर खड़े लोग ही होते हैं, ताकि उन परिवारों का आर्थिक पुनर्वास सुनिश्चित हो सके, एवं जे.आर.यू.एम. के अन्तर्गत संचालित शहरी गरीबों के लिए बुनियादी सुविधाएँ स्कीमों का लाभ यथा संभव बाल श्रमिकों के परिवारों तक पहुँचे तथा इन स्कीमों से बाल श्रमिकों के पुनर्वास तथा शिक्षा में मदद मिल सके । विभाग द्वारा उपरोक्त उद्देश्यों के लिए एक प्रभावकारी अनुश्रवण तंत्र स्थापित किया जाएगा, कार्यकारी एजेन्सीओं की क्षमता का विकास किया जाएगा तथा श्रम संसाधन विभाग के साथ इस प्रकार समन्वय बनाए रखा जाएगा ताकि शहरी क्षेत्रों के बाल श्रमिकों के मुद्दों पर दोंनो विभागों में सहक्रियात्मक सहयोग स्थापित हो सके। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग अन्य बातों के अलावा इस विभाग द्वारा बी0 पी0 एच0टी0 अधिनियम एवं बिहार टेनेन्सी अधिनियम के प्रावधानों का कार्यान्वयन, गैरमजरूवा भूमि की बंदोवस्ती, अधिशेष एवं भूदान भूमि का वितरण ग्रामीण क्षेत्रों के सुयोग्य कोटि के व्यक्तियों के बीच की जाती है, जो मुख्य रुप से हासिये पर खड़े परिवार एवं गरीब तबके के लोग होते हैं। उक्त अधिनियमों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए ताकि इसका लाभ लक्ष्य-समूहों तक सफलतापूर्वक पहुँच सके, विभाग विमुक्त किए गए बाल श्रमिकों के माता-पिता/परिवारों को, यदि वे इन अधिनियमों के अनुसार भूमि आबंटन का लाभ पाने के योग्य पाये जाते हों, भूमि आबंटन में प्राथमिकता देगा । इस उद्देश्य से विभाग श्रम संसाधन विभाग के साथ निकट सहयोग स्थापित करेगा ताकि बाल श्रमिकों के मुद्दों पर दोनों विभागों में सहक्रियात्मक सहयोग स्थापित हो सके। स्वास्थ्य विभाग अर्थशास्त्रियों का विश्वास है कि गरीबी अस्वस्थता का कारण बनती है। खराब स्वास्थ्य का असर उत्पादन क्षमता पर पड़ता है जिसके कारण आमदनी कम होती है। इससे उपभोग के स्तर में कमी आती है, एवं अन्ततः उपभोग का स्तर कम होने का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इस तरह गरीबी का दुष्चक्र गरीबों के विरुद्ध काम करता है। यदि गरीबी के इस दुष्चक्र को किसी स्तर पर तोड़ दिया जाए, तो गरीब अपने कंधे से गरीबी के जुए को उतार कर फेंक सकेंगे । सरकार विश्वास करती है कि जन स्वास्थ्य सुविधाएँ गरीबों के लिए सुनिश्चित किये जाने से गरीबी का यह दुष्चक्र कमजोर होता है। यह सभी की जानकारी में है कि अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए अच्छी खासी राशि की आवश्यकता पड़ती है जो गरीबों के पहुँच के बाहर है। अतः यह सरकार की मंशा रही है कि वह जन-स्वास्थ्य सुविधाओं को लगातार बेहतर बनाए। एन0 आर0 एच0 एम0 के प्रावधानों एवं राज्य की स्वंय की योजनाओं के माध्यम से जन स्वास्थय सुविधाओं एवं डेलीवरी की प्रक्रिया को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है। अतएव यह सुनिश्चित करते हुए कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ गरीबों तक पहुँचे, स्वास्थ्य विभाग ऐसे कदम उठाएगा ताकि इन स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ विमुक्त किये गए बाल श्रमिकों एवं उनके माता-पिता/परिवारों तक पहुँच सके। खतरनाक नियोजनों में कार्यरत बच्चे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरों के शिकार हो जाते हैं। चूँकि अधिकांश बच्चे अंसगठित क्षेत्रों में कार्य करते हैं, इस कारण उनके स्वास्थ्य की स्थिति का समुचित ध्यान नहीं रखा जाता । कृषि क्षेत्र में कार्य करने वाले बच्चों की संख्या काफी अधिक है एवं वे भी विभिन्न प्रकार के स्वास्थ्य-खतरों के प्रति समान रूप से अरक्षित होते हैं। ऐसे बच्चों के माता-पिता, जो प्रायः गरीब एवं स्वास्थ्य के खतरों से अनभिज्ञ होते हैं, अपने बच्चों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ दिलाने की क्षमता नहीं रखते । स्वास्थ्य विभाग निम्नांकित विशिष्ट जिम्मेदारियों का वहन करेगा । बाल श्रमिकों एवं उनके माता-पिता को हेल्थ कार्ड निर्गत किया जाएगा ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँचने में उन्हें प्राथमिकता मिल सके । विमुक्ति के पश्चात् ऐसे बच्चों एवं उनके बहन-भाईयों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण पुनर्वास केन्द्रों और / या उनके घरों के नजदीक पड़ने वाले स्थानों पर किया जाएगा । युवा-उम्र में ही कार्य करने के कारण इन बच्चों का मनोवैज्ञानिक विकास ठीक तरीके से नहीं हो पाता। अतः, यह आवश्यक है कि विमुक्ति के पश्चात् इन्हें उपलब्ध मनो चिकित्सकों एवं तनाव-परामर्शदाताओं के देख-रेख में रखा जाय । स्वास्थ्य विभाग इस दिशा में अपेक्षित सेवा प्रदान करेगा। बच्चे कई प्रकार के संक्रमण एवं सूक्ष्म-पौषिक कमियों से ग्रस्त हो जाते हैं।अतः ऐसे बच्चों का चिकित्सा पदाधिकारी/ शिशु रोग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में समुचित चिकित्सीय देख-रेख एवं पौषणिक पुनर्वास किया जाएगा । विभाग अपने विभिन्न कार्यक्रमों एवं पहल से कार्यरत बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के समाधान में प्रमुख भूमिका निभाएगा । निःशुल्क चिकित्सा, जिसमें मुफ्त दवाएँ और राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों / डिस्पेन्सरीज में भर्त्ती होने की सुविधा शामिल है, के लिए विभाग सभी बाल श्रमिकों एवं उनके परिवार के सदस्यों के लिए हेल्थ कार्ड निर्गत करेगा । विभाग अन्य राज्यों से लाए गये प्रवासी बाल श्रमिकों के लिए मुफ्त 'मेडिकल चेकअप' करायेगा तथा राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के अन्तर्गत चलाये जा रहे विद्यालयों में नियमित रूप से बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था करेगा ।विभाग द्वारा उपरोक्त उद्देश्यों से प्रभावी अनुश्रवण तंत्र स्थापित किया जाएगा, कार्यक्रमों के संचालन के लिए जिम्मेवार अधिकारियों के क्षमता विकास की व्यवस्था की जाएगी एवं श्रम संसाधन विभाग के साथ गहरा सहयोग कायम किया जाएगा ताकि बाल श्रमिकों के मुद्दों पर दोनों विभागों में सहक्रियात्मक तालमेल स्थापित हो सके । मानव संसाधन विकास विभाग एक बच्चा जो श्रम करता है, उसे बच्चे की व्यक्तिगत समस्या अथवा व्यक्तिगत ट्रेजेडी न मानते हुए बाल अधिकार के मामले के रुप में देखा जाना चाहिए। यह एक सार्वजनिक चिन्ता का विषय है एवं सभ्य समाज के लिए एक चुनौती बनकर उभरा है। एक सभ्य समाज में बच्चे का, बालक हो या बालिका, सही स्थान स्कूल अथवा खेल का मैदान हो सकता है, काम करने की जगह नहीं जहाँ उसे जीविका चलाने के लिए कम मजदूरी पर कठिन कार्य करना पड़ता है। वास्तव में यह प्रत्येक बच्चे का अधिकार है कि वह स्कूल में पढ़े एवं सभी साझेदारों का यह दायित्व बनता है कि वे इस दिशा में पहल करें। अतः सार्वजनिक चिन्ता एवं चुनौती का विषय है प्रारंभिक शिक्षा का सर्वव्यापीकरण, जो सभी 6-14 आयु वर्ग के बालक या बालिका, की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य की प्राप्ति का है। यह चुनौती बहुत हद तक स्कूली शिक्षा की व्यवस्था के समक्ष उत्पन्न व्यवस्थाजनित समस्याओं के निवारण एवं बच्चों की बिना बाधा स्कूल तक पहुँच सुनिश्चित कराने की मांग करती है।चूंकि आज निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है, अतः मानव संसाधन विभाग 6-14 आयु वर्ग के विद्यालय से बाहर रह गए बच्चों, जिनमें स्वाभाविक रूप से कामकाजी बच्चों की संख्या अधिक होगी, के लिए प्रारंभिक शिक्षा के सर्वव्यापीकरण की दिशा में आवश्यक कदम उठाएगा एवं कामकाजी बच्चों की शिक्षा में बालिकाओं को प्राथमिकता देगा । प्रारंभिक शिक्षा के सर्वव्यापीकरण का अर्थ है, सर्वव्यापी पहुँच, सर्वव्यापी ठहराव एवं सभी बच्चों के द्वारा न्यूनतम अधिगम स्तर की सम्प्राप्ति। इसके लिए व्यवस्थाजनित मुद्दों को हल करते हुए आपूर्त्ति पक्षीय हस्तक्षेप को मजबूत बनाना होगा ताकि ज्यादा से ज्यादा स्कूल खुलें, ज्यादा से ज्यादा शिक्षकों की नियुक्ति हो, उनका समुचित प्रशिक्षण हो, शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखा जाए, शिक्षक अनुपस्थिति पर रोक लगायी जाए एवं विद्यालयों में आनन्दायी माहौल में शिक्षण- अधिगम सुनिश्चित कराया जाए। इसका अर्थ यह भी है कि बिना किसी अनावश्यक नुकसान के चालू योजनाओं का फायदा लाभार्थीयों तक पहुँचाने हेतु डेलीवरी की व्यवस्था को मजबूत किया जाय। उपरोक्त कदमों का अन्तिम लक्ष्य होगा, बाल श्रम की परिघटना को होने से रोकना तथा सभी विमुक्त किए गए बाल श्रमिकों का शिक्षा के माध्यम से पुनर्वास की व्यवस्था करना। श्रम संसाधन विभाग, मानव संसाधन विभाग के द्वारा इस दिशा में उठाए जाने वाले हर प्रयास में हमेशा सहयोगी रहेगा। पूर्व वर्णित लक्ष्यों को ध्यान में रखकर मानव संसाधन विभाग निम्नलिखित विशिष्ट क्रियाकलाप सम्पन्न करेगा - शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाया जाएगा ताकि शिक्षक अपना पूरा समय विद्यालयों में पठन-पाठन में लगा सकें । शिक्षकों की बहाली एवं उनके विद्यालयों में पदस्थापन की प्रक्रिया तेज की जाएगी एवं यह व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी कि किसी भी स्कूल में शिक्षकों के कोई पद रिक्त न रहें। संकुल संसाधन केन्द्रों/प्रखंड संसाधन केन्द्रों/जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों(डायट) और राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद् को मजबूत बनाया जाएगा ताकि शिक्षकों को सेवाकालीन एवं सेवा-पूर्व प्रशिक्षण एवं विद्यालयों को नियमित अकादमिक अनुसमर्थन मिल सके तथा विद्यालय से बाहर रह गए बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का अनुश्रवण समुचित रूप से हो सके। सभी साझेदारों, जिनमें शैक्षिक प्रशासक, शिक्षक संघों के प्रतिनिधि एवं जनप्रतिनिधि शामिल होंगे, को शिक्षा के मौलिक अधिकारों एवं संविधान के अनुच्छेद 21 A के प्रति संवेदनशील बनाया जाएगा। मध्याह्न भोजन योजना को मजबूती से लागू किया जाएगा तथा डेलीवरी तंत्र को लगातार सुदृढ़ करने का प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री समग्र विद्यालय विकास कार्यक्रम को मजबूत बनाया जाएगा ताकि बच्चों को सम्पूर्ण विद्यालय उपलब्ध करवाया जा सके न कि केवल कक्षायें जोड़ी जायें । समुदाय एवं अन्य साझेदारों के साथ विशेष अभियान चलाकर विद्यालय से बाहर रह गए बच्चों की पहचान कर उनको औपचारिक/वैकल्पिक/नवाचारी विद्यालयों के माध्यम से शिक्षा की मुख्य धारा में शामिल किया जाएगा। मुफ्त पुस्तके, पोशाक बाल श्रमिक को र्सव शिक्षा अभियान/राज्य सरकार के योजनाओं के अधीन उपलब्ध कराया जायगा । बाल श्रमिको में से विशेषकर बालिकाओं को उच्च प्राथमिकता के आधार पर शिक्षा से जोड़ा जाएगा । एन0 सी0 एल0 पी0 विद्यालयों में पढ़ने वाले बाल श्रमिकों को शिक्षा की मुख्यधारा में जोड़ने में सहायता पहुँचाई जाएगी। सर्वव्यापी पहुँच सुनिश्चित करने के लिए अधिक से अधिक स्कूल खोला जाएगा ताकि कोई भी टोला बिना विद्यालय के न रहे। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद् बिहार शिक्षा परियोजना परिषद्, जो सामान्यतः बिहार शिक्षा परियोजना के नाम से जाना जाता है, संपूर्ण राज्य में सर्व शिक्षा अभियान के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेवार है। इस योजना का उद्देश्य स्कूलों के सामुदायिक- स्वामित्व व्यवस्था के अन्तर्गत 6-14 आयु वर्ग के सभी बच्चों के लिए प्रारंभिक शिक्षा सुनिश्चित करना है। अतः बाल श्रम उन्मूलन योजना को सर्व शिक्षा अभियान के बड़े लक्ष्य से जोड़ा जाएगा । इस का उद्देश्य यह होगा कि कामकाजी बच्चों समेत सभी बच्चों को सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से विद्यालयों से जोड़ा जाए। इस कार्य-योजना के अंतर्गत बिहार शिक्षा परियोजना पर, अन्य बातों के अलावा, निम्नलिखित कार्य करने की जिम्मेदारी होगी - बाल श्रमिक समेत विद्यालय से बाहर रह गए बच्चों का सर्वेक्षण करना । विद्यालय से बाहर रह गए सभी बच्चों का स्कूलों में नामांकन करवाना तथा इसके लिए पूरे राज्य में गुणात्मक शिक्षा के लिए जन आन्दोलन की शुरुआत करना। विद्यालय से बाहर रह गए सभी बच्चों का औपचारिक या वैकल्पिक विद्यालयों में नामांकन करवाना। आवासीय सेतु विद्यालय नामांकन करवाना । विद्यालय से बाहर रह गए बच्चों की शिक्षा के प्रति समुदाय एवं शिक्षकों को संवेदनशील बनाना। स्कूलों में पठन-पाठन के वातावरण को विकासित करना। शिक्षकों को संवेदनशील बनाना एवं उनकी क्षमता बढ़ाना। विद्यालयों में बच्चों की भागीदारी, उपस्थिति एवं ठहराव के अनुश्रवण हेतु ट्रैकिंग तंत्र विकसित करना। विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना। एन0 सी0 एल0 पी0 विद्यालयों के संबंध में बिहार शिक्षा परियोजना की निम्नलिखित जिम्मेवारियाँ होंगी- एन0 सी0 एल0 पी0 विद्यालयों में नामांकित बच्चों के लिए प्रशिक्षण अधिगम सामग्री एवं मुफ्त पाठ्य पुस्तक का वितरण करना। सर्व शिक्षा अभियान के अन्तर्गत बिहार शिक्षा परियोजना द्वारा पहचान किये गये बाल श्रमिकों का नामांकन राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के विद्यालयों द्वारा किया जाएगा। संकुल संसाधन केन्द्रों, प्रखंड संसाधन केन्द्रों एवं जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से एन0 सी0 एल0 पी0 विद्यालयों के शिक्षकों का क्षमता विकास एवं नियमित अकादमिक अनुसमर्थन की व्यवस्था करना। एन0 सी0 एल0 पी0 स्कूल के बच्चों को आवासीय विद्यालयों समेत औपचारिक शिक्षा की मुख्य धारा में शामिल करना। जो बाल श्रमिक एन0 सी0 एल0 पी0 विद्यालयों या औपचारिक/वैकल्पिक विद्यालयों में नामांकित नहीं हो पाऐं, उन्हें सेतु (आवासीय/गैर आवासीय) पाठ्यक्रमों से जोड़ना। कामकाजी बच्चों एवं बाल श्रमिकों की शिक्षा के मुद्दे पर श्रम संसाधन विभाग,मानव संसाधन विभाग एवं बिहार शिक्षा परियोजना के बीच के सहयोग को संस्थागत रूप प्रदान करने के लिए बिहार शिक्षा परियोजना के जिला एवं राज्य स्तर की समितियों में श्रम संसाधन विभाग के पदाधिकारी विशेष आमंत्रित सदस्य के रुप में रखे जाएँगे । समाज कल्याण विभाग यह विभाग बच्चों के अधिकारों के संरक्षण एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के कार्यान्वयन का नोडल विभाग है, इसलिए बाल श्रमिकों के पुनर्वास में इसकी प्रमुख भूमिका है। साथ ही, किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एव सुरक्षा) अधिनियम 2000, जिसका संबंध, अन्य बातों के अलावा, ऐसे बच्चों, जिन्हें देखभाल एवं सुरक्षा की आवश्यकता है, की देखभाल, सुरक्षा एवं पुनर्वास से है, के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी भी इसी विभाग की है। यह विभाग इस कार्य योजना के अंतर्गत निम्नलिखित कदम उठाएगा - सभी जिलों में बाल कल्याण समितियों का सुदृढ़ीकरण एवं संचालन । किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं सुरक्षा) अधिनियम,2000, (समय-समय पर यथा संशोधित)के दिशा -निर्देशों के आलोक में पर्याप्त संख्या में संस्थागत एवं गैर-संस्थागत परिवार आधारित सेवाओं की स्थापना करना। विमुक्त किए गए बाल श्रमिकों को जब तक घर न पहुँचा दिया जाए, तब तक उनके लिए अस्थायी आश्रय की व्यवस्था करना। विमुक्त किए गए बाल श्रमिकों, जिनका कोई परिवार नहीं हो, की देखरेख करना। बाल अधिकारों के संबंध में जागरूकता अभियान चलाना । संकट ग्रस्त परिवारों के बच्चों का आगंनबाड़ी केन्द्रों में नामांकन कराने पर ध्यान देना। बाल श्रमिकों के सुयोग्य श्रेणी के परिवारों के सदस्यों को बिहार वृद्धावस्था पेंशन योजना एवं इंदिरा गाँधी पेंद्गान योजना के अंतर्गत आच्छादित करना। अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण, एवं पिछड़ा वर्ग तथा अत्यंत पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग यह विभाग निम्नांकित कार्य करेगा - विद्यालयों में नामांकित सुयोग्य वर्गों के बाल श्रमिकों को छात्रवृति उपलब्ध करवाना। सुयोग्य श्रेणी के बाल श्रमिकों को चालू कल्याण योजनाओं के तहत लाभ प्रदान करना। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग खाद्य एवं आपूर्ति विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि जन-वितरण प्रणाली एवं खाद्य-सुरक्षा के कार्यक्रमों का लाभ सुयोग्य श्रेणी के सभी लोगों को सामन्यतः एवं विमुक्त बाल श्रमिक के परिवारों को विशेष रूप से प्राप्त हो । विभाग विमुक्त बाल श्रमिक के परिवारों को निम्नांकित विशिष्ट लाभ पहुँचाना सुनिश्चित करेगा - यदि पूर्व में राशन-कार्ड /कूपन निर्गत नहीं हो, तो पात्रता रखने वाले को राशन कार्ड / कूपन निर्गत करना । गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वालों के लिए अन्नपूर्णा/ अन्त्योदय एवं अन्य खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों के अन्तर्गत दिये जा रहे लाभ मुहैया कराना । अल्पसंखयक कल्याण विभाग यह विभाग सुनिश्चित करेगा कि अल्पसंखयक समुदाय के कल्याण की योजनाओं का लाभ सामान्यतः उक्त समुदाय के गरीब लोगों के साथ-साथ इस समुदाय के बाल श्रमिकों के परिवारों को भी मिले । विभाग निम्नांकित विशिष्ट लाभों को अल्पसंखयक समुदाय के विमुक्त बाल श्रमिकों के परिवारों को भी उपलब्ध कराएगा - अल्पसंखयकों के लिए प्रधान मंत्री के 15 सूत्री कार्यक्रम के अन्तर्गत लाभ । अल्पसंखयकों के लिए विशेष आवासीय कार्यक्रमों का लाभ । स्वनियोजन हेतु बिहार राज्य अल्पसंखयक वित्तीय कारपोरेशन द्वारा इच्छुकों को ऋण देना । अन्य साझेदारों की भूमिका बिहार बाल श्रमिक आयोग आयोग एक वैधानिक संस्था है जिसका उद्देश्य बिहार बाल श्रमिक आयोग अधिनियम, 1996 की धारा-7 के अन्तर्गत परिभाषित है। बाल श्रम के उन्मूलन एवं पुनर्वास में आयोग की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। दरअसल, बाल श्रम उन्मूलन के लिए सभी साझेदारों की सहभागिता से एक मजबूत सामाजिक आन्दोलन की आवश्यकता होगी । ऐसी आशा की जाती है कि अपने परिभाषित उद्देश्यों को पूरा करने के क्रम में आयोग ऐसे आन्दोलन की शुरूआत एवं उसकी अगुवाई भी करेगा । ऐसा करते हुए आयोग ऐसे कार्यक्रमों एवं गतिविधियों को संचालित करेगा जो बाल श्रम की घातक व्यवस्था के विरूद्ध समाज में एक अनुकुल वातावरण बनाने एवं जागरूकता पैदा करने में सहायक हों । आयोग बच्चों को काम पर भेजने की व्यवस्था के विरूद्ध सामाजिक साझेदारों सहित तमाम सरकारी विभागो /गैर सरकारी संगठनों, बाल अधिकार संगठनों, पंचायतों, बुद्धिजीवियों, असैनिक सामाजिक संगठनों, नियोजकों एवं माता-पिता को मिलाकर एक व्यापक गठजोड़ कायम करेगा । आयोग बाल श्रम के मुद्दों पर जन सुनवाई का आयोजन करेगा तथा बाल श्रम को रोकने के लिए बने अधिनियमों के कार्यान्वयन एवं बाल श्रमिकों के कल्याण कार्यक्रमों की समीक्षा एवं अनुश्रवण का भी महत्वपूर्ण दायित्व निभाएगा । इसके अतिरिक्त आयोग बाल श्रम से संबंधित मामलों पर सरकार को परामर्श देगा । यूनिसेफ, बिहार की भूमिका यूनिसेफ, बिहार, बच्चों के लिए किए जाने वाले सभी कार्यक्रमों एवं क्रियाकलापों में हमेशा अग्रणी रहा है। यूनिसेफ बच्चों के मुद्दों पर सरकारी एवं गैर सरकारी प्रयासों में सक्रियता से सहयोग करता रहा है। इस कार्य योजना के अंतर्गत यूनिसेफ ने जिन कार्यों के लिए अपनी सहमति दी है, वे निम्नप्रकार हैं । जागरुकता के लिए संचार संबंधी एवं बहुआयामी रणनीति- श्रम संसाधन विभाग से परामर्श कर यूनिसेफ विभिन्न साझेदारों, यथा संस्थागत साझेदारों, माता-पिता, शिक्षकों , नियोजकों, श्रमिक संघों, सामाजिक एवं राजनैतिक कार्यकर्त्ताओं, जन प्रतिनिधियों जिनमें पंचायती राज संस्थाएँ शामिल हैं, सरकारी पदाधिकारियों, असैनिक सामाजिक संगठनों, जागरुक नागरिकों, पेद्गोवर समूहों, रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों एवं बच्चों तक को इस मुहिम में जोड़ने के लिए बहुविध संचार संबंधी एवं बहुआयामी रणनीति अपनाएगा ताकि बाल श्रम के उन्मूलन एवं बाल श्रम प्रथा के विरुद्ध व्यापक सामाजिक गोलबंदी के लिए जरूरी वातावरण का निर्माण किया जा सके । इस रणनीति के तहत यूनिसेफ, राज्य सरकार एवं असैनिक सामाजिक संगठनों की सहायता से सामुदायिक गोलबंदी एवं जागरुकता उत्पन्न करने के लिए, अन्य बातों के अलावा मल्टी मीडिया विशेष अभियान भी चलाएगा। इस हेतु निम्नांकित रणनीति अपनाई जाएगी, हालांकि यह सूची उदाहरणात्मक है, पूर्ण नहीं - बालश्रम पर आधारित चलचित्रों/वृतचित्रों का प्रदर्शन विद्यालयों में गतिविधियाँ आयोजित करना (बच्चों को शामिल कर क्योंकि बच्चे बदलाव के कारक हैं), जैसे, विभिन्न प्रतियोगिताएँ, नाटक, नारे, मानवश्रृंखला, शपथ-ग्रहण, चर्चाएँ, बच्चों का मंत्रिपरिषद आदि । प्रखंडों / वार्डों में पंचायती राज संस्थाओं के सदस्यों एवं अन्य साझेदारों के साथ सघन रूप से घर-घर सम्पर्क स्थापित करने जैसे कार्य । घरों, कारखानों, दूकानों एवं प्रतिष्ठानों, अन्य कार्यस्थलों, होटलों एवं ढाबों आदि के मालिकों को प्रोत्साहित करना कि वे अपने प्रतिष्ठानों में बाल श्रमिक कार्यरत नहीं हैं,जैसी घोषणाओं के स्टीकर्स प्रदर्शित करें । उचित स्थानों पर बैनर, होर्डिंग्स, पोस्टर, लगाना। जन सुनवाई (विभिन्न साझेदारों द्वारा खुला विचार-विमर्श) प्रिन्ट, ऑडियो एवं विजुअल मीडिया का व्यापक उपयोग। पंचायत स्तर पर जागरूकता पैदा करने हेतु पंचायत के सदस्यों को गोलबंद करना। बालश्रम से मुक्ति एवं पुनर्वास से संबधित महत्वपूर्ण दिशा निर्देशों/सरकार के प्रोटोकोल तथा समय समय पर न्यायालय द्वारा दिए गए आदेशों को प्रचारित-प्रसारित करना। समाजिक साझेदारों की लामबंदी। यूनिसेफ मानव संसाधन विकास विभाग/बिहार शिक्षा परियोजना से परामर्श कर विद्यालय से बाहर रह गए सभी बच्चों के नामांकन एवं ठहराव के लिए समाजिक साझेदारों, जैसे, जिलाधिकारियों, शिक्षा विभाग के अधिकारियों विद्यालयों, शिक्षकों, नागरीय समाज की संस्थाओं, विद्यालय शिक्षा समितियों, नियोजकों, गृहस्वामीओं विशेष कर घर की महिलाओं को लामबंद करने हेतु आवश्यक गतिविधियाँ आयोजित करेगा। बालश्रम के उद्गम क्षेत्र का चिन्हीकरण तथा बाल श्रम की अवस्थिति का आकलन करने हेतु बेस लाईन सर्वे कराना एवं बालश्रम से मुक्त कराए गए बच्चों की प्रगति का अनुश्रवण करने के लिए श्रम विभाग में ट्रैकिंग सिस्टम की स्थापना । श्रम आयुक्त बिहार के कार्यालय में कार्यरत 'बालश्रम कोषांग' के साथ सहयोग एवं उसका सुदृढ़ीकरण। यूनिसेफ ने उपर्युक्त वर्णित कार्यकलापों के लिए प्रारंभिक चरण में वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए सहमति दी है। वैसे ये कार्यकलाप अन्ततः श्रम संसाधन विभाग द्वारा ही संचालित किये जाएंगे । विभाग के बजट में इसके लिए आवश्यक उपबंध किये जाएंगे, और / या सरकार के अन्य विभागों के कार्यक्रम/ कार्यकलापों के सहमिलन से इसकी व्यवस्था होगी । श्रमिक संघ श्रमिक संघ श्रमिकों के सशक्तिकरण एवं शोषण- मुक्ति की किसी भी प्रक्रिया के अनिवार्य अंग हैं। श्रमिक वर्ग चाहे संगठित या असंगठित क्षेत्र के हों, उनसे संबंधित मुद्दों पर श्रम संसाधन विभाग बहुत ही निकटता से श्रमिक संघों के साथ कार्य करता है। श्रमिक संघों को प्रोत्साहित किया जाएगा कि बाल श्रम के उन्मूलन में अपने संसाधनों एवं संगठनात्मक क्षमता का उपयोग करें एवं विभाग ऐसे प्रयासों में उनका सक्रिय साझेदार रहेगा । गैर सरकारी संगठन / असैनिक सामाजिक संगठन / सामाजिक एवं सांस्कृतिक कर्मी गैर सरकारी संगठनों एवं अन्य असैनिक सामाजिक संगठनों, जो बाल श्रम के क्षेत्र में कार्यरत हों या इसमें रूचि रखते हों, के साथ-साथ नियोक्ता संगठनों एवं सामाजिक एवं सांस्कृतिक कर्मीओं /समूहों को चिन्हित किया जाएगा एवं उनकी क्षमता का निर्माण / उन्नयन, जैसी भी स्थिति हो, किया जाएगा । बाल श्रमिकों की पहचान, विमुक्ति एवं पुनर्वास हेतु उनका सक्रिय सहयोग प्राप्त किया जाएगा । इन समूहों को बाल श्रम के मुद्दे पर जागृति उत्पन्न करने हेतु गति विधियाँ संचालित करने, शोध एवं अध्ययन करने तथा उनके दस्तावेजी करण के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा । बाल श्रम नियोजित करने एवं कानून का उल्लंघन करने वाले नियोजकों पर दबाव बनाने हेतु नियोक्ता संगठनों को प्रोत्साहित किया जाएगा । चूँकि घरों में बाल श्रमिकों का नियोजन प्रतिषिद्ध कर दिया गया है, अतः शहरी क्षेत्रों में कार्यरत रेसिडेंट कल्याण संगठनों को वैसे निवासियों, जो घरों में बाल श्रमिकों का नियोजन करते है, पर दबाव बनाने हेतु लामबंद किया जाएगा । ऐसे संगठनों को संबंधित कॉलोनी / एपार्टमेन्टस में बाल श्रमिको के नियोजन पर निगाह रखने एवं इसे रोकने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा । मीडिया विभिन्न मुद्दों पर जनता की राय के निर्माण में प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रोनिक मीडिया की प्रभावी भूमिका है। अतः राज्य में बाल श्रम के उन्मूलन हेतु किये जा रहे प्रयासों से संबंधित लेखों, और समाचारों को प्रकाशित करने, साझेदारों द्वारा किये जा रहे अच्छे प्रयासों को जन-जन तक पहुँचाने एवं बाल-श्रम के मुद्दों पर जागरूकता पैदा करने हेतु मीडिया को प्रोत्साहित किया जाएगा । सरकार द्वारा समय-समय पर विशेष मीडिया कैम्पेन चलाया जाएगा ।, ऐसा प्रयास किया जाएगा कि मीडिया कैम्पेन के सभी संभव एवं लगातार किए जा सकने योग्य तरीकों, जैसे कि समाचार पत्रों / पत्रिकाओं में विशेष-लेख, लघु-फिल्म, रेडियो जिंगल, टॉक शो, स्लाइड दिखाना आदि, का हर संभव उपयोग किया जा सके । कार्यबलों का गठन कार्य योजना के मार्गदर्शन, अनुश्रवण, पर्यवेक्षण तथा इसे गति प्रदान करने हेतु निम्नांकित रूप से कार्यबलों का गठन किया जाएगा - राज्य कार्यबल संरचना राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक 'कार्य बल' (टास्क फोर्स) का गठन किया जाएगा जिसमें विकास आयुक्त और श्रम संसाधन विभाग, वित्त, मानव संसाधन ,राजस्व, विधि राजस्व एवं भूमि सुधार, समाज कल्याण,अनुसूचितजाति एवं जनजाति कल्याण पिछड़ा एवं अत्यन्त पिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंखयक कल्याण, खाद्य एवं आपूर्ति, ग्रामीण विकास,द्गाहरी विकास, गृह, स्वास्थ्य, पंचायतीराज एवं योजना विभाग के सचिव/प्रधान सचिव सदस्य होगें । श्रम आयुक्त, बिहार शिक्षा परियोजना के राज्य परियोजना निदेशक , समाज कल्याण के निदेश क,यूनिसेफ के राज्य प्रतिनिधि और बाल श्रम के क्षेत्र में कार्य कर रही सुप्रसिद्ध गैर सरकारी संस्थाओं में से किन्ही दो के प्रतिनिधि भी इस कार्य बल के सदस्य होंगे । श्रम आयुक्त कार्य बल के सदस्य-सचिव होंगे। बिहार राज्य बालश्रम आयोग के अध्यक्ष विशेष आमंत्रित सदस्य होंगे। कार्य कार्ययोजना के क्रियान्वयन का अनुश्रवण, बाल श्रमिकों की विमुक्ति एवं उनके पुनर्वास तथा उनके परिवारों की गरीबी को दूर करने के लिए उपाय सुझाना, विद्यालय से बाहर रह गए बच्चों की पढ़ाई की समीक्षा तथा राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना विद्यालयों उन विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में जोड़ने संबंधी कार्यो की समीक्षा करना इस समिति का मुख्य कार्य होगा । कार्यबल बाल श्रम के उन्मूलन एवं पुनर्वास के लिए विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा किए जा रहे हस्तक्षेपों के अभिसरण की भी समीक्षा करेगा। बैठक कार्य बल की बैठक वर्ष में कम से कम तीन बार अध्यक्ष द्वारा निश्चित किये गये स्थान एवं समय पर होगी । जिला कार्यबल संरचना सभी जिले में संबंधित जिले के जिलाधिकारी/ समाहर्त्ता की अध्यक्षता में जिला कार्यबल (टास्क फोर्स ) का गठन किया जाएगा जिसमें जिले के पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त, मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, नगर आयुक्त, जिला परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी, सभी अनुमंडल पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, बिहार शिक्षा परियोजना के जिला प्रोग्राम समन्वयक, जिला कल्याण पदाधिकारी, जिला पंचायतीराज पदाधिकारी, जिला बाल कल्याण समिति के एक प्रतिनिधि, जिले में कार्यरत श्रमिक संघ के प्रतिनिधि एवं जिले में बाल श्रम के मुद्दे पर कार्यरत खयाति प्राप्त गैर सरकारी संगठनों के एक प्रतिनिधि सदस्य होंगे । जिलो के श्रम अधीक्षक / सहायक श्रमायुक्त कार्य बल के सदस्य- सचिव के रूप में कार्य करेंगे । जिला परिषद एवं नगर निगम/ नगर परिषद के अध्यक्ष इस कार्य-बल के सह-अध्यक्ष होंगे । कार्य कार्यबल जिले में बाल श्रमिकों की पहचान, विमुक्ति, पुनर्वास एवं बालश्रम के उन्मूलन हेतु की गई कार्रवाईयों की समीक्षा करेगा और जिला स्तर पर इस कार्ययोजना के कार्यान्वयन का अनुश्रवण करेगा। यह कार्यबल बाल श्रमिकों के परिवारों की गरीबी दूर करने के कार्य- योजना बनाएगा, उसका कार्यान्वयन करेगा तथा की गई कारवाई की समीक्षा करेगा । इसके अतिरिक्त बालश्रम से मुक्त कराए गए बच्चों के पुनर्वास के लिए विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों के बीच जिला स्तर पर अभिसरण सुनिश्चित करेगा, 10 दिसम्बर, 1996 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में निहित निर्देशों का शब्दशः अनुपालन सुनिश्चित करेगा, विद्यालय से बाहर रह गए सभी बच्चों को विद्यालय लाने के लिए प्रभावी कदम उठायेगा और राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना विद्यालयों के कार्यकलापों की समीक्षा करेगा । कार्यबल सभी विमुक्त कराए गए बच्चों के पुनर्वास की प्रगति का अनुश्रवण करेगा ताकि उनमें से कोई भी अपनी पुरानी स्थिति में वापस न लौटे। कार्यबल बालश्रम के मुद्दे पर समुदाय की लामबंदी एवं जागृति उत्पन्न करने की कारवाई तथा पंचायती राज संस्थानों एवं अन्य सामाजिक साझेदारो के साथ कार्य स्थलों से बच्चों को विमुक्त करने एवं उनका विद्यालय में नामांकन करने हेतु, समन्वय स्थापित करेगा। जिला कार्यबल अनुमन्डल स्तर पर भी कार्य-बल के गठन पर विचार कर सकता है। बैठक कार्य-बल की बैठक अध्यक्ष द्वारा निर्धारित समय एवं स्थान पर एक त्रैमास में कम से कम एक बार अवश्य होगी । प्रखण्ड एवं ग्राम पंचायत कार्यबल प्रत्येक प्रखण्ड स्तर पर कार्यबल का गठन किया जाएगा जिसकी अध्यक्षता पंचायत समिति के प्रमुख करेंगे एवं प्रखण्ड विकास पदाधिकारी सदस्य- सचिव होंगे । उक्त प्रखण्ड क्षेत्र में पड़ने वाले नगर पंचायतों के अध्यक्ष इस समिति के सह- अध्यक्ष होंगे । सभी संबंधित विभागों के प्रखण्ड स्तर के पदाधिकारी एवं नगर पंचायत के कार्य पालक पदाधिकारी इसके सदस्य रहेंगे । प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर इसी तरह के कार्य बल का गठन किया जाएगा जिसके अध्यक्ष ग्राम पंचायत के मुखिया होंगे एवं पंचायत- सचिव इसके सदस्य-सचिव होंगे । इस कार्य-बल के अन्य सदस्य होंगे सभी वार्ड सदस्य, पंचायत के अन्तर्गत अवस्थित प्रारंभिक विद्यालयों / प्राथमिक विद्यालयों के प्रधान शिक्षक, आंगनबाड़ी सेविका एवं विद्यालय शिक्षा समिति के अध्यक्ष । कार्य ये कार्यबल जिला कार्यबल के सामान्य नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण में अपने क्षेत्रान्तर्गत बाल श्रमिकों की पहचान, विमुक्ति पुनर्वास एवं कामकाजी बच्चों की शिक्षा के संबंध में कार्य-योजना बनाएंगे, उसका कार्यान्वयन करेंगे, समन्वय स्थापित करेंगे एवं संबंधित हिसाब रखेंगे । गरीबी उन्मूलन के कार्यक्रमों के कार्यान्वयन का लाभ गरीबों तक पहुँच सके, इसे सुनिश्चित करने के लिए ये कार्यबल ऐसे कार्यक्रमों का अनुश्रवण करेंगे । ये कार्यबल बाल श्रम के उन्मूलन हेतु समुदाय की लामबंदी के केन्द्र के रूप में कार्य करेंगे तथा विद्यालय शिक्षा समिति एवं अभिभावकों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी बच्चे विद्यालय जा रहे हैं एवं किसी बच्चे को मजदूरी में नहीं लगाया जा रहा है। बैठक अध्यक्ष द्वारा निर्धारित समय एवं स्थान पर प्रत्येक माह में कार्य बल की कम से कम एक बैठक अवश्य होगी । कामकाजी बच्चों एवं प्रवासी मजदूरों की पंजी का संधारण सभी कामकाजी बच्चों एवं सभी प्रवासी श्रमिकों, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, जो कार्य की खोज में ग्राम पंचायत से बाहर जाते हैं, के लिए पंचायत कार्यालय में एक पंजी का संधारण किया जाएगा एवं इसे नियमित रूप से अद्यतन किया जाएगा । कार्य से विमुक्त कराए गए, परिवारों में वापस किए गए तथा/ या विद्यालय में नामांकन कराये गए बच्चों संबंधी विवरण हेतु पंजी में अलग से पन्ने चिन्हित रहेंगे । ग्राम पंचायत ऐसे विमुक्त बच्चों के शैक्षणिक एवं आर्थिक पुनर्वास का हिसाब रखेगी एवं ये बच्चे पुनः उसी स्थिति में कार्य पर वापस न आ जाए इसे सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कदम उठाएगी । पंचायत सचिव इस पंजी के अभिरक्षक(कस्टोडियन) होंगे । नोडल विभाग इस कार्ययोजना के कार्यान्वयन एवं नोडल पदाधिकारियों को इसे लागू करने में आवश्यक सहयोग तथा मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु श्रम संसाधन विभाग नोडल विभाग होगा। विभाग सभी जिलाधिकारियों एवं विभागों/अभिकरणों, जो बाल श्रमिकों को मुक्त कराने, उनके पुनर्वास एवं बालश्रम उन्मूलन में संलग्न हैं, के साथ सघन रूप से कार्य करेगा । विभाग राज्य, जिला एवं पंचायत स्तरीय कार्यबलों के कार्य को सुगम बनाएगा । नोडल पदाधिकारी राज्य स्तर पर श्रम आयुक्त, बिहार एवं अपने-अपने जिलों के लिए संबंधित जिलाधिकारी / समाहर्त्ता इस कार्य-योजना के नोडल पदाधिकारी होंगे । नोडल पदाधिकारी के रूप में इस कार्य योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए उन्हें शक्ति होगी एवं इसके लिए वे जवाबदेह होंगे । सभी जिला मुखयालय के शहरों को बालश्रम से मुक्त करने हेतु विशेष अभियान शुरूआत में पटना शहरी क्षेत्र से प्रारम्भ कर सभी जिला मुखयालय शहरों को बालश्रम से मुक्त करते हुए यह अभियान क्रमशः देहाती क्षेत्रों की ओर अग्रसर होगा । शहरों एवं देहातों को बाल श्रम से मुक्त करने हेतु बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अन्तर्गत विशेष अभियान चलाया जाएगा । बालश्रम मुक्त क्षेत्रों के लिए विशेष पुरस्कार श्रम संसाधन विभाग द्वारा ग्राम पंचायत,प्रखण्ड एवं जिला को बाल श्रम की घातक प्रथा से मुक्त कराने हेतु किये गये प्रयासों के लिए विशेष पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। ये पुरस्कार वार्षिक होंगे एवं एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन कर प्रदान किये जाएँगें। पुरस्कार एवं प्राप्तकर्ता निम्नांकित होंगे- क्रम संख्या पुरस्कार प्राप्तकर्ता 1 बाल श्रम मुक्त ग्राम पंचायत के लिए मुख्यमंत्री का विशेष पुरस्कार मुखिया एवं सभी वार्ड सदस्य (संयुक्त रूप से) 2 बाल श्रम मुक्त प्रखण्ड के लिए मुख्यमंत्री का विशेष पुरस्कार प्रमुख, नगर पंचायतों के अध्यक्ष एवं प्रखण्ड विकास पदाधिकारी (संयुक्त रूप से) 3 बालश्रम मुक्त जिला के लिए मुख्यमंत्री का विशेष पुरस्कार जिलाधिकारी, जिला परिषद / नगर निगम / नगर परिषद के अध्यक्ष (संयुक्त रूप से) निधि इस कार्ययोजना के अन्तर्गत अपने दायित्वों के निर्वहन हेतु विभिन्न विभागों का आवश्यक बजट उनके विभागीय बजट में ही सन्निहित रहेगा । हालांकि अधिकांद्गा दायित्व संबधित विभाग के वर्तमान बजटीय प्रावधान से ही पूरे हो जाएंगे। फिर भी यदि विभागों को अतिरिक्त संसाधन की आवश्यकता होगी, तो विभाग ससमय आवश्यक कदम उठाएंगे । कठिनाईयों का निवारण इस कार्य योजना के कार्यान्वयन के क्रम में यदि कोई कठिनाई उत्पन्न हो या प्राविधानों को स्पष्ट करने की आवश्यकता हो, तो श्रम संसाधन विभाग को इन कठिनाईयों के निवारण एवं प्रावधानों को स्पष्ट करने का अधिकार होगा। निम्न चीजों से संबंधित है- अनुलग्नक अनुसूची (धारा-3 देखें) भाग ''अ'' - जीविकाएँ रेलवे द्वारा यात्री, माल या डाक का परिवहन। रेलवे परिसरों में सिंडर चुनना, राख साफ करना या भवन निर्माण। किसी रेलवें स्टेशन पर खाना-पान प्रतिष्ठान में काम, जिसमें एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर या किसी गतिमान गाड़ी में या उसके बाहर किसी कर्मचारी का काम शामिल है। रेलवे स्टेशन के निर्माण से संबंधित काम या ऐसा काम जो रेल लाइनों के निकट या उनके बीच में किया जाता है, या संबंधित कार्य । किसी बन्दरगाह की सीमाओं के भीतर कोई बन्दरगाह प्राधिकारी के अधीन कार्य । अस्थायी पटाखे की दूकानों में कार्य। वधशाला/कसाई खाना। आटोमोबाईल के कारखाने/गैराजों में कार्य ढलाई कार्य । विषैले, ज्वलनशील या विस्फोटक पदार्थ के कार्य । हस्तकरधा एवं बिजलीकरण के उद्योग में। खादान (जमीन के अंदर और पानी के अंदर), एवं कोयला खादान में। प्लास्टिक एवं फाइबर ग्लास के वर्कसॉप में। घरेलू कामगार या नौकर और ढाबे (सड़क किनारे), रेस्तरां, होटलों, मोटलों, चाय दूकानों, सैरगाहों, सखनिज-झरने या अन्य मनोरंजन के स्थलों पर गोताखोरी भाग ''ब''- प्रक्रियाएँ बीड़ी निर्माण कालीन बुनाई सीमेंट बनाना, जिसमें सीमेंट बोरियों में भरना शामिल है। कपड़ा छपाई, रंगाई तथा बुनाई। दियासलाई, विस्फोटक और आतिशबाजी का निर्माण । अभ्रक काटना और तोड़ना । चपड़ा उत्पादन साबुन निर्माण ताम्र निर्माण भवन एवं निर्माण उद्योग ऊन की सफाई स्लेट पेंसिल का निर्माण (पैकिंग समेत)। अगेट के उत्पादों का निर्माण। जहरीरे पदार्थ, धातु और शीशा, पारा, मैगनीज, क्रोमियम, केडमियम, बेंजीन,कीटनाशक और एस्वेस्टस जैसी चीजों से होने वाली निर्माण प्रक्रियायें । कारखाना अधिनियम 1948 की धारा 2 (सी.बी.) के तहत परिभाषित खतरनाक प्रक्रियायें एवं धारा 87 के तहत बनी नियमावली में परिभाषित 'खतरनाक ऑपरेशन'। मुद्रण कारखाना अधिनियम की धारा 21 (K) (IV) के तहत परिभाषित । काजूद्दीलना एवं प्रसंस्करण । इलेक्ट्रॅानिक उद्योग में सोल्डरिंग। अगरबत्ती निर्माण । वाहन मरम्मति और रखरखाव के साथ वेल्डिंग,लेथ कार्य,डेन्टिंग एवं रंगाई । ईट भट्ठे एवं खपडे बनाने में । रूई धुनाई एवं होजयरी का उत्पादन । सर्फ का उत्पादन। निर्माण कार्यशाला(लौहसहित एव लौह रहित)। रत्नों के कटाई एवं पोलिसिंग में । क्रोमाइट एवं मैगनीज अयस्क के कार्य । जूट के चट एवं रस्सी निर्माण । चूने भट्ठे एवं चूना निर्माण । तालानिर्माण । उत्पादन प्रक्रिया जिसमें शीशा का विगोपन हो जैसे मुख्य एवं द्वितीयक प्रदावण, शीशा रंजित धातुई निर्मित चीजों का का झलाई एवं कटाई, जस्तेदार या जींक सिलिकेट का झलाई, पोलि भीनाईल क्लोराइड, रवादार काँच पिण्ड को मिलाना (हाथ से), शीशा लेप को सरेसना एवं खुरचना, तामचीनी कर्मशाला में शीशा को जलाना, शीशा उत्खन्न, नलसाजी करना, केबुल बनाना, वाइरिंग, शीशा ढलाई, छापाखाना में टाइप फाउन्ड्री, टाइप सेटींग का भण्डार, कार का संग्रहण, छर्रा निर्माण एवं शीशा काँच को फूलाना। सीमेंट की नलिका, सीमेंट उत्पाद एवं अन्य संबधित कार्य। शीशा निर्माण, शीशा की समाग्री चूडी सहित,गुलदस्ता, बल्ब और समान प्रकार के शीशा की समाग्री । रंग निर्माण एवं रंग के समान। जहरीले एवं कीट नाद्गाक के उत्पादन में। क्षयकारी एवं जहरीले पदार्थ ,धातु सफाई और फोटो धुलाई तथा ईलेक्टानिक उद्योग में सोल्डरिंग प्रक्रिया । जले कोयले एवं कोयले के ब्रिकेट का निर्माण । खेल समाग्री के निर्माण में जिसमें पदार्थ,रसायनिक पदार्थ एवं चमडे का प्रयोग हो । फाईबर और प्लास्टिक के ढालने की प्रक्रिया । तेल निकालना एवं सफाई । कागज निर्माण । चीनी मिट्टी एवं सिरामिक उद्योग । पीतल के समान निर्माण में जहा ढलाई,जुडाई,कटाई एवं पालिश होता हो। कृषि कार्य जहाँ टै्रक्टर, थ्रेसिंग एवं हारमेस्टिंग मशीनों का उपयोग होता हो एवं चारा कटाई । आरा मिल के सभी कार्यों रेशम के उत्पादन में। चमडे की सफाई,रंगाई एवं चमडे के समान निर्माण में। पत्थर तोडना एवं पीसना । तम्बाकू के उत्पादन में टायर बनाने में, मरम्मत करने में,फिर से सिलाई करने और ग्रेफाईट चढाने में धातु शोधन ,बर्तन बनाने एव पोलिसिंग में। जरी बनाना (सभी प्रक्रियायें) धातु विलेपन में ग्रेफाईट चूर्ण बनाने एवं अनुषांगिक कार्यों में । धातु को पीसना या चमक लाना । हीरा कटिंग एवं पोलिसिंग । खान से स्लेट निकालना । कूड़ा चुनना एवं कचरा साफ करना । अधिक ताप ( फर्नेस के निकट काम) एवं ठंढ । यांत्रिक विधि द्वारा मछली पकड़ना । खाद्य प्रसंस्करण । शीतल पेय उद्योग । लकड़ी उतारना एवं चढ़ाना । यांत्रिक विधि द्वारा लकड़ी काटना । भण्डारण सीलिका प्रोसेस, यथा पेंसिल, पत्थर तोड़ना, स्लेट पत्थर खादान तथा गोमेद उद्योग । स्रोत: श्रम संसाधन विभाग, बिहार सरकार